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प्रश्न 41: हमने चीनी कम्युनिस्ट सरकार और धार्मिक दुनिया के कई भाषण ऑनलाइन देखे हैं जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बदनामी और झूठी निंदा करते हैं, उन पर आक्षेप और कलंक लगाते हैं (जैसे कि झाओयुआन, शेडोंग प्रांत की "5.28" वाली घटना)। हम यह भी जानते हैं कि सीसीपी लोगों से झूठ और गलत बातें कहने में, और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर लोगों को धोखा देने में माहिर है, साथ ही साथ उन देशों का जिनके यह विरोध में है, अपमान करने, उन पर हमला करने और उन का न्याय करने में भी माहिर है, इसलिए सीसीपी के कहे गए किसी भी शब्द पर बिल्कुल विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के द्वारा कही गई कई बातें सीसीपी के शब्दों से मेल खाती हैं, इसलिए हमें सीपीपी और धार्मिक दुनिया से आने वाले निन्दापूर्ण, अपमानजनक शब्दों को कैसे परखना चाहिए?

उत्तर:

शैतान की बुरी ताकतें इस तरह परमेश्वर के कार्य पर हमला क्यों करती हैं, परमेश्वर के कार्य का आंकलन करते हुए? क्यों बड़े लाल अजगर की बुरी ताकतें उन्मत्त होकर परमेश्वर पर हमला और उसकी निंदा कर रही हैं, और परमेश्वर की कलीसिया को उत्पीडित कर रही हैं? क्यों शैतान की सभी बुरी ताकतें, धार्मिक मंडलियों के अंदर मसीह-विरोधी बिरादरी सहित, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की निंदा करती हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि शैतान जानता है कि इसका अंत निकट है, कि परमेश्वर पहले से ही अपने राज्य को सुरक्षित कर चुका है और वह आ गया है, और यह कि अगर शैतान परमेश्वर के साथ एक निर्णायक लड़ाई में नहीं जुटता है तो वह तुरंत नष्ट हो जाएगा। क्या तुमने इस तथ्य को समझा है? (हाँ।) चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार से एक बार उन्मादी निंदा को सुनते ही, कई भ्रमित लोग तय करते हैं कि यह सही रास्ता नहीं है; एक बार जब उन्होंने पादरियों और धार्मिक मंडलियों के ज्येष्ठों (एल्डरों) से व्यापक निंदा देख ली है, तो वे तय करते हैं कि यह सही रास्ता नहीं है। ये लोग किन तरीकों से भ्रमित हैं? क्या वे दुनिया के अंधेरे और बुरे तत्वों को देख सकते हैं? बाइबिल ने कहा, "ज्योति अन्धकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया" (यूहन्ना 1:5)। क्या वे वास्तव में इन शब्दों को समझते ह? "सारा संसार उस दुष्‍ट के वश में पड़ा है" (1यूहन्ना 5:19)। क्या वे इन शब्दों का सही अर्थ जान सकते हैं? वे कुछ भी साफ़-साफ़ देखने में असमर्थ हैं। वे सोचते हैं कि यदि यह सही रास्ता हो, अगर परमेश्वर आ गया है, तो चीनी सरकार को इसका स्वागत करना चाहिए, धार्मिक मंडली को इसका स्वागत करना चाहिए, और वह इसे सही मार्ग बना देगा। यह किस तरह का तर्क है? क्या यह शैतान का तर्क नहीं है? (हाँ, गलत है।) कुछ लोग परमेश्वर के कार्य का अध्ययन करते हैं, वे पहले देखते हैं कि क्या विश्व सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, पूर्वी लाइटनिंग, का स्वागत करता है और उससे सहमत है या नहीं, क्या धार्मिक मंडली इसका स्वागत करती है और इसके साथ सहमत है या नहीं। "अगर विश्व इसका स्वागत करता है, और विशेषकर, अगर चीनी कम्युनिस्ट सरकार घोषित करती है कि यही सही रास्ता है, तभी हम इसमें विश्वास कर सकते हैं। यदि सभी पादरी और धार्मिक मंडली के बुजुर्ग यह कहते हैं कि यह सच है, कि यह प्रभु यीशु की वापसी है, तभी हम इसे स्वीकार