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परमेश्वर को जानने का तरीका

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परमेश्वर की मानवजाति की आपूर्ति को परमेश्वर द्वारा मानवजाति के लिए निर्मित बुनियादी जीवन परिवेश से देखना

जिस तरह से उसने मनुष्य के जीवित रहने के लिए इन पाँच मूल स्थितियों से व्यवहार किया था, उससे क्या तुम, मानवजाति के लिए परमेश्वर की आपूर्ति को देख सकते हो? (हाँ।) दूसरे शब्दों में परमेश्वर ने मनुष्य के जीवित रहने के लिए सभी पाँच मूल स्थितियों को बनाया था। उसी समय, परमेश्वर इन चीज़ों को कायम और नियन्त्रित भी कर रहा है, और अब भी, मानवजाति के हज़ारों सालों से अस्तित्व में रहने के बाद, परमेश्वर अभी भी निरन्तर उनके सजीव वातावरण को बदल रहा है, और मानवजाति के लिए बेहतरीन एवं बिल्कुल उपयुक्त वातावरण प्रदान कर रहा है ताकि उनके जीवन को सामान्य रीति से बरकरार रखा जा सके। इसे कब तक कायम रखा जा सकता है? दूसरे शब्दों में, परमेश्वर कितने लम्बे समय तक ऐसे वातावरण को प्रदान करेगा? जब तक परमेश्वर अपने प्रबन्धन कार्य को पूर्ण न कर ले। तब, परमेश्वर मानवजाति के सजीव वातावरण को बदल देगा। यह उन्हीं पद्धतियों के द्वारा भी हो सकता है, या यह अलग अलग पद्धतियों के द्वारा हो सकता है, परन्तु अब जिसे लोगों को वास्तव में जानने की आवश्यकता है वह है कि परमेश्वर लगातार मानवजाति की जरूरतों की आपूर्ति कर रहा है, मानवजाति के सजीव वातावरण का प्रबन्ध कर रहा है, और मानवजाति के सजीव वातावरण को बचारहा है, उनकी सुरक्षा कर रहा है और उसे बरकरार रख रहा है। यह ऐसे वातावरण के कारण ही है कि परमेश्वर के चुने हुए लोग इस तरह से सामान्य रीति से जी सकते हैं और परमेश्वर के उद्धार एवं ताड़ना एवं न्याय को स्वीकार कर सकते हैं। परमेश्वर के शासन के कारण सभी चीज़ें निरन्तर अस्तित्व में बनी हुई हैं, जबकि इस रीति से परमेश्वर की आपूर्ति के कारण समूची मानवजाति लगातार आगे बढ़ रही है।

