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सूचीपत्र

मैं आपकी बातों से सहमत नहीं हूँ! परमेश्वर में विश्वास, बाइबल में विश्वास है। बाइबल से दूर जाना परमेश्वर में विश्वास करना नहीं है!

उत्तर: "परमेश्वर में विश्वास करना, बाइबल में विश्वास करना है, बाइबल को छोड़ देना परमेश्वर में विश्वास करना नहीं है," यह कथन गलत है! क्या बाइबल लोगों को बचा सकती है? क्या बाइबल परमेश्वर की जगह ले सकती है? क्या बाइबल पवित्र आत्मा के कार्य की जगह ले सकती है? क्या यह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व कर सकती है और अंत के दिनों का उनका न्याय का कार्य कर सकती है? क्या परमेश्वर महान हैं या बाइबल महान है? परमेश्वर पहले आये या बाइबल? अब्राहम के ज़माने में कोई बाइबल नहीं थी, तो क्या आप कहेंगे कि अब्राहम परमेश्वर में विश्वास नहीं करते थे? जब मूसा ने इसराइलियों को मिस्त्र से निकालने में अगुवाई की, तब भी बाइबल नहीं थी, तो क्या आप कह सकते हैं कि मूसा परमेश्वर में विश्वास नहीं करते थे? परमेश्वर परमेश्वर हैं और बाइबल बाइबल ही है। बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती, और बाइबल परमेश्वर भी नहीं है। बाइबल परमेश्वर के पिछले कार्य और परमेश्वर की गवाहियों का सिर्फ एक ऐतिहासिक अभिलेख है, बाइबल परमेश्वर के कार्य और अंत के दिनों के वचनों की जगह नहीं ले सकती, यह मनुष्य को बचाने में परमेश्वर की जगह भी नहीं ले सकती! इसलिए, बाइबल में विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करने के बराबर नहीं है। अगर लोग बाइबल को परमेश्वर मान लेते हैं, तो यह परमेश्वर का घोर विरोध और तिरस्कार करना है! बाइबल सिर्फ परमेश्वर के कार्य की गवाही है। बाइबल न तो इंसान को जीवन देने में परमेश्वर का प्रतिनिधित्व कर सकती है और न ही पवित्र आत्मा के कार्य की जगह ले सकती है। बाइबल में कोई जीवन नहीं है। सिर्फ मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन हैं। सिर्फ मसीह को स्वीकार करके और उनका अनुसरण करके ही मनुष्य पवित्र आत्मा का कार्य और जीवन पा सकता है। प्रभु यीशु ने कहा था, "तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (यूहन्ना 5:39-40)। इसलिए अगर विश्वासी सिर्फ बाइबल में विश्वास करें मगर मसीह को स्वीकार न करें या अनुसरण न करें, तो वे सत्य और जीवन को नहीं पा सकेंगे, और बाइबल से जुड़े होने के कारण, वे मसीह का विरोध और उनकी निंदा करेंगे, वे परमेश्वर का विरोध करनेवाले मसीह-विरोधी बन जाएंगे। उस ज़माने में, चूंकि यहूदी फरीसी आँखें बंद करके बाइबल में विश्वास और उसकी आराधना करते थे, बाइबल को सबसे ऊपर मानते थे और बाइबल को परमेश्वर के रूप में देखते थे, इसलिए अंत में, जब प्रभु यीशु कार्य करने आये, तो वे जिद्दी बनकर बाइबल से जुड़े रहे और उसकी रक्षा करते रहे, उन्होंने प्रभु यीशु को उलझाने, उनका जबरदस्त विरोध और निंदा करने की कोशिश में बाइबल के पत्रों का इस्तेमाल किया। अंत में, उन लोगों ने प्रभु यीशु को पुराने नियम का पालन न करने के जघन्य अपराध का दोषी ठहराकर सूली पर चढ़ा दिया, अंत के दिनों में, धार्मिक पादरी और एल्डर्स आँखें बंद करके सिर्फ बाइबल में विश्वास करते हैं और उसकी आराधना करते हैं। वे बाइबल की रक्षा