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42. बाहरी व्यक्तियों से भेदभाव करना बहुत दुर्भावनापूर्ण है!

झाओजिन पैन'एन काउंटी, झेंजियांग प्रदेश

फरवरी 2007 में, कलीसिया को “जितनी जल्दी हो सके नए विश्वासियों को स्थापित होने में उनकी मदद करने हेतु संबल और आपूर्ति” नामक एक कार्य व्यवस्था हासिल हुआ। इसमें यह जोर दिया​ गया था कि “इस कार्य को पूरा करने के लिए, उन सभी को प्रयोग करना जरूरी है जो नए विश्वासियों का संबल देने में प्रभावी और अनुभवी हैं। नए विश्वासियों का संबल देने में अनुपयुक्त लोगों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए; कार्य में देरी होने से बचने के लिए उन्हें बदल देना चाहिए” (कलीसिया के कार्य की सहभागिता और व्यवस्थाओं का इतिहास। में “कलीसिया वर्तमान में जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उसे दूर करना चाहिए”)। इस व्यवस्था को देखने के बाद, हमारे जिले की जिस बहन ने नए विश्वासियों को संबल दिया था, वह उपयुक्त है या नहीं, यह मापने के लिए इन सिद्धांतों का प्रयोग करने के विपरीत, मैंने उसके विरुद्ध पहले से बनाए गए विचारों को अपनाए रखा: यह व्यक्ति लापरवाह ढंग से अपना कर्तव्य निभाती थी और परमेश्वर के वचनों को खाने और पीने पर ध्यान नहीं देती थी। इसके अलावा, वह शरीर की परवाह करती थी, इसलिए वह नए विश्वासियों को संबल देने के लिए उपयुक्त नहीं थी। और भी महत्वपूर्ण रूप से, उसने सोचा था उसमें कुछ क्षमता है और इसलिए वह अहंकारी हो गई थी और दूसरों को तुच्छ समझने लगी थी। पिछली बार, वह क्षेत्र में संबल के कार्य के प्रभारी व्यक्ति के पास गई थी और उसने मेरे बारे में बुरी बातें कहीं थी। अगर मेरे काम को लेकर जरूरत नहीं होती, तो मैंने उसकी तरफ​ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया होता। ऐसी बातें सोचते हुए, मैंने एक योजना बनाई: क्यों न इस अवसर का लाभ उठाया जाए और उसे वापस कर दिया जाए ताकि मुझे फिर उसे न देखना पड़े? क्या वह अहंकारी नहीं है? मैं उसे वापस कर दूंगा और फिर देखूंगा कि वह कितना अभिमानी है!

परिणामस्वरूप, मैंने उसके कार्य के प्रभाव को कोई महत्व नहीं दिया और मैं कलीसिया के हित में नहीं सोच रहा था। मुझे बस उसे वापस करने की जल्दी थी। इसके बाद, मैंने संबल देने के कर्तव्य को पूरा करने के लिए लापरवाह ढंग से कलीसिया के एक अगुआ का स्थानांतरण उस जिला में कर दिया। मेरी नजर में, वह व्यक्ति कठिनाइयों को सह सकती थी, वह अच्छे वचन बोलती थी और एक तेज कार्यकर्ता थी। उसमें लोगों के लिए करुणा थी और वह संबल देने के इस कार्य के लिए काफी उपयुक्त थी। मैंने यह नहीं जाना कि उस क्षेत्र के संबल देने के कार्य का जिम्मेदार व्यक्ति और समन्वयक यह सोचता था कि यह बहन अनुपयुक्त थी और वह बहन काफी उपयुक्त थी। मैंने कलीसिया की इस अगुआ के पक्ष में बहुत बोलने की पूरी कोशिश, यहां तक कि यह भी कह दिया कि उससे बेहतर कोई भी नहीं था। लेकिन जब मैं उनके सुझावों को स्वीकार करने के लिए राज़ी नहीं था, तभी मुझे यह खबर मिली कि कलीसिया की इस अगुआ पर बड़े लाल अजगर ने निगरानी रखी हुई थी। बिना किसी अन्य विकल्प के, मैंने खुद को अलग कर लिया और अनिच्छापूर्वक उस असली बहन को पुनर्नियुक्त कर दिया। मेरा दिल बुरी तरह से परेशान और निराश हो गया था, और मुझे लगातार कि मेरे पास अपनी कुंठा निकालने का कोई माध्यम नहीं था।

