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सूचीपत्र

बुद्धिमान कुंवारियों को क्या पुरस्कार दिया जाता है? क्या मूर्ख कुंवारियाँ विपत्ति में पड़ जाएँगी?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

"पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण" करने का मतलब है आज परमेश्वर की इच्छा को समझना, परमेश्वर की वर्तमान अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करने में सक्षम होना, आज के परमेश्वर का अनुसरण और आज्ञापालन करने में सक्षम होना, और परमेश्वर के नवीनतम कथनों के अनुसार प्रवेश करना। केवल ऐसा व्यक्ति ही है जो पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करता है और पवित्र आत्मा की धारा में है। ऐसे लोग न केवल परमेश्वर की सराहना प्राप्त करने और परमेश्वर को देखने के लिए सक्षम हैं, बल्कि परमेश्वर के नवीनतम कार्य से परमेश्वर के स्वभाव को भी जान सकते हैं, और मनुष्य की अवधारणाओं और अवज्ञा को, मनुष्य के प्रकृति और सार को भी, परमेश्वर के नवीनतम कार्य से जान सकते हैं; इसके अलावा, वे अपनी सेवा के दौरान धीरे-धीरे अपने स्वभाव में परिवर्तन हासिल करने में सक्षम होते हैं। केवल ऐसे लोग ही हैं जो परमेश्वर को प्राप्त करने में सक्षम हैं, और जो वास्तव में सही राह को हासिल कर चुके हैं। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य से हटा दिए गए हैं, वे वो लोग हैं जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य का अनुसरण करने में असमर्थ हैं, और जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य के विरुद्ध विद्रोह करते हैं। ऐसा लोग खुले आम परमेश्वर का विरोध इसलिए करते हैं कि परमेश्वर ने नया कार्य किया है, और परमेश्वर की छवि उनकी धारणाओं के अनुरूप नहीं है—जिसके परिणामस्वरूप वे परमेश्वर का खुले आम विरोध करते हैं और परमेश्वर पर निर्णय देते हैं, जिससे वे स्वयं के लिए परमेश्वर की घृणा और अस्वीकृति उत्पन्न करते हैं। परमेश्वर के नवीनतम कार्य का ज्ञान रखना कोई आसान बात नहीं है, लेकिन अगर लोग स्वेच्छापूर्वक परमेश्वर के कार्य का अनुसरण कर पाते हैं और परमेश्वर के कार्य की तलाश कर सकते हैं, तो उन्हें परमेश्वर को देखने का मौका मिलेगा, और उन्हें पवित्र आत्मा का नवीनतम मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिलेगा। जो जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करते हैं, वे पवित्र आत्मा के प्रबोधन या परमेश्वर के मार्गदर्शन को प्राप्त नहीं कर सकते हैं; इस प्रकार, लोगों को परमेश्वर का नवीनतम कार्य प्राप्त होता है या नहीं, यह परमेश्वर की कृपा पर निर्भर करता है, यह उनके अनुसरण पर निर्भर करता है, और यह उनके इरादों पर निर्भर करता है।

वे सभी धन्य हैं जो पवित्र आत्मा की वर्तमान उक्तियों का पालन करने में सक्षम हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कैसे थे, या उनके भीतर पवित्र आत्मा कैसे कार्य किया करता था—जिन्होंने नवीनतम कार्य को प्राप्त किया है वे सबसे अधिक धन्य हैं, और जो लोग आज के नवीनतम कार्य का अनुसरण नहीं कर सकते हैं, वे हटा दिए जाते हैं। परमेश्वर उन्हें चाहता है जो नई रोशनी को स्वीकार करने में सक्षम हैं, और वह उन्हें चाहता है जो उसके नवीनतम कार्य को स्वीकार करते और जान लेते हैं। ऐसा क्यों कहा गया है कि तुम लोगों को शुद्ध कुँवारी होना चाहिए? एक शुद्ध कुँवारी पवित्र आत्मा के कार्य की तलाश करने में और नई चीज़ों को समझने में सक्षम होती है, और इसके अलावा, पुरानी अवधारणाओं को दूर करने और परमेश्वर के आज के कार्य का अनुसरण करने में सक्षम होती है। इस समूह के लोगों को, जो आज के नवीनतम कार्य को स्वीकार करते हैं, परमेश्वर ने युगों पहले ही पूर्वनिर्धारित किया था, और वे सभी लोगों में सबसे अधिक धन्य हैं। तुम लोग सीधे परमेश्वर की आवाज सुनते हो, और परमेश्वर की उपस्थिति का दर्शन करते हो, और इस तरह, समस्त स्वर्ग और पृथ्वी में, और सारे युगों में, कोई भी तुम सब से, लोगों के इस समूह से, अधिक धन्य नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" से उद्धृत

