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धर्मोपदेश और संगति: मूर्ख कुँवारियाँ क्यों उजागर की और निकाल दी जाती हैं?

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तथाकथित 'बुद्धिमान कुँवारियाँ' उन लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं जो परमेश्वर की आवाज़ पहचान सकते हैं और 'दूल्हे' की आवाज़ सुन सकते हैं और इसलिए जो मसीह को स्वीकार कर सकते हैं और उसके प्रति समर्पित हो सकते हैं, जिससे व्यावहारिक परमेश्वर को घर ले जाते हैं। और क्योंकि 'मूर्ख कुँवारियाँ' 'दूल्हे' की आवाज़ नहीं जानती हैं और परमेश्वर की आवाज़ को नहीं पहचान सकती हैं, इसलिए वे मसीह को अस्वीकार करती हैं। वे अभी भी अस्पष्ट परमेश्वर की आशा करती हैं, इसलिए उनका परित्याग कर दिया जाता है और उन्हें निकाल दिया जाएगा। इसलिए हम देख सकते हैं कि परमेश्वर में विश्वास में वास्तविक निष्ठा के बिना मसीह को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है। जो लोग मसीह को स्वीकार करने से इनकार करते हैं वे 'परमप्रिय की शादी के भोज' से चूक जाएँगे और उन्हें स्वर्ग के राज्य में प्रभु द्वारा उनके घर वापस नहीं ले जाया जा सकता है, और वे उस जगह में प्रवेश नहीं कर सकते हैं जिसे परमेश्वर ने मानवजाति के लिए बनाया है। इसलिए, यह तय करने में कि लोग परमेश्वर में अपने विश्वास में सफल होंगे या विफल, लोग अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार कर सकते और उसके कार्य के प्रति समर्पित हो सकते हैं या नहीं, यह एक निर्णायक कारक है।

ऊपर से प्राप्त धर्मोपदेश और संगति में "परमेश्वर की सेवा करने के समय क्यों धार्मिक दुनिया ने हमेशा उसका विरोध किया है" से

बुद्धिमान कुँवारियाँ प्रभु की आवाज़ को पहचान सकती हैं, मुख्यतः क्योंकि बुद्धिमान कुँवारियाँ वे लोग हैं जो सत्य से प्रेम करते हैं और सत्य की खोज करते हैं। वे परमेश्वर के प्रकटन के लिए प्यासे होते हैं, इसलिए वे परमेश्वर के आगमन की खोज और जाँच-पड़ताल कर पाते हैं। वे प्रभु की आवाज़ में भेद कर पाने में सक्षम होते हैं। चूँकि मूर्ख कुँवारियाँ सत्य से प्रेम नहीं करती हैं, इसलिए वे प्रभु के आगमन की खोज और जाँच-पड़ताल नहीं करती हैं। वे बस हठभूर्वक नियमों से चिपकी रह सकती हैं। इनमें से कुछ लोग तब तक स्वीकार या जाँच-पड़ताल नहीं करते हैं जब तक कि वह एक बादल पर आने वाला प्रभु न हो। अन्य लोग धार्मिक दुनिया के पादरियों तथा बुज़ुर्गों की चालबाजियों के प्रति पूर्णतः समर्पित हो जाते हैं। पादरी तथा बुज़ुर्ग जो कुछ भी कहते हैं, वे सुनेंगे और आज्ञापालन करेंगे। वे प्रभु पर केवल नाममात्र का विश्वास करते हैं, लेकिन वास्तव में, वे इन पादरियों और बुज़ुर्गों का अनुसरण और आज्ञापालन करते हैं। वे स्वयं सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल नहीं करते हैं और वे प्रभु की आवाज़ को नहीं पहचान सकते हैं। कुछ लोग तो और भी अधिक मूर्ख होते हैं। चूँकि नकली मसीह भी हैं जो अंत के दिनों में प्रकट होते हैं, इसलिए वे असली मसीह की खोज नहीं करते हैं। इसके बजाय, वे उसे अस्वीकार करते हैं और उसकी निन्दा करते हैं। क्या यह दम घुटने के डर से खाना बंद कर देना नहीं है? यह भी मूर्ख कुँवारी की अभिव्यक्ति है।

