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अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय कार्य बाइबल की भविष्यवाणियों को साकार और पूरा करता है

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धर्मग्रंथों के भीतर जिसकी सबसे अधिक भविष्यवाणी की गई है वह अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय और ताड़ना का कार्य है। धर्मग्रंथों में परमेश्वर द्वारा कम से कम दो सौ स्थानों में न्याय को पूरा करने का उल्लेख किया गया है; कोई कह सकता है कि सभी ने भविष्यवाणी की है कि परमेश्वर अंत के दिनों में न्याय और ताड़ना के अपने कार्य को पूरा करेगा। इसके साथ-साथ धर्मग्रंथों के केवल एक छोटे से हिस्से का उपयोग करना यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि परमेश्वर का न्याय और ताड़ना का अपना कार्य लागू करना उसके अंत के दिनों के कार्य का एक अनिवार्य कदम है। परमेश्वर के अंत के दिनों का कार्य मानवजाति को शुद्ध करने, बचाने और सिद्ध करने के लिए न्याय और ताड़ना के तरीके का उपयोग करना है; यह युग को समाप्त करने और अंततः मसीह के राज्य—परमेश्वर के प्यारे राज्य—का निर्माण करने के लिए न्याय और ताड़ना के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को उसके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत करने का कार्य है। यह मानवजाति को बचाने के परमेश्वर के तीन-चरण के कार्य का घनीभूत रूप और शैतान पर उसकी विजय का गौरवशाली प्रतीक है। इस प्रकार, धर्मग्रंथों में हर जगह हम अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय की भविष्यवाणियों के लेखन को देख सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति कई वर्षों तक धर्मग्रंथों को पढ़ता है और आदि से अंत तक परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य को देखने में असफल रहता है जो कि उसके अंत के दिनों के कार्य में आवश्यक है, तो वह कोई ऐसा व्यक्ति है जिसकी समझ में धर्मग्रंथ थोड़ा सा भी नहीं आते हैं; यह निश्चित रूप से ऐसा व्यक्ति नहीं है जो परमेश्वर के कार्य को जानता है। नीचे धर्मग्रंथों से स्पष्ट लेखों का एक छोटा सा अंश यह साबित करने के लिए है कि परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्यन्याय और ताड़ना का कार्य है:

1."तब मैं न्याय करने को तुम्हारे निकट आऊँगा…, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है" (मलाकी 3:5)।

2. "परमेश्‍वर धर्मी और न्यायी है, वरन् ऐसा ईश्‍वर है जो प्रतिदिन क्रोध करता है" (भजन संहिता 7:11)।

3. "और वह आप ही जगत का न्याय धर्म से करेगा, वह देश देश के लोगों का मुक़द्दमा खराई से निपटाएगा" (भजन संहिता 9:8)।

4. "जब ठीक समय आएगा तब मैं आप ही ठीक ठीक न्याय करूँगा" (भजन संहिता 75:2)।

5. "वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा" (यशायाह 2:4)।

6. "इसलिये जब मैं तुझ को कोप और जलजलाहट और रिसवाली घुड़कियों के साथ दण्ड दूँगा" (यहेजकेल 5:15)।

7. "वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर" (यूहन्ना 16:8)।

8. "क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है। वह धर्म से जगत का, और सच्‍चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा" (भजन संहिता 98:9)।

9. "इस कारण दुष्‍ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे" (भजन संहिता 1:5)।

10. "हे भाइयो, एक दूसरे पर दोष न लगाओ, ताकि तुम दोषी न ठहरो; देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है" (याकूब 5:9)।

11. "उसने बड़े शब्द से कहा, परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है" (प्रकाशितवाक्य 14:7)।

12. "जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।" (यूहन्ना 12:48)।

13. "... क्योंकि वह आनेवाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्‍चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा" (भजन संहिता 96:13)।

