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सच्चे मार्ग की खोजबीन पर एक सौ प्रश्न और उत्तर

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भाग दो

सच्चे मार्ग की जाँच पर एक सौ प्रश्न

1मानवजाति को परमेश्वर में क्यों विश्वास करना चाहिए?
2संसार इतना अधिक अंधकारपूर्ण और कुटिल क्यों है? मानवजाति भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पर है, क्या इसका विनाश होना चाहिए?
3मेरे विचार से, प्रत्येक धर्म मानवजाति को नेक बनना ही सिखाता है। क्या इसका अर्थ यह है कि मानवजाति चाहे जिस किसी भी धर्म का अनुसरण करे, जब तक वह ईमानदार रहे और कोई बुरे काम न करे, उसे उद्धार प्राप्त होगा?
4बैद्ध और ताओ धर्म के लोगों की धार्मिक प्रथाएं ऐसी हैं, जिनमें वे स्वयं को सांसारिक विषयों से अलग कर संन्यास का पालन करते हैं, क्या इससे उद्धार प्राप्त होगा?
5लोग अक्सर कहते हैं, "सदाचार को मिले पुरस्कार, बुराई को प्रतिकार", तो परमेश्वर सभी बुरे लोगों को ख़त्म क्यों नहीं कर देते?
6यदि हम परमेश्वर में विश्वास न करें, सदाचारी रहें, अच्छे काम करें, और कोई बुरे काम न करें, तो क्या हम उद्धार प्राप्त कर सकते हैं?
7बहुत-से लोग कहते हैं, "जब तबाही आयेगी, हर कोई मारा जाएगा।" तो आपदाओं के आने पर, क्या परमेश्वर के विश्वासी मरने से वाकई बच जायेंगे?
8परमेश्वर में विश्वास करनेवाले लोगों को नया जीवन पाने के लिए, प्रार्थना करना, इकट्ठा होना और परमेश्वर के वचन को पढ़ना क्यों आवश्यक है?
9चूंकि परमेश्वर मानवजाति से प्रेम करते हैं, तो वे उन्हें नकारने और उनका विरोध करनेवाले सभी बुरे लोगों का विनाश करने के लिए तबाही क्यों करते हैं?
10कुछ लोग कहते हैं कि परमेश्वर हैं ही नहीं; यह दृष्टिकोण गलत कैसे है? हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि परमेश्वर का अस्तित्व है?
11मुझे यकीन है कि परमेश्वर होते हैं, लेकिन मेरी उम्र कम है और मुझे ज़िंदगी में अभी बहुत-कुछ करना है। यदि मैं उनमें विश्वास करने के लिए कम व्यस्त होने तक प्रतीक्षा करूं, तो क्या तब भी मैं उद्धार पा सकूंगा?
12परमेश्वर के कार्य के तीनों चरण, मानवजाति का उद्धार करने के लिए किस प्रकार गहरे होते जाते हैं?
13हम मानते हैं कि जब प्रभु लौटेंगे, तब पलक झपकते ही मनुष्य एक पवित्र शरीर में बदल जाएगा, तो फिर परमेश्वर का अंत के दिनों में न्याय और शुद्धिकरण का कार्य करना क्यों ज़रूरी है?
14जिन लोगों ने अनेक वर्षों तक प्रभु यीशु में विश्वास किया है और उत्साह के साथ स्वयं को खपा कर अथक काम किया है, उन्होंने प्रभु के लिए बहुत दुख सहे हैं। क्या ऐसा हो सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार न करने के कारण उनका उद्धार न किया जाए और उन्हें स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न मिले?
15चूंकि परमेश्वर धर्मी हैं, तो ऐसा क्यों है कि दुष्ट लोग सुख-सुविधा से समृद्ध होते हैं, जबकि अच्छे लोगों को सताया और दबाया जाता है और वे तकलीफें झेलते हैं?
16क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने से कोई व्यक्ति वाकई नष्ट होने से बच जाएगा और अनंत जीवन पायेगा?