जब तुम राज्य के युग में देहधारी परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक कदम का अनुभव प्राप्त कर लोगे, तब तुम अनुभव करोगे कि अनेक वर्षों की तुम्हारी आशाएँ अंततः साकार हो गयी हैं। तुम अनुभव करोगे कि केवल अब तुमने परमेश्वर को वास्तव में आमने-सामने देखा है, केवल अब ही तुमने परमेश्वर के चेहरे को निहारा है, परमेश्वर के व्यक्तिगत कथन को सुना है, परमेश्वर के कार्य की बुद्धि की सराहना की है, और वास्तव में महसूस किया है कि परमेश्वर कितना वास्तविक और सर्वशक्तिमान है। तुम महसूस करोगे कि तुमने ऐसी बहुत सी चीज़ों को पाया है जिन्हें अतीत में लोगों ने कभी देखा या धारण नहीं किया था। इस समय, तुम संतुष्ट रूप में जान लोगे कि परमेश्वर पर विश्वास करना क्या है, और परमेश्वर के हृदय के अनुसार होना क्या है। निस्संदेह, यदि तुम अतीत के विचारों से जुड़े रहते हो और परमेश्वर के दूसरे देहधारण को अस्वीकार या इनकार करते हो, तब तुम खाली हाथ रहोगे और कुछ नहीं पाओगे, और अंततः परमेश्वर का विरोध करने के दोषी होगे। वे जो सत्य का पालन करते हैं और परमेश्वर के कार्य के प्रति समर्पण करते हैं, वे दूसरे देहधारी परमेश्वर-सर्वशक्तिमान—के नाम के अधीन आएँगे। वे परमेश्वर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन पाने में सक्षम होंगे, वे अधिक उच्चतर सत्य को प्राप्त करेंगे और वास्तविक मानव जीवन ग्रहण करेंगे। वे उस दर्शन को देखेंगे जिसे अतीत के लोगों ने कभी नहीं देखा है: "तब मैं ने उसे, जो मुझ से बोल रहा था, देखने के लिये अपना मुँह फेरा; और पीछे घूमकर मैं ने सोने की सात दीवटें देखीं, और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र सदृश एक पुरुष को देखा, जो पाँवों तक का वस्त्र पहिने, और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए था। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है" (प्रकाशितवाक्य 1:12-16)। यह दर्शन परमेश्वर के सम्पूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है, और उसके सम्पूर्ण स्वभाव की यह अभिव्यक्ति परमेश्वर के कार्य की अभिव्यक्ति भी है, जब इस समय वह देहधारी हुआ। ताड़ना और न्याय की बौछारों में, मनुष्य का पुत्र वचनों को बोलने के द्वारा अपने अंर्तनिहित स्वभाव को अभिव्यक्त करता है, और उन सबको जो उसकी ताड़ना और न्याय को स्वीकार करते हैं, मनुष्य के पुत्र के वास्तविक चेहरे को निहारने की अनुमति देता है, ऐसा चेहरा जो यूहन्ना द्वारा देखे गए मनुष्य के पुत्र के चेहरे का ईमानदार चित्रण है (निस्संदेह, यह सब उनके लिये अदृश्य होगा जो राज्य के युग में परमेश्वर के कार्यों को स्वीकार नहीं करते हैं)। मनुष्य के वचनों का उपयोग करके परमेश्वर के वास्तविक चेहरे को पूर्णरूप से व्यक्त नहीं किया जा सकता है, और इसलिये मनुष्य को अपना वास्तविक चेहरा दिखाने के लिए परमेश्वर अपने अंर्तनिहित स्वभाव की अभिव्यक्ति का उपयोग करता है। अर्थात्, उन सबने जिन्होंने मनुष्य के पुत्र के अंर्तनिहित स्वभाव का अनुभव किया है, मनुष्य के पुत्र का वास्तविक चेहरा देखा है, क्योंकि परमेश्वर अति महान है और मनुष्यों के वचनों का उपयोग करके उसे व्यक्त नहीं किया जा सकता है। एक बार जब मनुष्य राज्य के युग में परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण का अनुभव कर लेगा, तब वह यूहन्ना के वचनों का वास्तविक अर्थ जान लेगा, जो उसने दीवटों के बीच मनुष्य के पुत्र के बारे में कहे थे: "उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है।" उस समय, तुम बिना किसी संदेह के जान जाओगे कि यह साधारण शरीर जिसने बहुत से वचन कहे हैं, ही वास्तव में दूसरा देहधारी परमेश्वर है। और तुम्हें वास्तव में महसूस होगा कि तुम कितने धन्य हो, और तुम स्वयं को सबसे अधिक भाग्यशाली महसूस करोगे। क्या तुम इस आशीष को प्राप्त करने के अनिच्छुक होगे?

