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34. क्या वह हर व्यक्ति जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार नहीं करता है, वास्तव में विपत्ति में पड़ जाएगा?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

मेरा न्याय पूरी तरह से प्रकट हो गया है, विभिन्न लोगों के लिए लक्षित है, और उन सभी को अपना उचित स्थान लेना होगा। कौन-सा नियम टूटा है, उसके आधार पर उस नियम के अनुसार उन्हें प्रशासित करूंगा और न्याय करूंगा। जो इस नाम में नहीं हैं और जो अंतिम दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करेंगे, उनके लिए केवल एक नियम है: जो कोई भी मेरी उपेक्षा करेगा, मैं तुरंत उनकी आत्मा, रूह और देह छीन लूंगा और उन्हें पाताल लोक में फेंक दूंगा; जो कोई भी मेरी उपेक्षा नहीं करेगा, मैं न्याय करने से पहले तुम लोगों के परिपक्व होने की प्रतीक्षा करूँगा। मेरे वचन पूरी स्पष्टता में समझाते हैं और कुछ छुपा नहीं है। मैं केवल यही चाहता हूं कि तुम लोग हर समय उन्हें ध्यान में रख सको!

"वचन देह में प्रकट होता है" से "सड़सठवां कथन" से

मैं तुम लोगों बता दूँ, कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं वे निश्चित रूप से उस श्रेणी के होंगे जो विनाश को झेलेगी। वे जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकार करने में अक्षम हैं वे निश्चित रूप से नरक के वंशज, महान फ़रिश्ते के वंशज हैं, उस श्रेणी के हैं जो अनंत विनाश के अधीन की जाएगी। कई लोग मैं क्या कहता हूँ इसकी परवाह नहीं करते हैं, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ जो यीशु का अनुसरण करते हैं, कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते हुए अपनी आँखों से देखो, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते हुए देखोगे तो यही वह समय भी होगा जब तुम दण्ड दिए जाने के लिए नीचे नरक चले जाओगे। यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा होगी, और यह तब होगा जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दण्ड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के संकेतों को देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब वहाँ सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति ही होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं तथा संकेतों की खोज नहीं करते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए जाते हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे ही जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि "यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता है एक झूठा मसीह है" अनंत दण्ड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेतों को प्रदर्शित करता है, परन्तु उस यीशु को स्वीकार नहीं करते हैं जो गंभीर न्याय की घोषणा करता है और जीवन में सच्चे मार्ग को बताता है। और इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटें तो वह उसके साथ व्यवहार करें। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं?

"वचन देह में प्रकट होता है" से "जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा" से

अंतिम दिनों का मसीह जीवन लेकर आता, और सत्य का स्थायी एवं अनन्त मार्ग प्रदान करता है। इसी सत्य के मार्ग के द्वारा मनुष्य जीवन को प्राप्त करेगा, और एक मात्र इसी मार्ग से मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करेगा। यदि तुम अंतिम दिनों के मसीह के द्वारा प्रदान किए गए जीवन के मार्ग को नहीं खोजते हो, तो तुम कभी भी यीशु के अनुमोदन को प्राप्त नहीं कर पाओगे और कभी भी स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य नहीं बन पाओगे क्योंकि तुम इतिहास के कठपुतली और कैदी दोनों हो। …