17कुछ लोगों ने कहा है, "यदि हम प्रभु यीशु के मार्ग पर चलेंगे और उनकी अपेक्षाओं के अनुसार अपना आचरण रखेंगे, यदि हम विनम्र और धैर्यवान होंगे, अपने शत्रुओं से प्रेम करेंगे, सलीब को धारण करेंगे, अपने शरीर को वश में रखेंगे, प्रचारकार्य और प्रभु के लिए काम करेंगे और उनकी गवाही देंगे, यदि हम इन चीज़ों में मेहनत करेंगे, तो हम पवित्र हो जाएंगे।" ऐसा कहना क्यों गलत है?
18परमेश्वर सदा अपरिवर्तनीय हैं, फिर प्रभु यीशु अपने नाम को सर्वशक्तिमान परमेश्वर में क्यों बदलेंगे?
19हमारे पाप क्षमा कर दिये गये हैं और प्रभु में विश्वास के जरिये हमें न्यायसंगत माना गया है, और साथ ही, हमने बहुत-सी चीज़ों का त्याग किया है, स्वयं को खपाया है, और प्रभु के लिए अनथक मेहनत की है। मुझे यकीन है कि इस प्रकार का विश्वास हमें स्वर्ग के राज्य में आरोहित होने देगा। आप ऐसा क्यों कहते हैं कि यह हमें स्वर्गिक राज्य में प्रवेश नहीं दिलायेगा?
20इन सभी वर्षों में प्रभु में अपने विश्वास के जरिये मैंने बहुत-से आशीष पाये हैं और रोगों से मुक्त हुआ हूँ। इसलिए यदि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करूं तो क्या यह अंतरात्मा का अभाव नहीं दर्शायेगा?
21यदि मुझे प्रभु यीशु में पहले से विश्वास है, तो मुझे उद्धार प्राप्त करने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास क्यों करना होगा?
22चूंकि प्रभु यीशु और सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक ही परमेश्वर हैं, तो क्या बचाये जाने के लिए केवल यीशु में विश्वास करना काफी नहीं है?
23प्रभु में विश्वास करने के बाद हमारे पाप क्षमा कर दिये गये थे, लेकिन हम अब भी अक्सर पाप करते हैं; हम पापों के चंगुल से अंतत: कब छूट पायेंगे?
24जब प्रभु यीशु को सलीब पर चढ़ाया गया तो उसने कहा, "यह समाप्त हो गया" जो दर्शाता है कि मानवजाति के लिए परमेश्वर का उद्धार का कार्य पूरा हो गया था। तो आप कैसे कह सकते हैं कि परमेश्वर ने मानवजाति का न्याय करने, उसे शुद्ध करने और बचाने के लिए कार्य का एक और चरण किया है?
25हम मानते हैं कि प्रभु के कीमती रक्त ने हमें पहले ही शुद्ध कर दिया है और हम पवित्र हो चुके हैं और पाप से संबंधित नहीं हैं, इसलिए हमें शुद्धिकरण के कार्य को प्राप्त करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा कहना सही क्यों नहीं है?
26प्रभु यीशु ने अपना छुटकारे का कार्य अनुग्रह के युग में पूरा किया और अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपना न्याय का कार्य करते हैं। हम यह कैसे पहचान सकते हैं कि अंत के दिनों का न्याय का कार्य और अनुग्रह के युग का छुटकारे का कार्य एक ही परमेश्वर के हैं?
27प्रभु यीशु ने हमें वचन दिया है कि, "जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नष्ट न हो, परंतु अनंत जीवन पाये।" परमेश्वर अपनी इस बात को कैसे पूरा करेंगे?
28अतीत में, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य का बहुत अधिक विरोध और निंदा की है और मैंने तिरस्कारपूर्ण बातें कही हैं; क्या परमेश्वर फिर भी मुझे बचायेंगे?
29बाइबल में यह कहा गया है कि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों के बीच कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, एकमात्र उद्धारकर्ता यीशु मसीह हैं, कल भी वे ही थे, आज भी वे ही हैं, और सदा के लिए वे ही रहेंगे। लेकिन आज आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास क्यों करते हैं?
