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अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य मनुष्य को शुद्ध करने, बचाने और सिद्ध करने, और विजेताओं का एक समूह बनाने के लिए किया जाता है।

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परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन:

"अंत के दिनों का कार्य, सभी को उनके स्वभाव के आधार पर पृथक करना, परमेश्वर की प्रबंधन योजना का समापन करना है, क्योंकि समय निकट है और परमेश्वर का दिन आ गया है। परमेश्वर उन सभी को जिन्होंने उसके राज्य में प्रवेश कर लिया है अर्थात्, वे सभी लोग जो अंत तक उसके वफादार रहे हैं, स्वयं परमेश्वर के युग में ले जाता है। हालाँकि, जब तक स्वयं परमेश्वर का युग नहीं आ जाता है तब तक परमेश्वर जो कार्य करेगा वह मनुष्य के कर्मों को देखना या मनुष्य जीवन के बारे में पूछताछ करना नहीं, बल्कि उनके विद्रोह का न्याय करना है, क्योंकि परमेश्वर उन सभी को शुद्ध करेगा जो उसके सिंहासन के सामने आते हैं। वे सभी जिन्होंने आज के दिन तक परमेश्वर के पदचिन्हों का अनुसरण किया है वे हैं जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने आ गए हैं, इसलिए, हर एकेला व्यक्ति जो परमेश्वर के कार्य को इसके अंतिम चरण में स्वीकार करता है वह परमेश्वर द्वारा शुद्ध किए जाने की वस्तु है। दूसरे शब्दों में, हर कोई जो परमेश्वर के कार्य को इसके अंतिम चरण में स्वीकार करता है वही परमेश्वर के न्याय की वस्तु है।"

"मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" से

"जान लें कि आज, चाहे वह धर्मी न्याय हो या निष्ठुर शुद्धिकरण, सभी उद्धार के लिए है। इस बात की परवाह किए बिना कि चाहे आज स्वभाव के अनुसार प्रत्येक का वर्गीकरण है, या मनुष्य की श्रेणियाँ सामने लायी गई हैं, परमेश्वर के सभी कथन और कार्य उन लोगों को बचाने के लिए हैं जो परमेश्वर से प्यार करते हैं। धर्मी न्याय मनुष्य को शुद्ध करने के उद्देश्य से है, निर्दय शुद्धिकरण मनुष्य का परिमार्जन करने के उद्देश्य से है, कठोर वचन या ताड़ना सब शुद्ध करने के उद्देश्य से और उद्धार के लिए हैं। और इस प्रकार, उद्धार की आज की विधि अतीत की विधि के विपरीत है। आज, धर्मी न्याय तुम लोगों को बचाता है, और तुम लोगों में से प्रत्येक को स्वभाव के अनुसार वर्गीकृत करने का एक अच्छा साधन है, और निर्मम ताड़ना तुम लोगों के लिए सर्वोच्च उद्धार लाती है—और इस ताड़ना और न्याय का सामना होने पर तुम लोगों को क्या कहना है? क्या तुम लोगों ने शुरू से अंत तक उद्धार का आनंद नहीं लिया है?"

"तुम लोगों को हैसियत के आशीषों को अलग रखना चाहिए और मनुष्य के उद्धार के लिए परमेश्वर की इच्छा को समझना चाहिए" से

"मनुष्य की दशा और परमेश्वर के प्रति मनुष्य के व्यवहार को देखने पर परमेश्वर ने नया कार्य किया है, उसने मनुष्य को अनुमति दी है कि वह उसके विषय में ज्ञान और उसके प्रति आज्ञाकारिता रखे, और प्रेम और गवाही दोनों रखे। इस प्रकार, मनुष्य को परमेश्वर के शोधन, और साथ ही उसके दंड, उसके व्यवहार और काँट-छाँट का अनुभव करना चाहिए, जिसके बिना मनुष्य कभी परमेश्वर को नहीं जानेगा, और कभी सच्चाई के साथ परमेश्वर से प्रेम करने और उसकी गवाही देने में समर्थ नहीं होगा। परमेश्वर द्वारा मनुष्य का शोधन केवल एकतरफा प्रभाव के लिए नहीं होता, बल्कि बहुतरफा प्रभाव के लिए होता है। केवल इसी रीति से परमेश्वर उनमें शोधन का कार्य करता है जो सत्य को खोजने के लिए तैयार रहते हैं, ताकि मनुष्य का दृढ़ निश्चय और प्रेम परमेश्वर के द्वारा सिद्ध किया जाए। जो सत्य को खोजने के लिए तैयार रहते हैं, और जो परमेश्वर की लालसा करते हैं, उनके लिए ऐसे शोधन से अधिक अर्थपूर्ण, या अधिक सहयोगपूर्ण कुछ नहीं हैं। परमेश्वर का स्वभाव मनुष्य के द्वारा सरलता से जाना या समझा नहीं जाता, क्योंकि परमेश्वर आखिरकार परमेश्वर है। अंततः, परमेश्वर के लिए मनुष्य जैसे स्वभाव को रखना असंभव है, और इस प्रकार मनुष्य के लिए परमेश्वर के स्वभाव को जानना सरल नहीं है। मनुष्य के द्वारा सहजता से सत्य को प्राप्त नहीं किया जाता, और यह सरलता से उनके द्वारा समझा नहीं जाता जो शैतान के द्वारा भ्रष्ट किए गए हैं; मनुष्य सत्य से रहित है, और सत्य को अभ्यास में लाने के दृढ़ निश्चय से रहित है, और यदि वह दुःख नहीं उठाता, और उसका शोधन नहीं किया जाता या उसे दंड नहीं दिया जाता, तो उसका दृढ़ निश्चय कभी सिद्ध नहीं किया जाएगा।"

