परमेश्वर का प्रेम सर्वाधिक यथार्थ है

वेंझोंग बीजिंग शहर

11 अगस्त 2012

21 जुलाई 2012 की रात को हमारे यहाँ एक भयावह बाढ़ आई थी। इस प्रकार की दुर्घटनाएं कभी कभी ही घटित होती है। मैंने इस दुर्घटना के दौरान क्या अनुभव किया और मैंने क्या देखा; उन सभी लोगों को बताना चाहती हूँ जो लोग परमेश्वर के लिए लालायित रहते हैं।

उस दिन मैंने और मेरे पति ने, मेरी बहन के लिए चारागाह को ठीक ठाक किया था। रात में भारी बरसात जारी थी और हम लोग काफी जल्दी सोने चले गए। रात 3 बजकर 45 मिनट पर हमारे जीजाजी ने हमें जगाया और बताया: "वे लोग जलाशय खोलने जा रहे हैं! सब कुछ बाढ़ में विलीन होने वाला है! हमें जल्दी तैयार होना होगा!" यह सुनकर मेरे होश उड़ गए, और परमेश्वर से गुहार लगाने के लिए "हे परमेश्वर, हे परमेश्वर!" कहने के अलावा मेरे पास और कोई शब्द नहीं था। मुझे अपना बिजली का स्कूटर और वह एमपी5 प्लेयर और टीएफ़ कार्ड सुरक्षित करना था जिनसे मैं भजन और धर्मोपदेश सुनती थी। अत्यंत व्यग्र मनोदशा में मैं बिजली वाले स्कूटर को बाहर निकालने के लिए स्टोर रूम में गई, और घर जाने के लिए मैं स्कूटर से निकल पड़ी ताकि परमेश्वर के वचनों वाली पुस्तकों को जलमग्न होने से बचा सकूँ और मैं अपनी सास और बच्चों के लिए भी चिंतित थी। मैं स्कूटर से हाइवे तक पहुंची लेकिन भारी बरसात के कारण कुछ दिख नहीं रहा था और मैं डामर (अस्फाल्ट) के एक टुकड़े से टकरा गई, जो पानी के प्रवाह से नीचे गिर गया था एवं मैं और मेरा स्कूटर दोनों ही पानी में गिर गए। मैं अपने मन में प्रार्थना कर रही थी कि, "हे परमेश्वर यदि आज मैं इस जल में बह गई तो यह आपका धार्मिक निर्णय ही होगा। मुझे बचा लीजिए, और आज से मैं अपने कर्तव्य का पालन ईमानदारी के साथ करूंगी।" इस समय तक मेरा एक जूता पानी में बह चुका था, अत: मैंने हाइवे का मार्ग पकड़ने का निर्णय किया। लेकिन जब मैं आगे बढ़ी और तो जो कुछ दिखा उससे मेरे पाँव के नीचे की जमीन खिसक गई; मैंने देखा कि उस तरफ की सड़क को बंद कर दिया गया है और मैं आगे नहीं जा सकती थी। एक बार फिर मैं पानी में फिसली और मेरा दूसरा जूता भी बह गया। जल का स्तर बढ़ कर अब मेरी जांघों के बराबर पहुँच गया था और तीसरी बार वापस लौटने के अलावा मेरे कोई विकल्प नहीं था, इस पूरी अवधि के दौरान मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी। उसी समय एक दूसरे पिग फार्म से तीन व्यक्तियों का एक परिवार वहां आ गया और मैंने परमेश्वर के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। मैं उन लोगों के साथ हो ली और फिर से हाइवे पकड़ने की सोचने लगी, इसी समय मेरे पति भी पहुँच गए। उन्होंने तारों की जाली में छेद को बनाने के लिए ड्रिल मशीन का प्रयोग किया और मैं पहली व्यक्ति थी जिसने नंगे पाँव कूद लगाई और हाइवे पर पहुँच गई। दक्षिण की ओर नदी का एक मोड़ था जो उत्तर की ओर बह रहा था और उत्तर की ओर मुख्य मार्ग जलमग्न था और यह जल दक्षिण की ओर बह रहा था। हम लोग बीच में फंसे हुए थे और हाइवे पकड़ने के अलावा हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