कर सकते हैं।" इस तरह के कई भ्रमित लोग हैं। कुछ लोग, जैसे ही वे परमेश्वर के लिए काम आना चाहते हैं, बड़ा लाल अजगर और शैतान उनकी परीक्षा लेने आते हैं: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया लोगों का अपहरण करती है। यदि तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर विश्वास करते हो, तो तुम छोड़ कर जा नहीं पाओगे, अन्यथा वे तुम्हारी आँखें निकाल लेंगे, तुम्हारे कान काट लेंगे, और तुम्हारी टाँगें तोड़ देंगे।" मुझे बताओ, अगर वास्तव में यह बात है, तो इस दुनिया में कितने लोगों की पहले से ही आँखें निकाल दी गई होंगी और उनके कान कट चुके होंगे? क्या तुमने ऐसा एक मामला भी देखा है? (नहीं।) मुझे बताओ, परमेश्वर के लिए जिन लोगों ने योगदान दिया है, क्या तुमने उनमें से किसी एक व्यक्ति को भी देखा है जिसका अपहरण कर लिया गया हो, जिसे परमेश्वर के लिए काम आने के लिए मजबूर किया गया था क्योंकि अन्यथा वे नहीं लौट पाएंगे? यदि उनका वास्तव में अपहरण हुआ था, तो क्या उनका काम और उनका प्रचार प्रभावी होगा? (नहीं।) एक बार जब कोई सुलझे दिमाग वाला व्यक्ति इस मामले पर विचार करता है, तो वह इस निष्कर्ष पर आ जाएगा कि: "मामला यही है, यह सीसीपी द्वारा गढ़ी गई अफवाह है, यह सीसीपी द्वारा कहा गया एक झूठ है। दुष्ट शैतान वास्तव में अफवाहों को फैलाने में निपुण है, मैं सच्चाई को कैसे नहीं देख पाया?" कुछ लोग इन बातों पर विश्वास नहीं करते हैं, जबकि अन्य लोग करते हैं। कुछ लोग, जब वे परमेश्वर के लिए काम आना चाहते हैं, तो वे सुनते हैं कि "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया लोगों का अपहरण कर लेती है। यदि तुम्हारा उनके द्वारा अपहरण हो जाता है, तो उम्मीद नहीं है कि तुम वापस आ सकोगे। अगर तुम वापस आ भी गए, तो कम से कम, तुम्हारी आँखें निकाल ली जाएँगी, और तुम्हारे कान काट दिए जाएँगे।" एक बार जब वे यह सुनते हैं, तो वे परमेश्वर के लिए काम आने की और हिम्मत नहीं करते। "मैं खुद को समर्पित नहीं कर सकता। यह खतरनाक है, मैं अपना जीवन खो सकता हूँ!" और वे छोड़ जाते हैं। क्या इन लोगों में समझने की क्षमता है? (नहीं।) कुछ लोग यह भी कहते हैं: "मैं देखता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन परमेश्वर के वचन हैं, परमेश्वर की आवाज़ है। मैंने मूल रूप से यह निर्धारित किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सच्चे हैं, लेकिन यह संगठन, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, क्या है? मैंने अभी तक इसकी अच्छी तरह से जाँच नहीं की है। मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कोई समझ नहीं है। क्या वे वास्तव में लोगों का अपहरण करने में सक्षम हैं? अगर वे मेरा अपहरण करें, तो क्या वे मेरी आँखों को निकाल लेने और मेरे कानों को काट देने में सक्षम हैं?" यहीं आकर वे भ्रमित हो जाते हैं। वे कहते हैं: "मैं नहीं जा सकता। अगर उन्होंने मेरी आँखों को निकाल लिया और मेरे कान काट दिये, तो मैं अपने बाकी जीवन के लिए अपाहिज हो जाऊँगा। मेरे लिए अभी भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर लटका हुआ एक प्रश्न-चिह्न है, मैं इसे नहीं समझ पाता; परमेश्वर की उक्तियों के बारे में, मैंने मूल रूप से उन्हें सच मान लिया है कि वे परमेश्वर की ही आवाज़ हैं, कि उनमें सच्चाई है।" वे अपनी परीक्षा में बहुत सावधान हैं, इसे दो चरणों में करते हुए: सबसे पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों की जांच करो, और