"केवल शोधन का अनुभव करने के द्वारा ही मनुष्य सच्चाई के साथ परमेश्वर से प्रेम कर सकता है" से

"परमेश्वर न्याय और ताड़ना का कार्य करता है ताकि मनुष्य उसे जाने, और उसकी गवाही को जाने। मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव पर परमेश्वर के न्याय के बिना, मनुष्य परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव को नहीं जानेगा जो कोई भी अपराध की अनुमति नहीं देता है, और परमेश्वर के बारे में अपनी पुरानी जानकारी को नई जानकारी में बदल नहीं सकता है। परमेश्वर की गवाही के लिए, और परमेश्वर के प्रबंधन की ख़ातिर, परमेश्वर अपनी सम्पूर्णता को सार्वजनिक बनाता है, इस प्रकार से मनुष्य को परमेश्वर का ज्ञान हासिल करने, अपने स्वभाव को बदलने, और परमेश्वर के सार्वजनिक प्रकटन के माध्यम से परमेश्वर की गवाही देने में सक्षम बनाता है।"

"केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं" से

"मनुष्य शरीर में रहता है, इसका मतलब है कि वह मानवीय नरक में रहता है, और परमेश्वर के न्याय और उसकी ताड़ना के बगैर, मनुष्य शैतान के समान ही गन्दा है। मनुष्य पवित्र कैसे हो सकता है? पतरस ने यह विश्वास किया कि परमेश्वर की ताड़ना और उसका न्याय मनुष्य की सब से बड़ी सुरक्षा और सब से महान अनुग्रह है। केवल परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के द्वारा ही मनुष्य जागृत हो सकता है, और शरीर और शैतान से बैर कर सकता है। परमेश्वर का कठोर अनुशासन मनुष्य को शैतान के प्रभाव से मुक्त करता है, वह उसे उसके छोटे संसार से आज़ाद करता है, और उसे परमेश्वर की उपस्थिति के प्रकाश में जीवन बिताने देता है। ताड़ना और न्याय की अपेक्षा कोई बेहतर उद्धार नहीं है! ...अपने जीवन में, यदि मनुष्य शुद्ध होना चाहता है और अपने स्वभाव में परिवर्तन हासिल करना चाहता है, यदि वह एक सार्थक जीवन बिताना चाहता है, और एक जीवधारी के रूप में अपने कर्तव्य को निभाना चाहता है, तो उसे परमेश्वर की ताड़ना और न्याय को स्वीकार करना चाहिए, और उसे परमेश्वर के अनुशासन और परमेश्वर के प्रहार को अपने आप से दूर नहीं होने देना चाहिए, इस प्रकार वह अपने आपको शैतान के छल प्रपंच और प्रभाव से मुक्त कर सकता है और परमेश्वर के प्रकाश में जीवन बिता सकता है। यह जानो कि परमेश्वर की ताड़ना और न्याय वह ज्योति है, और वह मनुष्य के उद्धार की ज्योति है, और यह कि मनुष्य के लिए उस से बेहतर कोई आशीष, अनुग्रह या सुरक्षा नहीं है।"

"पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान" से

"मैं पहले कह चुका हूँ कि पूर्व दिशा से जीतने वालों का एक समूह प्राप्त किया जाता है, ऐसे जीतने वाले जो महान क्लेश से गुजर कर आते हैं। ऐसे वचनों का क्या अर्थ है? उनका अर्थ है कि न्याय और ताड़ना, और व्यवहार और काँट-छाँट, और सभी प्रकार के शुद्धिकरण से गुजरने के बाद केवल ये प्राप्त कर लिए गए लोग ही वास्तव में आज्ञापालन करते थे। ऐसे व्यक्तियों का विश्वास अस्पष्ट और अमूर्त नहीं है, बल्कि वास्तविक है। उन्होंने किन्हीं भी संकेतों और चमत्कारों, या अचम्भों को नहीं देखा है; वे गूढ़ अक्षरों और सिद्धान्तों, या गहन अंर्तदृष्टि की बातें नहीं करते हैं; इसके बजाय उनके पास वास्तविकता और परमेश्वर के वचन, और परमेश्वर की वास्तविकता का सच्चा ज्ञान है। क्या ऐसा समूह परमेश्वर की सामर्थ्य को स्पष्ट करने में अधिक सक्षम नहीं है?"

"परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" से

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