30बाइबल में यह कहा गया है, "यही यीशु जिस रीति से तुमने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।" जब प्रभु की वापसी होगी, तो यह सफ़ेद बादल पर उनकी सवारी से होगी, वे देहधारी क्यों होंगे?
31ऐसा क्यों है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया अधिक-से-अधिक समृद्ध हो रही है जबकि अनुग्रह के युग की कलीसियाएं इतनी उजाड़ हैं?
32विश्व में बहुत-से प्रमुख धर्म हैं और उनमें से प्रत्येक यह कहता है कि उन्हीं के परमेश्वर सच्चे हैं, तो कोई इसे वास्तव में कैसे सुनिश्चित कर सकता है कि कौन-से परमेश्वर एकमात्र सच्चे परमेश्वर हैं?
33कोई परमेश्वर और मनुष्य के कार्य के बीच भेद कर कैसे पहचान सकता है?
34कोई वाकई कैसे पुष्टि करे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटे कर आए यीशु हैं?
35धार्मिक दुनिया के भीतर प्रत्येक वर्ग मानता है कि उन्हीं का मार्ग सच्चा मार्ग है, फिर कोई सच्चे मार्ग को झूठे मार्गों से अलग कैसे पहचाने?
36परमेश्वर द्वारा अंत के दिनों में क्रियान्वित कार्य को देख कर, हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि यही सच्चा मार्ग है?
37परमेश्वर प्रत्येक युग में नये कार्य को क्यों क्रियान्वित करते हैं? कोई नया युग वास्तव में किन कारणों से आता है?
38धार्मिक समुदाय ने अनुग्रह के युग में देहधारी मसीह का विरोध करना शुरू किया, तो धार्मिक समुदाय ने हमेशा से क्यों मसीह का विरोध और निंदा की है?
39परमेश्वर के प्रत्येक युग के नये कार्य का घोर विरोध करने और उसकी निंदा करने के धार्मिक समुदाय के प्रयासों के पीछे क्या कारण है? इसकी जड़ में क्या है?
40क्या बाइबल में उल्लिखित अंत के दिनों का न्याय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य का हवाला देता है?
41परमेश्वर अंत के दिनों के अपने कार्य में भ्रष्ट मानवजाति को न्याय और ताड़ना क्यों देते हैं?
42अनुग्रह के युग के छुटकारे के कार्य और राज्य के युग के न्याय के कार्य के बीच क्या फ़र्क है? उद्धार प्राप्त करने से पहले अंत के दिनों के न्याय के कार्य को स्वीकार करना किसी के लिए क्यों ज़रूरी है?
43यदि चमकती पूर्वी बिजली ही सच्चा मार्ग है, तो सीसीपी सरकार किसलिए चमकती पूर्वी बिजली के विरुद्ध घोर दमन, गिरफ्तारियों और उत्पीड़न में निरंतर लगी हुई है?
44यदि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य ही सच्चा मार्ग है, तो उन कलीसियाओं के एल्डर्स, पादरी और याजक इसे स्वीकार क्यों नहीं करते?
45अंत के दिनों में, परमेश्वर अपना नया कार्य शुरू कर चुके हैं। ऐसा क्यों है कि जो लोग परमेश्वर के नये कार्य के साथ नहीं चल सकते और अनुग्रह के युग की किसी कलीसिया में कायम रहते हैं, वे उद्धार पाने में समर्थ नहीं हो सकते?
46हम हर बात में पादरियों और एल्डर्स की आज्ञा मानते हैं और समर्पण करते हैं, क्या यह परमेश्वर के आगे समर्पण करने के समान है? क्या इस ढंग से परमेश्वर में विश्वास करना उद्धार प्राप्त करने का मार्ग है?
47आपने कहा है कि परमेश्वर आ चुके हैं, लेकिन हम इसमें यकीन करने की हिम्मत नहीं करते क्योंकि बाइबल कहती है, "उस समय यदि कोई तुम से कहे, 'देखो, मसीह यहाँ है!' या 'वहाँ है!' तो विश्‍वास न करना। "क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:23-24)। हम वास्तव में सच्चे मसीह को झूठे मसीहों से अलग कैसे पहचानें?