देखो कि क्या वे परमेश्वर के वचन हैं। अगर उन्होंने स्वीकार कर लिया कि ये वास्तव में परमेश्वर के वचन हैं, तो वे आगे इसकी जाँच करते हैं कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक वास्तविक कलीसिया है। अगर सर्वशक्तिमान देवता की कलीसिया एक आपराधिक संगठन हो, जबकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन वास्तविक हैं, तो क्या वह फिर भी उनके लिए एक समस्या खड़ी नहीं करता है? क्या यह संभव है? (नहीं।) यदि यह बात सही हो, तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक वास्तविक कलीसिया नहीं, बल्कि एक आपराधिक संगठन है। फिर कौन उपदेश दे रहा है और परमेश्वर के वचनों की गवाही देता है? कौन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के लिए गवाही देता है? अगर चीजें ऐसी हों जैसी कि उन्होंने कल्पना की है, अर्थात सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया जो परमेश्वर के वचनों का प्रचार कर रही है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के लिए गवाही दे रही है, ऐसे लोगों का एक संगठन है, जो परमेश्वर के नहीं हैं, तो क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य सिर्फ एक ढकोसला नहीं है? परमेश्वर कैसे एक आपराधिक संगठन के लोगों को, मनुष्यों के एकसंगठन के लोगों को, उसकी स्तुति करने और उसके लिए गवाही देने की इजाजत दे सकता है? क्या यह परमेश्वर का अपमान नहीं है? क्या परमेश्वर खुद को अपमानित कर सकता है? (नहीं।) कुछ लोग इस मामले के आर-पार देखने में असमर्थ हैं। उन्होंने परमेश्वर के वचनों को स्वीकार किया है, फिर भी वे यह स्पष्ट रूप से नहीं देख पा रहे हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक किस प्रकार की कलीसिया है, और वे इसमें विश्वास करने की हिम्मत नहीं करते। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के लोग कहते हैं: "क्या हम तुमसे मिलकर बात कर सकते हैं? आओ हम सहभागिता करें।" "मैं इस समय व्यस्त हूँ, मेरे पास समय नहीं है", जब कि वे सोच रहे हैं: "मैं तुम्हारे साथ संपर्क में आना नहीं चाहता हूँ। अगर तुम्हारे साथ संपर्क में आने के बाद तुम्हारी कलीसिया के लोग मेरा अपहरण कर लेते हैं, तो मैं क्या करूँगा?" ये लोग उन संतों के साथ तुलना के करीब नहीं आ सकते हैं, जिन्होंने सदियों से परमेश्वर के लिए खुद को शहीद किया है। जब प्रभु यीशु ने उन्हें प्रचार करने के लिए भेजा था, तो ऐसा लगता था कि भेड़ियों के बीच मेमनों को फेंक दिया गया था, और उन लोगों ने परमेश्वर के लिए खुद को शहीद करने की हिम्मत की। अब ये लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को एक आपराधिक संगठन के रूप में देखते हैं। वे डरपोक और भयभीत हो गए हैं। क्या परमेश्वर इससे निराश है? लोगों में विश्वास की कमी है और वे शैतान की बात सुनते हैं, यह मनुष्य की एक त्रासदी है।

आदम और हव्वा अदनवाटिका में बहुत खुश थे, परमेश्वर के प्रति आज्ञापालन करते हुए और परमेश्वर की आवाज़ सुनते हुए, लेकिन आखिर में उनके पाप करने का कारण क्या बना? परमेश्वर द्वारा उनसे बात करने के बाद, शैतान आया, उनको प्रलोभित करने के लिए कुछ शब्द कहे, और वे धोखा खा गए, वे भूल कर गए। उनकी भूल के बाद, वे परमेश्वर से कट गए थे, परमेश्वर ने उनसे और बात नहीं की, परमेश्वर ने अपने चेहरे को उनसे छिपा लिया। क्या यह मनुष्य के लिए त्रासदी नहीं है? (हाँ, गलत है।) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को सुनने के बाद, कई लोगों ने कहा, "ओह, यह वास्तव में परमेश्वर की आवाज़ है, यह वास्तव में सच है। ये शब्द इतने व्यावहारिक हैं, प्रभु यीशु के चरण के दौरान इतने सारे शब्द नहीं कहे गए थे।" एकाएक, ऐसा लगता था जैसे वे एक बार फिर परमेश्वर के आलिंगन में वापस आ गए हों, और उन्होंने आनंदित और संतुष्ट महसूस किया था। किसने सोचा होगा कि इसी क्षण में शैतान का प्रलोभन आ जाएगा: "क्या तुमने पूर्वी बिजली के बारे में सुना है? यह एक आपराधिक संगठन है, यह एक पंथ है। यदि तुम उनके द्वारा प्रचारित सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते हो, तो वे तुम्हारी आँखें निकाल लेंगे और तुम्हारे कान काट लेंगे। वे भयावह हैं! इसलिए, अगर तुम पूर्वी बिजली के संपर्क में आते हो, तो तुमको सावधान रहना चाहिए, और तुमको कभी भी उनकी धोखाधड़ी का शिकार नहीं होना चाहिए।" और शैतान के इस प्रलोभन से, ये लोग फँस गए हैं। वे स्तब्ध हैं, और वे अब परमेश्वर के लिए काम में आने की हिम्मत नहीं करते। इसे कहते हैं "अपने संपूर्ण जीवन में चतुर रहना, लेकिन मूर्खता के एक क्षण में बर्बाद हो जाना।" क्या पूरे ताइवान में एक भी व्यक्ति ऐसा है जिसकी आँखें निकाल ली गयी हैं और जिसके कान काट दिए गए हैं? (नहीं।) पूरे ताइवान में ऐसा एक भी मामला नहीं है। सम्पूर्ण मुख्यभूमि चीन में आँखें निकालने और कान काटने वाला एक भी किस्सा नहीं है। अगर ऐसा एक भी मामला हो, तो क्या सीसीपी इसे जाने देगी? उसने समस्त मीडिया को पूरी दुनिया में घोषणा करने के लिए नियुक्त कर दिया होता, यहाँ तक कि कई दिनों के लिए इस तरह की घटनाओं का उत्साहपूर्वक प्रचार किया होता। ऐसा एक भी मामला नहीं मिल सकता है। सीसीपी हर जगह व्याप्त है, फिर भी शैतान द्वारा प्रलोभित उन लोगों को सीसीपी की असली पहचान का पता नहीं है, वे सीसीपी द्वारा किए गए सभी पापों, उसके किये सभी बुरे कर्मों के आर-पार नहीं देख पा रहे हैं। सीसीपी के मीडिया ने जितना भी कहा है, उसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है, फिर भी ये लोग इसकी असलियत को नहीं देख पा रहे हैं। तुम कहते हो कि परमेश्वर को जानना आसान नहीं है, क्योंकि परमेश्वर आत्मा है, क्योंकि परमेश्वर रहस्यमय है; लेकिन सीसीपी को जानना, शैतान को जानना, यह चीज़ तो ऐसी है ना जिसे इंसान जान सकता है, है ना?

जैसा कि हम सभी जानते हैं, सीसीपी एक नास्तिक पार्टी है। यह परमेश्वर का विरोध करती है और किसी भी दूसरे से कहीं ज़्यादा सत्य से नफ़रत करती है। उसने सच्चे परमेश्वर में विश्वास करनेवाली सभी कलीसियाओं और मंडलियों को दुष्ट पंथ मान लिया हैऔर खुले आम ऐलान किया है कि बाइबल एक बुरी कुपंथी पुस्तक है। ये एक मानी हुई सच्चाई है। क्या तुम्हें नहीं पता? इसके अलावा, इतने बरसों से प्रभु यीशु में विश्वास करके क्या हमने जबरदस्त अत्याचार नहीं सहे हैं क्या उन लोगों ने बहुत-से प्रचारकों और ईसाइयों को जेल की सजा देकर और अत्याचार करके मौत के घाट नहीं उतार दिया है? तुम अभी भी सीसीपी सरकार की अफवाहों को कैसे सुन सकती हो? जब कुपंथों और अच्छे धर्मों के बीच फर्क करने की बात उठती है, तो किसी एक इंसान या राजनीतिक पार्टी की इच्छा के अनुसार यह फर्क नहीं किया जा सकता, और इतना ही नहीं, यह किसी एक देश या उसके राष्ट्रीय संविधान द्वारा भी तय नहीं किया जा सकता। एक अच्छे धर्म को मानवजाति के लाभ की एक सकारात्मक चीज़ के रूप में समझा जाता है। कुपंथों को नकारात्मक माना जाता है, जो मानवजाति को भ्रष्ट कर देते है। अगर किसी को यह तय करना हो कि कोई कलीसिया एक