— "वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना से उद्धृत

मैं तुम लोगों बता दूँ, कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से उस श्रेणी के होंगे जो विनाश को झेलेगी। वे जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकार करने में अक्षम हैं, वे निश्चित रूप से नरक के वंशज, महान फ़रिश्ते के वंशज हैं, उस श्रेणी के हैं जो अनंत विनाश के अधीन की जाएगी। कई लोग मैं क्या कहता हूँ इसकी परवाह नहीं करते हैं, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ जो यीशु का अनुसरण करते हैं, कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते हुए अपनी आँखों से देखो, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते हुए देखोगे, यही वह समय भी होगा जब तुम दण्ड दिए जाने के लिए नीचे नरक में चले जाओगे। यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा होगी, और यह तब होगा जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दण्ड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के संकेतों को देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब वहाँ सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति ही होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं तथा संकेतों की खोज नहीं करते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए जाते हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे ही जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि "ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता है एक झूठा मसीह है" अनंत दण्ड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेतों को प्रदर्शित करता है, परन्तु उस यीशु को स्वीकार नहीं करते हैं जो गंभीर न्याय की घोषणा करता है और जीवन में सच्चे मार्ग को बताता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटें तो वह उसके साथ व्यवहार करें। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा" से उद्धृत

मसीह अंत के दिनों में आता है ताकि वे सभी जो सच्चाई से उस पर विश्वास करते हैं उन्हें जीवन प्रदान किया जाए। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है और यही वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वालों को अपनाना चाहिए। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और उसकी भर्त्सना करते हो, निंदा करते हो और यहां तक कि उसे पीड़ा पहुंचाते हो, तो तुम अनन्त समय तक जलाए जाते रहने के लिए निर्धारित कर दिये गए हो और तुम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे। इसी कारण से मसीह ही स्वयं पवित्र आत्मा और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर अपना कार्य सौंपा है। इसलिए मैं कहता हूँ कि अंत के दिनों में जो मसीह के द्वारा कार्य किया गया है उसे तुम स्वीकार नहीं करते हो तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। और उसका प्रतिकार पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को सहना होगा वह सभी के लिए स्वत:-स्पष्ट है। मैं यह भी कहता हूँ कि यदि तुम अंत के दिनों में मसीह का विरोध करोगे और उसे नकारोगे, तो ऐसा कोई भी नहीं है जो तुम्हारे लिए इसका नतीजा भुगत ले। इसके अलावा, आज के बाद से फिर कभी तुम्हें परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने उद्धार की कोशिश भी करते हो, तो तुम कभी भी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। क्योंकि तुम जिसका विरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, जिसको नकार रहे हो वह नन्हा-सा प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम परिणामों के बारे में जानते हो? तुमने कोई छोटी-मोटी गलती नहीं की है, बल्कि एक बहुत ही जघन्य अपराध किया है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

