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हर इंसान जीता है परमेश्वर की रोशनी में

I

उमंग में, उल्लास में अब, परमेश्वर की धर्मिता और पवित्रता,

फैल गई है पूरे ब्रह्माण्ड में, हर तरफ, और पूरी मानवता के बीच बनी महान।

हंसते शहर आसमां के, नाचते धरती के राज्य।

हंसते शहर आसमां के, नाचते धरती के राज्य।

कौन है जो ख़ुश न होगा, किसकी आंखें नम न होंगी?

कौन है जो ख़ुश न होगा, किसकी आंखें नम न होंगी?

अब न है अनबन किसी में, अब न है तकरार कोई,

नाम परमेश्वर का ना, बदनाम अब करता है कोई।

II

हर कोई रहता है अब, परमेश्वर की रोशनी में,

हर कोई रहता है अब, परमेश्वर की रोशनी में,

शांति और प्यार से, रहते हैं मिलके लोग अब।

आसमां से धरती का संबंध है, आसमां और धरती दोनों एक हैं।

आसमां और धरती को जो जोड़ती है, वो कड़ी इंसान है।

आसमां से धरती का संबंध है, आसमां और धरती दोनों एक हैं।

आसमां और धरती को जो जोड़ती है, वो कड़ी इंसान है।

इंसान की निर्मलता की बदौलत, इंसान के कायाकल्प की बदौलत,

अब आसमां धरती से छुपके रहता नहीं,

आसमां को लेके धरती मौन अब रहती नहीं।

अब न है अनबन किसी में, अब न है तकरार कोई,

नाम परमेश्वर का ना, बदनाम अब करता है कोई।

III

है हवा की चाल अब चंचल-चपल, धुंध गहरी अब कहीं दिखती नहीं,

है हवा की चाल अब चंचल-चपल, धुंध गहरी अब कहीं दिखती नहीं,

हर तरफ सूरज की है अब रोशनी।

हर तरफ मुस्कान है, चेहरों पे अब इंसान के।

उनके दिलों में छुपी मधुरता, दूर तलक जाती है।

उनके दिलों में छुपी मधुरता, दूर तलक जाती है।

अब न है अनबन किसी में, अब न है तकरार कोई,

नाम परमेश्वर का ना, बदनाम अब करता है कोई।

हर कोई रहता है अब, परमेश्वर की रोशनी में,

हर कोई रहता है अब, परमेश्वर की रोशनी में,

शांति और प्यार से, रहते हैं मिलके लोग अब,

रहते हैं मिलके लोग अब, रहते हैं मिलके लोग अब।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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