अच्छे धर्म से जुड़ी है या कुपंथ से, तो इस आधार पर करना होगा कि यह सकारात्मक है या नकारात्मक। परमेश्वर से उपजी और उनके कार्य से गठित हुई कलीसियाएं अच्छे धर्म से जुड़ी होती हैं। शैतान और दुष्ट शक्तियों से उपजे तमाम लोगों को कुपंथ से जुड़ा माना जाता है। सीसीपी की सरकार को एक शैतानी शासन माना जाता है, जो परमेश्वर का सबसे ज़्यादा विरोध करती है और सत्य से नफ़रत करती है। असल में सीसीपी सही मायनों में दुष्ट कुपंथ है। उन्हें परमेश्वर में आस्था के बारे में कुछ कहने का कोई हक़ नहीं है, और यही नहीं, वे धार्मिक आस्थाओंवाली किसी भी कलीसिया या मंडली की निंदा करने के काबिल नहीं हैं।

सीसीपी सरकार द्वारा चमकती पूर्वी बिजली पर किये जा रहे अत्याचार किसी दूसरे संप्रदाय के मुकाबले ज़्यादा बेरहम हैं। चमकती पूर्वी बिजली पर सीसीपी के शैतानी शासन की सख्त कार्रवाई बहुत भयंकर है, हद से ज़्यादा बेरहम। ये बात यह दिखने के लिए काफी है कि सीसीपी सत्य से सबसे ज़्यादा डरती है और परमेश्वर से सबसे अधिक घृणा करती है। इन बरसों में सीसीपी के शासन ने चीन की गृह कलीसियाओं और भूमिगत कलीसियाओं की लगातार निंदा की है, उन पर अत्याचार किया है और उनको खदेड़ा है। क्या हम इस वजह से इस बात को नकार सकते हैं कि प्रभु यीशु सच्चे परमेश्वर और सच्चे मार्ग हैं? तुमने परमेश्वर में कई बरसों से विश्वास किया है। क्या तुम ये सब नहीं समझ सकती? सीसीपी ने हमेशा सत्य को तोड़ा-मरोड़ा है और सही-गलत को उलट-पुलट दिया है। यह राक्षसी शैतान का सार है। क्या अभी भी तुम अच्छे धर्म और दुष्ट कुपंथ में फर्क नहीं कर सकती? सच्चे परमेश्वर में विश्वास करनेवाली सभी कलीसियाएं अच्छे धर्म से जुड़ी हैं। झूठे परमेश्वरों, दुष्ट आत्माओं या राक्षसी शैतान में विश्वास करनेवाले सभी लोग दुष्ट कुपंथों से जुड़े हुए हैं। परमेश्वर को नकारनेवाली और परमेश्वर का विरोध करनेवाली नास्तिकता और विकास जैसी धर्मद्रोही ताकतों की पैरवी करनेवाले, सभी लोग दुष्ट कुपंथों से जुड़े हैं। आजकल अगर सबसे भयंकर निंदा और सबसे कड़ी कार्रवाई किसी के खिलाफ हो रही है तो वो है चमकती पूर्वी बिजली। पूरी दुनिया इस बात को साफ़-साफ़ समझ सकती है। अगर लोग वाकई फर्क कर पाते, तो वे समझ लेते कि यह शैतानी शासन किस चीज़ का सबसे ज़्यादा विरोध और किससे सबसे ज़्यादा घृणा करता है, और पक्के तौर पर उन्हें पता चल सकता है कि सच्चा मार्ग कौन-सा है। सीसीपी सत्य से सबसे ज़्यादा घृणा करती है और लोगों के सत्य को स्वीकार करने से सबसे ज़्यादा डरती है। यही वजह है कि वह परमेश्वर का इतना भयंकर विरोध कर रही है। अंत के दिनों में, सिर्फ सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही मानवजाति को बचाने के लिए सत्य व्यक्त कर रहे हैं, सिर्फ सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही मानवजाति को शुद्ध करने और बचाने का कार्य कर रहे हैं। क्या ये सच नहीं है? इस तरह से हम समझ सकते हैं कि सीसीपी किस वजह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से सबसे ज़्यादा नफ़रत करती है और परमेश्वर का सबसे ज़्यादा विरोध करती है। प्रभु के प्रकटन का इंतज़ार कर रहे सभी लोगों को अपनी आँखें खोल कर देखना चाहिए कि भला वे कौन हैं जो अंत के दिनों में न्याय का कार्य कर रहे हैं।

"स्क्रीनप्ले प्रश्नों के उत्तर" से