14. "जो यहोवा से झगड़ते हैं वे चकनाचूर होंगे; वह उनके विरुद्ध आकाश में गरजेगा। यहोवा पृथ्वी की छोर तक न्याय करेगा; और अपने राजा को बल देगा, और अपने अभिषिक्‍त के सींग को ऊँचा करेगा" (1 शमूएल 2:10)।

15. "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1 पतरस 4:17)।

न्याय के बारे में उपर्युक्त 15 छंदों में मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि परमेश्वर को धार्मिकता के अनुसार दुनिया का न्याय करना चाहिए, और कि उसे विभिन्न देशों में न्याय करना चाहिए, और उनमें मुख्य बिंदु उठाए गए हैं कि "परमेश्वर धार्मिक का न्याय करता है," "और मैं न्याय करने को तुम्हारे निकट आऊँगा," "हाकिम द्वार पर खड़ा है," "क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है," "क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आता है," "वह पृथ्वी का न्याय करने को आता है," और "पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए।" इस तरह के चकित कर देने वाले वचन हम सभी को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि परमेश्वर को अनिवार्य रूप से अंत के दिनों में पृथ्वी पर आना होगा और न्याय और ताड़ना का कार्य करना होगा; परमेश्वर का अंत के दिनों के कार्य को न्याय और ताड़ना का कार्य भी होना होगा। चूँकि ये धर्मग्रंथ भविष्यवाणी करते हैं और गवाही देते हैं कि परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से मनुष्य की दुनिया में आएगा और न्याय और ताड़ना का कार्य करेगा, फिर जब परमेश्वर आएगा, तो वह किस सटीक तरीके से न्याय करेगा और मनुष्य को दिखाई देगा? यह मानवजाति का सबसे चिंताजनक प्रश्न बन गया है। धर्मग्रंथों में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों के वास्तविक अभिलेख से, हम ऐसे किसी तथ्य को इस तरह से देख सकते हैं: परमेश्वर के आत्मा की सीधी आवाज़ के अलावा, जब देहधारी प्रभु यीशु पृथ्वी पर आया केवल तभी वह परमेश्वर के रूप में अपनी पहचान के साथ बोल और कार्य कर सका था। "परमेश्वर पृथ्वी पर आता है"; ये वे वचन हैं जो परमेश्वर भ्रष्ट मानवजाति के लिए कहता है, न कि वे हैं जो वह आध्यात्मिक दुनिया से कहता है। यह निश्चित रूप से पृथ्वी पर आने वाले परमेश्वर के देहधारण का उल्लेख कर रहा है जिसे लोग देखने में समर्थ हैं, यह निश्चित रूप से परमेश्वर के आत्मा का उल्लेख नहीं कर रहा है कि जिसे देखने का लोगों के पास कोई तरीका नहीं है। इससे यह देखा जा सकता है कि यदि परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से न्याय के अपने कार्य को करने के लिए धरती पर आता है, तो उसे मनुष्य के पुत्र, मसीह के रूप में देहधारण करना होगा; केवल तभी वह परमेश्वर की पहचान के साथ बात और कार्य कर सकता है। यह निश्चित रूप से संदेह से परे है। "यह कार्य, यदि देहधारण के माध्यम से नहीं किया जाए, तो थोड़े से भी परिणामों को प्राप्त नहीं करेगा और पापियों का पूरी तरह से उद्धार करने में समर्थ नहीं होगा। यदि परमेश्वर देह नहीं बना होता, तो वह ऐसा पवित्रात्मा बना रहता जो मनुष्यों के लिए अदृश्य और अमूर्त होता। मनुष्य देह वाला प्राणी है, और मनुष्य और परमेश्वर दो अलग-अलग संसारों से सम्बन्धित हैं, और स्वभाव में भिन्न हैं। परमेश्वर का आत्मा देह वाले मनुष्य से बेमेल है, और उनके बीच कोई सम्बन्ध स्थापित नहीं किया जा सकता है; इसके अतिरिक्त, मनुष्य आत्मा नहीं बन सकता है। वैसे तो, परमेश्वर के आत्मा को प्राणियों में से एक अवश्य बनना चाहिए और अपना मूल काम करना चाहिए। परमेश्वर