चूंकि आप कहती हैं कि हर युग में परमेश्‍वर का नाम उनकी संपूर्णता को नहीं दर्शा सकता, तो हर युग में उनके नाम की क्या अहमियत है?

सुसमाचार के प्रश्नोत्तर

उत्तर

एक बेहद अहम सवाल, सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: ""यहोवा" वह नाम है जिसे मैंने इस्राएल में अपने कार्य के दौरान अपनाया था, और इसका अर्थ है इस्राएलियों (परमेश्वर के चुने हुए लोग) का परमेश्वर जो मनुष्य पर दया कर सकता है, मनुष्य को शाप दे सकता है, और मनुष्य के जीवन को मार्गदर्शन दे सकता है। इसका अर्थ है वह परमेश्वर जिसके पास बड़ी सामर्थ्य है और जो बुद्धि से भरपूर है। "यीशु" इमैनुअल है, और इसका मतलब है वह पाप बलि जो प्रेम से परिपूर्ण है, करुणा से भरपूर है, और मनुष्य को छुटकारा देता है। उसने अनुग्रह के युग का कार्य किया, और वह अनुग्रह के युग का प्रतिनिधित्व करता है, और वह प्रबन्धन योजना के केवल एक भाग का ही प्रतिनिधित्व कर सकता है। अर्थात्, केवल यहोवा ही इस्राएल के चुने हुए लोगों का परमेश्वर, इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, याकूब का परमेश्वर, मूसा का परमेश्वर, और इस्राएल के सभी लोगों का परमेश्वर है। और इसलिए वर्तमान युग में, यहूदा के कुटुम्ब के अलावा सभी इस्राएली यहोवा की आराधना करते हैं। वे वेदी पर उसके लिए बलिदान करते हैं, और याजकीय लबादे पहनकर मन्दिर में उसकी सेवा करते हैं। वे यहोवा के पुनः-प्रकट होने की आशा करते हैं। केवल यीशु ही मानवजाति को छुटकारा दिलाने वाला है। यीशु वह पाप बलि है जिसने मानवजाति को पाप से छुटकारा दिलाया है। जिसका अर्थ है, कि यीशु का नाम अनुग्रह के युग से आया, और अनुग्रह के युग में छुटकारे के कार्य के कारण विद्यमान रहा। अनुग्रह के युग के लोगों को आध्यात्मिक रूप से पुनर्जीवित किए जाने और उनका उद्धार किए जाने हेतु अनुमति देने के लिए यीशु का नाम विद्यमान था, और यीशु का नाम पूरी मानवजाति के उद्धार के लिए एक विशेष नाम है। और इस प्रकार यीशु का नाम छुटकारे के कार्य को दर्शाता है, और अनुग्रह के युग का द्योतक है। यहोवा का नाम इस्राएल के लोगों के लिए एक विशेष नाम है जो व्यवस्था के अधीन जीए थे। प्रत्येक युग में और कार्य के प्रत्येक चरण में, मेरा नाम आधारहीन नहीं है, किन्तु प्रतिनिधिक महत्व रखता हैः प्रत्येक नाम एक युग का प्रतिनिधित्व करता है। "यहोवा" व्यवस्था के युग का प्रतिनिधित्व करता है, और यह उस परमेश्वर के लिए सम्मानसूचक है जिसकी आराधना इस्राएल के लोगों के द्वारा की जाती है। “यीशु” अनुग्रह के युग को दर्शाता है, और यह उन सब के परमेश्वर का नाम है जिन्हें अनुग्रह के युग के दौरान छुटकारा दिया गया था। यदि मनुष्य तब भी अंत के दिनों के दौरान उद्धारकर्त्ता यीशु के आगमन की अभिलाषा करता है, और तब भी उस से अपेक्षा करता है कि वह उस प्रतिरूप में आए जो उसने यहूदिया में धारण किया था, तो छः हज़ार सालों की सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना छुटकारे के युग में रूक जाएगी, और थोड़ी सी भी प्रगति करने में अक्षम होगी। इसके अतिरिक्त, अंत के दिन का आगमन कभी नहीं होगा, और युग का समापन कभी नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि उद्धारकर्त्ता यीशु सिर्फ मानवजाति के छुटकारे और उद्धार के लिए है। मैंने अनुग्रह के युग के सभी पापियों के लिए यीशु का नाम अपनाया था, और यह वह नाम नहीं है जिसके द्वारा मैं पूरी मानवजाति को समाप्त करूँगा" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" )।

