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मानवजाति की विभिन्न जीवनशैलियों से सीमाओं को विकसित किया गया है।

परमेश्वर ने सभी प्राणियों को सृजा और उनके लिए सीमाओं को स्थापित किया, और उनके मध्य सभी प्रकार के जीवित प्राणियों का पालन पोषण किया। जैसे सभी जीव सब प्रकार के जीवित प्राणियों का पोषण कर रहे थे, उसने मनुष्यों के लिए ज़िन्दा बचे रहने की विभिन्न पद्धतियों को भी तैयार किया, अतः तुम लोग देख सकते हो कि मनुष्यों के पास जीवित रहने के लिये बस एक ही तरीका नहीं है। साथ ही उनके पास जीवित रहने के लिए बस एक ही प्रकार का वातावरण नहीं है। हमने पहले ही परमेश्वर के द्वारा मनुष्यों के लिए विभिन्न प्रकार के आहार और जल स्रोतों को तैयार करने के विषय में बात की थी, यह कुछ ऐसा है जो मानवजाति के जीवन को देह में बने रहने की अनुमति देने के लिए अति महत्वपूर्ण है। फिर भी, इस मानवजाति के मध्य, सभी लोग अनाज पर ही नहीं जीते। भौगोलिक वातावरण और भूभागों की भिन्नताओं के कारण लोगों के पास ज़िन्दा रहने की अलग अलग पद्धतियाँ हैं। ज़िन्दा रहने की इन सभी पद्धतियों को परमेश्वर के द्वारा तैयार किया गया है। अतः सभी मनुष्य मुख्य तौर पर खेती में नहीं लगे हुए हैं। अर्थात्, सभी लोग फसल पैदा करके अपना भोजन प्राप्त नहीं करते हैं। यह तीसरा बिन्दु है जिसके बारे में हम बात करने जा रहे हैं: मानवजाति की विभिन्न जीवनशैलियों से सीमाओं को विकसित किया गया है। अतः मनुष्यों के पास अन्य प्रकार की कौन कौन सी जीवनशैलियां हैं? मनुष्यों के पास अन्य विभिन्न प्रकार के भोजन के स्रोत कौन कौन से हैं? कई मुख्य प्रकार हैं:

पहला है शिकार की जीवनशैली। हर कोई इसे जानता है। क्या तुम लोगों में से कोई अपनी जीविका के लिए शिकार करता है? तुम सभी आधुनिक लोग हो-तुम लोग नहीं जानते कि शिकार कैसे करते हैं, बंदूक को कैसे उठाते हैं। तुम सबके भोजन के स्रोत पृथ्वी से उत्पन्न होते हैं। ऐसे लोग जो शिकार करने के द्वारा ज़िन्दा रहते हैं वे क्या खाते हैं? (शिकार)। वे जंगल के पक्षियों और पशुओं को खाते हैं। "शिकार" एक आधुनिक शब्द है। शिकारी इसे शिकार के रूप में नहीं सोचते हैं; वे इसे भोजन के रूप में, और अपने दैनिक जीवन आहार के रूप में सोचते हैं। उदाहरण के लिए, यदि उन्हें एक हिरण मिल जाए तो वे खुश होंगे। "बहुत बढ़िया, यह हिरण पूरे परिवार के लिए कई दिनों के लिए पर्याप्त भोजन है।" जब उन्हें यह हिरण मिल जाता है तो यह बिलकुल ऐसा है जैसे किसी किसान को मिट्टी से फसलें मिल जाती हैं। एक किसान मिट्टी से फसल प्राप्त करता है, और जब वह अपनी फसल को देखता है वह खुश होता है और सुकून महसूस करता है। "अब कुछ तो खाने के लिए है; हमें भूखे रहने के विषय में डरने की आवश्यकता नहीं है।" खाने के लिए अनाज के होने से परिवार भूखा नहीं होगा। उसका हृदय सुकून से है और वह सन्तुष्ट महसूस करता है। और साथ ही एक शिकारी सुकून और संतुष्टि का एहसास करता है जब वह उसे देखता है जिसे उसने पकड़ा है क्योंकि उसे भोजन के विषय में अब कोई चिन्ता नहीं करनी है। अगली बार के भोजन के लिए कुछ तो है, भूखे रहने की ज़रूरत नहीं है। यह एक ऐसा व्यक्ति है जो जीने के लिए शिकार करता है। ऐसे लोग जो शिकार पर जीवन निर्वाह करते हैं वे सामान्यतः किस प्रकार के वातावरण में रहते हैं? वे पहाड़ी जंगलों में रहते हैं। क्योंकि उनमें से अधिकांश खेती नहीं करते या फसल नहीं उगाते हैं; वे पहाड़ी जंगलों में रहते हैं। क्या पहाड़ी जंगलों में कृषि योग्य भूमि है? कृषि योग्य भूमि पाना आसान नहीं है, अतः वे विभिन्न जीवित प्राणियों, और विभिन्न प्रकार के शिकार पर ज़िन्दा रहते हैं। यह पहली जीवनशैली है जो साधारण लोगों से अलग है।