करते हैं, बाइबल की गवाही देते हैं और अपने हर काम में परमेश्वर की जगह बाइबल का इस्तेमाल करते हैं। जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों का अपना न्याय का कार्य करने और सत्य व्यक्त करने आते हैं, तो इस मामले में वे बिल्कुल फरीसियों की तरह, लोगों के दिलों में बाइबल की जगह बचाए रखने की खातिर, अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर का जबरदस्त विरोध, निंदा और तिरस्कार करते हैं। उन लोगों ने परमेश्वर के स्वभाव का भारी अपमान करते हुए, पहले ही मसीह को फिर से सूली पर चढ़ाने का पाप किया है। क्या यह सभी को नज़र आनेवाला सच नहीं है? बाइबल मूल रूप से परमेश्वर की गवाही थी, लेकिन फरीसियों और धार्मिक अगुवाओं ने परमेश्वर की जगह लेने और परमेश्वर का विरोध करने के लिए बाइबल का इस्तेमाल क्यों किया? वे लोगों को परमेश्वर की आज्ञा मानने, आराधना करने को कहने की बजाय, उनसे बाइबल का गुणगान करने और उसकी आराधना करने के लिए कहते हैं? यह लोगों को धोखा देने के लिए शैतान की चाल है! ऐसा इसलिए क्योंकि शैतान को इस बात का बेहद डर है कि मानवजाति परमेश्वर की आज्ञा मानेगी और उनकी आराधना करेगी, लेकिन शैतान को बिल्कुल भी यह डर नहीं है कि मानवजाति बाइबल की आराधना और उसका गुणगान करेगी। इसलिए, चूंकि शैतान बाइबल को नहीं नकार सकता, वो ऐसी चाल चलता है कि लोग आँखें बंद करके बाइबल में विश्वास और उसकी आराधना करें, और बाइबल को परमेश्वर की जगह दिला सकें, जिससे लोग सिर्फ बाइबल में विश्वास करके बाइबल से जुड़े रहते हैं, मगर परमेश्वर और सत्य को स्वीकार नहीं करते, कुछ इस तरह कि यह जान लेने के बावजूद कि मसीह का हर वचन सत्य है, वे बाइबल से अलग होने और धर्म से धोखा करने की हिम्मत नहीं करते। नतीजा यह कि मनुष्य भले ही नाम के लिए परमेश्वर में विश्वास करे, असल में वह परमेश्वर से नाता तोड़ चुका होता है। शैतान के परमेश्वर-विरोध की यही चालाकी है और इसको समझ पाना मनुष्य के लिए टेढ़ी खीर है। इसलिए, अगर विश्वासी सिर्फ आँखें बंद करके बाइबल में विश्वास करते हैं और उसकी आराधना करते हैं, तो इसका मतलब यह है कि वे शैतान की चाल में फंस गये हैं, वे परमेश्वर के विरोध करने और उनको धोखा देने के रास्ते पर चल पड़े हैं। अगर वे अभी भी बाइबल को संदर्भ से बाहर ले जा सकते हैं, मसीह को नकारने और उनकी निंदा करने के लिए बाइबल में मनुष्य के कथनों का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो वे परमेश्वर-विरोधी, मसीह-विरोधी बन चुके हैं! अगर लोग हमेशा बाइबल की आराधना करते रहें, तो क्या उनके दिलों में अभी भी परमेश्वर के लिए जगह होगी? अगर बाइबल ने किसी के दिल में परमेश्वर की जगह ले ली है, तो क्या वह परमेश्वर में विश्वास रखने वाला होगा? परमेश्वर के विश्वासियों के रूप में, हमें बाइबल का सेवक होने के बजाय, परमेश्वर और सत्य का सेवक होना चाहिए। अगर कोई अड़ जाए कि परमेश्वर में विश्वास ही बाइबल में विश्वास है, तो उसके दिल में परमेश्वर के लिए कोई जगह नहीं है। वे परमेश्वर में बिल्कुल भी विश्वास नहीं करते, बल्कि वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर को नकारते और उनका विरोध करते हैं। ऐसे इंसान के भाग्य में परमेश्वर के हाथों मिट जाना लिखा होता है!

