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परमेश्वर और इंसान के लिये अलग-अलग आरामगाह

I

परमेश्वर की अपनी मंज़िल और इंसान की अपनी है।

विश्राम करते हुए परमेश्वर, दिखाता रहेगा राह इंसान को,

इंसान करेगा आराधना उस सच्चे परमेश्वर की जो स्वर्ग में है।

न परमेश्वर रहेगा इंसानों के बीच, ना इंसान रह पाएगा उसकी मंज़िल में।

रह नहीं सकते परमेश्वर और इंसान एक राज्य में,

रह नहीं सकते परमेश्वर और इंसान एक राज्य में,

जीने के अपने-अपने दस्तूर के साथ।

इंसान परमेश्वर के प्रबंधन का फल है और लक्ष्य है उसके पथ-प्रदर्शन का,

परमेश्वर ही करता है अगुवाई इंसान की।

परमेश्वर का और मानव का सार अलग है।

परमेश्वर ही करता है अगुवाई इंसान की।

परमेश्वर का और मानव का सार अलग है।

II

मानव की आरामगाह धरती है; और स्वर्ग है परमेश्वर की विश्राम-स्थली।

करते हुए विश्राम धरती पर मानव, करेगा आराधना परमेश्वर की।

और जब विश्राम करेगा परमेश्वर, तो वो अगुवाई करेगा मानव की।

और जब विश्राम करेगा परमेश्वर, तो वो अगुवाई करेगा मानव की।

धरती से नहीं, करेगा स्वर्ग से अगुवाई परमेश्वर।

परमेश्वर आत्मा है अब भी, मानव शरीर है अब भी।

विश्राम करने के दोनों के हैं अपने तौर-तरीके।

मानव के मध्य प्रकट होगा परमेश्वर जब विश्राम करेगा।

मानव के मध्य प्रकट होगा परमेश्वर जब विश्राम करेगा।

मानव जब विश्राम करेगा, तब स्वर्ग में परमेश्वर उसको लाएगा घुमाने,

स्वर्ग की दुनिया दिखलाने, स्वर्ग में आनंद कराने।

स्वर्ग की दुनिया दिखलाने, स्वर्ग में आनंद कराने।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:जिनको परमेश्वर पा लेगा, वो अनंत आशीष का आनंद लेंगे

अगला:चाहे बड़ा हो या छोटा, सबकुछ मायने रखता है जब परमेश्वर की राह का पालन कर रहे हो

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है