जो मसीह के द्वारा कहे गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करने की अभिलाषा करते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे हास्यास्पद मनुष्य हैं और जो मसीह के द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं वे कल्पना में ही खोए हुए हैं। इसलिए मैं यह कहता हूं कि लोग जो अंतिम दिनों में मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं वे हमेशा के लिए परमेश्वर के द्वारा तुच्छ समझे जाएंगे। अंतिम दिनों में मसीह मनुष्यों के लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने का माध्यम है, जिसकी अवहेलना कोई भी नहीं कर सकता। मसीह के माध्यम बने बिना कोई भी परमेश्वर के द्वारा सिद्धता को प्राप्त नहीं कर सकता। परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास है, और इसलिए तुम उसके वचनों को स्वीकार करो और उसके मार्गों का पालन करो। बिना सत्य को प्राप्त किए या बिना जीवन के प्रावधान को स्वीकार किए तुमको सिर्फ़ अनुग्रह प्राप्त करने के बारे में सोचना नहीं है। मसीह अंतिम दिनों में आता है ताकि वे सभी जो सच्चाई से उस पर विश्वास करते हैं उन्हें जीवन प्रदान किया जाए। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है और यही वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वालों को अपनाना चाहिए। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और उसकी भर्त्सना करते हो, निंदा करते हो और यहां तक कि उसे पीड़ा पहुंचाते हो, तो तुम अनन्त समय तक जलाए जाते रहने के लिए निर्धारित कर दिये गए हो और तुम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे। इसी कारण से मसीह ही स्वयं पवित्र आत्मा और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर अपना कार्य सौंपा है। इसलिए मैं कहता हूं कि अंतिम दिनों में जो मसीह के द्वारा कार्य किया गया है उसे तुम स्वीकार नहीं करते हो तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। और उसका प्रतिकार पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को सहना होगा वह सभी के लिए स्वत:-स्पष्ट है। मैं यह भी कहता हूं कि यदि तुम अंतिम दिनों में मसीह का विरोध करोगे और उसे नकारोगे, तो ऐसा कोई भी नहीं है जो तुम्हारे लिए सज़ा भुगत ले। इसके अलावा, फिर कभी तुम्हें परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने उद्धार की कोशिश भी करते हो, तो तुम कभी भी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। क्योंकि तुम जिसका विरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, जिसको नकार रहे हो वह नन्हा सा प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम परिणामों के बारे में जानते हो? तुमने कोई छोटी-मोटी गलती नहीं की है, बल्कि एक बहुत ही जघन्य अपराध किया है। इसलिए मैं प्रत्येक को सलाह देता हूं कि सत्य के सामने अपने ज़हरीले दांत मत दिखाओ, या लापरवाही से आलोचना मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुमको जीवन दिला सकता है और सत्य के अलावा कुछ भी तुमको नया जन्म देने के लिए या परमेश्वर का चेहरा देखने के लिए अनुमति नहीं दे सकता है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" से

किन्तु जब तक पुराना संसार निरन्तर बना रहता है, मैं सारे विश्व में खुले तौर पर अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करते हुए, अपने प्रचण्ड प्रकोप को इनके राष्ट्रों के ऊपर तेजी से फेंकूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करता है उनको ताड़ना दूँगा:

जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ अपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और उसके बाद उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, अर्थात्, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और मेरे कारण सूर्य और चन्द्रमा को नया बना दिया जाएगा—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से विभक्त कर दिया जाएगा और मेरे राष्ट्र के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राष्ट्र बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता हो; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान से संबंध रखते हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा दिखाया जाएगा—अर्थात्, उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो, भिन्न-भिन्न अंशों में, धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जा कर मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। समस्त मानवता अपने-अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उसने किया है उससे भिन्न-भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े हुए हैं सभी नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया है, वे, क्योंकि उन्होंने जिस प्रकार अपने आपको दोषमुक्त किया है, पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर बने रहेंगे। मैं अपने महान कार्य की समाप्ति की घोषणा करने के लिए पृथ्वी पर अपनी ध्वनि आगे करते हुए अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