अंत के दिनों में, परमेश्वर देहधारी होते हैं और अपने वचन सुनाने के लिए मनुष्यों के बीच गुप्त रूप से अवतरित होते हैं, परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को करते हैं, जो लोग उनकी वाणी सुनते हैं और उनके सिंहासन के सामने लौटते हैं, उनको शुद्ध और सिद्ध करते हैं और उन्हें विजयी लोगों का समूह बनाते हैं। तब परमेश्वर भीषण आपदा लाते हैं, उन सभी को जो अंत के दिनों के परमेश्वर के न्याय को स्वीकार नहीं करते हैं, उनको शुद्ध करते हैं और ताड़ना देते हैं। इसके बाद, परमेश्वर सभी मनुष्यों के सामने प्रत्यक्ष तौर पर प्रकट होने के लिए बादलों के साथ अवतरित होंगे। यह तब पूरी तरह से प्रकाशितवाक्‍य 1:7 की भविष्यवाणी को पूरा करेगा: "देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे।" जब प्रभु बादलों के साथ अवतरित होते हैं तो क्या जिन्होंने उन्हें बींधा था वे भी उन्हें देख सकते हैं? वे कौन लोग हैं जिन्होंने उन्हें बींधा था? कुछ लोग कहते हैं कि ये वही लोग हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया था। क्या यह वास्तव में ऐसा है? क्या जिन्होंने प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया था उन लोगों को परमेश्वर ने पहले ही शापित और नष्ट नहीं कर दिया था? वास्तविकता में, उनको बींधने वाले लोग वे हैं जो, उस अवधि में जब देहधारी परमेश्वर अंत के दिनों में कार्य करने के लिए गुप्त रूप से अवतरित हुए, तब परमेश्वर की वाणी की खोज नहीं करते और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की निंदा और उनका विरोध करते हैं। उस समय, वे उस सर्वशक्तिमान परमेश्वर को देखेंगे कि जिनका उन्होंने विरोध और निंदा की है वह वास्तव में वही उद्धारकर्ता यीशु है, जिनका वे इन सभी वर्षों से बेसब्री से इंतजार करते रहे हैं। वे अपनी छाती पीटेंगे, रोयेंगे और अपने दाँत पीसेंगे। केवल बुद्धिमान कुंवारियां जो परमेश्वर की वाणी सुनती हैं प्रभु की वापसी का स्वागत करने का अवसर प्राप्त कर सकती हैं, मेमने की शादी के भोज में भाग लेने के लिए परमेश्वर के सिंहासन के सामने लायी जा सकती हैं, और परमेश्वर द्वारा एक विजयी के रूप में सिद्ध की जा सकती हैं। यह प्रकाशितवाक्य 14:4 की भविष्यवाणी को पूरा करता है, "ये वे हैं जो स्त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, पर कुँवारे हैं; ये वे ही हैं कि जहाँ कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्‍वर के निमित्त पहले फल होने के लिये मनुष्यों में से मोल लिए गए हैं।" जहाँ तक उन लोगों की बात है जो केवल इस धारणा को मानते हैं कि प्रभु बादलों के साथ अवतरित होंगे, लेकिन अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य की खोज और जांच नहीं करते हैं, उन्हें मूर्ख कुंवारी माना जाता है। खासकर वे लोग जो क्रोधावेश में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध करते हैं और उनकी निंदा करते हैं, वे अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य से उजागर किये गए फरीसी और यीशु-विरोधी हैं। वे सभी वे लोग हैं जिन्होंने परमेश्वर को फिर से सूली पर चढ़ाया है। ये सभी लोग भीषण आपदाओं में गिर जाएंगे और दंड प्राप्त करेंगे।