आइए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों पर फिर एक बार नज़र डालें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "वे जो सिर्फ़ बाइबल के वचनों पर ही ध्यान देते हैं, जो सत्य के बारे में या मेरे नक्शे-कदम को खोजने के बारे में बेफ़िक्र हैं—वे मेरे विरुद्ध हैं, क्योंकि वे मुझे बाइबल के अनुसार सीमित बना देते हैं, और मुझे बाइबल में ही सीमित कर देते हैं, और वे ही मेरे बहुत अधिक निंदक हैं। ऐसे लोग मेरे सामने कैसे आ सकते हैं? वे मेरे कार्यों, या मेरी इच्छा, या सत्य पर कुछ भी ध्यान नहीं देते हैं, बल्कि वचनों से ग्रस्त हो जाते हैं, वचन जो मार देते हैं। कैसे ऐसे लोग मेरे अनुकूल हो सकते हैं?" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए")। "उनके लिये मेरे अस्तित्व का दायरा मात्र बाइबल तक ही सीमित है। उनके लिए, मैं बस बाइबल के सामान ही हूँ; बाइबल के बिना मैं भी नहीं हूँ, और मेरे बिना बाइबल भी नहीं है। इस हद कि हर एक वचन जो मैं बोलता हूं उसकी तुलना बाइबल की आयतों के साथ करते हैं, और उसका उपयोग मुझे दोषी ठहराने के लिए करते हैं। वे जिसकी खोज कर रहे हैं वह मेरे अनुकूल होने का रास्ता या ढंग नहीं है, या सत्य के अनुकूल होने का रास्ता नहीं है, बल्कि बाइबल के वचनों की अनुकूलता में होने का रास्ता है, और वे विश्वास करते हैं कि कोई भी बात जो बाइबल के अनुसार नहीं है, बिना किसी अपवाद के, मेरा कार्य नहीं है। क्या ऐसे लोग फरीसियों के कर्तव्यनिष्ठ वंशज नहीं हैं? यहूदी फरीसी यीशु को दोषी ठहराने के लिए मूसा की व्यवस्था का उपयोग करते थे। उन्होंने उस समय के यीशु के अनुकूल होने की खोज नहीं की, बल्कि नियम का अक्षरशः पालन कर्मठतापूर्वक किया, इस हद तक किया कि अंततः उन्होंने निर्दोष यीशु को, पुराने नियम की व्यवस्था का पालन न करने और मसीहा न होने का आरोप लगाते हुए, क्रूस पर चढ़ा दिया" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए")। "और आज के लोगों के विषय में क्या कहें? मसीह सत्य को बताने के लिए आया है, फिर भी वे निश्चय ही स्वर्ग में प्रवेश प्राप्त करने और अनुग्रह को पाने के लिए उसे मनुष्य के मध्य में से बाहर निकाल देंगे। वे निश्चय ही बाइबल के हितों की सुरक्षा करने के लिए सत्य के आगमन को भी नकार देंगे, और निश्चय ही वापस देह में आये हुए मसीह को बाइबल के अस्तित्व को अनंतकाल तक सुनिश्चित करने के लिए फिर से सूली पर चढ़ा देंगे। कैसे मनुष्य मेरे उद्धार को ग्रहण कर सकता है, जब उसका हृदय इतना अधिक द्वेष से भरा है, और मेरे प्रति उसका स्वभाव ही इतना विरोध से भरा है?" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए")। बड़े लंबे समय से, सभी धार्मिक अगुआ लोगों को सिखाते रहे हैं कि "परमेश्वर में विश्वास बाइबल में विश्वास है, बाइबल को छोड़ देना परमेश्वर में विश्वास नहीं करना है।" वे बाइबल का गुणगान करने और उसकी गवाही देने में कोई कसर नहीं छोड़ते, बाइबल और परमेश्वर को बराबर बताकर, लोगों के दिलों में बाइबल को परमेश्वर की जगह बिठाने की कोशिश करते हैं, वे लोगों को ऐसा बना देते हैं कि वे बाइबल में आँखें मूँद कर विश्वास करें, उसकी आराधना करें और उसे परमेश्वर जैसा समझें। वे बाइबल को हर चीज़ का आधार बनाकर इस्तेमाल करते हैं। और-तो-और मसीह के आने पर भी, वे मसीह को सीमाओं में बांधने, उनको नकारने, उनकी निंदा और विरोध करने का आधार भी बाइबल के पत्रों को बनाते हैं। ऊपर से तो लगता है कि धार्मिक पादरी और एल्डर्स लोगों को बाइबल के सामने ला रहे हैं, लेकिन सच कहें तो वे लोगों को खुद अपने सामने ला रहे हैं! लोग चूंकि बाइबल में अंधा विश्वास करते हैं, इसलिए वे बाइबल के इन विद्वानों और विशेषज्ञों ज़्यादा ही आराधना करते हैं। ये धार्मिक फरीसियों द्वारा युगों से आजमायी जा रही सबसे घिनौनी चाल है, जिसमें वे बाइबल की गलत व्याख्या करने, लोगों को धोखा देकर वश में करने के लिए बाइबल के पत्रों इस्तेमाल करते हैं और लोगों को परमेश्वर के करीब जाने से रोकते हैं! यह शैतान की चालाकी और अपना स्वतंत्र राज्य बनाने की उनकी कोशिश का सच्चा सबूत है! सच कहें तो, बहुत-से धार्मिक पादरी और एल्डर्स मूल रूप से अविश्वासी हैं। वे सिर्फ बाइबल में विश्वास करते हैं, मगर परमेश्वर में विश्वास नहीं करते। वे बाइबल में दर्ज आलेखों को मनगढ़ंत कहानियाँ मानते हैं, और विश्वास नहीं करते कि ये परमेश्वर के कार्य के तथ्य हैं। इसलिए, वे यह स्वीकार नहीं करते कि परमेश्वर कभी भी देहधारी हुए हैं! अगर कोई देहधारी परमेश्वर की गवाही देता है, तो वे उनको नकारने और उनका घोर विरोध और निंदा करने की पूरी कोशिश करते हैं। ऐसे लोग बिल्कुल भी विश्वासी नहीं हैं! इसलिए, वे सभी लोग जो यह स्वीकार नहीं करते कि परमेश्वर ने देहाधारण किया था, मसीह-विरोधी हैं। इसमें कोई शक नहीं हैं! इससे पता चलता है कि धार्मिक दुनिया पूरी तरह से फरीसियों और मसीह-विरोधियों के वश में है, और एक ऐसा किला बन गयी है जो परमेश्वर का विरोध करती है, एक स्वतंत्र राज्य बन गयी है जो परमेश्वर का विरोध करती है। इस सच को नकारा नहीं जा सकता! धर्म के लोग भले ही परमेश्वर में विश्वास करें, मगर असल में फरीसियों और मसीह-विरोधियों ने उनको धोखा देकर वश में कर लिया है, इस तरह वे मसीह-विरोधियों के अपराध में भागीदार और उनकी कठपुतली बन गये हैं! इसलिए, धर्म में जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, उन्हें बचाया नहीं जा सकता।

"तोड़ डालो अफ़वाहों की ज़ंजीरें" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

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