दूसरे प्रकार की जीवनशैली चरवाही है। वे लोग जो जीविका के लिए मवेशियों को झुण्ड में चराते हैं खेती नहीं करते, अतः वे क्या करते हैं? केवल मवेशियों को झुण्ड में चराते हैं? यदि कोई यहां जातीय आधार पर मंगोलियाई है, तो तुम सब अपने खानाबदोश जीवनशैली के बारे में थोड़ा बहुत बात कर सकते हो। (अधिकांशतः, हम जीने के लिए मवेशियों और भेड़ों को झुण्ड में चराते हैं, कोई खेती नहीं करते हैं, और शीत ऋतु में हम अपने पालतू पशुओं को काटते हैं और खाते हैं। हमारा मुख्य भोजन गोमांस और मटन से बना होता है, हम दूध की चाय पीते हैं, हम भुना चावल और बहुत कम सब्जियां खाते हैं। आज कल सभी प्रकार के परिवहन सुविधाजनक हैं और हमारे पास हर प्रकार की सब्जियां और अनाज हैं। मंगोलियाई लोग दूध की चाय पीते हैं, और तिब्बती लोग मक्खन की चाय पीते हैं। हालांकि चरवाहे सभी चारों ऋतुओं में व्यस्त रहते हैं, वे अच्छी तरह खाते हैं। उन्हें दूध, दुग्ध उत्पादों या मांस की कोई कमी नहीं होती है। वे मोटे कपड़ों से बने बड़े गोलाकार तम्बुओं में (यर्ट्स) में रहा करते थे किन्तु आज कल उन सभी लोगों ने घर बना लिया है।) मंगोलियाई लोग मुख्य रूप से गोमांस और मटन खाते हैं, दूध पीते हैं, और अपने पशुओं को झुण्ड में चराने के लिए घुड़सवारी करते हैं। यह चरवाहे की जीवनशैली है। चरवाहे की जीवनशैली बुरी नहीं है-वे हवा में लहराते हुए अपने बालों, और सूर्य की रौशनी में चमचमाते हुए अपने चेहरों के साथ मैदान में बैलों और घोड़ों की सवारी करते हैं, और उनके पास आधुनिक जीवन का कोई तनाव नहीं है। पूरे दिन वे बस नीले आसमानों और घास के मैदानों के व्यापक विस्तार को देखते रहते हैं। ऐसे लोग जो जीने के लिए मवेशियों के झुण्ड की देखरेख करते हैं वे सब घास के मैदानों में रहते हैं और वे पीढ़ी दर पीढ़ी अपने खानाबदोश जीवनशैली को बरकरार रखने में सक्षम हैं। हालांकि घास के मैदानों पर जीवन थोड़ा एकाकी है, फिर भी यह एक बहुत खुशहाल जीवन भी है। यह एक बुरी जीवनशैली नहीं है!