सबसे ऊँचे स्थान पर चढ़ सकता है और सृष्टि का एक मनुष्य बनकर, कार्य करते हुए और मनुष्य के बीच रहते हुए, अपने आपको विनम्र भी कर सकता है, परन्तु मनुष्य सबसे ऊँचे स्थान पर नहीं चढ़ सकता है और पवित्रात्मा नहीं बन सकता है और वह निम्नतम स्थान में तो बिलकुल भी नहीं उतर सकता है। इसलिए, अपने कार्य को करने के लिए परमेश्वर को देह अवश्य बनना चाहिए। बहुत कुछ जैसा कि प्रथम देहधारण के साथ है, केवल देहधारी परमेश्वर का देह ही सलीब पर चढ़ने के माध्यम से मनुष्य को छुटकारा दे सकता था, जबकि परमेश्वर के आत्मा को मनुष्य के लिए पापबलि के रूप में सलीब पर चढ़ाया जाना सम्भव नहीं था। परमेश्वर मनुष्य के लिए एक पापबलि के रूप में कार्य करने के लिए प्रत्यक्ष रूप से देह बन सकता था, परन्तु मनुष्य उस पापबलि को लेने के लिए प्रत्यक्ष रूप से स्वर्ग में चढ़ नहीं सकता था जिसे परमेश्वर ने उनके लिए तैयार किया था। वैसे तो, मनुष्य को इस उद्धार को लेने के लिए स्वर्ग में चढ़ने देने की बजाए, परमेश्वर को स्वर्ग और पृथ्वी के बीच इधर-उधर अवश्य आना-जाना चाहिए, क्योंकि मनुष्य पतित हो चुका था और स्वर्ग पर चढ़ नहीं सकता था, और पापबलि को तो बिलकुल भी प्राप्त नहीं कर सकता था। इसलिए, यीशु के लिए मनुष्यों के बीच आना और व्यक्तिगत रूप से उस कार्य को करना आवश्यक था जिसे मनुष्य के द्वारा सरलता से पूरा नहीं किया जा सकता था। हर बार जब परमेश्वर देह बनता है, तब ऐसा करना नितान्त आवश्यक था। यदि किसी भी चरण को परमेश्वर के आत्मा के द्वारा सीधे तौर पर सम्पन्न किया जा सकता, तो उसने देहधारी होने के अनादर को सहन नहीं किया होता" ("देहधारण का रहस्य (4)")। धर्मग्रंथों और परमेश्वर के वचनों से हम देख सकते हैं कि परमेश्वर को व्यक्तिगत रूप से पृथ्वी पर आने और न्याय का कार्य करने के लिए देहधारण के तरीके का उपयोग करना होगा; निम्नलिखित तीन स्थानों में छंद स्पष्ट रूप से पुष्टि करते हैं: "क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिसमें वह उस मनुष्य के द्वारा धार्मिकता से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है" (प्रेरितों 17:31)। "वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है।" (यूहन्ना 5:27)। "पिता किसी का न्याय नहीं करता, परन्तु न्याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है" (यूहन्ना 5:22)। इन सभी छंदों में सीधे भविष्यवाणी की गई है कि मसीह व्यक्तिगत रूप से धरती पर देह के रूप में आएगा और न्याय करेगा। विशेषरूप से वे सब जो "पुत्र" और "मनुष्य के पुत्र" की बात करते हैं; वे निश्चित रूप से मसीह का देहधारी के रूप में उल्लेख कर रहे हैं। मनुष्य के पुत्र में देहधारण करने वाला परमेश्वरमसीह है; यह निश्चित रूप से संदेह से परे है। इससे हम देखते हैं कि परमेश्वर का देह धारण करने और अंत के दिनों में न्याय और ताड़ना का कार्य करने की धर्मग्रंथों में भविष्यवाणियाँ, किसी भी तरह से संख्या में थोड़ी नहीं हैं; यदि केवल कोई उनकी तलाश करता है, तो उन्हें देखा जा सकता है। इसके अलावा, कुछ मूलग्रंथ हैं जो सीधे भविष्यवाणी करते हैं कि कैसे परमेश्वर न्याय का कार्य करेगा और न्याय के कार्य के क्या परिणाम होंगे। यह आगे साबित करता है कि अंत के दिनों में न्याय और ताड़ना का परमेश्वर का कार्य परमेश्वर की प्रबंधन योजना को समाप्त करने का अंतिम कार्य है; यह अंधकार और बुराई के युग को समाप्त करने और मसीह के राज्य के युग का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य है। उदाहरण के लिए:

1."स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्‍वर तो आप ही न्यायी है" (भजन संहिता 50:6)।

2. "यहोवा ने अपने को प्रगट किया, उसने न्याय किया है" (भजन संहिता 9:16)।

3. "यहोवा देश देश के लोगों से मुक़द्दमा लड़ने और उनका न्याय करने के लिये खड़ा है" (यशायाह 3:13)।

4."वह अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये ऊपर के आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा" (भजन संहिता 50:4)।

5. "वह मंत्रियों को लूटकर बँधुआई में ले जाता, और न्यायियों को मूर्ख बना देता है" (अय्यूब 12:17)।

6. "क्या परमेश्‍वर को कोई ज्ञान सिखाएगा? वह तो ऊँचे पद पर रहनेवालों का भी न्याय करता है" (अय्यूब 21:22)।

7. "अब इस संसार का न्याय होता है, अब इस संसार का सरदार निकाल दिया जाएगा" (यूहन्ना 12:31)।

8. "जो बड़े बड़े हाकिमों को तुच्छ कर देता है, और पृथ्वी के अधिकारियों को शून्य के समान कर देता है" (यशायाह 40:23)।

9. "मैं मोआब को भी दण्ड दूँगा। तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ" (यहेजकेल 25:11)।

10."हे परमेश्‍वर उठ, पृथ्वी का न्याय कर; क्योंकि तू ही सब जातियों को अपने भाग में लेगा" (भजन संहिता 82:8)।

11."इसलिये अब, हे राजाओ, बुद्धिमान बनो; हे पृथ्वी के न्यायियो, यह उपदेश ग्रहण करो" (भजन संहिता 2:10)।

12."तू ने स्वर्ग से निर्णय सुनाया है; पृथ्वी उस समय सुनकर डर गई, और चुप रही, जब परमेश्‍वर न्याय करने को, और पृथ्वी के सब नम्र लोगों का उद्धार करने को उठा" (भजन संहिता 76:8-9)।

13. "इसलिये यदि मैं बिजली की तलवार पर सान धरकर झलकाऊँ, और न्याय अपने हाथ में ले लूँ, तो अपने द्रोहियों से बदला लूँगा, और अपने बैरियों को बदला दूँगा" (व्यवस्थाविवरण 32:41)।

14. "जाति जाति में कहो, “यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है कि वह टलने का नहीं; वह देश देश के लोगों का न्याय खराई से करेगा" (भजन संहिता 96:10)।

15. "तो प्रभु भक्‍तों को परीक्षा में से निकाल लेना और अधर्मियों को न्याय के दिन तक दण्ड की दशा में रखना भी जानता है" (2 पतरस 2:9)।

16. "क्योंकि जब परमेश्‍वर ने उन स्वर्गदूतों को जिन्होंने पाप किया नहीं छोड़ा, पर नरक में भेजकर अन्धेरे कुण्डों में डाल दिया ताकि न्याय के दिन तक बन्दी रहें" (2 पतरस 2:4)।

17. "मैं ने मन में कहा, परमेश्‍वर धर्मी और दुष्‍ट दोनों का न्याय करेगा, क्योंकि उसके यहाँ एक एक विषय और एक एक काम का समय है" (सभोपदेशक 3:17)।

