सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का ऐप

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क्या आप वास्तव में शेन्डोंग झाओयुआन घटना के पीछे की सच्चाई को समझते हैं?

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ही होंगचैंग (मत-आरोपण केन्द्र का निदेशक): मुझे यकीन है कि, आप सब जानते होंगे कि सरकार ने आप सबको बचाने की कोशिश में बहुत निवेश किया है ख़ास तौर से आप जैसे ईसाइयों के लिए शैक्षणिक कोर्सेस तैयार किये। आपको इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। अगर आप मेहनत से पढ़ेंगे, तो यहाँ से जल्दी जा सकेंगे। मुझे यकीन है आप समझ रहे होंगे आप एक समझदार इंसान हैं। कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा नियंत्रित दुनिया में परमेश्वर का अनुसरण करके आप कुछ नहीं कर पायेंगे। कम्युनिस्ट पार्टी, एक क्रांतिकारी, नास्तिक पार्टी है। वो परमेश्वर के अस्तित्व की या परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की इजाज़त कभी नहीं देगी। सभी जानते हैं कम्युनिस्ट पार्टी ने बहुत पहले ही ईसाई धर्म और कैथोलिक धर्म को कुपंथ मान लिया था, और ईसाई धर्मग्रंथ, पवित्र बाइबल को एक, कुपंथी किताब घोषित कर दिया था। आपकी यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, दावा करती है कि प्रभु यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में अंत के दिनों के न्याय के कार्य को करने के लिए, चीन में प्रकट होकर लौट आये हैं, इसे बरदाश्त नहीं किया जाता। क्या यह स्वाभाविक नहीं है कि सरकार इसे दबाकर उस पर बंदिश लगाये? अगर यीशु आज पैदा हुए होते और चीन में कार्य करते, तो यह और भी बड़ी वजह होती कि उन्हें सूली पर चढ़ा दिया जाए नहीं, दस नहीं सौ बार गोली मार दी जाए। आपने इस बारे में नहीं सोचा था, नहीं ना? बहुत सालों से, चीन की सरकार ने ईसाई गृह कलीसियाओं को दबाया है, और उन पर हमला किया है। उनका लक्ष्य, हमेशा से चीन को, एक नास्तिक क्षेत्र के रूप में खड़ा करना है यह पक्का करने के लिए, कि कम्युनिस्ट पार्टी, हमेशा-हमेशा सत्ता में रहे। 28 मई को शैन्दोंग में हुई जाओयुआन घटना को जैसा प्रचारात्मक घुमाव दिया गया, उस पर नज़र डालें। सभी को जानना होगा: सरकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को इजाज़त नहीं देती क्योंकि सभी गृह कलीसियाएं प्रतिबंधित हैं। बहुत-से लोगों ने जाओयुआन घटना को संदेहास्पद माना, और उन्हें शक हुआ कि पूरा मामला कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा गढ़ा गया है। सीसीपी ने एक खतरनाक क़त्ल के मामले का दोष उठाकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर मढ़ दिया। इस तरह से उन्होंने इसे दबाने के लिए, जनता का समर्थन जुटाया। फिर भी, चीन की अदालत लोक, सुनवाई के द्वारा, एक निष्कर्ष पर पहुँच पायी, जिसे पूरे चीन के अखबारों ने छापा। कम्युनिस्ट पार्टी के पास आपको दोषी घोषित करने के लिए यह सबसे अच्छा सबूत है। मुझे यकीन है, कि सरकार द्वारा उठाये गए, इस एक कदम का ज़रूर कुछ असर होगा। चांग मींगदाओ, आपके ख्याल से जाओयुआन घटना कैसे हुई थी? क्या ऐसा है कि आपको भी शक था?

चांग मींगदाओ (एक ईसाई): शैन्दोंग जाओयुआन घटना, उस बड़े धोखे ने, बहुत हलचल मचायी थी। लेकिन आपके ख्याल से कितने लोग उस खबर पर वाकई विश्वास करते हैं, जो चीन की कम्युनिस्ट मीडिया ने पेश की थी, या अदालत के आदेशों से सहमत होते हैं? वे सभी जो सीसीपी को समझते हैं वे अच्छी तरह जानते हैं कि हम तानाशाही में रहते हैं, जहां न्यायिक आज़ादी या प्रेस की आज़ादी नहीं है। यहाँ चीन में, ये सभी चीज़ें सरकार द्वारा नियंत्रित होती हैं। ये इस तानाशाही द्वारा इस्तेमाल किये जानेवाले मुखपत्र या उपाय से ज़्यादा कुछ नहीं हैं। इस सच्चाई को सब जानते हैं। शैंदोंग जाओयुआन घटना ने, लोगों को थोड़े समय तक धोखा दिया होगा, लेकिन जैसे ही सत्य का खुलासा होगा, आपके ख्याल से क्या होगा? मैंने जाओयुआन घटना की लोक सुनवाई को देखा था और उसमें पर्त-दर-पर्त असंगतियाँ थीं। संदिग्धों के शब्द कोट कर रहा हूँ: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से मेरा कोई संपर्क नहीं था।" "सिर्फ मैं और चांग फैन सच्ची सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की नुमाइंदगी करते हैं।" "सरकार जिन पर कारवाई कर रही है, वे वो सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, जिनमें चाओ वीशान विश्वास करते हैं, न कि वो सर्वशक्तिमान परमेश्वर, जिनमें हम विश्वास करते हैं।" उनके कथनों से यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की, कलीसिया के, लोग नहीं हैं। उनका सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से बिल्कुल भी संबंध नहीं है। चीन के कम्युनिस्ट जज गूंगों-बहरों जैसे क्यों हो जाते हैं, और तथ्य पर आधारित न्याय क्यों नहीं करते? वे इतनी ढिठाई से संदेहास्पद गवाहियों के खिलाफ क्यों जाते हैं, जानबूझ कर झूठ क्यों बोलते हैं और सत्य को क्यों तोड़ते-मरोड़ते हैं, और जोर देकर कहते हैं कि संदिग्ध लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्य हैं? लोग इस बात को समझते क्यों नहीं कि चीन की सरकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के खिलाफ सबूत गढ़ रही है, और उसे उत्पीड़ित करने के लिए, जनमत तैयार कर रही है? क्या ये क़ानून को कुचलने वाली हरकत नहीं है? क्या आप सफेद झूठ नहीं बोल रहे हैं? इससे बताइये किसको शक नहीं होगा?

