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धर्मोपदेश और संगति: बुद्धिमान कुँवारियों में क्या समझदारी है?

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"अनुग्रह के युग के दौरान, यीशु ने बुद्धिमान कुँवारियों के बारे में बात की। यह समस्त रहस्य किस बारे में है? बुद्धिमान कुँवारी शब्द का क्या अर्थ है? मुख्य बात यह है कि वह परमेश्वर की आवाज़ पहचानती है। जब वह इसे सुनती है, तो वह सोचती है, 'मैं ऐसा क्यों सोचती हूँ कि जो बातें यह मनुष्य का पुत्र कह रहा है वे परमेश्वर के वचन हैं? ऐसा क्यों प्रतीत होता है कि उसके पास परमेश्वर की आवाज़ है? ये ऐसी बातें हैं जिन्हें मनुष्य नहीं कह सकता है। यह परमेश्वर की आवाज़ है। इसलिए मुझे उस में अवश्य विश्वास करना चाहिए। वह मसीह है। वह देहधारी परमेश्वर है।' देखो, इसलिए वह बुद्धिमान है। अब, मूर्ख कुँवारियाँ मूर्ख क्यों हैं? यह इसलिए है क्योंकि वे सोचती हैं, 'क्या यह बस एक मनुष्य नहीं है? क्या यह नासरत का यीशु नहीं है? क्या यह बस एक सामान्य आदमी नहीं है? वह परमेश्वर कैसे हो सकता है? हम उसमें विश्वास नहीं करेंगी। हम स्वर्ग के परमेश्वर पर विश्वास करती हैं।' आप देखो, वे आध्यात्मिक मामलों को नहीं समझते हैं, ठीक है? ये लोग मानते हैं कि वे अपने आप में सही हैं और कि वे न्यायोचित हैं। इसका परिणाम यह था कि परमेश्वर बुद्धिमानों को उनकी स्वयं की चतुराई में फँसा देता है। क्या आप बुद्धिमान नहीं हैं? क्या आप ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो मनुष्य में विश्वास नहीं करता है? आज, परमेश्वर देहधारी बन गया है। वह मनुष्य बन गया है। यदि आप विश्वास नहीं करते हैं, तो आपको नष्ट कर दिया जाएगा, और आप मिट जाएँगे। यदि आप सोचते हैं कि आप चतुर और बुद्धिमान हैं, तो आप स्वयं को मूर्ख बना देंगे।"

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (Ⅸ) में "केवल वे लोग ही बचाये और सिद्ध बनाए जाएँगे जो अपने कर्तव्यों को पूरा करने में मानक को पूरा करते हैं" से

"प्रभु यीशु ने बाइबल में भविष्यवाणी की थी कि उसकी वापसी के समय दो तरह के लोग होंगे, उसने अनुग्रह के युग के सभी विश्वासियों के लिए उपमा के रूप में बुद्धिमान कुँवारियों और मूर्ख कुँवारियों का उपयोग किया था: वे सब जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनने में सक्षम हैं बुद्धिमान कुँवारियाँ हैं; वे सब जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनने में सक्षम नहीं हैं, जो सुनते हैं और फिर भी अस्वीकार करते हैं और इस पर विश्वास नहीं करते हैं वे मूर्ख कुँवारियाँ हैं। क्या आप सब सोचते हैं कि मूर्ख कुँवारियों का स्वर्गारोहण किया जा सकता है? निस्संदेह नहीं, ठीक है? तो इन मूर्ख और बुद्धिमान कुँवारियों को कैसे प्रकट किया जा सकता है? परमेश्वर के वचन का उपयोग करके।"

