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परमेश्वर से लगाव

I

परमेश्वर ने चुना मुझे अपार जनसमूह से,

प्रबंध किया मुझे अपनी ओर लाने का।

स्नेह दिया दिल को मेरे, उनके सच्चे और दयालु वचनों ने।

उनकी नेकनीयत पुकार ने जगाया मुझे मेरे सपनों से।

उनकी परिचित वाणी, सुंदर मुखड़ा

न बदले हैं आरंभ से।

लेता हूँ आनंद मैं उनके मधुर प्रेम का उनके धाम में,

आ जाता हूँ समीप, चाहता हूँ जुदा न होऊं उनसे।

परमेश्वर ने छोड़ा नहीं साथ मेरा कभी,

करते हैं वो त्याग मगर शिकायत नहीं करते कभी।

निकाल फेंकूँगा भ्रष्टता और हो जाऊँगा शुद्ध मैं।

साथ चलूँगा मैं सदा परमेश्वर के, परमेश्वर के।

II

बिन परमेश्वर दिन हो गए थे बेहद मुश्किल,

लड़खड़ाया मैं दर्द भरे लम्बे डग भरते हुए।

उनकी हिफाज़त पूरे सफ़र में राह दिखाती है मुझे।

परमेश्वर के वचनों से अब संतुष्टि है मुझे।

समय लाता है बदलाव, दुनिया करेगी तरक्की।

परमेश्वर से मेरे दिल को मगर, जुदा कर नहीं सकता कोई।

हज़ार वर्षों की प्रतिज्ञा, शपथ में नहीं बदलाव कोई।

जीवन-मृत्यु के चक्र, मैं साथ हूँ फिर से परमेश्वर के।

परमेश्वर ने छोड़ा नहीं साथ मेरा कभी,

करते हैं वो त्याग मगर शिकायत नहीं करते कभी।

निकाल फेंकूँगा भ्रष्टता और हो जाऊँगा शुद्ध मैं।

साथ चलूँगा मैं सदा परमेश्वर के, परमेश्वर के।

III

बो दिया जीवन उन्होंने हृदय में मेरे।

वचन उनके पालते हैं मुझे,

लेते हैं इम्तहान, करते हैं शुद्धिकरण मेरा।

यातना और पीड़ाएँ बनाती हैं मज़बूत मुझे।

नाकामियां बनाती हैं कठोर मुझे।

परमेश्वर ने छोड़ा नहीं साथ मेरा कभी,

करते हैं वो त्याग मगर शिकायत नहीं करते कभी।

निकाल फेंकूँगा भ्रष्टता और हो जाऊँगा शुद्ध मैं।

साथ चलूँगा मैं सदा परमेश्वर के, परमेश्वर के।

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है