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सीसीपी की अफवाहों और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की निंदा का ईसाइयों द्वारा पुरज़ोर खंडन

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दु गुइरोंग (610 कार्यालय के मत-परिवर्तन दर्जे का डायरेक्टर): इसके अलावा, एक बात और है जो मुझे कभी समझ नहीं आयी। भले आप जिन पर विश्वास करते हैं वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, आप जो पढ़ती हैं वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन हैं, और आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम से प्रार्थना करती हैं, लेकिन हमारी जानकारी के मुताबिक तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की स्‍थापना एक इंसान ने की थी, जिनकी हर आज्ञा का आप पालन करती हैं। आपकी गवाहियों के मुताबिक यह मनुष्य एक पादरी है, एक ऐसा मनुष्य जिसे सभी प्रशासकीय मामलों के प्रभारी के रूप में, परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। इस बात ने मुझे उलझन में डाल दिया है। वो कौन था जिसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की स्‍थापना की थी? उसका जन्‍म कैसे हुआ था? क्या आप इस बात को समझा सकती हैं?

झोउ मिन (एक ईसाई): डायरेक्‍टर ड्यू, मुझे उम्‍मीद नहीं थी कि आपको सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कोई भी समझ होगी। जैसा कि आप जानते हैं, हम जिन पर विश्वास करते हैं, वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, जो कुछ हम पढ़ते हैं वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन हैं, और हम जो प्रार्थना करते हैं वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम से होती है, तो फिर आप ऐसा क्‍यों कहते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की रचना एक इंसान ने की थी? मुझे नहीं पता कि आपने अपनी राय किस आधार पर बनायी है। हम जिन पर विश्वास करते हैं वे देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, कोई इंसान नहीं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कहे अधिकांश वचन, वचन देह में प्रकट होता है पुस्‍तक में दर्ज़ हैं। चूंकि आपने वचन देह में प्रकट होता है पुस्‍तक नहीं पढ़ी है, यह बात पक्‍के तौर पर नहीं कही जा सकती कि आपको सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की सही समझ है। चीनी कम्युनिस्‍ट सरकार की ओर से लगातार किए जाने वाले ये प्रचार और अफवाहें, कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की रचना एक इंसान ने की थी, यह साबित करने के लिये काफी हैं कि सीसीपी को सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कोई भी समझ नहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का जन्‍म कैसे हुआ, इस बात को जाने बिना, सीसीपी इस बात पर अड़ी रहती है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की रचना एक इंसान ने की थी। क्या यह बेतुका नहीं है? क्या आपको यह असंगत नहीं लगता? तो फिर मैं आपसे पूछती हूँ, ईसाई धर्म की रचना किसने की थी? कैथलिक धर्म की रचना किसने की थी? असल में, ईसाई धर्म, कैथलिक धर्म, और पूर्व की परंपरागत कलीसियाओं, इन सभी का जन्म प्रभु यीशु के छुटकारा देनेवाले कार्य से हुआ था। हालांकि, प्रेरितों ने हर जगह कलीसियाओं की स्थापना की थी, इसका मतलब यह नहीं है कि ईसाई धर्म की स्थापना प्रेरितों द्वारा की गई थी। चाहे कोई भी युग हो, कलीसियाओं का जन्‍म परमेश्वर के प्रकटन और कार्य के कारण ही हुआ था। अनुग्रह के युग में कलीसियाओं का जन्‍म प्रभु यीशु के प्रकटन और कार्य के कारण हुआ था। राज्य के युग में कलीसियाओं का जन्‍म सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य के कारण हुआ था। अगर परमेश्वर का प्रकटन और कार्य नहीं हुआ होता तो क्या प्रेरित खुद कलीसियाओं की स्थापना कर सकते थे? जो लोग कलीसियाओं में शामिल हुए, वे परमेश्वर पर विश्वास करने वाले लोग थे। वे प्रेरितों पर विश्वास करने वाले लोग नहीं थे। इसलिए, ऐसा नहीं कहा जा सकता कि किसी भी युग में कलीसियाओं की स्‍थापना मनुष्य द्वारा की गई थी। यहाँ तक कि अगर प्रेरितों द्वारा भी कलीसियाओं की स्‍थापना हुई है तो भी उनका निर्माण प्रभु यीशु के नाम पर होना ज़रूरी था। प्रेरित यह नहीं कह सकते कि कलीसियाओं की स्‍थापना उनके द्वारा की गई थी। यह सार्वजानिक रूप से मान्य तथ्य है! सीसीपी के लोग तथ्यों के अनुसार बात क्यों नहीं कर सकते? क्यों तथ्यों को इस बुरी तरह से तोड़-मरोड़ रहे हैं? क्या यह बेतुका नहीं है? अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर कार्य करने के लिए प्रकट हुए ताकि सत्य को व्यक्त किया जा सके। जब सत्य से प्रेम करनेवाले हर वर्ग के ईसाइयों ने परमेश्वर की वाणी सुनी और कार्य करते हुए परमेश्वर के प्रकटन को देखा, वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर वापस लौट गए और उन्हें परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाया गया, इस प्रकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की रचना हुई। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने हर जगह कलीसियाओं की स्थापना की है, लेकिन क्या आप ऐसा कह सकते हैं कि कलीसियाओं के संस्थापक उनके रचनाकार हैं? सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की रचना सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य से हुई है। यह ऐसा तथ्य है जिससे कोई इन्कार नहीं कर सकता।

दु गुइरोंग: ठीक है, अब और कुछ मत कहें! अगर आप जो कह रही हैं वह तथ्य है, तब भी हम उसे नहीं मानेंगे। क्योंकि हम नास्तिक हैं, हमें आपके विश्वास के खिलाफ निंदा ही करनी चाहिए। हम जो कहना चाहते हैं वही कहते हैं और आपको बहस करने का कोई अधिकार नहीं हैं। ज़रा सोचिए, अगर हम आपके विश्वास की निंदा करते हैं, क्या तब भी हम तथ्य के अनुसार बोल सकते हैं? उसी तथ्य के साथ, जो आप कहती हैं वह एक बात है, और जो हम कम्युनिस्ट कहते हैं वह दूसरी बात है। चाहे परमेश्वर का देहधारण सच हो या झूठ, हमें एक मनुष्य मानकर उसकी निंदा करनी चाहिए। चाहे आप इसे मानें या नहीं, कुछ ऐसे लोग हमेशा रहेंगे जो हमारे दृष्टिकोण को स्वीकार करेंगे। वह काफ़ी होगा। इससे हमारा उद्देश्य हासिल हो जाएगा। साथ ही, मैं देखता हूं कि भले ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के आप लोग, सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्‍वास रखते हैं, तो भी आप सब एक ऐसे व्‍यक्ति की कार्य व्यवस्था, संगठन और कार्यकौशल का पालन करते हैं जो आपका महाप्रबंधक बन गया है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वह किस तरह का इंसान है, हम सिर्फ यही कह सकते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की रचना एक व्‍यक्ति ने की थी। चाहे आप इसे स्वीकार करें या नहीं, हम तो यही कहेंगे। सीसीपी की आवाज़ बुलंद है और आपकी आवाज़ धीमी है। जब हम ऐसा कहते हैं, तब ऐसे कई लोग हैं जो हम पर विश्वास करते हैं। चाहे आप इसे स्वीकार करें या नहीं, सहमत हो या नहीं, इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता। हमने पहले ही हमारे लक्ष्य को हासिल कर लिया है।

"वार्तालाप" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

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