ही होंगचैंग: आप कहते हैं कि सरकार द्वारा सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को फंसाने के लिए जानबूझ कर जाओयुआन घटना का इस्तेमाल, इस कलीसिया को दबाने के लिए जनमत तैयार करने के मकसद से किया गया था। आपकी बात बिल्कुल सही है। अगर कम्त्युनिस्ट पार्टी धार्मिक संस्थाओं को और विद्रोही अल्पसंख्यकों को दबाना चाहती है, तो उसे पहले जनमत तैयार करना होगा। इसी तरह से चीन के लोग यकीन करेंगे, कि कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा ईमानदारी से काम करती है। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो कुछ भी हासिल नहीं कर पायेंगे। क्या आप कह सकते हैं कि जाओयुआन घटना को गढ़ कर पार्टी ने गलती की थी? मुझे तो ऐसा करना ज़रूरी लगा। शुरू से ही, पार्टी ने आगे बढ़ने के लिए अपने बूते का हर काम किया था। यही तो कम्युनिस्ट पार्टी का कमाल है! लोग चाहे जितने शक्की हो जाएं, कोई फ़ायदा नहीं। यही तो ज़िंदगी है न?

चांग मींगदाओ: डायरेक्टर हे, आपने कहा कि, कम्युनिस्ट पार्टी अपना मकसद हासिल करने के लिए कुछ भी करती है। यह मैंने अपनी आँखों से देखा है। पहले जब सरकार ने, चार जून के छात्र आंदोलन, शिनज्यांग और तिब्बत के विद्रोहों को दबाने का फैसला किया, तब उन पर दोष मढ़ने के लिए उनको फंसाने के लिए झूठ झूठे दावे गढ़े गये, अफवाहें फैलायी गयीं जिसके बाद हिंसक दमन किया गया। कम्युनिस्ट पार्टी इसी तरह से मतभेद से निपटती है। मुझे, ज़रा भी हैरत नहीं है कि, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का दमन करने के एक तरीके के रूप में, उन्होंने जाओयुआन घटना को गढ़ा। लेकिन बरसों तक किये गए उनके सदस्यों के इस दमन, गिरफ्तारी और उत्पीड़न से क्या वाकई उसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से छुटकारा मिल जाएगा? बहुत पहले, यहूदी लोगों ने प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाकर परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को अपमानित किया था, और उन्हें परमेश्वर का श्राप मिला था, जिससे उन्हें दो हज़ार सालों तक पराजय झेलनी पडी। इस वजह से कि, उन्होंने परमेश्वर का जितना अंधाधुंध विरोध किया, और ईसाइयों का बेरहमी से उत्पीड़न किया, रोमन सामाज्य परमेश्वर की भेजी महामारी से तबाह हो गया। ये तथ्य हैं। क्या आपको यह नहीं पता? जिस प्रकार से चीन के कम्युनिस्ट, परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य का विरोध और उसकी निंदा करते हैं, वे परमेश्वर के दंड से कैसे बचे रह सकेंगे? सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "हमें विश्वास है कि परमेश्वर जो कुछ प्राप्त करना चाहता है उस मार्ग में कोई भी देश या शक्ति ठहर नहीं सकता है। वे जो परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं, परमेश्वर के वचन का विरोध करते हैं, परमेश्वर की योजना में विघ्न डालते हैं और उसे बिगाड़ते हैं, अंततः परमेश्वर के द्वारा दण्डित किए जाएँगे। वह जो परमेश्वर के कार्य की अवज्ञा करता है नष्ट कर दिया जाएगा; कोई भी राष्ट्र जो परमेश्वर के कार्य को अस्वीकार करता है, उसे नष्ट कर दिया जाएगा; कोई भी देश जो परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए उठता है, वह इस पृथ्वी पर से मिटा दिया जाएगा; और उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा" (वचन देह में प्रकट होता है)।

"साम्यवाद का झूठ" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

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