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (सीरीज़ 133) से

"वे लोग जो मसीह के अनुकूल हैं और जिनका दिल मसीह के साथ है वे मसीह के राज्य के आधार स्तम्भ हैं। ये लोग ही मसीह के राज्य में सत्ता में रहेंगे और ये, शुरूआत से अंत तक, मसीह की गवाही देंगे और मसीह का उत्कर्ष करेंगे। समझे? (समझा।) अनुग्रह के युग के दौरान, यीशु की क्या भविष्यवाणी थी? "आधी रात को धूम मची : देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)। वे लोग कौन हैं जो दूल्हे से मिलने जाते हैं? वे बुद्धिमान कुँवारियाँ हैं। बुद्धिमान कुँवारियों के दूल्हे से मिलने जाने के बाद, जो होगा वह है: "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। यह किस प्रकार का भोज है? यह मेम्ने की शादी का भोज है। यहाँ, इस अंश में 'शादी,' 'बुद्धिमान कुँवारी' और 'भोजों में उपस्थित होने' का उल्लेख किया गया है। क्या यह मानवजाति की भाषा है? परमेश्वर यह समझाने के लिए व्यावहारिक उदाहरण का उपयोग करता है कि किस प्रकार परमेश्वर के चुने हुए लोगों को भोज में उपस्थित होने के लिए परमेश्वर के सामने लाया जाएगा। अब, बुद्धिमान कुँवारियों के संबंध में, क्या फिर ऐसा कहा जा सकता है कि वे सब लोग जो प्रभु की वापसी का स्वागत करने के लिए जाते हैं वे महिलाएँ हैं? (नहीं।) कुछ पुरूष हैं और कुछ महिलाएँ हैं। तो क्यों उपमा के रूप में बुद्धिमान कुँवारियाँ उपयोग किया जाता है? यह देहधारी परमेश्वर है जो मानवजाति की भाषा का उपयोग कर रहा है। यह एक उपमा है। यदि परमेश्वर का आत्मा बोलता, तो वह इन शब्दों का उपयोग नहीं करता। वह इस भाषा का उपयोग नहीं करता। यह यीशु द्वारा बोला गया था। यीशु देहधारी परमेश्वर है। वह मनुष्य के मामलों के बारे में जानता है। उसने बहुत सी मानवीय परिस्थितियों का अनुभव किया है। इसलिए, वह स्वर्ग के राज्य में भोज में उपस्थित होने को समझाने के लिए उपयुक्त उपमा के रूप में मनुष्य के मामलों का उपयोग करता है। ऐसा करके, यह मनुष्य के लिए और अधिक समझने योग्य हो जाता है। ठीक है? (ठीक है।) अब, 'कुँवारी' का क्या अर्थ है? मनुष्य के विश्वास की शुद्धता का वर्णन करने के लिए कुँवारी का उपयोग अन्योक्ति के रूप में किया जाता है। ‘मैं परमेश्वर में विश्वास करता हूँ, मैं परमेश्वर का अनुसरण करूँगा और मैं मसीह का अनुसरण करूँगा। मैं मसीह के प्रति समर्पित रहूँगा। मेरा किसी धर्म से संबंध नहीं है और मेरा धर्मनिरपेक्ष दुनिया से संबंध नहीं है।’ यह एक बुद्धिमान कुँवारी है, ठीक है? (हाँ।) यदि आपका धर्मनिरपेक्ष दुनिया से या किसी धर्म से संबंध है, तो क्या आपको कुँवारी माना जा सकता है? (नहीं।) यदि आपकी शादी कुछ मालिकों से हो चुकी है, तो आप कुँवारी नहीं हैं। यदि आपकी केवल एक मालिक से शादी हुई है, तो आप कुँवारी हैं। अभी, जो मसीह के प्रति समर्पित हैं उन्हें कुँवारी माना जा सकता है। यदि आप केवल मसीह के प्रति समर्पित हैं और केवल मसीह से प्यार करते हैं और किसी से नहीं, तो आपको बुद्धिमान और पवित्र कुँवारी माना जा सकता है, ठीक है? (हाँ।) 'जो लोग मसीह के प्रति समर्पित हैं वे अति दुर्लभ हैं।' अनुग्रह के युग के दौरान यह ऐसा ही था। अब, राज्य के युग के दौरान, परमेश्वर लोगों का एक वर्ग बनाना चाहता है। प्रकाशितवाक्य की किताब में, यह भविष्यवाणी की गई है कि परमेश्वर 144,000 विजयी लोगों को बनाएगा। ये वे लोग हैं जो मसीह के प्रति समर्पित होते हैं। वे मसीह के सिंहासन के सामने न्याय के द्वारा शुद्ध किए जाएँगे और बिल्कुल अंत में, वे मसीह के साथ एक हो जाएँगे और बहुत नज़दीकी से मसीह का अनुसरण करेंगे। वे एक भी चरण नहीं चूकते हैं। यह विजयी लोगों का वह वर्ग है जिसे परमेश्वर अंत के दिनों में बनाएगा।"

जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (सीरीज़ 153) से

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