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क्या तुम हो अपने लक्ष्य के प्रति आगाह

I

क्या तुम हो अपने लक्ष्य से अवगत?

क्या तुम अपने बोझ, फ़र्ज़, और कर्तव्यों से अवगत हो?

कहाँ है तुम्हारा वो ऐतिहासिक कर्तव्य का अहसास?

कैसे बनोगे अगले युग के मालिक तुम?

क्या तुम्हारी स्वामित्व की समझ मज़बूत है?

सभी का मालिक होने का अर्थ कैसे समझाओगे?

क्या वो सारे जीवों का मालिक है

या फिर इस पूरे भौतिक संसार का मुखिया?

कार्य के अगले कदम की क्या है तुम्हारी योजना?

जाने कितने हैं तरसते चरवाही के लिए तुम्हारी?

क्या तुम्हें नहीं लगता ये कार्य अतिभारी?

II

ये लाचार आत्माएं हैं दयनीय, अंधी और भटकी,

चीखतीं अंधेरों में, इंतज़ार में बाहर निकलने के।

कैसे वो चाहे रोशनी टूटते तारे-सी आए

और ख़त्म करे अंधेरा जिसने ज़ुल्म किया उन पे सदियों से।

कौन है जो जाने दिन-रात की उनकी तड़प को?

जब रोशनी चमकती, बिना रिहाई की उम्मीद ये बदनसीब क़ैद रहते अंधेरे में।

कब उनके आँसूं रुकेंगे?

ये बेचैन नाज़ुक आत्माएं हैं झेल रहीं ऐसा दुर्भाग्य।

बेरहम धागे, जमे हुए इतिहास ने कबका इन्हें बंद कर दिया।

किसी ने कब सुना उनका इतना रोना? किसी ने कब देखा उनका सारा कष्ट?

III

क्या तुमने कभी परमेश्वर के बारे में सोचा?

वो कितना दुखी और बेचैन हो सकता है?

कैसे सहे वो मानव जाति को पीड़ित देखके, जिसे उसने अपने हाथों से बनाया?

इंसानियत विषाक्त, बदकिस्मत है।

माना कि आज भी मानव जाति जीवित है,

पर वो कब से विषाक्त है बुराई से।

क्या तुम भूल गए तुम भी पीड़ित हो इसी से?

क्या तुम नहीं चाहते अपने परमेश्वर के लिए उनको बचाना जो हैं अब भी बचे?

क्या तुम नहीं चाहते अपने प्रयासों से परमेश्वर को चुकाना,

जो प्यार करता मानव को जैसे खुद का खून और मांस?

ईश्वर द्वारा उपयोग से असाधारण जीवन जीने कोकैसे समझते हो?

क्या तुम में इच्छा है, आत्मविश्वास है पुण्य जीवन जीने का,

ऐसा जीवन जो समर्पित हो ईश्वर की सेवा के लिए?

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है