18. "और जो मनुष्य अभिमान करके उस याजक की, जो वहाँ तेरे परमेश्‍वर यहोवा की सेवा टहल करने को उपस्थित रहेगा, न माने, या उस न्यायी की न सुने, तो वह मनुष्य मार डाला जाए" (व्यवस्थाविवरण 17:12)।

19. "हे यहोवा, अपने क्रोध में उठ; क्रोध से भरे मेरे सतानेवाले के विरुद्ध तू खड़ा हो जा; मेरे लिये जाग! तू ने न्याय की आज्ञा दे दी है" (भजन संहिता 7:6)।

20. "रात के समय मैं जी से तेरी लालसा करता हूँ, मेरा सम्पूर्ण मन यत्न के साथ तुझे ढूँढ़ता है। क्योंकि जब तेरे न्याय के काम पृथ्वी पर प्रगट होते हैं, तब जगत के रहनेवाले धर्म को सीखते हैं" (यशायाह 26:9)।

21. "तेरा अन्त भी आ गया, और मैं अपना कोप तुझ पर भड़काकर तेरे चालचलन के अनुसार तुझे दण्ड दूँगा; और तेरे सारे घिनौने कामों का फल तुझे दूँगा" (यहेजकेल 7:3)।

22. "अब थोड़े दिनों में मैं अपनी जलजलाहट तुझ पर भड़काऊँगा, और तुझ पर पूरा कोप उण्डेलूँगा और तेरे चालचलन के अनुसार तुझे दण्ड दूँगा। तेरे सारे घिनौने कामों का फल तुझे भुगताऊँगा" (यहेजकेल 7:8)।

23. "उस प्राचीन के सम्मुख से आग की धारा निकलकर बह रही थी; फिर हज़ारों हज़ार लोग उसकी सेवा टहल कर रहे थे, और लाखों लाख लोग उसके सामने हाजिर थे; फिर न्यायी बैठ गए, और पुस्तकें खोली गईं" (दानिय्येल 7:10)।

24. "राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा" (भजन संहिता 67:4)।

25. "हाँ, दण्ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्म कर देगा" (इब्रानियों 10:27)।

26. "हम जानते हैं कि ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर परमेश्‍वर की ओर से ठीक-ठीक दण्ड की आज्ञा होती है" (रोमियों 2:2)।

27. "और मैं तुम से कहता हूँ कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन वे हर एक उस बात का लेखा देंगे" (मत्ती 12:36)।

28. "क्योंकि हम उसे जानते हैं, जिसने कहा, पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूँगा। और फिर यह, कि प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा” (इब्रानियों 10:30)।

29. "तब यीशु ने कहा, मैं इस जगत में न्याय के लिये आया हूँ, ताकि जो नहीं देखते वे देखें, और जो देखते हैं वे अंधे हो जाएँ।" (यूहन्ना 9:39)।