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों से हम सबने हर युग में परमेश्‍वर द्वारा अपनाये गये नामों का अर्थ समझा है। व्यवस्था के युग में, उनका नाम यहोवा था, और यह नाम उस युग में मानवजाति के सामने उनकी अभिव्यक्ति को दर्शाता है: प्रताप, क्रोध, श्राप, और दया का उनका स्वभाव। फिर, परमेश्‍वर ने यहोवा नाम अपना कर व्यवस्था के युग का कार्य शुरू किया। उन्होंने अपनी व्यवस्था और आदेश जारी किये और आधिकारिक रूप से नवजात मानवजाति की पृथ्वी पर अपना जीवन जीने में अगुवाई की। उनकी मांग थी कि लोग व्यवस्था का सख्ती से पालन करें और उनकी आराधना करना और उनको महान मान कर उनका सम्मान करना सीख लें। व्यवस्था का पालन करनेवाले किसी को भी आशीष और अनुग्रह मिलना निश्चित था। जो कोई व्यवस्था को तोड़ता, उसे पत्थरों से मार दिया जाता, या स्वर्ग की ज्वाला में भून कर राख कर दिया जाता। इसीलिए व्यवस्था में जीनेवाले इस्‍त्राएलियों ने सख्ती से इसका पालन किया, और यहोवा के नाम को पवित्र माना। कुछ हज़ार सालों तक, व्यवस्था के युग की समाप्ति होने तक वे यहोवा नाम के अधीन रहे, व्यवस्था के युग का अंत होने पर, चूंकि मानवजाति अधिक से अधिक भ्रष्ट हो गई थी और वे अधिक से अधिक पाप कर रहे थे, लोगों के सामने व्यवस्था को बनाये रखने का कोई रास्ता नहीं रह गया था। हर किसी के सामने व्यवस्था तोड़ने के लिए दंड पाने का सतत खतरा मंडरा रहा था, जिस वजह से परमेश्‍वर ने यीशु नाम धारण कर पापमुक्ति का कार्य किया। उन्होंने परमेश्‍वर का प्रेम और दया का स्वभाव व्यक्त करके अनुग्रह के युग की शुरुआत की और व्यवस्था के युग का अंत किया। उन्होंने इंसान पर अपना भरपूर अनुग्रह बरसाया और अंत में उन्हें मनुष्य की खातिर सूली पर चढ़ा दिया गया, ताकि हमें हमारे पापों से छुटकारा मिल सके। उसके बाद से, हमने यीशु नाम की आराधना करना और उनके नाम को पवित्र मानना शुरू किया, ताकि हमारे पापों के लिए माफी मिल सके और हम उनके भरपूर अनुग्रह का आनंद उठा सकें। "यीशु" नाम ऐसा है कि अनुग्रह के युग के लोग दोबारा जन्म लेकर उद्धार प्राप्त कर सकें। इसका अर्थ है मानवजाति की पापमुक्ति के लिए दया और प्रेम और पाप की भेंट होना है यीशु नाम परमेश्‍वर की पापमुक्ति के कार्य को दर्शाता है और यह उनकी दया और प्रेम के स्वभाव को भी रूपायित करता है। भाइयो और बहनो, परमेश्‍वर द्वारा पूरे किये गये कार्य दो चरणों से हम देख सकते हैं कि हर युग में वे जो नाम अपनाते हैं, उसकी अपनी अहमियत है। प्रत्येक नाम परमेश्‍वर के उस युग के कार्य को और उस युग में व्यक्त उनके स्वभाव को दर्शाता है। अनुग्रह के युग में, जब प्रभु आये, तो अगर उन्हें यीशु न कह कर यहोवा कहा जाता, तो परमेश्‍वर का कार्य व्यवस्था के युग में रुक गया होता, और भ्रष्ट मानवजाति को परमेश्‍वर से कभी पापमुक्ति नहीं मिल पायी होती। आखिर में, व्यवस्था तोड़ने के लिए मनुष्य की निंदा हुई होती और उसे दंड मिला होता, और जब परमेश्‍वर अंत के दिनों में आये, तब यदि उन्हें अब भी यीशु कहा जाता, तो भ्रष्ट मानवजाति को केवल अपने पापों से छुटकारा मिल पाया होता, परंतु कभी भी उसे परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए शुद्ध होकर बचाया नहीं जा पाता। ऐसा इसलिए कि प्रभु यीशु में विश्वास करके हमारे पाप माफ़ कर दिये जाते हैं, लेकिन हमारे भीतर का पापी स्वभाव फिर भी मौजूद रहता है। हम अब भी अक्सर पाप करते हैं, जिस वजह से हम परमेश्‍वर को प्राप्त नहीं हो पाते। इसलिए, मानवजाति को पूरी तरह से पाप से बचाने के लिए, परमेश्‍वर अब एक और चरण का कार्य कर रहे हैं, जो कि प्रभु यीशु के कार्य की बुनियाद पर मानवजाति को पूरी तरह से शुद्ध करने और बचाने का है। इसी अनुसार परमेश्‍वर के नाम को बदलते रहना चाहिए। जहां तक परमेश्‍वर को अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहने का सवाल है, दरअसल इसकी भविष्यवाणी बहुत समय पहले ही की जा चुकी थी। ध्यान से समीक्षा करने पर हम इसे प्राप्त कर सकते हैं। आइए, प्रकाशितवाक्य 1:8 को पढ़ कर देखें: "प्रभु परमेश्‍वर, जो है और जो था और जो आनेवाला है, जो सर्वशक्‍तिमान है, यह कहता है, "मैं ही अल्फ़ा और ओमेगा हूँ।" 11:16-17 को पलटें। "तब चौबीसों प्राचीन जो परमेश्‍वर के सामने अपने अपने सिंहासन पर बैठे थे, मुँह के बल गिरकर परमेश्‍वर को दण्डवत् करके, यह कहने लगे, “हे सर्वशक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर, जो है और जो था,हम तेरा धन्यवाद करते हैं कि; तूने अपनी बड़ी सामर्थ्य को काम में लाकर राज्य किया है।" प्रकाशितवाक्य 4:8, 16:7, 19:6 और बाइबल में कई दूसरे स्थानों पर भी ये भविष्यवाणी की गयी थी। अंत के दिनों में, परमेश्‍वर का नया नाम सर्वशक्तिमान है, यानी सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर।