पटकथा प्रश्नों के उत्तरों से

प्रभु यीशु ने बाइबल में भविष्यवाणी की थी कि उसकी वापसी के समय दो तरह के लोग होंगे, उसने अनुग्रह के युग के सभी विश्वासियों के लिए उपमा के रूप में बुद्धिमान कुँवारियों और मूर्ख कुँवारियों का उपयोग किया था: वे सब जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनने में सक्षम हैं बुद्धिमान कुँवारियाँ हैं; वे सब जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनने में सक्षम नहीं हैं, जो सुनते हैं और फिर भी अस्वीकार करते हैं और इस पर विश्वास नहीं करते हैं वे मूर्ख कुँवारियाँ हैं। क्या आप सब सोचते हैं कि मूर्ख कुँवारियों का स्वर्गारोहण किया जा सकता है? निस्संदेह नहीं, ठीक है? तो इन मूर्ख और बुद्धिमान कुँवारियों को कैसे प्रकट किया जा सकता है? परमेश्वर के वचन का उपयोग करके। ‘वचन देह में प्रकट होता है नामक एक किताब है, इन वचनों पर विचार करें और देखें कि आप क्या सोचते हैं, इस पर नजर डालें।’ कुछ साधारण विश्वासियों के इसे पूरा पढ़ने के बाद, वे कहते हैं, 'वाह, कितने गहरे वचन हैं, इन वचनों में सत्य निहित है।' 'इसे फिर से ध्यानपूर्वक पढ़ते हैं।' 'यह कुछ ऐसी चीज़ नहीं है जिसके बारे में कोई सामान्य व्यक्ति बात कर सकता है, ऐसा प्रतीत होता है कि यह परमेश्वर की ओर से आया है।' 'इसे फिर से ध्यानपूर्वक पढ़ते हैं।' 'वाह, यह परमेश्वर की आवाज़ है, ये वचन मनुष्य से बिल्कुल नहीं आ सकते हैं!' आप देखो, यह व्यक्ति धन्य है, वह एक बुद्धिमान कुँवारी है। जहाँ तक मूर्ख कुँवारियों की बात है, कुछ पादरी हैं, कुछ बुज़ुर्ग हैं, कुछ उपदेशक हैं, कुछ भ्रमित विश्वासी हैं जो केवल अपना पेट-भर खाना चाहते हैं। वे परमेश्वर के वचन को पूरा पढ़ने के बाद कैसा महसूस करते हैं? 'हम्म, ये वचन मेरी धारणाओं और कल्पना के अनुरूप नहीं हैं, मैं उन्हें स्वीकार नहीं करता हूँ।' उन्हें फिर से ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद: 'हम्म, कुछ वचन ऐसे प्रतीत होते हैं मानों वे सत्य हों, लेकिन यह संभव नहीं है, यह परमेश्वर का कार्य नहीं हो सकता है।' इसलिए एक बार फिर यह उनकी धारणाओं और कल्पना के अनुरूप नहीं होता है। कुछ और बार 'हम्म' कहने के बाद, वे कहेंगे: 'यह परमेश्वर का वचन नहीं है, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता। यह नक़ली है। कोई नक़ली मसीह लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, इस पर विश्वास मत करो!' यह किस प्रकार का व्यक्ति है? यह फरीसी, एक मूर्ख कुँवारी है, ठीक है? बुद्धिमान और मूर्ख कुँवारियाँ किस प्रकार प्रकट की जाती हैं? यह परमेश्वर का वचन है जो उन्हें प्रकट करता है। यह अंत के दिनों में परमेश्वर का वचन है जो उन्हें उन श्रेणियों में वर्गीकृत और विभाजित करेगा जिनसे वे संबंधित हैं, और फिर परमेश्वर अच्छों को पुरस्कृत और दुष्टों को दंडित करना आरंभ करेगा।

