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परमेश्वर को जानने का तरीका

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परमेश्वर ने विभिन्न पक्षियों और पशुओं, मछलियों, कीड़े-मकोड़ों, और सभी पौधों के लिए सीमाएँ खींची।

…… इन सीमाओं के कारण जिन्हें परमेश्वर ने बनाया है, विभिन्न भूभागों ने जीवित रहने के लिए अलग-अलग वातावरण को उत्पन्न किया है, और जीवित रहने के लिए ये वातावरण विभिन्न प्रकार के पक्षियों और पशुओं के लिए सुविधाजनक रहे हैं साथ ही साथ ये जीवित रहने के लिए एक स्थान भी ले कर आए हैं। इससे विभिन्न जीवित प्राणियों के जीवित रहने हेतु वातावरण के लिए सीमाओं को विकसित किया गया है। आगे हम बस इसी विषय पर बात करने जा रहे हैं।

दूसरा, किस प्रकार के वातावरण के भीतर पक्षी और पशु और कीड़े-मकोड़े रहते हैं? विभिन्न भौगोलिक वातावरण के लिए सीमाएं स्थापित करने के अलावा, उसने विभिन्न पक्षियों और पशुओं, मछलियों, कीड़े-मकोड़ों, और सभी पौधों के लिए सीमाएं खींची थीं। उसने नियमों को भी स्थापित किया था। विभिन्न भौगोलिक वातावरण के मध्य भिन्नताओं के कारण और विभिन्न भौगोलिक वातावरण की मौजूदगी के कारण, विभिन्न प्रकार के पक्षियों और पशुओं, मछलियों, कीड़े-मकोड़ों, और पौधों के पास जीवित रहने के लिए अलग अलग वातावरण हैं। पशु और पक्षी और कीड़े-मकोड़े विभिन्न पौधों के बीच में रहते हैं, मछलियां पानी में रहती हैं, और पौधे भूमि पर उगते हैं। भूमि में क्या शामिल है? विभिन्न क्षेत्र जैसे पर्वत, मैदान और पहाड़ियां। अतः, पक्षियों और पशुओं के पास उनके स्थायी निवासस्थान हैं और वे सभी जगहों पर नहीं घूमेंगे। उनके निवासस्थान जंगल और पहाड़ हैं। एक दिन यदि उनके निवासस्थान नष्ट हो जाते हैं, तो यह क्रम उथल-पुथल हो जाएगा। जैसे ही यह क्रम उथल-पुथल हो जाता है, तो परिणाम क्या हैं? वे कौन हैं जिन्हें सबसे पहले नुकसान पहुँचता? (मानवजाति।) यह मानवजाति है! इन नियमों और सीमाओं के अंतर्गत जिन्हें परमेश्वर ने स्थापित किया है, क्या तुम लोगों ने कोई अजीब सी घटना देखी है? उदाहरण के लिए, हाथी बस यों ही मरुस्थल में यहाँ वहाँ घूम रहे हैं। क्या तुम सबने यह देखा है? यदि ऐसा होता, तो यह एक बहुत ही अजीब सी घटना होती। यह इसलिए है क्योंकि वह वातावरण जिसमें हाथी रहते हैं वह जंगल है, और जंगल का वातावरण जीने के लिए है, और जीवत रहने के लिए है जिसे परमेश्वर ने उनके लिए बनाया था। जीवित रहने के लिए इसके पास इसका स्वयं का वातावरण और उसका अपना स्थायी घर है, अतः वह इधर-उधर क्यों भागता फिरेगा? क्या किसी ने शेरों या बाघों को महासागर के आस-पास घूमते हुए देखा है? शेरों और बाघों का निवासस्थान जंगल और पर्वत है। क्या किसी ने महासागर से व्हेल या शार्क मछलियों को मरुस्थल में बस यों ही टहलते हुए देखा है? व्हेल और शार्क मछलियां अपना घर महासागर में बनाती हैं और उनके पास ज़मीन पर रहने का कोई तरीका नहीं है। मनुष्य के जीने के वातावरण में, क्या ऐसे लोग हैं जो भूरे भालूओं के साथ रहते हैं? क्या ऐसे लोग हैं जो अपने घरों के भीतर या बाहर हमेशा मोर, या अन्य पक्षियों के द्वारा घिरे रहते हैं? क्या किसी ने पालतू मवेशियों और भेड़ों को जंगलों के भीतर देखा है? क्या किसी ने चीलों और जंगली कलहंसों को बन्दरों के साथ खेलते देखा है? यदि ऐसा होता है, तो ये सब बहुत ही अजीब घटना होती। यही वह कारण है कि मैं इन चीज़ों के विषय में बात करता हूँ जो तुम लोगों की नज़रों में अजीब सी घटनाएं हैं। यह तुम सबको समझाने के लिए है कि सभी प्राणियों को परमेश्वर के द्वारा सृजा गया था-इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वे एक ही स्थान में स्थायी हैं या उनमें श्वास है और वे चल सकते हैं-उन सब के पास जीवित रहने के लिए उनके नियम हैं। परमेश्वर ने इन प्राणियों को बनाया उससे बहुत पहले ही उसने उनके लिये उनके निवासस्थानों, और जीवित रहने के लिए उनका स्वयं का वातावरण बनाया था। इन जीवित प्राणियों के पास जीवित रहने के लिए उनके स्वयं के स्थायी वातावरण, उनका स्वयं का भोजन, उनके स्वयं के निवासस्थान, उनके जीवित रहने के लिए उपयुक्त उनके स्वयं के स्थायी स्थान, और उनके जीवित रहने के लिए उपयुक्त तापमानों से युक्त जगहें थीं। इस तरह वे इधर-उधर नहीं भटकते या मानवजाति की अतिजीविता को दुर्बल या नष्ट नहीं करते या उनके जीवन को प्रभावित नहीं करते। इस तरह से परमेश्वर सभी प्राणियों का प्रबंधन करता है। यह मानवजाति के जीवत रहने हेतु उत्तम वातावरण प्रदान करने के लिए है। सभी प्राणियों के अंतर्गत जीवित प्राणियों में से प्रत्येक के पास जीवित रहने हेतु उनके वातावरण के भीतर जीवन को बनाए रखने वाला भोजन है। उस भोजन के साथ, वे जीवत रहने के लिए अपने पैदाइशी वातावरण के अंतर्गत स्थिर हैं; वे उस वातावरण में स्थिर हैं। उस प्रकार के वातावरण में, वे उन नियमों के अनुसार अभी भी जीवित बचे हुए हैं, बहुगुणित हो रहे हैं, और निरन्तर बढ़ रहे हैं जिन्हें परमेश्वर ने उनके लिए स्थापित किया है। इस प्रकार के नियमों के कारण, और परमेश्वर के पूर्वनिर्धारण के कारण, सभी प्राणी मानवजाति के साथ एक स्वर में परस्पर व्यवहार करते हैं, और मानवजाति एवं सभी प्राणी एक दूसरे पर आश्रित हैं।

"वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी" से

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