परमेश्‍वर एक बुद्धिमान परमेश्‍वर हैं, और जो अकेला कार्य वह करता है उसकी बड़ी अहमियत है। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर नाम उनके कार्य को और अंत के दिनों में उनके द्वारा व्यक्त स्वभाव को पूरी तरह से दर्शाता है। परमेश्‍वर द्वारा हमारे सामने खुद ये रहस्य प्रकट किये बिना, हमने बाइबल को पढ़ते हुए चाहे जितने साल गुज़ार दिये हों, हम ये बातें नहीं जान पाते। आइए, सब मिलकर सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों को पढ़ें।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "अपने सभी प्रबंधन में परमेश्वर का कार्य पूर्णतः स्पष्ट है: अनुग्रह का युग अनुग्रह का युग है, और अंत के दिन अंत के दिन हैं। प्रत्येक युग के बीच सुस्पष्ट अंतर हैं,क्योंकि हर युग में परमेश्वर कार्य करता है जो उस युग का प्रतिनिधित्व करता है। अंत के दिनों का कार्य किए जाने के लिए, युग का अंत लाने के लिए ज्वलन, न्याय, ताड़ना, कोप, और विनाश अवश्य होने चाहिए। अंत के दिन अंतिम युग को संदर्भित करते हैं। अंतिम युग के दौरान, क्या परमेश्वर युगका अंत नहीं लाएगा? युग को समाप्त करने के लिए, परमेश्वर को अपने साथ ताड़ना और न्याय अवश्य लाना चाहिए। केवल इसी तरह से वह युग को समाप्त कर सकता है। ...इसलिए, व्यवस्था के युग के दौरान परमेश्वर का नाम यहोवा था, और अनुग्रह के युग में यीशु के नाम ने परमेश्वर का प्रतिनिधित्व किया। अंत के दिनों के दौरान, उसका नाम सर्वशक्तिमान परमेश्वर—सर्वशक्तिमान है, और वह मनुष्य का मार्गदर्शन करने,मनुष्य पर विजय प्राप्त करने, और मनुष्य को प्राप्त करने, और अंत में,युग का समापन करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)" )।