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (सीरीज़ 133) से

क्या आज परमेश्वर के लिए इस तरह से कार्य करना यथार्थवादी है या नहीं? यह यथार्थवादी है, क्योंकि यह उस बात की पुष्टि करता है जो प्रभु यीशु ने अपनी उपमा में भेड़ों और बकरियों के बारे में कही थी। भेड़ों को बकरियों से पृथक कैसे किया जा सकता है? यह इस पर निर्भर करता है कि कौन परमेश्वर की आवाज़ को पहचानता है और प्रभु यीशु की वापसी को स्वीकार करता है। प्रमु ने कहा, 'क्योंकि मैं भूखा था, और तुमने मुझे खाने को दिया: मैं प्यासा था, और तुमने मुझे पानी पिलाया: मैं परदेशी था, और तुमने मुझे अपने घर में ठहराया: मैं नंगा था, और तुमने मुझे कपड़े पहिनाए: मैं बीमार था, और तुमने मेरी सुधि ली: मैं बन्दीगृह में था, और तुम मुझसे मिलने आए।' ये लोग अंत में बचाए जाते हैं जबकि जो प्रभु की अगवानी नहीं करते हैं, जो प्रभु में विश्वास तो करते हैं लेकिन उसे स्वीकार नहीं करते हैं, हटा दिए जाएँगे। क्या यह इस तथ्य की ओर इशारा नहीं करता है कि आज पूरी धार्मिक दुनिया परमेश्वर की वापसी की अगवानी नहीं कर रही है? हम लोग जिन्होंने अगवानी की है एक ओर खड़े हैं, वे दूसरी ओर खड़े हैं। इसी तरह से असली विश्वासियों को नकली विश्वासियों से, परमेश्वर की अगवानी करने वालों को अगवानी नहीं करने वालों से, परमेश्वर की आवाज़ को स्वीकार करने वालों को स्वीकार नहीं करने वालों से पृथक किया जाता है। परमेश्वर द्वारा अपने देहधारण के तथ्य के माध्यम मनुष्य को प्रकट करने के पीछे महान बुद्धिमत्ता है और इसे ही परमेश्वर की सर्व-शक्तिमत्ता और बुद्धि कहा जाता है। एक दिन जब इन लोगों को बचाया जाता है और ये लोग राज्य में प्रवेश करते हैं, तब यदि वे धार्मिक श्रेष्ठ पुरुष और धार्मिक पादरी अपने आरोप लगाते हैं, तो परमेश्वर किस प्रकार प्रत्युत्तर देगा? वह पाँच बुद्धिमान कुँवारियों और पाँच मूर्ख कुँवारियों की प्रभु यीशु की भविष्यसूचक उपमा का उपयोग करके जवाब दे सकता है; अच्छा, तो उन्हें पृथक कैसे किया गया? जिन्होंने मध्यरात्रि में दूल्हे की आवाज़ सुनी वे बुद्धिमान थीं, जबकि जिन्होंने उसकी आवाज़ नहीं सुनी वे मूर्ख थीं। इसलिए, जब देहधारी परमेश्वर अंत के दिनों में परमेश्वर के वचन व्यक्त करता है, बुद्धिमान कुँवारियाँ वे होंगी जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनती हैं और इसे स्वीकार करती हैं, तथा मूर्ख कुँवारियाँ, जिन्हें हटा दिया जाएगा, वे होंगी जो परमेश्वर की आवाज़ सुनती हैं लेकिन उसे परमेश्वर की आवाज़, परमेश्वर के वचन के रूप में नहीं मानती हैं और स्वीकार करने से इनकार करती हैं। क्या यह उन बातों को पूरा नहीं करता है जो प्रभू यीशु ने इन भविष्यसूचक उपमाओं में कही थीं? परमेश्वर का कार्य मनुष्य को अधिकतम प्रकट करता है, परमेश्वर के कार्य की विधि सबसे बुद्धिमान है। केवल ऐसे कार्य के माध्यम से ही परमेश्वर की धार्मिकता प्रकट होती है, परमेश्वर की पवित्रता प्रकट होती है, और परमेश्वर की सर्व-शक्तिमत्ता प्रकट होती है।

केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करके ही किसी को बचाया जा सकता है में "सुसमाचार फैलाने के बारे में विभिन्न स्थान से प्रश्नों के उत्तर" से

बुद्धिमान और मूर्ख कुँवारियाँ किस प्रकार प्रकट की जाती हैं? यह परमेश्वर का वचन है जो उन्हें प्रकट करता है। यह अंत के दिनों में परमेश्वर का वचन है जो उन्हें उन श्रेणियों में वर्गीकृत और विभाजित करता है जिनसे वे संबंधित होती हैं, और फिर परमेश्वर अच्छों को पुरस्कृत और दुष्टों को दंडित करना आरंभ करेगा। वह अच्छों को कैसे पुरस्कृत करेगा? बुद्धिमान कुँवारियों को परमेश्वर के सम्मुख लाया जाएगा और वे उसके साथ बैठकर भोज खाएँगी। अंत में उन्हें शुद्ध किया और सिद्ध बनाया जाएगा। यह पुरस्कार प्राप्त करना है, यह परमेश्वर का पुरस्कार और अनुग्रह है। यह मायने नहीं रखता कि मूर्ख कुँवारियाँ कितने साल से परमेश्वर में विश्वास करती हैं, या वे परमेश्वर के लिए स्वयं को कितना व्यय करती हैं, या वे कितनी कठिनाइयाँ सहती हैं। चूँकि वे परमेश्वर के वचन को अस्वीकार और इनकार करती हैं, और अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार नहीं करती हैं, चूँकि जब उनका दूल्हा आता है तो वे उसे नहीं पहचानती हैं, तो उन्हें हटा दिया जाएगा और वे रोते और दाँत पीसते हुए अंधकार में गिर जाएँगी। इसे क्या कहा जाता है? इसे दुष्टों का दंड कहा जाता है। वे सभी जो अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को अस्वीकार, इनकार और उसका विरोध करते हैं उन्हें परमेश्वर द्वारा अंधकार में छोड़ दिया जाएगा। वे बहुत बड़ी आपदा में होंगे। क्या यह उनका दंड नहीं है? आज हम सबका सर्वशक्तिमान परमेश्वर के साथ आमना-सामना हुआ है, हर दिन हम लोग परमेश्वर के वचन खाते और पीते हैं, हर दिन हम लोग परमेश्वर के मार्ग के बारे में सुनते और बाते करते हैं, और सत्य के बारे में संगति करते हैं। क्या यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान किया गया पुरस्कार और आशीष नहीं है? यह वह पुरस्कार है जो परमेश्वर ने इन बुद्धिमान कुँवारियों को दिया है।

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (सीरीज़ 133) से

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