48बहुत-से लोग यह मानते हैं कि मनुष्य द्वारा लिखे जाने के बावजूद बाइबल के सभी वचन पवित्र आत्मा से आये हैं और वे परमेश्वर के वचन हैं। क्या यह सही है?
49बाइबल की रचना कैसे हुई? बाइबल वास्तव में किस प्रकार की किताब है?
50लोग परमेश्वर को परिभाषित करने के लिए हमेशा बाइबल का उपयोग क्यों करते हैं? इसमें गलत क्या है यदि कोई परमेश्वर को बाइबल के दायरे में बांध कर रखे?
51परमेश्वर के कार्य और बाइबल के बीच वास्तव में क्या संबंध है? परमेश्वर का कार्य पहले आया या कि बाइबल पहले आयी?
52प्रभु यीशु के लौट आने के अपने अध्ययन में कुछ लोग केवल बाइबल की भविष्यवाणियों को आधार बनाते हैं, लेकिन वे परमेश्वर की वाणी को सुनने की कोशिश नहीं करते। इस चलन के साथ क्या समस्या है?
53बहुत-से लोग मानते हैं कि परमेश्वर में विश्वास करने का अर्थ बाइबल से कभी भी भटकना नहीं है, और बाइबल से भटकने का अर्थ परमेश्वर को धोखा देना है। क्या यह नज़रिया सही है?
54कुछ लोग मानते हैं कि परमेश्वर में विश्वास बाइबल पर आधारित होना चाहिए, लेकिन क्या बाइबल पर आधारित विश्वास वाकई उद्धार दिला सकता है?
55परमेश्वर में अपने विश्वास में किसी को बाइबल से नहीं भटकना चाहिए; बाइबल से भटकी हुई कोई भी चीज़ नकली और धर्मद्रोही है। क्या यह तर्कसंगत है?
56बाइबल में वाकई ऐसे बहुत-से स्थान हैं जहां परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की भविष्यवाणी की गयी है। हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और उनके कार्य के बारे में जानना चाहेंगे; ये किस प्रकार से उन भविष्यवाणियों को साकार कर उन्हें हासिल करेंगे?
57बाइबल कहती है कि पूरी बाइबल परमेश्वर की प्रेरणा से दी गयी है, फिर आप क्यों कहते हैं कि बाइबल में पूरी तरह से परमेश्वर के वचन नहीं हैं?
58हमें लगता है कि परमेश्वर के सभी वचन बाइबल में हैं और बाइबल से बाहर की किसी भी चीज़ में परमेश्वर के प्रकाशित वाक्य या वचन नहीं हैं। इस प्रकार का बयान क्यों गलत है?
59प्रभु की वापसी के बारे में, बाइबल में साफ़ तौर पर दर्ज है, "उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र; परन्तु केवल पिता" (मरकुस 13:32)। यदि आप कहते हैं कि प्रभु यीशु पहले ही लौट कर आ चुके हैं, तो आपको कैसे पता चला?
60प्रभु यीशु ने कहा था कि वे वापस आएँगे, और उनकी वापसी की रीति क्या होगी?
61प्रभु की वापसी में देहधारण क्यों शामिल है—गुप्त रूप से अवरोहण—साथ-ही-साथ सार्वजनिक रूप से बादलों से अवरोहण?
62यह क्यों ज़रूरी था कि मानवजाति के सामने स्वयं को प्रकट करने के लिए, प्रभु मनुष्य-पुत्र के रूप में देहधारण करके वापस आएँ?
63मनुष्य के सामने प्रकट होकर अपना कार्य करने के लिए अंत के दिनों में प्रभु की वापसी आध्यात्मिक शरीर में क्यों नहीं हुई?
64परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए गये लोगों के जरिये क्यों नहीं किया गया? यह क्यों आवश्यक है कि वे यह कार्य देहधारी होकर व्यक्तिगत रूप से करें?
65देहधारी रूप में प्रकट होने में, परमेश्वर एक महाकाय या रोबदार रूप में प्रकट क्यों नहीं हुए?
