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495 अपनी आत्मा की गहराइयों में हर कोई परमेश्वर से लिपटा रहता है

1 लोगों को कई वर्षों तक लगातार शैतान द्वारा भ्रष्ट किया गया है, और उन्होंने आध्यात्मिक मामलों की धारणा को बहुत पहले ही खो दिया है। इस कारण से परमेश्वर के वचनों का सिर्फ एक वाक्य ही लोगों की आँखों के लिए दावत की तरह है। पवित्रात्मा और आत्माओं के बीच की दूरी के कारण, परमेश्वर पर विश्वास करने वाले सभी के पास उसके लिए लालसा की भावना है, और वे सभी करीब आने और अपने दिलों को उड़ेलने के इच्छुक हैं, फिर भी वे उसके संपर्क में आने का साहस नहीं करते हैं, और वे सिर्फ अचरज में रहते हैं। यह पवित्रात्मा के आकर्षण की सामर्थ्य है। क्योंकि परमेश्वर लोगों के प्यार करने के लिए एक परमेश्वर है, और उसमें उनके प्यार करने के लिए अनन्त तत्व हैं, इसलिए सभी लोग उसे प्यार करते हैं और वे सभी उस पर विश्वास करना चाहते हैं। वास्तव में, हर किसी के पास परमेश्वर के लिए प्रेम का हृदय है, यह केवल शैतान का व्यवधान है जिसने सुस्त, मंदबुद्धि, दयनीय लोगों को परमेश्वर को जानने में असमर्थ बना दिया है।

2 यही कारण है कि परमेश्वर ने परमेश्वर की ओर मानवजाति की सच्ची भावनाओं को बताया: "मनुष्य ने अपने हृदय की अंतर्तम गहराईयों में मुझे कभी भी तिरस्कृत नहीं किया है, बल्कि, वह अपनी आत्मा की गहराई में मुझसे लिपटा रहता है। ...मेरी वास्तविकता मनुष्य को अनिश्चित, अवाक् और व्यग्र कर देती है, और फिर भी वह सब स्वीकार करने के लिये तैयार है।" यह उन लोगों के हृदय की गहरी वास्तविक स्थिति है जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। जब लोग परमेश्वर को वास्तव में जान जाएँगे तो उनका उसके प्रति स्वाभाविक रूप से एक अलग रवैया होगा, और आत्मा की भूमिका के कारण वे अपने हृदय में गहराई से स्तुतियाँ कहने में समर्थ होंगे। परमेश्वर सभी लोगों की आत्माओं में गहरा है, किन्तु शैतान की भ्रष्टता के कारण उन्होंने भ्रमवश शैतान को परमेश्वर मान लिया है। आज परमेश्वर इसी पहलू से कार्य करता है, और यही आध्यात्मिक दुनिया की लड़ाई का शुरू से अंत तक केन्द्र बिन्दु रहा है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या के "अध्याय 15" से रूपांतरित

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