"एक समय मुझे यहोवा के नाम से जाना जाता था। मुझे मसीह भी कहा जाता था, और लोगों ने एक बार मुझे उद्धारकर्त्ता यीशु कहा था क्योंकि वे मुझ से प्रेम करते थे और मेरा आदर करते थे। किन्तु आज मैं वह यहोवा और यीशु नहीं हूँ जिसे लोग बीते समयों में जानते थे—मैं वह परमेश्वर हूँ जो अंत के दिनों में वापस आ गया है, वह परमेश्वर जो युग को समाप्त करेगा। वह परमेश्वर मैं स्वयं हूँ जो अपने स्वभाव की परिपूर्णता के साथ, और अधिकार, आदर एवं महिमा से भरपूर होकर पृथ्वी के अंतिम छोर से उदय होता हूँ। लोग कभी भी मेरे साथ संलग्न नहीं हुए हैं, उन्होंने मुझे कभी जाना नहीं है, और मेरे स्वभाव के प्रति हमेशा अनभिज्ञ रहे हैं। संसार की रचना के समय से लेकर आज तक, एक मनुष्य ने भी मुझे नहीं देखा है। यह वह परमेश्वर है जो अंत के दिनों के दौरान मनुष्यों पर प्रकट होता है किन्तु वह मनुष्य के बीच में छुपा हुआ है। वह, सामर्थ्य से भरपूर और अधिकार से लबालब भरा हुआ, धधकते हुए सूरज और दहकती हुई आग के समान, सच्चे और वास्तविक रूप में, मनुष्यों के बीच निवास करता है। कोई ऐसा मनुष्य या चीज़ नहीं है जिसका न्याय मेरे वचनों के द्वारा नहीं किया जाएगा, और कोई ऐसा मनुष्य या चीज़ नहीं है जिसे आग की जलती हुई लपटों के माध्यम से शुद्ध नहीं किया जाएगा। अंततः, मेरे वचनों के कारण सारे राष्ट्र धन्य हों जाएँगे, और मेरे वचनों के कारण टुकड़े-टुकड़े भी कर दिए जाएँगे। इस तरह, अंत के दिनों के दौरान सभी लोग देखेंगे कि मैं ही वह उद्धारकर्त्ता हूँ जो वापस लौट आया है, मैं ही वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ जो समस्त मानवजाति को जीतता है, और मैं एक समय मनुष्य के लिए पाप बलि था, किन्तु अंत के दिनों में मैं सूरज की आग की ज्वाला भी बन जाता हूँ जो सभी चीज़ों को जला देती है, और साथ ही मैं धार्मिकता का सूर्य भी बन जाता हूँ जो सभी चीज़ों को प्रकट कर देता है। अंत के दिनों का मेरा कार्य ऐसा ही है। मैंने इस नाम को अपनाया है और मेरा यह स्वभाव है ताकि सभी लोग देख सकें कि मैं धर्मी परमेश्वर हूँ, और धधकता हुआ सूरज हूँ, और दहकती हुई आग हूँ। ऐसा इसलिए है ताकि सभी मेरी, एकमात्र सच्चे परमेश्वर की, आराधना कर सकें, और ताकि वे मेरे असली चेहरे को देख सकें: मैं न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर हूँ, और न मात्र छुटकारा दिलाने वाला हूँ—मैं समस्त आकाश और पृथ्वी और महासागरों के सारे प्राणियों का परमेश्वर हूँ" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" )।