धर्मग्रंथों से उपर्युक्त 29 छंदों के भीतर, हम सभी मानवजाति पर पूरे किए गए परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के माध्यम से हर पहलू में प्राप्त परिणामों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इसके अलावा, अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय केवल एक जाति या एक देश पर निर्देशित नहीं किया जाता है, बल्कि यह आवश्यक रूप से सभी राष्ट्रों, सभी राज्यों और यहाँ तक कि समस्त मानवजाति की ओर विस्तारित होता है। इस प्रकार अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय पुराने युग को समाप्त करने और एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य है। साथ ही, लोग यह देखने में भी समर्थ होते हैं कि परमेश्वर अपने न्याय में विनम्रों और श्रद्धालुओं को प्रलोभन से बचा रहा है, और अन्यायियों को ताड़ना के भीतर रख रहा है। परमेश्वर का न्याय उन लोगों को जो जमीन पर हैं धार्मिकता सीखने, सच का पीछा करने और परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव को जानने देता है। यह उन सभी लोगों को जो जमीन पर हैं परमेश्वर के सामने जाने देता है और उनसे उसकी प्रशंसा और स्तुति करवाता है; सभी राष्ट्र प्रसन्नतापूर्वक कूदते हैं, और आराधना में उसके सामने झुकते हैं। यह पूरी तरह से परमेश्वर के अपना धार्मिक स्वभाव व्यक्त करने के द्वारा प्राप्त किए गए परिणामों को व्यक्त करता है। यह आगे साबित करता है कि परमेश्वर केवल एक दयालु और प्रेमपूर्ण परमेश्वर ही नहीं है, बल्कि अधिक महत्वपूर्ण रूप से उसके पास कोप और प्रताप, और न्याय और ताड़ना भी है; परमेश्वर सबसे धार्मिक परमेश्वर है। वास्तव में, परमेश्वर का अंतर्निहित स्वभाव ऐसा है जो मुख्य रूप से धार्मिक है। इसलिए, न्याय के कार्य को पूरा करने के लिए परमेश्वर का पृथ्वी पर आना वह समय है जब परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव पूरी तरह से प्रकट होता है। परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव के प्रकाशन के कारण भ्रष्ट मानवजाति को प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है; जो लोग अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को स्वीकार और उसका पालन कर मान सकते हैं, वे बचाए और सिद्ध किए जाएँगे, और जो लोग परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को अस्वीकार करते हैं, वे परमेश्वर का विरोध करने के कारण नष्ट कर दिए जाएँगे। यह वह परिणाम है जो अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होता है। यह परमेश्वर का धार्मिक न्याय और उसकी ताड़ना है जो मानवजाति को शुद्ध करती है, मानवजाति को बचाती है, और मानवजाति को सबसे सिद्ध बनाती है। इस प्रकार परमेश्वर पर सिंहासन दृढ़ता से स्थापित किया जाता है; परमेश्वर की इच्छा भी उनके न्याय और ताड़ना के कारण पूरी किए जाने में समर्थ होती है। न्याय को कार्यान्वित करने के लिए परमेश्वर के धरती पर आने ने पूरी तरह से पुष्टि कर दी है कि मनुष्य के पुत्र की छवि प्रकाशित वाक्य की पुस्तक में दी गई न्याय के प्रभु की छवि है। साथ ही, यह इस भविष्यवाणी की भी पुष्टि करता है कि "परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है।" केवल जब परमेश्वर पृथ्वी पर आता है तभी वह भ्रष्ट मानवजाति को बचा सकता है, और केवल परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के द्वारा ही इस दुष्ट युग को समाप्त किया जा सकता है। यह परमेश्वर का न्याय और ताड़ना है जिसने परमेश्वर के राज्य के आने की नींव रखी है, और पृथ्वी पर मसीह के राज्य को साकार होने दिया है। यह मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर की प्रबंधन योजना को समाप्त करने का अपरिहार्य परिणाम और सघन रूप है। अंत में, उन सभी लोगों का जनसमूह जो बचाए जाते हैं मसीह के राज्य की पूर्ति करता है; यह "परमेश्वर का अपने राज्य में आने" और "नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरने" की भविष्यवाणियों को पूरी तरह से पूरा करता है। स्पष्ट रूप से, 21वीं शताब्दी परमेश्वर के अपने राज्य में आने की उसकी शताब्दी है; यह वह शताब्दी है जिसमें मसीह का राज्य पृथ्वी पर साकार होगा। इससे भी अधिक, यही वह शताब्दी है जिसमें परमेश्वर शैतान के भाग्य को खत्म कर देगा, और जिसमें परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से धरती पर आएगा और सत्ता को लेगा। एक सहस्राब्दी का राज्य 21वीं शताब्दी में साकार होगा।

