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लेकिन हम बाइबल से दूर हो जाने पर भी परमेश्वर में कैसे विश्वास करते रह सकते हैं और जीवन पा सकते हैं?

उत्तर: आपने बड़ा अहम सवाल उठाया है। ये ऐसी बात है जिसे हम सभी विश्वासी जानना चाहते हैं। प्रभु यीशु ने एक बार ये वचन कहे थे: "तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (यूहन्ना 5:39-40)। पहले, हमने बार-बार बाइबल को खंगाला, यह सोच कर कि बाइबल से ही अनंत जीवन पाया जा सकता है। असलियत में, बाइबल सिर्फ परमेश्वर की एक गवाही है। अगर हम परमेश्वर में अपनी आस्था से सत्य और जीवन पाना चाहते हैं, तो बाइबल की गवाही के भरोसे रहना काफी नहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "अंतिम दिनों का मसीह जीवन लेकर आता है, और सत्य का स्थायी एवं अनन्त मार्ग प्रदान करता है। इसी सत्य के मार्ग के द्वारा मनुष्य जीवन को प्राप्त करेगा, और एक मात्र इसी मार्ग से मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करेगा। यदि तुम अंतिम दिनों के मसीह के द्वारा प्रदान किए गए जीवन के मार्ग को नहीं खोजते हो, तो तुम कभी भी यीशु के अनुमोदन को प्राप्त नहीं कर पाओगे और कभी भी स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य नहीं बन पाओगे क्योंकि तुम इतिहास के कठपुतली और कैदी दोनों हो। …परमेश्वर के कार्य के चरण बहुत ही विशाल और सामर्थी हैं, जैसे कि हिलोरे मारती हुई लहरें और गरजता हुआ तूफान—फिर भी तुम बैठकर निष्क्रियता से विनाश का इंतजार करते हो, अपनी ही मूर्खता से चिपके रहते हो और कुछ भी नहीं करते। इस प्रकार से, तुम्हें मेमने का अनुसरण करने वाले के रूप में कैसे देखा जा सकता है? और तुम जिस परमेश्वर पर निर्भर रहते हो उसे उस परमेश्वर के रूप में न्यायोचित कैसे ठहरा सकते हो कि जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताब के वचन तुम्हें नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे कैसे तुम्हें परमेश्वर के चरणबद्ध तरीके से चलने वाले कार्यों तक लेकर जायेंगे? वे तुम्हें कैसे स्वर्ग लेकर जायेंगे? तुम्हारे हाथों में जो संदेश हैं वे तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना ही दे सकते हैं, वह सत्य नहीं दे सकते जो जीवन देने में सक्षम है। जो शास्त्र तुम पढ़ते हो वे तुम्हारी जिव्हा को आनंदित तो कर सकते हैं लेकिन ये वे विवेकपूर्ण वचन नहीं हैं जो तुम्हें मानव जीवन का बोध करा सकें। ये वह मार्ग तो दिखा ही नहीं सकते जो तुम्हें पूर्णता की ओर ले जायें। क्या यह भिन्नता तुम्हें विचार-मंथन का कारण नहीं देती? क्या यह तुम्हें अपने भीतर समाहित रहस्यों को समझने के लिए अनुमति नहीं देता है? क्या तुम अपने आप को परमेश्वर से मिलने के लिए स्वर्ग में ले जाने के योग्य हो? परमेश्वर के आये बिना, क्या तुम अपने आप को परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनन्द मनाने के लिए स्वर्ग में ले जा सकते हो क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? मैं तुम्हें सुझाव देता हूँ, कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो, और उसकी ओर देखो जो अभी कार्य कर रहा है, उसकी ओर जो अंतिम दिनों में मनुष्यों को बचाने के लिए कार्य कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते हो, तो तुम कभी भी सत्य को नहीं प्राप्त कर सकते, और कभी भी जीवन प्राप्त नहीं कर सकते हो" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है")। हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन से समझ पाये हैं कि सिर्फ मसीह ही मानवजाति को बचाने के लिए सत्य व्यक्त कर सकते हैं। मनुष्य को सत्य और जीवन पाने के लिए मसीह के पास आना होता है। बाइबल परमेश्वर के अधिकार की जगह नहीं ले सकती, न ही मनुष्य को जीवन देने के लिए परमेश्वर नुमाइंदगी कर सकती है, और यही नहीं, यह पवित्र आत्मा के कार्य की जगह भी नहीं ले सकती। सिर्फ अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार करके और उनकी आज्ञा मानकर ही, हम पवित्र आत्मा के कार्य, सत्य और जीवन को पा सकते हैं। अंत के दिनों के मसीह द्वारा व्यक्त वचनों को स्वीकार किये बिना हम जीवन नहीं पा सकते, क्योंकि बाइबल परमेश्वर नहीं है; यह सिर्फ परमेश्वर के कार्य की गवाही है। इससे हम यह समझ सकते हैं कि जीवन बाइबल से नहीं बल्कि मसीह से उपजता है। मसीह बाइबल के प्रभु हैं और जीवन का स्रोत हैं।