तीसरे प्रकार की जीवनशैली मछली पकड़ने की है। मनुष्यों का एक छोटा सा भाग है जो महासागर के समीप या छोटे द्वीपों पर रहता है। वे चारों ओर पानी से घिरे हुए हैं, और वे समुद्र का सामना कर रहे हैं। इस प्रकार के लोग जीविका के लिए मछली पकड़ते हैं। ये लोग जो जीने के लिए मछली पकड़ते हैं वे भोजन के लिए किस पर भरोसा रखते हैं? उनके भोजन का स्रोत क्या है? यह सब प्रकार की मछलियां और समुद्री भोजन है। जब हांगकांग मछली पकड़नेवाला मात्र एक छोटा सा गांव था, तब ऐसे लोग जो वहां रहते थे वे अपनी जीविका के लिए मछली पकड़ना पसंद करते थे। वे खेती बाड़ी नहीं करते थे-वे प्रतिदिन मछली पकड़ने जाते थे। उनका मुख्य भोजन विभिन्न प्रकार की मछलियां, मांस और समुद्री भोजन था। साथ ही वे कभी कभार चावल, आटा और दैनिक ज़रूरतों के लिए मछली का व्यापार करना पसंद करते थे। ऐसे लोग जो मछली पकड़ने पर जीवन निर्वाह करते हैं वे सभी महासागर के समीप रहते हैं और कुछ लोग नाव पर रहते हैं। यह उन लोगों की एक अलग प्रकार की जीवनशैली है जो पानी के समीप रहते हैं। ऐसे लोग जो पानी के समीप रहते हैं वे मछली पकड़ने पर आश्रित हैं; यह उनके जीविका का स्रोत है साथ ही साथ उनके भोजन का भी स्रोत है।

उन लोगों से अलग जो जीने के लिए खेती बाड़ी करते हैं, मुख्य रूप से तीन अलग-अलग जीवनशैलियां हैं जिनका उल्लेख ऊपर किया गया था। उन लोगों से अलग जो मवेशियों को झुण्ड में चराने, मछली पकड़ने, और शिकार करने पर जीवन निर्वाह करते हैं, अधिकतर लोग जीविका के लिए खेती बाड़ी करते हैं। और ऐसे लोग जो जीविका के लिए खेती बाड़ी करते हैं उन्हें किसकी आवश्यकता है? उन्हें मिट्टी की आवश्यकता है। ऐसे लोग जो अपनी जीविका के लिए खेती बाड़ी पर आश्रित हैं वे मुख्य रूप से पीढ़ियों से फसल उगते हैं। वे अपना आहार पृथ्वी से प्राप्त करते हैं। चाहे वे सब्जियां, फल या अनाज उगाएं, किन्तु वे सभी पृथ्वी से अपनी दैनिक ज़रुरतों को प्राप्त करते हैं।