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए लोगों से हर चीज़ को पीछे छोड़ देने के लिए कहेगी।" मैं पूछता हूँ ईसाई धर्म में क्या प्रभु यीशु ने मनुष्यों से ऐसी माँगें नहीं की थी? क्या युगों से संतों ने ऐसा नहीं किया है? ये सब गवाही बहुत समय पहले दी गयी थी, तुम उन लोगों की निंदा क्यों नहीं करते? तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की निंदा क्यों करते हो? क्या प्रभु यीशु ने ऐसे वचन नहीं कहे थे? क्या युगों से संतों ने परमेश्वर के नाम पर, परमेश्वर का अनुसरण करने, प्रभु यीशु का प्रचार करने और प्रभु यीशु के बारे में गवाही देने के लिए अपने विवाह, अपने परिवार, सारी दुनिया को अपनी पीठ नहीं दिखाई है? क्या उन्होंने ऐसा नहीं किया? ऐसे बहुत हुए हैं। किस देश के किस कानून ने इसकी एक अपराध के रूप में निंदा की है? क्या यह एक अपराध के रूप में निन्दित हुई है? चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा, "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया परिवारों को तोड़ती है।" क्या यह न्यायपूर्ण है? क्या यह सच्चाई है? परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए, सच्चाई की राह पर चलने के लिए, धार्मिकता के लिए स्वयं को दे देने के लिए, लोग स्वेच्छा से ऐसा काम करने का निर्णय लेते हैं। क्या परमेश्वर के परिवार ने किसी को भी मजबूर किया है? क्या अनुग्रह के युग के दौरान यह प्रभु यीशु का काम नहीं रहा है? (हाँ, गलत है।) प्रभु यीशु ने क्या कहा था? "इसी रीति से तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्याग न दे, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता" (लूका 14:33)। प्रभु यीशु बारह शिष्यों के पास स्वयं गया, और उसने कहा, "मेरे पीछे चले आओ" (मार्क 1:17)। उसने यह भी कहा, "तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार का प्रचार करो" (मरकुस 16:15)। क्या तुम यह कह रहे हो कि प्रभु यीशु ऐसा कहने में गलत थे? यह बाइबल में दर्ज है। सभी धार्मिक समुदायों और सभी युगों के संतों ने इस तरह से कार्य किया है, तुम क्यों उनकी निंदा करने की हिम्मत नहीं करते हो? तुम यहाँ क्यों आते हो और यह कहकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को बदनाम करते हो कि यह परिवार को तोड़ता है? क्या यह शैतान द्वारा कहा गया झूठ का एक पुलिंदा नहीं है? (हाँ, गलत है।) तुम परमेश्वर का अनुसरण कर रहे हो, फिर भी तुम इसके आर-पार देखने में असमर्थ हो। तुम नहीं जानते कि सच और झूठ, सफ़ेद और काले के बीच के अंतर को कैसे बताया जाए।

क्या मनुष्य के लिए सच्चाई को हासिल करना सरल है? यदि तुम देखते हो कि कोई व्यक्ति उसके साथ घटित किसी घटना का मतलब नहीं समझ पाता है, तो यह इसलिए होता है कि उसके पास सच्चाई नहीं है। अगर कोई व्यक्ति उसके साथ हुई किसी भी बात को समझने में सक्षम है, यदि उसका परमेश्वर का अनुसरण और उपासना करना किसी भी बात से प्रभावित नहीं होता है, तो उसके पास सच्चाई है। जब तुम्हारे साथ कोई छोटी-सी बात होती है, तब यदि तुम निष्क्रिय हो जाते हो, अवधारणाओं में होते हो, परमेश्वर पर संदेह करते हो, या परमेश्वर को धोखा देते हो, तो तुम्हारे पास सच्चाई नहीं है। तुम्हारे साथ जो कुछ भी हो, तुम उसको समझ नहीं पाओगे, क्योंकि तुम अंधे की तरह हो और परमेश्वर के बारे में कुछ नहीं जानते हो। जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे बहुत अधिक परेशानियों में होते हैं, है ना? जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं, उनसे निपटना मुश्किल है, है ना? क्या ऐसे लोग जिनके पास परमेश्वर का कोई ज्ञान न हो, अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करने