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परमेश्वर वाकई आया है इंसान के बीच

I

परमेश्वर लाता है मानव जाति का अंत इंसानी दुनिया में।

उसके बाद,

वो खोल देता है अपना पूर्ण स्वभाव मानव जाति के सामने,

ताकि जो जानते हैं परमेश्वर को और जो नहीं जानते हैं उसे,

वे सभी अपनी आँखों से देखेंगे

कि सच में आया परमेश्वर इंसान के बीच,

उस पृथ्वी पर जहां सब कुछ है उगता।

यही है परमेश्वर की योजना।

मानव जाति के सृजन से लेकर अब तक

यही है उसकी एकमात्र "घोषणा",

यही है उसकी एकमात्र "घोषणा"।

चाहता है परमेश्वर कि उसके हर कदम पर

तुम लोग पूरे दिल से ध्यान दो,

क्योंकि उसकी छड़ी फिर आ रही है मानव जाति के पास।

आ रही है पास उस मानव जाति के जो करती है उसका विरोध,

करती है उसका विरोध।

II

परमेश्वर लाता है मानव जाति का अंत इंसानी दुनिया में।

उसके बाद,

वो खोल देता है अपना पूर्ण स्वभाव मानव जाति के सामने,

ताकि जो जानते हैं परमेश्वर को और जो नहीं जानते हैं उसे,

वे सभी अपनी आँखों से देखेंगे

कि सच में आया परमेश्वर इंसान के बीच,

उस पृथ्वी पर जहां सब कुछ है उगता।

यही है परमेश्वर की योजना।

मानव जाति के सृजन से लेकर अब तक

यही है उसकी एकमात्र "घोषणा",

यही है उसकी एकमात्र "घोषणा"।

चाहता है परमेश्वर कि उसके हर कदम पर

तुम लोग पूरे दिल से ध्यान दो,

क्योंकि उसकी छड़ी फिर आ रही है मानव जाति के पास।

आ रही है पास उस मानव जाति के जो करती है उसका विरोध,

करती है उसका विरोध।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं? परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है