क्या इस भाग ने जिसके विषय में मैंने बस अभी—अभी चर्चा की है तुम लोगों को कुछ नए विचार दिये हैं? क्या अब तुम लोग परमेश्वर एवं मानवजाति के बीच के बड़े अन्तर का आभास करते हो? सभी चीज़ों का स्वामी कौन है? क्या मनुष्य है? (नहीं।) तो क्या तुम लोग जानते हो कि जिस प्रकार परमेश्वर और मनुष्य सभी चीज़ों के साथ व्यवहार करते हैं उनके बीच क्या अन्तर है? (परमेश्वर सभी चीज़ों के ऊपर शासन करता है और सभी चीज़ों का बंदोबस्त करता है, जबकि मनुष्य उन सबका आनन्द उठाता है।) क्या तुम लोग उन वचनों से सहमत हो? (हाँ।) परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में सबसे बड़ा अन्तर है कि परमेश्वर सभी चीज़ों के ऊपर शासन करता है और सभी चीज़ों की आपूर्ति करता है। परमेश्वर प्रत्येक चीज़ का स्रोत है, और मानवजाति सभी चीज़ों का आनन्द उठाता है जबकि परमेश्वर उनकी आपूर्ति करता है। दूसरे शब्दों में, मानवजाति तब सभी चीज़ों का आनन्द उठाता है जब वह उस जीवन का स्वीकार कर लेता है जिसे परमेश्वर सभी चीज़ों को प्रदान करता है। मानवजाति परमेश्वर के द्वारा सभी चीज़ों की सृष्टि के परिणामों का आनन्द उठाता है, जबकि परमेश्वर स्वामी है। सही है? तो सभी चीज़ों के दृष्टिकोण से, परमेश्वर और मानवजाति के बीच क्या अन्तर है? परमेश्वर सभी चीज़ों की बढ़ौतरी के श्रेणियों को साफ साफ देख सकता है, और सभी चीज़ों की बढ़ौतरी के नमूनों को नियन्त्रित करता है और उन पर शासन करता है। अर्थात्, सभी चीज़ें परमेश्वर की दृष्टि में हैं और उसके निरीक्षण के दायरे के भीतर हैं। क्या मानवजाति सभी चीज़ों को देख सकता है? (नहीं।) जो मानवजाति देखता है वह सीमित है। तुम नहीं कह सकते हो कि "सभी चीज़ें"—वे ही हैं जिन्हें वे अपनी आँखों के सामने देखते हैं। यदि तुम इस पर्वत पर चढ़ते हो, तो जो तुम देखते हो वह यह पर्वत है। पर्वत के उस पार क्या है तुम उसे नहीं देख सकते गो। यदि तुम समुद्र के किनारे जाते हो, तो तुम महासागर के इस भाग को देखते हो, परन्तु तुम नहीं जानते हो कि महासागर का दूसरा भाग किसके समान है। यदि तुम इस जंगल में आते हो, तो तुम उन पेड़ पौधों को देख सकते हो जो तुम्हारी आँखों के सामने और तुम्हारे चारों ओर हैं, किन्तु जो कुछ और आगे है उसे तुम नहीं देख सकते हो। मनुष्य उन स्थानों को नहीं देख सकते हैं जो अधिक ऊँचे, अधिक दूर और अधिक गहरे हैं। वे वह सब कुछ जो उनकी आँखों के सामने हैं और उनकी दृष्टि के भीतर है उन्हें ही देख सकते हैं। यद्यपि मनुष्य एक वर्ष की चार ऋतुओं के श्रेणियों और सभी चीज़ों की बढ़ौतरी के श्रेणियों को जानता है, फिर भी वे सभी चीज़ों का प्रबन्ध करने या उन पर शासन करने में असमर्थ है। दूसरे रूप में, जिस तरह से परमेश्वर सभी चीज़ों को देखता है वह ऐसा है जैसे परमेश्वर एक मशीन को देखता है जिसे उसने व्यक्तिगत रीति से बनाया है। वह हर एक तत्व को बहुत ही अच्छी रीति से जानता है। उसके सिद्धांत क्या हैं, उसके नमूने क्या हैं, और उसका उद्देश्य क्या है—परमेश्वर इन सभी चीज़ों को सरलता एवं स्पष्टता से जानता है। इस प्रकार परमेश्वर परमेश्वर है, और मनुष्य मनुष्य है! भले ही मनुष्य लगातार विज्ञान एवं सभी चीज़ों के नियमों पर अनुसन्धान करता रहे, फिर भी यह एक सीमित दायरे में होता है, जबकि परमेश्वर सभी चीज़ों को नियन्त्रित करता है। मनुष्य के लिए, यह असीमित है। यदि मनुष्य किसी छोटी सी चीज़ पर अनुसन्धान करता है जिसे परमेश्वर ने किया था, तो वे उस पर अनुसन्धान करते हुए बिना किसी सच्चे परिणाम को हासिल किए अपने पूरे जीवन को बिता सकते हैं। इसीलिए यदि तुम ज्ञान का इस्तेमाल करते हो और परमेश्वर का अध्ययन करने के लिए जो कुछ भी तुमने सीखा है उसे इस्तेमाल करते हो, तो तुम कभी भी परमेश्वर को जानने या समझने के योग्य नहीं होगे। किन्तु यदि तुम सत्य के मार्ग का उपयोग करते हो और परमेश्वर को खोजते हो, और परमेश्वर को जानने के दृष्टिकोण से परमेश्वर की ओर देखते हो, तो एक दिन तुम स्वीकर करोगे कि परमेश्वर के कार्य और उसकी बुद्धि हर जगह है, और तुम यह भी जानोगे कि क्यों परमेश्वर को सभी चीज़ों का स्वामी और सभी चीज़ों के लिए जीवन का स्रोत कहा जाता है। तुम्हारे पास जितना अधिक ऐसा ज्ञान होगा, तुम उतना ही अधिक समझोगे कि क्यों परमेश्वर को सभी चीज़ों का स्वामी कहा जाता है। सभी चीज़ें एवं प्रत्येक चीज़, जिसमें तुम भी शामिल हो, निरन्तर परमेश्वर की आपूर्ति के नियमित बहाव को प्राप्त कर रहे हैं। तुम भी स्पष्ट रूप से आभास कर सकोगे कि इस संसार में, और इस मानवजाति के बीच में, परमेश्वर के अलावा कोई नहीं है जिसके पास सभी चीज़ों के अस्तित्व के ऊपर शासन करने, उसका प्रबन्ध करने, और उसको बरकरार रखने के लिए ऐसी सामर्थ और ऐसा सार तत्व हो सकता है। जब तुम ऐसी समझ प्राप्त कर लेते हो, तब तुम सचमुच में स्वीकार करते हो कि परमेश्वर तुम्हारा परमेश्वर है। जब तुम इस बिन्दु तक पहुँच जाते हो, तब तुमने सचमुच में परमेश्वर को स्वीकार कर लिया है और तुमने उसे अपना परमेश्वर एवं अपना स्वामी बनने की अनुमति दी है। जब तुम्हारे पास ऐसी समझ होती है और तुम्हारा जीवन एक ऐसे बिन्दु पर पहुँच जाता है, तो परमेश्वर आगे से तुम्हारी परीक्षा नहीं लेगा और तुम्हारा न्याय नहीं करेगा, और न ही वह तुमसे कोई माँग करेगा, क्योंकि तुम परमेश्वर को समझते हो, उसके हृदय को जानते हो और तुमने सचमुच में परमेश्वर के हृदय को स्वीकार कर लिया है। सभी चीज़ों पर परमेश्वर के शासन और प्रबंधन के विषय में इन शीर्षकों पर बातचीत करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कारण है। यह लोगों को और अधिक ज्ञान एवं समझ देने के लिए है; मात्र तुमसे स्वीकार करवाने के लिए नहीं, लेकिन तुम्हें परमेश्वर के कार्यों का और अधिक व्यावहारिक ज्ञान एवं समझ देने के लिए है।

"वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी" से

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