अंत के दिनों में, परमेश्‍वर, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर नाम से राज्य के युग का अपना न्याय का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मानवजाति के भ्रष्ट स्वभाव का पर्दाफ़ाश किया है और अपने वचनों से हमारी अधार्मिकता पर न्याय किया है ताकि हम इन वचनों को पढ़कर अपने स्वभाव और सार को समझ सकें, इस सच्चाई को देख सकें कि शैतान ने हमें कितनी गहराई तक भ्रष्ट कर दिया है, अपने भ्रष्ट आचरण की जड़ को समझ पायें, और परमेश्‍वर की धार्मिकता और उनके उस स्वभाव को जान पायें, जो मानवजाति द्वारा किये जा रहे अपमान को बरदाश्त नहीं करता। वे हमारे स्वभाव को बदलने के लिए एक मार्ग और एक दिशा की ओर भी इशारा करते हैं, ताकि हम बुराई को छोड़ दें, सच्चाई की साधना करें, स्वभाव में बदलाव हासिल करें और परमेश्‍वर द्वारा बचा लिये जाएं। परमेश्‍वर मानवजाति के साथ न्याय करने और उसके शुद्धिकरण का कार्य करने, हमारे प्रकार के अनुसार हमें बांटने, और अच्छे लोगों को पुरस्कृत करने तथा बुरे लोगों को सज़ा देने आये हैं, जिससे कि भ्रष्ट मानवजाति को शैतान के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह से बचाया जा सके, और परमेश्‍वर के छह हज़ार साल वाली प्रबंधन योजना को समाप्त किया जा सके। परमेश्‍वर अंत के दिनों में मानवजाति के सामने अपने धर्मी स्वभाव, प्रताप, और क्रोध के साथ प्रकट हुए हैं, जो अपमान को बरदाश्त नही करेगा। उन्होंने खुले तौर पर अपने सहज स्वभाव, और उनके पास जो है उसे सबके सामने प्रदर्शित किया है, वे पाप से हमें पूरी तरह से बचाने के लिए और मनुष्य को उसकी मूल पवित्रता लौटाने के लिए, मानवजाति के भ्रष्ट आचरण और अधर्मी स्वभाव को ताड़ना देने और उसके साथ न्याय करने आये हैं। वे चाहते हैं कि सभी लोग न केवल उस बुद्धि को समझें जो उन्होंने स्वर्ग, पृथ्वी, और सभी चीज़ों को रचने में लगायी है, बल्कि उस बुद्धि को और अधिक समझें जो उन्होंने मानवजाति के लिए अपने व्यावहारिक कार्य में लगायी है। उन्होंने न केवल सभी चीज़ों की रचना की है, बल्कि वे सभी चीज़ों पर शासन भी करते हैं। वे न केवल मानवजाति के लिए एक पाप-चढ़ावा बन पाये, बल्कि वे हमें पूर्णता देने, हमारा रूपांतर करने और शुद्धिकरण करने में भी समर्थ हैं। वे प्रथम और अंतिम हैं। कोई भी उनके आश्चर्यजनक स्वभाव या उनके कार्य की थाह नहीं पा सकता। इसलिए, परमेश्‍वर को उनके सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर नाम से पुकारना सबसे उपयुक्त है। अब पवित्र आत्मा का कार्य केवल सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के नाम से किये गये कार्य का मान बनाये रखना है। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के नाम की प्रार्थना करनेवाला और उनकी आराधना करनेवाला कोई भी इंसान पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त कर सकता है, और परमेश्‍वर द्वारा दिये गये जीवन के समृद्ध पोषण और सिंचाई का आनंद उठा सकता है। वरना वे सब अँधेरों में डूब जाएंगे और अपना रास्ता भटक जाएंगे। फिलहाल, अभी भी अनुग्रह के युग में फंसी हुई कलीसियाओं में वीरानगी छायी हुई है। विश्वासी अपनी आस्था के प्रति बेरुखे होते जा रहे हैं, प्रचारकों के पास उपदेश देने के लिए कुछ नहीं है, और लोगों के मन में परमेश्‍वर से प्रार्थना करते समय कोई भावना नहीं होती। साथ-ही-साथ, ज़्यादा-से-ज़्यादा लोग दुनिया के बहकाओं के शिकार हो रहे हैं। इसकी बुनियादी वज़ह यह है कि उन लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के नाम को स्वीकार नहीं किया है, और वे परमेश्‍वर के नये कार्य के साथ चल नहीं पाये हैं। "परमेश्‍वर का नाम बदल गया है?!" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