यह सब चलता रहा, जब तक कि एक दिन मैंने मनुष्य के धर्मोपदेश में एक अवतरण नहीं पढ़ लिया: “अगुआ उन भाई—बहनों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं जिन्हें वे प्रतिकूल पाते हैं, जो उनका विरोध करते हैं, जिनका नजरिया उनसे पूरी तरह से अलग है, यह काफी गंभीर मामला है और काफी सावधानीपूर्वक इसे संभालना जाना चाहिए। अगर वे सत्य में प्रवेश नहीं करते हैं, तो वे निश्चित रूप से पक्षपात करेंगे या इस तरह के मामले का सामना करने पर इस व्यक्ति के विरुद्ध ईर्ष्या करेंगे। इस प्रकार का कार्य परमेश्वर का प्रतिरोध करने और उसे धोखा देने वाले बड़े लाल अजगर की प्रकृति को हूबहू प्रकाशित कर रहा है। वह यह अगुआ वह व्यक्ति जो सत्य का अनुसरण करता है, जिसमें विवेक, और संवेदना है, तो वे सत्य की खोज करेंगे और उसे उचित रूप से संभालेंगे” (कलीसिया के कार्य की सहभागिता और व्यवस्थाओं का इतिहास। में “वे लापरवाह अगुआ जो अपने कार्य को उचित रूप से पूरा नहीं करते हैं, उन्हें निकाल देना चाहिए”)। इस समय, मैंने हाल ही में जिले में संबल देने वाले कार्यकताओं के स्थानांतरण के बारे में सोचने लगा। उस समय, परमेश्वर ने अपने खुद के कार्य की सुरक्षा करने के लिए मुझे एक बुरा काम करने से रोक लिया, जिससे मेरी योजना सफल नहीं हो पाई। हालांकि, मेरे अंदर की यह शैतानी प्रकृति और बड़े लाल अजगर की खराबी पूरी तरह से प्रकाश में आ गई। इस कार्य व्यवस्था ने साफ तौर पर नए विश्वासियों को संबल देने और संबल देने वाले उपयुक्त कार्यकर्ता का स्थानांतरण करने के लिए हर संभव काम करने पर जोर दिया था। लेकिन लोगों को बचाने की परमेश्वर की इच्छा के बावजूद, और उचित रूप से काम पूरा करने के बारे में सोचे बिना, मैंने भेदभाव करने और मेरा विरोध करने वाले व्यक्ति पर हमला करने के लिए इस स्वतंत्रता का उपयोग किया। ऐसा करने में, क्या मैं भी बाहरी व्यक्तियों को अलग करने के लिए बड़े लाल अजगर के समान घिनौने तरीके का उपयोग नहीं कर रहा था? यह परमेश्वर की सेवा करना कैसे था? यह साफ तौर पर लोगों को सताना और उन्हें दंडित करना था। यह कलीसिया के कार्य में दखल देना और उसे बाधित करना था। मुझे वाकई शैतान ने गहराई से भ्रष्ट कर दिया था और मैं पूरी तरह से बड़े लाल अजगर का अवतार बन गया था। मेरे कर्म बड़े लाल अजगर के कामों से अलग नहीं थे। बड़ा लाल अजगर बाहरी व्यक्तियों को अलग करने के लिए निंदनीय तरीकों का प्रयोग करता है। मैं भी कार्य व्यवस्था को व्यवहार में लाने के नाते पर मेरा विरोध करने वाले व्यक्ति को निकाल रहा था। बड़ा लाल अजगर जिन पर भरोसा करता है उनकी तरक्की करता है और मैं भी उसकी तरक्की कर रहा था जिसे मैं निजी तौर पर अच्छा मानता था और जिसने मेरे विचार को स्वीकार किया था। लाल बड़ा अजगर “मेरे प्रति समर्पित हो या खत्म हो जाओ” के शैतानी नियम का पालन करता है। मैंने भी मेरा विरोध करने वाले और मेरे बारे में विचार रखने वाले व्यक्ति से बदला लेने के लिए अपने “अधिकार” का प्रयोग किया था। बड़ा लाल अजगर तथ्यों को तोड़ता—मरोड़ता है; यह अन्यायपूर्ण और अनुचित है। मैंने बिना देखे मेरी इच्छा को स्वीकार न करने वाले व्यक्ति की आलोचना करते हुए भावुक था। मैंने बढ़ा—चढ़ाकर बोलने, तथ्य के विपरीत बात करने की हद तक, लगातार उस व्यक्ति के पक्ष में बात की जिसे मैं पसंद करता था। … अब मैं देखता हूं कि बड़े लाल अजगर की खराबी ने मुझमें गहराई से जगह बना ली है। यह मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया है, इस हद तक कि यह मेरे व्यवहार के हर पहलू को प्रभावित करता है। बड़े लाल अजगर की खराबी ने मुझे कपटी और दुर्भावनापूर्ण बना दिया; इसने मेरी आत्मा को कुत्सित, निंदनीय, और बुरा बन दिया, जिससे मैं अनिच्छापूर्वक परमेश्वर का विरोध किया। अगर परमेश्वर की प्रबुद्धता नहीं होती, तो मैं अब भी अपने खुद के भ्रष्टाचार में जी रहा होता और अपनी असफल चालों में लटक रहा होता। मैं वाकई नहीं जानता था कि मैंने पूरी तरह से अपनी संवेदना और विवेक को खो दिया था और कि मेरे बर्ताव ने परमेश्वर के स्वभाव का विरोध किया था।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, तुम्हारे प्रकाशन ने मुझे दिखाया है कि मेरी प्रकृति बहुत ज्यादा बुरी और निंदनीय है। मैं पूरी तरह से बड़े लाल अजगर का अवतार हूं; मेरा बर्ताव बड़े लाल अजगर के बर्ताव से बिल्कुल भी अलग नहीं है। अब से, मैं सक्रिय रूप से सत्य का अनुसरण करने के लिए राज़ी हूं। मैं परमेश्वर के वचन से अपने विचारों, वचनों और कार्यों की तुलना करके खुद का विश्लेषण करूंगा, और अपने अंदर लाल बड़े अजगर की प्रकृति को स्वीकार करूंगा। मैं साफ तौर पर इसके सार को देखूंगा और सच में इससे नफरत करूंगा, इसे दूर करूंगा, और तुम्हारे दिल को सांत्वना देने के लिए मानवता के साथ सच्चा मनुष्य बनूंगा!

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