कई लोगों को परमेश्वर के दूसरे देह धारण के बारे में बुरी अनुभूति है, क्योंकि मनुष्य को यह बात स्वीकार करने में कठिनाई होती है कि न्याय का कार्य करने के लिए परमेश्वर देह बन जाएगा। तथापि, मैं तुम्हें अवश्य बता दूँ कि प्रायः परमेश्वर का कार्य मनुष्य की अपेक्षाओं से बहुत अधिक होता है और मनुष्य के मन इसे स्वीकार करने में कठिनाई महसूस करते हैं। क्योंकि मनुष्य पृथ्वी पर मात्र कीड़े-मकौड़े हैं, जबकि परमेश्वर सर्वोच्च एक है जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में समाया हुआ है; मनुष्य का मन गंदे पानी से भरे हुए एक गड्डे के सदृश है जो केवल कीड़े-मकोड़ों को ही उत्पन्न करता है, जबकि परमेश्वर के विचारों द्वारा निर्देशित कार्य का प्रत्येक चरण परमेश्वर की बुद्धि का ही आसवन है। मनुष्य निरंतर परमेश्वर के साथ झगड़ा करता रहता है, जिसके लिए मैं कहता हूँ कि यह स्वतः-प्रमाणित है कि कौन अंत में नुकसान सहेगा। मैं तुम सभी लोगों को प्रोत्साहित करता हूँ कि तुम लोग अपने आप को स्वर्ण की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण मत समझो। यदि अन्य लोग परमेश्वर के न्याय को स्वीकार कर सकते हैं, तो तुम क्यों नहीं स्वीकार कर सकते हो? तुम दूसरों की अपेक्षा कितना ऊँचा खड़े हो? यदि दूसरे लोग सत्य के आगे अपने सिर झुका सकते हैं, तो तुम भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते हो? परमेश्वर के कार्य का संवेग अविरल है। वह तुम्हारी "योग्यता" के वास्ते न्याय के कार्य को फिर से नहीं दोहराएगा, और तुम इतने अच्छे अवसर को चूकने पर असीम पछतावे से भर जाओगे। यदि तुम्हें मेरे वचनों पर विश्वास नहीं है, तो बस आकाश में उस महान श्वेत सिंहासन द्वारा तुम पर "न्याय पारित करने" की प्रतीक्षा करो! तुम्हें अवश्य पता होना चाहिए कि सभी इस्राएलियों ने यीशु को ठुकराया और अस्वीकार किया था, मगर यीशु द्वारा मानवजाति के छुटकारे का तथ्य अभी भी ब्रह्माण्ड के सिरे तक फैल रहा है। क्या यह एक वास्तविकता नहीं है जिसे परमेश्वर ने बहुत पहले बनाया? यदि तुम अभी भी यीशु के द्वारा स्वर्ग में उठाए जाने का इंतज़ार कर रहे हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम एक ज़िद्दी अवांछित व्यक्ति हो।[क] यीशु तुम जैसे किसी भी झूठे विश्वासी को अभिस्वीकृत नहीं करेगा जो सत्य के प्रति निष्ठाहीन है और केवल आशीषों की ही माँग करता है। इसके विपरीत, वह तुम्हें दसों हज़ार वर्षों तक जलने देने के लिए आग की झील में फेंकने में कोई दया नहीं दिखाएगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" से

मनुष्य की संगति:

क्यों धार्मिक समुदाय के ज़्यादातर लोग परमेश्वर के सामने नहीं लाये गए हैं? क्यों वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य नहीं हैं? क्योंकि यद्यपि वे परमेश्वर में विश्वास करते हैं, फिर भी वे उसका विरोध करते हैं। वे परमेश्वर में विश्वास करते हैं लेकिन उसका आज्ञापालन नहीं करते हैं; इसके बजाय वे उसका विरोध करते हैं। क्या अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने में विफल रहना उसका विरोध करने के बराबर नहीं है? क्या देहधारी परमेश्वर को पहचानने में विफलता परमेश्वर का विरोध करने के बराबर नहीं है? क्या देहधारी परमेश्वर की आलोचना और निंदा करना भी परमेश्वर का विरोध करना नहीं है? क्योंकि धार्मिक समुदाय परमेश्वर का विरोध करता है, इसलिए उसे दंडित करने के लिए अलग कर दिया गया है। बाइबिल में यह कहा गया है कि, "क्योंकि सच्‍चाई की पहिचान प्राप्‍त करने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिये फिर कोई बलिदान बाकी नहीं" (इब्रानियों 10:26)। सच्चाई को जान कर भी जानबूझ कर पाप करना, यह किस बात का संकेत करता है? क्या यह भ्रष्टता की हर रोज़ की अभिव्यक्तियों का संकेत करता है? यह मुख्य रूप से अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने में विफलता का संकेत करता है। यदि कोई स्पष्ट रूप से समझता है कि अंत के दिनों में देहधारी परमेश्वर जो व्यक्त करता है वह सत्य है, लेकिन फिर भी उसकी निंदा करता रहता है, तो वह अभिशप्त है। क्या मसीह की निंदा करना अच्छा है जो सत्य को व्यक्त करता है? इस तरह का कोई भी कृत्य स्वयं पर तबाही को लाना है, स्वयं पर विनाश को लाना है! आपको क्या लगता है कि उन लोगों का क्या परिणाम होता है जो परमेश्वर पर विश्वास तो करते हैं लेकिन उसका आज्ञापालन नहीं करते हैं और जो उसका विरोध करते हैं? (विनाश।) परमेश्वर किस तरह से ऐसे लोगों का विनाश करता है? (वह उन पर आपदाओं की बारिश करेगा।) यहाँ, देहधारी परमेश्वर ने कहा है, "मैं आग को लाता हूँ, कोप को लाता हूँ, सभी आपदाओं को लाता हूँ।" त के दिनों के अपने कार्य में परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन को लाता है। वह अपने चुने हुए लोगों के लिए अनन्त जीवन का मार्ग लाता है। अविश्वासियों, धार्मिक लोगों और उसका विरोध करने वालों के लिए, उन्हें जड़ से मिटाने के लिए परमेश्वर सभी तरह की आपदाएँ लाता हैं। वह सभी प्रकार की आपदाओं से उन सभी को जड़ से मिटा देगा जो उसका विरोध करते हैं। अंत दिनों के न्याय के दो भाग हैं। न्याय का कार्य पूरा हो जाने पर, महान आपदाएँ आएँगी।