पहले परमेश्वर में हमारी आस्था सिर्फ बाइबल की बुनियाद पर थी। हमारी नज़रों में, बाइबल प्रभु और परमेश्वर की नुमाइंदगी करती है। बाइबल ने हमारे दिलों में परमेश्वर की जगह ले ली थी। यह कहने के बजाय कि हम परमेश्वर में विश्वास करते थे, यह कहा जा सकता है कि हम दरअसल बाइबल में विश्वास कर रहे थे। इसलिए, जब अंत के दिनों के मसीह — सर्वशक्तिमान परमेश्वर — ने अपना कार्य किया, तो हमने सोचा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन और कार्य बाइबल के मुताबिक़ नहीं थे, इसलिए उसे ठुकरा दिया, और यही नहीं, उसकी निंदा कर उसका विरोध किया। भाइयो और बहनो, हम जानते हैं कि परमेश्वर का स्वभाव धर्मी है और उसका अपमान नहीं हो सकता। उन दिनों, यहूदी मुख्य पादरियों, धर्मशास्त्रियों और फरीसियों ने पीढ़ियों से परमेश्वर में प्रेम किया था, लेकिन उन्होंने पुराने नियम को पकड़े रखा और उसकी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करके उन्होंने प्रभु यीशु की निंदा की और उन्हें सूली पर चढ़ाया। अब, सर्वशक्तिमान परमेश्वर आ चुके हैं, और हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए फिर एक बार बाइबल का इस्तेमाल किया है। यह अनुग्रह के युग में फरीसियों द्वारा प्रभु यीशु के विरोध से अलग कैसे है? हमें फरीसियों की नाकामी से सीख लेनी होगी! प्रभु यीशु ने एक बार कहा था: "मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (यूहन्ना 14:6)। मैंने परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार करने से पहले इस आयत का मतलब नहीं समझा था। लेकिन अब मैं समझता हूँ। सिर्फ अंत के दिनों के मसीह ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश का महाद्वार हैं। सिर्फ अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार करके और उनके आज्ञाकारी बन कर ही हम बचाये जा सकेंगे और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर पायेंगे।

आइए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन के एक अंश को पढ़ें! "जो मसीह के द्वारा कहे गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करने की अभिलाषा करते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे हास्यास्पद मनुष्य हैं और जो मसीह के द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं वे कल्पना में ही खोए हुए हैं। इसलिए मैं यह कहता हूँ कि लोग जो अंतिम दिनों में मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं वे हमेशा के लिए परमेश्वर के द्वारा तुच्छ समझे जाएंगे। अंतिम दिनों में मसीह मनुष्यों के लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने का माध्यम है, जिसकी अवहेलना कोई भी नहीं कर सकता। मसीह के माध्यम बिना कोई भी परमेश्वर के द्वारा सिद्धता को प्राप्त नहीं कर सकता। परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास है, और इसलिए तुम उसके वचनों को स्वीकार करो और उसके मार्ग का पालन करो। बिना सत्य को प्राप्त किए या बिना जीवन के प्रावधान को स्वीकार किए तुमको सिर्फ़ अनुग्रह प्राप्त करने के बारे में सोचना नहीं है। मसीह अंतिम दिनों में आता है ताकि वे सभी जो सच्चाई से उस पर विश्वास करते हैं उन्हें जीवन प्रदान किया जाए। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है और यही वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वालों को अपनाना चाहिए। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और उसकी भर्त्सना करते हो, निंदा करते हो और यहां तक कि उसे पीड़ा पहुंचाते हो, तो तुम अनन्त समय तक जलाए जाते रहने के लिए निर्धारित कर दिये गए हो और तुम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे। इसी कारण से मसीह ही स्वयं पवित्र आत्मा और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर अपना कार्य सौंपा है। इसलिए मैं कहता हूँ कि अंतिम दिनों में जो मसीह के द्वारा कार्य किया गया है उसे तुम स्वीकार नहीं करते हो तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। और उसका प्रतिकार पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को सहना होगा वह सभी के लिए स्वत:-स्पष्ट है। मैं यह भी कहता हूँ कि यदि तुम अंतिम दिनों में मसीह का विरोध करोगे और उसे नकारोगे, तो ऐसा कोई भी नहीं है जो तुम्हारे लिए इसका नतीजा भुगत ले। इसके अलावा, आज के बाद से फिर कभी तुम्हें परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने उद्धार की कोशिश भी करते हो, तो तुम कभी भी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। क्योंकि तुम जिसका विरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, जिसको नकार रहे हो वह नन्हा सा प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम परिणामों के बारे में जानते हो? तुमने कोई छोटी-मोटी गलती नहीं की है, बल्कि एक बहुत ही जघन्य अपराध किया है। इसलिए मैं प्रत्येक को सलाह देता हूं कि सत्य के सामने अपने ज़हरीले दांत मत दिखाओ, या लापरवाही से आलोचना मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुमको जीवन दिला सकता है और सत्य के अलावा कुछ भी तुमको नया जन्म देने के लिए या परमेश्वर का चेहरा देखने के लिए अनुमति नहीं दे सकता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है")। परमेश्वर के वचन से हम देखते हैं कि अंत के दिनों के मसीह के अलावा किसी और रास्ते से कोई स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। जब परमेश्वर का नया कार्य हम तक पहुंचता है, तब हमारे स्वीकार करने या ठुकरा देने से ही हमारी किस्मत का फैसला होता है। ऐसा कहा जा सकता है कि अंत के दिनों के मसीह के प्रति हमारा रवैया ही परमेश्वर के प्रति हमारा रवैया होता है। अगर हम आखिरकार उनका विरोध कर उन्हें ठुकरा देंगे, तो हम बचाये जाने का मौका खो देंगे और अनंत उद्धार गवां देंगे। इससे हमें परमेश्वर के धर्मी स्वभाव का पता चलता है। सन 1991 से, अंत के दिनों के मसीह—सर्वशक्तिमान परमेश्वर—ने करोड़ों वचन व्यक्त किये हैं। इस किताब वचन देह में प्रकट हुआ, में परमेश्वर ने अपनी 6,000-साल की प्रबंधन योजना के सबसे बड़े रहस्य का खुलासा किया है, और परमेश्वर ने हम विश्वासियों को उद्धार पाने का एकमात्र मार्ग दिखाया है।

"बाइबल के बारे में रहस्य का खुलासा" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

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