हाइवे पर पहुँचने के बाद जब मैंने नीचे की ओर देखा तो डर से मेरे पाँव काँपने लगे। जहां हम लोग रहते हैं उससे थोड़ी ही दूरी पर एक स्टील कारख़ाना है। इस कारखाने की चारदीवारी और हमारे घर को, इन दोनों के बीच दो मीटर या इससे थोड़ा ही अधिक चौड़ा एक रास्ता अलग करता है। इस दीवार के अंदर एक मीटर पानी भरा हुआ था, और कारखाने में, रंगीन स्टील से बनाए गए छत वाले घर भी पानी पर तैर रहे थे। मैंने पुन: प्रार्थना किया, "हे परमेश्वर, मुझे बचाने के लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूँ। मैं धन के लोभ के कारण परमेश्वर की आवाज़ नहीं सुन पाती हूँ और मेरा व्यवहार अहंकारी और जिद्दी है। मुझसे पाप हुआ है।" यदि पानी का बहाव उत्तर दिशा की ओर हुआ होता है तो दिन में 2 बजे तक हम सब लोग पानी में बह कर विलीन हो चुके होते। लेकिन इसका मुंह दीवार के निचले हिस्से से दक्षिण दिशा की ओर खुला हुआ था और इसने नीचे की ओर स्थित पिग फार्मों को डुबो दिया। यह वह क्षण था जब मैंने परमेश्वर की शक्ति का साक्षात दर्शन किया; जो उस परमेश्वर में विश्वास करते हैं उनके मार्ग की आपदाएँ भी किनारे हो लेती हैं।

सुरंग से बाहर आकर और घर प्रस्थान करने तक, हम लोगों ने हाइवे की सुरंग में तीन घंटा समय बिताया। जब मैं घर पहुंची और अपना भोजन का बैग खोला तो आश्चर्यजनक रूप से न तो मेरा एमपी5 प्लेयर और न ही टीएफ़ कार्ड गीला हुआ था। जब मेरा स्कूटर पानी में गिरा था तो ये दोनों भी पानी में गिरे थे। स्कूटर का चार्जर और बाकी चीजें तो भीग गई थीं। सिर्फ एमपी5 प्लेयर और टीएफ़ कार्ड को ही कोई नुकसान नहीं हुआ था। मैंने परमेश्वर के चमत्कारी कारनामों को देखा था।

जब मैं चारागाह लौटी और वहाँ जो कुछ मैंने देखा उससे मेरे आश्चर्य की कोई सीमा न रही। सिर्फ पिछली रात हुई बरसात का पानी ही चारागाह के हाते मे भरा हुआ था। इसके अंदर, बाहर से ज्यादा पानी नहीं घुसा था। सामने की तरफ अनाज की पट्टी में पानी था और पीछे के हिस्से में यह ज्यादा गहरा था। लेकिन चारागाह की जमीन पर अधिक पानी नहीं था। परमेश्वर ने इसे सुरक्षित किया था।

इस बाढ़ के अनुभव ने, मेरे मन को ज्यादा शांत बना दिया है, और अब मैं जानती हूँ कि सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्या है। लोग अक्सर कहते हैं कि पैसा ही सब कुछ है, लेकिन जब आपदाएँ आती हैं तो पैसा हमें बचाने के लिए नहीं आएगा; असली मालिक परमेश्वर है। मैं अब पैसों के पीछे नहीं भागूंगी, और चारागाह का त्याग करके।

अपना जीवन ईसाई धर्म के कार्यों के लिए समर्पित करूंगी। उस दिन मैं परमेश्वर के बारे में धर्म उपदेश देने अपनी चाची, अपनी माँ और भाभी के यहाँ गई। उन्होंने मेरे अनुभवों को सुना और उन पर विश्वास किया। इससे पहले मेरी माँ और भाभी, परमेश्वर में मेरी आस्था का मज़ाक उड़ाते थे, मैंने चार वर्षों तक उन्हें धर्म का उपदेश दिया लेकिन वे विश्वास ही नहीं करते थे। लेकिन इस बार मैंने ज्यादा स्पष्ट रूप से परमेश्वर की दिव्य शक्ति का साक्षात्कार किया था। मेरे पति पहले मुझे सताते थे, लेकिन अब वे ऐसा नहीं करते हैं, और मैं उन्हें भी धर्म का उपदेश दे रही हूँ। पहले धर्म उपदेश के लिए मैं अपना मुंह तक नहीं खोल पाती थी, मुझे बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। इस अनुभव के बाद अब मुझे किसी प्रकार का कोई भी डर-संकोच नहीं होगा। अपना अनुभव प्रसारित करने और उसके साक्षी के रूप में प्रस्तुत होने के लिए मैं हर प्रयास करूंगी। चूंकि मैंने परमेश्वर के उद्धार करने वाले स्वरूप को देखा है एवं साक्षात अनुभव किया है तथा आपदा के चरम क्षणों में हमने उसके सर्वाधिक सत्य और यथार्थ प्रेम का अनुभव किया है तो मैं उस परमेश्वर के लिए साक्षी क्यों न बनूँ?