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (श्रृंखला 136) से लिया गया अंश

इसलिए, जब अंत के दिनों में मसीह आता है, यदि आप विश्वास नहीं करते हैं, यदि आप विरोध करते हैं, तो आपकी निश्चित रूप से मृत्यु हो जाएगी! क्या यह परमेश्वर का प्रशासनिक आदेश नहीं है? यह पूरे ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर का सार्वजनिक प्रशासनिक आदेश है। जिस दिन से परमेश्वर ने यह घोषणा की है, तब से यह उसका सार्वजनिक प्रशासनिक आदेश है। परमेश्वर के वक्तव्यों में से एक निम्नानुसार पढ़ा जाता है, "र्थात्, उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा।" इसका क्या अर्थ निकलता है? इसका अर्थ है कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि यह अब होता है या बाद में, जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार नहीं करते हैं उन सभी की अंत में मृत्यु हो जाएगी। वे नष्ट हो जाएँगे। इसका अर्थ है कि उन्हें आग लगा कर भस्म कर दिया जाएगा। जब परमेश्वर ने सदोम को नष्ट किया, तो शहर के लोगों को जला कर भस्म कर दिया गया था। यहाँ तक कि उनकी आत्मा भी शेष नहीं बची थी। सब कुछ राख में बदल गया था। यह परमेश्वर का सार्वजनिक प्रशासनिक आदेश है। इसलिए, जब अंत के दिनों में मसीह आता है, तो क्या आपकी अपनी अवधारणाएँ होती हैं? क्या आप विरोध करने का साहस करते हैं? यह पूर्वनियत था: ऐसे प्रकटन वाला व्यक्ति वास्तव में अंत के दिनों का मसीह है। उसके द्वारा सत्य के मार्ग को व्यक्त किये जाने के बाद, यदि आप इसे स्वीकार नहीं करते हैं, तो आपकी मृत्यु हो जाएगी। यदि आप मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं, तो आपकी निश्चित रूप से मृत्यु हो जाएगी। यदि आप मसीह की निंदा या उसका विरोध करते हैं, तो इसका मतलब है कि सब कुछ ख़त्म हो गया, आपकी निश्चित रूप से मृत्यु हो जाएगी। हम इससे क्या सीख सकते हैं? परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव मानवजाति के लिए सार्वजनिक रूप से प्रकट हो गया है।

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (श्रृंखला 124) से लिया गया अंश