बाइबल की कई भविष्यवाणियों से हम पूरी तरह से देख सकते हैं कि अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय का कार्य व्यापक, शक्तिशाली और अबाध है। यह लोगों को बाइबिल से स्पष्ट रूप से यह देखने में और अधिक सक्षम बनाती हैं कि मानवजाति को बचाने का परमेश्वर का तीन-चरण का कार्य मानवजाति को बचाने की परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समग्रता है। यद्यपि बाइबिल का अधिकांश भाग व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य का केवल एक अभिलेख है, फिर भी नबियों की भविष्यवाणियों, प्रभु यीशु और प्रकाशितवाक्य सभी ने फिर भी अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को बहुत पहले पूरी तरह से प्रकट कर दिया था, जो कि राज्य के युग में न्याय और ताड़ना की पूरी तस्वीर है, जिससे लोग बाइबल से परमेश्वर की प्रबंधन योजना के तीन-चरण के कार्य को स्पष्ट रूप से देखते हैं। अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर मानवजाति को बचाने के लिए न्याय और ताड़ना का उपयोग करता है, उसे प्रकार के अनुसार वर्गीकृत करता है, और बुराई तथा भ्रष्टता के इस अंधकारमय युग को समाप्त करता है; यह एक स्पष्ट और निर्विवाद तथ्य है। यदि कोई व्यक्ति मानवजाति को बचाने के परमेश्वर के तीन-चरण के कार्य को बाइबल द्वारा देखने में असमर्थ है, तो वह निश्चित रूप से ऐसा व्यक्ति नहीं है जो बाइबिल को समझता है, और निश्चित रूप से ऐसा व्यक्ति नहीं है जो परमेश्वर के कार्य को जानता है। जिस समय हर कोई प्रभु यीशु के पुनः आगमन की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहा है, परमेश्वर ने काफी समय पहले ही देहधारण कर लिया है और गुप्तरूप से मुख्य भूमि चीन में आ गया है। तब परमेश्वर के वचनों को पूरी तरह से निभाते हुए, "उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र; परन्तु केवल पिता।" (मरकुस 13:32) सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने एक-एक करके लाखों वचन व्यक्त किये हैं; चीन में उसने अंत के दिनों में महान सफेद सिंहासन के सामने न्याय के लिए औपचारिक रूप से पर्दा उठा दिया है, और परमेश्वर के घर में न्याय पहले ही शुरू हो चुका है। चीन में परमेश्वर के चुने हुए लोग अंततः परमेश्वर के न्याय और ताड़ना में उसके प्रकटन को देख सकते हैं। यह परमेश्वर के वचन हैं जो उसके देहधारण की गवाही देते हैं, यह पवित्र आत्मा की वाणी है जो न्याय और ताड़ना का कार्य करने के लिए परमेश्वर के व्यक्तिगत रूप से पृध्वी पर आने की गवाही है। परमेश्वर के चुने हुए लोग, परमेश्वर के वचनों के अधिकार के अधीन समर्पण करते हुए, परमेश्वर के न्याय और ताड़ना, काट-छाँट और निपटारे, और सभी प्रकार के परीक्षणों और शुद्धिकरणों को स्वीकार करते हैं। साथ ही वे बड़े लाल अजगर द्वारा शिकार और उत्पीड़न का और हर प्रकार के परीक्षणों और दारुण-दुःखों का अनुभव करते हैं, और सभी प्रकार की पीड़ा और शुद्धिकरणों को झेलते हैं। अब परमेश्वर ने अंततः विजय पा ली है, लोगों के एक समूह को बचा और पूर्ण कर लिया है जो परमेश्वर के हृदय और इच्छा के अनुकूल हैं। ठीक जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपनी वाणी में कहता है: "संसार की पूर्व दिशा में धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ प्रकट हो जाऊँगा, और मैं मानवता के असंख्य मेज़बानों पर स्वयं को प्रकट करूँगा!" स्पष्टतया, बाइबल की सभी भविष्यवाणियों को पूरी तरह से पूर्ण और प्राप्त करते हुए, अंत के दिनों में परमेश्वर के महान सफेद सिंहासन के सामने न्याय पहले ही शुरू हो चुका है।

धर्मोपदेशों—जीवन के लिए आपूर्ति—के संग्रह में "अंत के दिनों में न्याय और ताड़ना के परमेश्वर के कार्य को कैसे जानें" से

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