इन अलग अलग मानवीय जीवनशैलियों की मूल परिस्थितयां क्या हैं? क्या उन्हें जीवित रहने के लिए अपने वातावरण का मूलभूत संरक्षण करने की आवश्यकता नहीं होती है? दूसरे अर्थ में, यदि शिकारी को पहाड़ी जंगलों या पक्षियों और पशुओं को खोना पड़ता, तो उनके पास आगे से अपनी कोई जीविका नहीं होती। अतः वे लोग जो शिकार पर जीवन निर्वाह करते हैं यदि उन्होंने पहाड़ी जंगलों को खो दिया होता और आगे से उनके पास कोई पक्षी और पशु नहीं होता, तो उनके पास आगे से अपनी जीविका का कोई स्रोत नहीं होता। उस प्रकार का जातीय समूह किस दिशा में अग्रसर होता; उस किस्म के लोग कहां जाते? ज़िन्दा बचने या न बचने की क्षमता एक अज्ञात मात्रा है और वे बस लुप्त हो सकते हैं। और ऐसे लोग जो अपनी जीविका के लिए मवेशियों को झुण्ड में चराते हैं-वे घास के मैदानों पर आश्रित हैं। वास्तव में वे जिस पर निर्भर हैं वह उनके पालतू पशुओं का झुण्ड नहीं है, बल्कि वह वातावरण है, जिसमें उनके पालतू पशुओं का झुण्ड जीवित रहता है-घास के मैदान। यदि कहीं कोई घास के मैदान नहीं होते, तो वे अपने पालतू पशुओं के झुण्ड को कहां चराते? मवेशी और भेड़ क्या खाते? पालतू पशुओं के झुण्ड के बिना, खानाबदोश लोगों के पास कौन सी जीविका होती? उनके पास कोई जीविका नहीं होती। अपनी जीविका के स्रोत के बिना, लोग कहां जाते? लगातार ज़िन्दा बचे रहना बहुत ही कठिन हो जाता; उनके पास कोई भविष्य नहीं होता। पानी के स्रोतों के बिना, नदियां और झीलें सूख जातीं। क्या वे सभी मछलियां जो अपनी ज़िन्दगियों के लिए पानी पर निर्भर हैं तब भी जीवित रहतीं? वे मछलियां जीवित नहीं रहतीं। वे लोग जो अपनी जीविका के लिए उस जल और उन मछलियों पर आश्रित हैं क्या वे निरन्तर जीवित रह पाते? यदि उनके पास भोजन नही होता, यदि उनके पास अपनी जीविका का स्रोत नहीं होता, तो वे लोग निरन्तर जीवित रहने में सक्षम नहीं होते। जैसे ही उनकी जीविका या उनके जीवित रहने में कोई समस्या आती है, तो वे जातियां आगे से बनी नहीं रहतीं। वे जीवित रहने में सक्षम नहीं होतीं-वे लुप्त हो सकती हैं, वे पृथ्वी पर से मिट गई होतीं। और ऐसे लोग जो अपनी जीविका के लिए खेती बाड़ी करते हैं यदि वे अपनी मिट्‍टी खो देते हैं, तो अंजाम क्या होता? वे चीज़ों (फसलों) को लगाने में सक्षम नहीं होते, वे विभिन्न पौधों से अपने भोजन को प्राप्त करने में सक्षम नहीं होते। इसका परिणाम क्या होता? भोजन के बिना, क्या लोग भूख से मर नहीं जाते? यदि लोग भूख से मर जाते, तो क्या उस तरह के मानव का सफाया नहीं हो जाता? अतः विभिन्न पारिस्थितिक वातावरण को बनाए रखने के लिए यह परमेश्वर का उद्देश्य है। विभिन्न वातावरण और पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने, और प्रत्येक वातावरण के अंतर्गत विभिन्न जीवित प्राणियों को बनाए रखने में परमेश्वर के पास सिर्फ एक ही उद्देश्य है-वह है सब प्रकार के लोगों का पालन पोषण करना, विभिन्न भौगोलिक वातावरण में जीवन के साथ लोगों का पालन पोषण करना।

यदि सभी प्राणी स्वयं के नियमों को खो देते, तो वे आगे से अस्तित्व में नहीं रहते; यदि सभी प्राणियों के नियम खो जाते, तो जीवित प्राणी सभी जीवों के मध्य निरन्तर बने रहने में सक्षम नहीं होते। मनुष्य जीवित रहने के लिए अपने वातावरण को भी खो देते जिस पर वे जीवित रहने के लिए निर्भर हैं। यदि मनुष्य वह सब कुछ खो देते, तो वे लगातार जीवित रहने और पीढ़ी दर पीढ़ी बहुगुणित होने में सक्षम नहीं होते। मनुष्य आज तक ज़िन्दा बचा हुआ है उसका कारण है क्योंकि परमेश्वर ने मानवजाति को सभी जीव प्रदान किए हैं कि उनका पोषण करें, और विभिन्न तरीकों से मानवजाति का पोषण करें। यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि परमेश्वर विभिन्न तरीकों से मानवजाति का पालन पोषण करता है कि वे आज तक जीवित बचे हुए हैं, कि वे आज के दिन तक ज़िन्दा बचे हुए हैं। जीवित रहने के लिए उस प्रकार के स्थायी वातावरण के साथ जो अनुकूल और सुव्यवस्थित है, पृथ्वी पर सभी प्रकार के लोग, और सभी प्रकार की जातियां अपने स्वयं के निर्दिष्ट दायरों के भीतर जीवित रह सकती हैं। कोई भी इन दायरों या इन सीमाओं से बाहर नहीं जा सकता है क्योंकि वह परमेश्वर है जिसने उनकी रेखाओं को खींचा है।

"वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी" से

पिछला:परमेश्वर ने विभिन्न पक्षियों और पशुओं, मछलियों, कीड़े-मकोड़ों, और सभी पौधों के लिए सीमाएँ खींची।

अगला:परमेश्वर ने विभिन्न जातियों के बीच सीमाएं खींची हैं।

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