66परमेश्वर अंत के दिनों में एक स्त्री के रूप में देहधारी क्यों हुए हैं? इसका महत्त्व क्या है?
67जब अनुग्रह के युग में परमेश्वर देहधारी हुए, तो यह देहधारण एक यहूदी पुरुष के रूप में था, तो अंत के दिनों के परमेश्वर एक एशियाई व्यक्ति के रूप में क्यों प्रकट हुए हैं?
68अंत के दिनों में परमेश्वर का कार्य आत्मा के माध्यम से क्यों नहीं किया जाता है? परमेश्वर अपना कार्य करने के लिए देह में क्यों आ गया है?
69जब यीशु लौटेंगे तो वे वास्तव में कौनसा कार्य करेंगे?
70सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय के कार्य में, वे सभी सम्प्रदायों को मिलाकर एक कैसे कर देते हैं?
71परमेश्वर के विश्वासी उनकी वाणी को कैसे पहचानें ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि यही सच्चा मार्ग है?
72परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य में, उन्होंने न्याय और ताड़ना के इतने अधिक वचन क्यों कहे हैं?
73सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में न्याय, ताड़ना और घोषणायें शामिल हैं और उनके वचनों में वाकई तेजस्विता और क्रोध है, मगर क्या उनमें दया और प्रेम का अभाव नहीं है?
74सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि ये मुख्य रूप से परमेश्वर की वाणी हैं, और परमेश्वर बोल रहे हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ वचन मनुष्य के वचनों जैसे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है?
75हम सभी पाप करने और स्वीकार कर लेने के चक्र में फंसे हुए जी रहे हैं और इससे छूटने का कोई रास्ता नहीं है; क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन वाकई मानवजाति को बदल कर शुद्ध कर सकते हैं?
76ऐसा क्यों कहा गया है कि प्रभु यीशु की सभी भविष्यवाणियाँ सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य के जरिये साकार हो गई हैं और उन्हें हासिल कर लिया गया है?
77ऐसा क्यों है कि उद्धार केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने और परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार करने के जरिये ही संभव है?
78परमेश्वर अपना अंत के दिनों का कार्य करने के लिए चीन में गुप्त रूप से क्यों अवरोहित हुए? इसके पीछे का अर्थ क्या है?
79परमेश्वर का अंत का दिनों का कार्य चीन में क्यों किया जा रहा है, इस्राएल में क्यों नहीं?
80चूंकि शैतान और दुष्ट आत्माओं ने मानवजाति को जीवित, मलिन राक्षसों में बदल दिया है, तो परमेश्वर ने उन्हें जल्दी नष्ट क्यों नहीं किया?
81अनुग्रह के युग में परमेश्वर का कार्य 2,000 वर्षों तक चला; और पुराने युग को समाप्त कर एक नये स्वर्ग और पृथ्वी की स्थापना करने के लिए परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य कितना लंबा चलेगा?
82उद्धार प्राप्त करने के लिए, किसी को परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य के आगे कैसे समर्पित होकर उसका अनुभव करना चाहिए?
83किसी के कर्तव्य निभाने और सत्य का अनुसरण करने के बीच वास्तव में क्या संबंध है? उद्धार प्राप्त करने के साथ किसी के कर्तव्य निभाने का क्या सरोकार है?
84परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के अतिरिक्त किसी के लिए उनकी परीक्षा और शुद्धिकरण को स्वीकार करना क्यों आवश्यक है?
85परमेश्वर के उद्धार और पूर्णता को स्वीकार करने के लिए इतनी अधिक तकलीफें सहना क्यों आवश्यक है?
86एक अच्छे गंतव्य के लिए विश्वासियों को इतने अधिक नेक काम क्यों करने पड़ते हैं?
87मानवजाति के गंतव्य और राज्य के सुंदर दृश्य वास्तव में कैसे होते हैं? परमेश्वर के कौन-से वचन इन्हें सत्यापित करते हैं?
88परमेश्वर द्वारा राज्य के जिन सुंदर दृश्यों की भविष्यवाणी की गयी है, उन्हें कैसे हासिल और साकार किया जाएगा?
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