— "राज्य के सुसमाचार पर विशिष्ट प्रश्न और उत्तर संकलन" से उद्धृत

आज परमेश्वर का वचन फैल चुका है और इसकी गवाही दी गई है, और तुममें से कई अपने देश और क्षेत्रों से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार करने वाले पहले लोग हैं। तुम वास्तव में सबसे धन्य हो। ...सबसे पहले, तुमने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया है क्योंकि तुम देखते हो कि प्रभु यीशु वापस आ गया है, कि उसने मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारण किया है और सत्य को व्यक्त करना शुरू कर दिया है और वह अंत के दिनों में न्याय का कार्य कर रहा है, इसीलिए तुम उसे स्वीकार करते हो। इसका मतलब है कि तुम्हारा परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहण हो चुका है, तुम प्रभु से मिलने के लिए हवा में उठाए गए हो। यहाँ "हवा" का क्या अर्थ है? लोगों को प्राप्त करने के लिए सुसमाचार फैलाना और ऑनलाइन बोलना, क्या यह "हवा में" नहीं है? ये "हवा" कहाँ है? "हवा" एक सर्वनाम है और यह इस सवाल का प्रतिनिधित्व करता है कि हम स्वर्ग में हैं या पृथ्वी पर। बिलकुल शाब्दिक रूप से कहें तो, हम धरती पर हैं लेकिन हम परमेश्वर के साथ जीवन का आनंद लेते हैं, और हम परमेश्वर के वचन खाते-पीते हैं, जो कि सिंहासन से बहने वाली जीवन की नदी का पानी है, इसलिए हम ऐसे ही रहते हैं जैसे कि हम तीसरे स्वर्ग में हों। इसका वास्तविक महत्व इसमें है कि हम कहाँ हैं? हम स्वर्ग में हैं, या धरती पर? यह कहना मुश्किल है, इसलिए हम इसका वर्णन करने के लिए "हवा में" का उपयोग करते हैं। आज, तुम्हें मेमने के साथ दावत खाने के लिए, जो कि परमेश्वर के साथ दावत खाना है, परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहित किया गया है। दूसरा, तुमने अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा पूर्ण किये जाने का मौका प्राप्त किया है। यदि तुम मसीह के आसन के सामने न्याय और ताड़ना के माध्यम से शुद्ध और पूर्ण किये जाते जाते हो, तो तुम परमेश्वर की मंजूरी पाने के योग्य हो जाओगे। यह आशीर्वाद कितना महान है! हमने वो हासिल कर लिया है जिसे आज तक के इतिहास में, संत भी चाहते रहे हैं पर खोजने में विफल रहे हैं। क्या हम सबसे भाग्यशाली नहीं हैं? तीसरा, हम परमेश्वर की ताड़ना और न्याय का अनुभव कर रहे हैं, हमारे साथ काट-छाँट की जा रही है और हमें ताड़ना देकर अनुशासित किया जा रहा है। भले ही हम अपने दिल में कुछ पीड़ित होते हों, और यह शुरू में शर्मनाक महसूस हो सकता है, मगर अंत में हम कुछ-न-कुछ हासिल करेंगे, अर्थात इसके परिणाम स्वरूप हम शुद्ध हो जाएँगे, हम सत्य को समझेंगे, और हम परमेश्वर को जान लेंगे। भले ही ताड़ना से गुज़रने के दौरान हम सारी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान त्याग देते हैं, घुटने टेकते हैं, झुकते और सिसकियाँ भरते हैं, अपने पापों को स्वीकार करते और पश्चाताप करते हैं, फिर भी इस तरह की शुद्धता के एक दौर के बाद, हम बदलना शुरू कर देते हैं, हम एक असली मनुष्य के जैसे जीवन जीने लगते हैं। हम और अधिक विवेकशील हो जाते हैं, हमारा जमीर जाग जाता है, हमारी आत्मा उज्ज्वल हो जाती है, और हम परमेश्वर को देखते हैं। हम इस पथ पर पूरी तरह से यकीन करते हैं, इस पथ पर खुद को स्थापित कर लेते हैं, और हमारा मार्ग निरंतर अधिक से अधिक उज्ज्वल होता जाता है, जब तक हम अंततः पूर्ण नहीं हो जाते और विजेता नहीं बन जाते हैं। विजेता होने का क्या मतलब है? इसका मतलब बड़ी आपदा का सामना न करना है, और जब बड़ी आपदा आती है, "तेरे निकट हज़ार, और तेरी दाहिनी ओर दस हज़ार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा" (भजन संहिता 91:7)। क्या यह महान आशीर्वाद नहीं हैं? अविश्वासी और धार्मिक दुनिया के लोग आपदा में पड़ जाएँगे, और हालाँकि ऐसा लग सकता है कि हम भी आपदा में फँसे हैं, पर परमेश्वर हमारे साथ होता है, इसलिए हम पर आपदा नहीं पड़ेगी। यदि तुम वास्तव में सत्य को हासिल करते हो, तो मौत तुम्हें नहीं छुएगी। ये वचन सच हैं। सबसे बड़ा आशीर्वाद, जो अंत के दिनों में परमेश्वर का वादा है, हम पर प्रदान किया जाएगा।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति, खंड 130 से उद्धृत

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