में सक्षम होंगे? यह आसान नहीं होगा! जिन लोगों को परमेश्वर का ज्ञान नहीं है, वे कभी भी परमेश्वर का विरोध कर सकते हैं, परमेश्वर से इनकार कर सकते हैं या किसी भी समय परमेश्वर को धोखा दे सकते हैं। परमेश्वर को धोखा देने के खतरे में वे सौ प्रतिशत हैं! क्या तुम इस समय परमेश्वर को धोखा देने के किसी भी खतरे में हो? तुम सभी इस खतरे में हो। तुम्हें सब कुछ एक नीतिपूर्ण तरीके से करना चाहिए, परमेश्वर का ज्ञान होना और उसे समझना कोई आसान बात नहीं है। यदि तुम परमेश्वर को नहीं समझते हो, अगर तुम्हारे पास परमेश्वर का ज्ञान नहीं है, तो तुम्हारे लिए शैतान के झूठ पर विश्वास करना आसान होगा। हम उन लोगों को क्या कहते हैं जो बड़े लाल अजगर की हर बात या धार्मिक समुदाय द्वारा कही गई हर बात का विश्वास करते हैं? मूर्ख! उनके ये शब्द कहाँ से आते हैं? ये शब्द शैतान के मुंह से आते हैं, और फिर भी तुम उन पर विश्वास करते हो। तो क्या तुम मूर्ख नहीं हो? तुम शैतान के जाल में घिर गए हो; शैतान ने तुमको सफलतापूर्वक धोखा दे दिया है। तुम परमेश्वर के वचन में विश्वास नहीं करते हो, परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता पर विश्वास नहीं करते हो, यह विश्वास नहीं करते हो कि परमेश्वर ही सच्चाई है, लेकिन तुम शैतान के शब्दों में विश्वास करते हो; हम इसे ही अंधा होना कहते हैं! क्या यह परमेश्वर नहीं है जिसमें तुम विश्वास करते हो? यदि तुम मानते हो कि शैतान के शब्द सत्य हैं, संभव है, और विश्वसनीय हैं, तो फिर तुम वास्तव में किस पर विश्वास करते हो, परमेश्वर पर या शैतान पर? तुम निश्चित रूप से नहीं कह सकते, क्या तुम कह सकते हो? क्या यह कहना ठीक है कि तुम नाम मात्र के लिए परमेश्वर पर विश्वास करते हो, लेकिन वास्तविकता में तुम अपने दिल में जिस पर सबसे अधिक विश्वास करते हो, वह अभी भी शैतान ही है? (हाँ, ऐसा है।) क्या तुम सभी विश्वास करते हो कि सच्चाई के शब्द शैतान के मुंह से बोले जा सकते हैं? (नहीं, हम नहीं करते।) तो, हम इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं? ("एक गंदा मुंह सभ्य भाषा नहीं बोल सकता", या "बन्दर के मुंह से राम-राम")। हाँ! यह कहा जा सकता है। जब तुम वास्तव में समझते हो कि इस कहावत का क्या अर्थ है, तो तुम यह जान लोगे कि सच्चे शब्द कभी शैतान के मुख से नहीं बोले जाएँगे। ऐसे कुछ लोग हैं जो केवल सिद्धांतों को समझते हैं, लेकिन सिद्धांत का यहाँ कोई उपयोग नहीं है, जैसे ही शैतान कुछ कहता है, वे अभी भी उस पर विश्वास करेंगे: "अरे! यह सच हो सकता है!" फिर वे बर्बाद हो जाएँगे! "एक गंदा मुंह सभ्य भाषा नहीं बोल सकता है।" तुमको इन शब्दों पर विश्वास करना होगा। सच्चाई के शब्द कभी भी शैतान के मुंह से नहीं बोले जा सकेंगे। शैतान जो कुछ भी कहता है वे सब हमेशा झूठ, अफवाहें, विकृतियाँ ही हैं; वह हमेशा आरोप लगाएगा, बातें बनाएगा, बदनामी करेगा, और अच्छी चीज़ों को कलंकित करेगा! क्या तुम मानते हो कि यह सच है? (हाँ)। यदि कई लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बदनामी करते हैं, इसके बारे में अफवाह फैलाते हैं, और झूठा आरोप लगाते हैं, तो तुम इसके बारे में क्या करोगे? क्या तुम देख सकते हो कि ये पूरी तरह से झूठ हैं, क्या तुम वे जो कुछ भी कह रहे हैं उसे अनदेखा कर सकते हो और अपने दिलों में उसे त्याग सकते हो? तुम्हें इन चीजों को त्याग देना चाहिए। चाहे जो भी कहा जाए, तुम्हें इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए कि इसे कौन कह रहा है। यदि वे परमेश्वर के मुंह से बोले गए वचन हैं, तो वे सच्चाई हैं। यदि वे पवित्र आत्मा द्वारा इस्तेमाल किये गए किसी व्यक्ति के द्वारा बोले गए शब्द हैं, तो वे विश्वसनीय हैं। यदि वे शब्द किसी अविश्वासी या धार्मिक व्यक्ति द्वारा, या बड़े लाल अजगर द्वारा कहे गए हैं, तो वे विश्वसनीय नहीं हैं। तुम्हें उन्हें पूरी तरह से अस्वीकार करना चाहिए, उन्हें नहीं मानना चाहिए। अगर वे तुम्हें सच्चे भी लगें, तो भी वे ऐसे शब्द हैं जो तथ्यों को तोड़ते-मरोड़ते हैं, और वे बदनामी और झूठे आरोपों के शब्द हैं। तुम "झाओयुआन घटना" के बारे में कैसा महसूस करते हो? (यह एक बनावटीपन था।) यह बड़ा लाल अजगर था, जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर झूठे आरोप मढ़ने, उसकी बदनामी करने और उसे फँसाने की कोशिश कर रहा था। उन लोगों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर विश्वास ही नहीं था। उनमें से कुछ झूठे मसीह के साथ भागीदारी कर रहे थे, वे झूठे मसीह पर विश्वास करते थे और उन्होंने परमेश्वर के घर का जानबूझ कर विरोध किया। ये लोग परमेश्वर के घर के विरोध में खड़े हुए थे। वे विश्वासियों को पाने के लिए परमेश्वर के साथ संघर्ष करते थे और बुरी आत्माओं से जुड़े हुए थे। अब उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्य कैसे माना जा सकता है? वे तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्य थे ही नहीं, परमेश्वर के घर में कोई भी उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। क्या तुम समझते हो कि आज मैं इस बारे में सहभागिता क्यों कर रहा हूँ? किसी को वास्तव में परमेश्वर का सच्चा ज्ञान और उसकी समझ है या नहीं, यही सब कुछ निर्धारित करता है। यदि तुम बस कुछ बुनियादी सिद्धांतों को समझते हो, तो इसका कोई फायदा नहीं होगा, वह इसे नहीं दर्शाता है कि तुम्हारे पास परमेश्वर का सच्चा ज्ञान है। केवल अगर तुम्हारे पास परमेश्वर का सच्चा ज्ञान और उसकी समझ है, तो ही तुम शैतान की चालों में नहीं फँसोगे। केवल तभी तुम उन सभी झूठों का त्याग कर सकोगे जिन्हें शैतान कहता है। केवल तभी तुम शैतान की प्रलोभनों पर विजय पा सकोगे। मुख्य रूप से यही मेरा तात्पर्य है। क्या तुम समझे? (हम समझते हैं।) ये वचन जिन पर मैंने आज सहभागिता की है, क्या तुम उनसे लाभान्वित होगे? (हाँ)। यही वास्तविकता है, तुम इस धारणा के तहत मत रहना कि ये वचन जीवन में प्रवेश करने में तुम्हारे लिए उपयोगी नहीं हैं, वे उपयोगी हैं, वे वो हैं जिनकी तुम्हारे में कमी है।

"परमेश्वर के वचन 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III' के बारे में उपदेश और सहभागिता (I)" जीवन में प्रवेश पर उपदेश और सहभागिता (XI) में

पिछला:प्रश्न 38: हाल के वर्षों में, धार्मिक संसार में विभिन्न मत और संप्रदाय अधिक से अधिक निराशाजनक हो गए हैं, लोगों ने अपना मूल विश्वास और प्यार खो दिया है और वे अधिक से अधिक नकारात्मक और कमज़ोर बन गए हैं। हम उत्साह का मुरझाना भी देखते हैं और हमें लगता है कि हमारे पास प्रचार करने के लिए कुछ नहीं है और हम सभी ने पवित्र आत्मा के कार्य को खो दिया है। कृपया हमें बताओ, पूरी धार्मिक दुनिया इतनी निराशाजनक क्यों है? क्या परमेश्वर वास्तव में इस दुनिया से नफरत करता है और क्या उसने इसे त्याग दिया है? हमें 'प्रकाशित वाक्य' पुस्तक में धार्मिक दुनिया के प्रति परमेश्वर के शाप को कैसे समझना चाहिए?

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