और पढ़ें

I. परमेश्वर में विश्वास करने के लिए, एक व्यक्ति को यह अवश्य पहचानना चाहिए कि मसीह देह में प्रकट परमेश्वर है, और कि वह स्वयं परमेश्वर है

बाइबिल के अभिलेख के अनुसार, पवित्र आत्मा ने गवाही दी थी कि प्रभु यीशु परमेश्वर का प्यारा पुत्र है, और प्रभु यीशु ने भी स्वर्ग के परमेश्वर को "पिता" कहा था। इस प्रकार, बहुत से लोग मानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है, और यह कि स्वर्ग में पिता परमेश्वर भी है । और फिर भी प्रभु यीशु ने कहा था: "जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। …मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है" (यूहन्ना 14:9-10)। "मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना 10:30)। इसलिए यह देखा जा सकता है कि केवल एक ही परमेश्वर है। यीशु मसीह देहधारी हुआ यहोवा परमेश्वर था—वह स्वयं परमेश्वर था।

अधिक उत्कृष्ट सामग्री

सामूहिक वीडियो श्रृंखला

Hindi Christian Video | वह जिसका हर चीज़ पर प्रभुत्व है | Testimony of the Great Power of God

Hindi Christian Video | वह जिसका हर चीज़ पर प्रभुत्व है | Testimony of the Great Power of God

सुसमाचार फिल्म श्रृंखला

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie | "परमेश्वर में आस्था" (Hindi Dubbed)

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie | "परमेश्वर में आस्था" (Hindi Dubbed)

सामूहिक वीडियो श्रृंखला

Hindi Praise and Worship | "चीनी सुसमाचार गायक-मण्डली 18वाँ प्रदर्शन" | God Is Come, God Is King

Hindi Praise and Worship | "चीनी सुसमाचार गायक-मण्डली 18वाँ प्रदर्शन" | God Is Come, God Is King

सामूहिक वीडियो श्रृंखला

सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रतापी सिंहासन पर बैठा हुआ है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रतापी सिंहासन पर बैठा हुआ है

सामूहिक वीडियो श्रृंखला

Hindi Christian Video "हर राष्ट्र सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आराधना करता है" | Praise the Return of the Lord

Hindi Christian Video "हर राष्ट्र सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आराधना करता है" | Praise the Return of the Lord

सुसमाचार फिल्म श्रृंखला

Hindi Christian Movie | सिंहासन से बहता है जीवन जल | How to Seek the Footsteps of the Holy Spirit

Hindi Christian Movie | सिंहासन से बहता है जीवन जल | How to Seek the Footsteps of the Holy Spirit

संबंधित वीडियो