कुछ लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों के अपने न्याय के कार्य में जिन वचनों को व्यक्त करता है, वे सत्य हैं और वे मानवजाति को शुद्ध कर सकते हैं और बचा सकते हैं। हालाँकि, वे इसे स्वीकार करने से इन्कार करते हैं। वे अभी भी अपनी स्वयं की धारणाओं और कल्पनाओं पर सख्ती से कायम रहते हैं। वे मानते हैं कि यदि वे प्रभु यीशु के नाम पर दृढ़ रहते हैं और परमेश्वर के लिए श्रम और कड़ी मेहनत करते हैं, तो वे स्वर्ग के राज्य में ले जाए जाने के योग्य हो पाएँगे। वे किस तरह के लोग हैं? यह कहा जा सकता है कि इस तरह के लोग मूल रूप से कोई ऐसे होते हैं जो सत्य को स्वीकार नहीं करते हैं। इतना ही नहीं, वे परमेश्वर का आज्ञापालन भी नहीं करते हैं। वे मूल रूप से अविश्वासी हैं! परमेश्वर में विश्वासी के रूप में, हम जिस किसी भी मार्ग पर चलते हैं वह वही मार्ग होता है जिसे हम अपने स्वयं के लिए चुनते हैं। परमेश्वर हमारे निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करता है। हालाँकि, हमें यह अवश्य समझना चाहिए कि परमेश्वर द्वारा आरंभ किए जाने वाले नए कार्य के प्रत्येक चरण के साथ, वह मनुष्य को सत्य और मार्ग प्रदान करता है जिस पर मनुष्य को चलना चाहिए। हमें इसे अवश्य स्वीकार करना चाहिए और उनका आज्ञापालन करना चाहिए। परमेश्वर इस बात की परवाह नहीं करता है कि हमने अतीत में कितना कार्य किया है, हमने कितना कष्ट झेला है और हमने कितनी कीमत चुकाई है। यदि हम परमेश्वर के मौजूदा वचनों और कार्य का आज्ञापालन नहीं करते हैं, सत्य को प्राप्त करने और पाप से मुक्त होने के लिए अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य का अनुभव करके शुद्धता प्राप्त नहीं करते हैं, तो हम परमेश्वर के दण्ड का सामना करेंगे। यह परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव द्वारा निर्धारित किया गया है। जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है: "मैं प्रत्येक व्यक्ति की मंज़िल आयु, वरिष्ठता, पीड़ा की मात्रा, और सबसे कम, दुर्दशा के अंश जिसे वे आमंत्रित करते हैं के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात के अनुसार तय करता हूँ कि वे सत्य को धारण करते हैं या नहीं। इसे छोड़कर अन्य कोई विकल्प नहीं है। तुम्हें यह अवश्य समझना चाहिए कि वे सब जो परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण नहीं करते हैं दण्डित किए जाएँगे। यह एक अडिग तथ्य है। इसलिए, वे सब जो दण्ड पाते हैं, वे परमेश्वर की धार्मिकता के कारण और उनके अनगिनत बुरे कार्यों के प्रतिफल के रूप में इस तरह से दण्ड पाते हैं" ("वचन देह में प्रकट होता है” से “अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए")। हम सभी जानते हैं, जब प्रभु यीशु ने अपना कार्य किया था, तो जो फरीसी यह मानते थे कि उनकी कड़ी मेहनत प्रशंसा के योग्य थी और वे बहुत योग्य थे, वे व्यवस्था के युग में अटक गए थे। वे बाइबल के पुराने नियम से सख्ती से चिपके रहे। उन्होंने प्रभु यीशु की निंदा की और उसका विरोध किया। उन्होंने प्रभु यीशु के उद्धार को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। अंत में, उन्हें परमेश्वर द्वारा दंडित किया गया। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसी तरह, अंत के दिनों का सर्वशक्तिमान परमेश्वर आ गया है और वह सत्य को व्यक्त करता है और मानवजाति के लिए अनन्त जीवन का मार्ग प्रदान करता है। यदि हम जो कुछ भी करते हैं वह अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य से इन्कार और उसका विरोध करते हुए प्रभु यीशु के नाम पर दृढ़ रहना है, तो इस बात की परवाह किए बिना कि हमने अतीत में कितना कार्य किया है और हमारा कष्ट कितना बड़ा था, परमेश्वर हमसे घृणा करेगा। हम उसके परित्याग के लक्ष्य बन जाएँगे और अंत में, हम परमेश्वर से दण्ड और सर्वनाश पाएँगे। यह एक तथ्य है जो कभी नहीं बदलेगा।

राज्य के सुसमाचार पर उत्कृष्ट प्रश्न और उत्तर से लिया गया अंश

फुटनोटः

क. ए पीस ऑफ़ डेडवुड: एक चीनी मुहावरा, जिसका अर्थ है – "सहायता से परे"।

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