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यह अवश्य ज्ञात होना चाहिए कि केवल परमेश्वर के कार्य के तीन चरण ही मानवजाति को बचाने के लिए उसका पूरा कार्य हैं

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धर्मोपदेश और संगति

परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों पर उसका प्रवचन हमारे लिए यह स्पष्ट रूप से देखने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त है कि यह चरण दर चरण के आधार पर बना है, और प्रत्येक चरण घनिष्ठता से अगले से जुड़ा हुआ है। कार्य का प्रत्येक और हर एक चरण बहुत ही व्यावहारिक और उचित है, और यह कार्य के केवल तीन चरण ही हैं जो मानवजाति को बचाने का पूरा कार्य हैं, और परमेश्वर के कार्य के तीन चरण मानवजाति को बचाने के लिए उसकी प्रबंधन योजना हैं। यही कारण है कि केवल तीन चरणों को समझना ही वास्तव में परमेश्वर के कार्य को समझना है, और केवल इसी तरह से ही परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव और उसके सार को पूरी तरह समझना संभव है। इस प्रकार, हमें परमेश्वर के कार्य के हर चरण के सार और महत्व का स्पष्ट ज्ञान और समझ अवश्य होनी चाहिए, और केवल तभी हम वास्तव में पहचान सकते हैं कि केवल परमेश्वर के कार्य के तीन चरण ही मानवजाति को बचाने का पूरा कार्य हैं। परमेश्वर के कार्य के हर चरण में हम सभी स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि वह शैतान की बुरी ताक़तों के विरूद्ध युद्ध में कैसे विजयी हुआ है। मानवजाति शैतान के द्वारा गहराई तक भ्रष्ट की जा चुकी है, और उसके कार्य के हर चरण में कई लोग रहे हैं जिन्होंने उसके कार्य को बाधित और अस्तव्यस्त करने के लिए अपना अधिकतम करते हुए, शैतान, दानव की भूमिका ग्रहण की है, और परमेश्वर के कार्य को नष्ट करने का प्रयास करते हुए, उन्होंने भी परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उलझन में डाला है, फुसलाया है, नियंत्रित किया है, और उन्हें उपयोग किया है। हालाँकि, परमेश्वर सर्वशक्तिमान, बुद्धिमान परमेश्वर है, और उसने मानवजाति को छुटकारा दिलाने और बचाने के अपने कार्य को प्राप्त करने के लिए शैतान की चालबाजी को हमेशा सेवा के रूप में उपयोग किया है। अनुग्रह के युग में अपने कार्य में, उसने शैतान को सेवा करने के लिए उपयोग किया और यहूदा के विश्वासघात और प्रभु यीशु को सलीब पर चढ़वाने के माध्यम से, उसने छुटकारा दिलाने के अपने कार्य को पूरा किया। राज्य के युग में, ईसा के शत्रुओं, झूठे अग्रणियों, और सभी तरह की बुरी आत्माओं द्वारा लाए गए हंगामे, तोड़फोड़ और भ्रम के माध्यम से वह अपने चुने हुए लोगों को प्रशिक्षित करता है और उन्हें सच्चाई को समझने, शैतान को समझने, बुराई से नफ़रत करने, बड़े लाल अजगर की ओर अपनी पीठ करने, और उसके वचनों की वास्तविकता में प्रवेश करने में समर्थ होने के लिए पूर्ण बनाता है। अंत में, वह अपने चुने हुए लोगों को पूरा करता है और उन्हें राज्य में लाता है। मानवजाति को बचाने के परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को समझना बहुत अर्थपूर्ण है। न केवल हम यह देख सकते हैं कि परमेश्वर की सर्वसामर्थ्य और बुद्धि कहाँ रहती है, बल्कि इससे भी ज्यादा, हम उसके स्वभाव को और उसके पास जो है और वह जो है उसे समझ सकते हैं जो उसके कार्य के हर चरण में प्रकट होते हैं। इस तरह हमारे द्वारा वास्तव में परमेश्वर को समझने के फल मिल सकते हैं। वास्तविकता यह है, कि परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों से गुज़रने की प्रक्रिया ही परमेश्वर को समझने की प्रक्रिया है, और यह उद्धार प्राप्त करने और पूर्ण बनाए जाने के लिए लोगों के दृष्टिकोणों और जीवन स्वभावों में धीरे-धीरे बदलाव की प्रक्रिया भी है। केवल अंत के दिनों में लोगों द्वारा परमेश्वर के कार्य का अनुभव करने के बाद ही वे वास्तव में बचाए जाएँगे और पूरी तरह से परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाएँगे, ताकि वे अब और पाप और परमेश्वर का विरोध नहीं करें। इसका कारण यह है कि भ्रष्ट मानवजाति के शैतानी स्वभाव बदल दिए गए हैं और उनके पास परमेश्वर की वास्तविक समझ है। वे मानवीय अवधारणाओं और कल्पनाओं के आधार पर परमेश्वर को अब और परिभाषित और उसका विरोध नहीं करते हैं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि परमेश्वर उनकी कैसे अगुआई करता है और वह कैसे चीजों को डिज़ाइन और व्यवस्थित करता है, वे श्रद्धालु हृदय के साथ उसके सामने आज्ञाकारी होने में समर्थ होंगे। केवल ये ही लोग वास्तव में परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हैं, और जो उसके आशीषों को प्राप्त कर सकते हैं। केवल वही लोग जो वास्तव में परमेश्वर द्वारा उद्धार को प्राप्त करते हैं, परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए विश्राम में प्रवेश करने और अपने अंतिम गंतव्य को वास्तव में प्राप्त करने में समर्थ होते हैं। इस बारे में कोई संदेह नहीं है।

परमेश्वर ने अपने द्वारा मानवजाति के उद्धार में कार्य के तीन चरणों को किया है, और कार्य के इन तीन चरणों ने लोगों को उसके धार्मिक स्वभाव और उसकी बुद्धि और सर्वसामर्थ्य को सचमुच समझने दिया है, और इस तरह उसकी ओर मुड़ने और बचाए जाने दिया है। यही कारण है कि परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को समझना इतना अर्थपूर्ण है।

"धर्मोपदेशों का संग्रह—जीवन के लिए आपूर्" से "केवल परमेश्वर के कार्य के तीन चरण ही मानवजाति को बचाने के लिए उसका पूरा कार्य हैं" से

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