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राज्य के युग में चीन में अपना कार्य करने के लिए परमेश्वर क्यों देहधारी बन गया?

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संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है; क्योंकि अन्यजातियों में मेरा नाम महान् है, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है" (मलाकी 1:11)।

"क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)।

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन:

कई जगहों पर, परमेश्वर ने सिनीम के देश में जीतने वालों के एक समूह को प्राप्त करने की भविष्यवाणी की है। दुनिया के पूर्व में जीतने वालों को प्राप्त किया जाता है, इसलिए परमेश्वर के दूसरे देहधारण के अवतरण का स्थान बिना किसी संदेह के, सिनीम का देश है, ठीक वहीं जहाँ बड़ा लाल अजगर कुण्डली मारे पड़ा है। वहाँ परमेश्वर बड़े लाल अजगर के वंशज को प्राप्त करेगा ताकि यह पूर्णतः पराजित और शर्मिंदा हो जाए। परमेश्वर इन गहन रूप से पीड़ित लोगों को जगाना चाहता है, उन्हें पूरी तरह से जगाना और उन्हें कोहरे से बाहर निकालना चाहता है और चाहता है कि वे उस बड़े लाल अजगर को ठुकरा दें। परमेश्वर उन्हें उनके सपने से जगाना, उन्हें बड़े लाल अजगर के सार से अवगत कराना, उनका संपूर्ण हृदय परमेश्वर को दिलवाना, अंधकार की ताक़तों के दमन से बाहर निकालना, दुनिया के पूर्व में खड़े होना, और परमेश्वर की जीत का सबूत बनाना चाहता है। केवल तभी परमेश्वर महिमा को प्राप्त करेगा। मात्र इसी कारण से, परमेश्वर उस कार्य को जो इस्राएल में समाप्त हुआ, उस देश में लाया जहाँ बड़ा लाल अजगर कुण्डली मारे पड़ा है और, प्रस्थान करने के करीब दो हजार वर्ष बाद, वह अनुग्रह के कार्य को जारी रखने के लिए पुनः देह में आ गया है। मनुष्य की खुली आँखों के लिए, परमेश्वर देह में नए कार्य का शुभारंभ कर रहा है। किन्तु परमेश्वर के लिए, केवल कुछ हजार वर्षों के अलगाव के साथ, और केवल कार्य स्थल और कार्य परियोजना में बदलाव के साथ, वह अनुग्रह के युग के कार्य को जारी रख रहा है। यद्यपि देह की छवि जो परमेश्वर ने आज के कार्य में ली है वह यीशु की अपेक्षा सर्वथा भिन्न व्यक्ति है, फिर भी वे एकही सार और मूल को साझा करते हैं, और ये एकही स्रोत से हैं।

"कार्य और प्रवेश (6)" से

भविष्यवाणियों में कहा गया है कि यहोवा का नाम गैर यहूदी राष्ट्रों में महान होगा और गैर यहूदी राष्ट्रों में यहोवा का नाम फैल जाएगा -वे ऐसा क्यों कहते? यदि परमेश्वर सिर्फ इस्राएलियों का परमेश्वर होता, तो वह केवल इस्राएल में ही कार्य करता। इसके अलावा, वह इस कार्य का विस्तार और कहीं नहीं करता और न ही वह ऐसी भविष्यवाणी करता। चूँकि उसने यह भविष्यवाणी की है, तो उसे गैर यहूदीयों, प्रत्येक देशों तथा स्थानों के मध्य में कार्य का विस्तार करना ही होगा। चूँकि उसने ऐसा कहा है, तो वह ऐसा करेगा भी।यह उसकी योजना है, क्योंकि वह स्वर्ग और पृथ्वी तथा उसमें की सभी वस्तुओं का सृजन करने वाला प्रभु है और सम्पूर्ण सृष्टि का परमेश्वर है। इससे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता कि वह अपना कार्य इस्राएल या सम्पूर्ण यहूदिया में कर रहा है, वह जो कार्य करता है वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का कार्य होता है और सम्पूर्ण मानवजाति का कार्य होता है। आज वह जो कार्य बड़े लाल अजगर के राष्ट्र में-गैर यहूदी राष्ट्र में - कर रहा है,यह अभी भी सम्पूर्ण मानवता का कार्य है। पृथ्वी पर इस्राएल उसके कार्य का आधार हो सकता है; इसी प्रकार से, चीन गैर यहूदी राष्ट्रों के मध्य में उसके कार्य का आधार हो सकता है। क्या उसने उस भविष्यवाणी को अब पूरा नहीं किया कि “यहोवा का नाम गैर यहूदी देशों में महान हो जाएगा।

"परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है" से

यहोवा का कार्य दुनिया का सृजन था, यह आरंभ था; कार्य का यह चरण कार्य का अंत है, और यह समापन है। आरंभ में, परमेश्वर का कार्य इस्राएल के चुने हुए लोगों के बीच किया गया था,और यह सभी जगहों में से सबसे पवित्र में एक नए युग का उद्भव था। कार्य का अंतिम चरण, दुनिया का न्याय करने और युग को समाप्त करने के लिए, सभी देशों में से सबसे अशुद्ध में किया जाता है। पहले चरण में, परमेश्वर का कार्य सबसे प्रकाशमान स्थान में किया गया था, और अंतिम चरण सबसे अंधकारमय स्थान में किया जाता है, और इस अंधकार को बाहर निकाल दिया जाएगा,प्रकाश को प्रकट किया जाएगा, और सभी लोगों पर विजय प्राप्त की जाएगी। जब सभी जगहों में इस सबसे अशुद्ध और सबसे अंधकारमय स्थान के लोगों पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी, और समस्त आबादी स्वीकार कर लेगी कि एक परमेश्वर है, जो सच्चा परमेश्वर है, और हर व्यक्ति सर्वथा आश्वस्त हो जाएगा, तब समस्त जगत में विजय का कार्य करने के लिए इस तथ्य का उपयोग किया जाएगा। कार्य का यह चरण प्रतीकात्मक है: एक बार इस युग का कार्य समाप्त हो गया, तो प्रबंधन का 6000 वर्षों कार्य पूरा हो जाएगा। एक बार सबसे अंधकारमय स्थान के लोगों को जीत लिया, तो कहने की आवश्यकता नहीं कि हर अन्य जगह पर भी ऐसा ही होगा। वैसे तो, केवल चीन में विजय का कार्य सार्थक प्रतीकात्मकता रखता है। चीन अंधकार की सभी शक्तियों का मूर्तरूप है, और चीन के लोग उन सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो देह के हैं,शैतान के हैं,मांस और रक्त के हैं। ये चीनी लोग हैं जो बड़े लाल अजगर द्वारा सबसे ज़्यादा भ्रष्ट किए गए हैं, जिनका परमेश्वर के प्रति सबसे मज़बूत विरोध है, जिनकी मानवता सर्वाधिक अधम और अशुद्ध है, और इसलिए वे समस्त भ्रष्ट मानवता के मूलरूप आदर्श हैं। ... मैंने हमेशा क्यों कहा है कि तुम लोग मेरी प्रबंधन योजना के सहायक हो ? यह चीन के लोगों में है कि भ्रष्टाचार, अशुद्धता, अधार्मिकता, विरोध और विद्रोहशीलता सर्वाधिक पूर्णता से व्यक्त होते हैं और अपने सभी विविध रूपों में प्रकट होते हैं। एक ओर, वे खराब क्षमता के हैं, और दूसरी ओर, उनके जीवन और उनकी मानसिकता पिछड़े हुए हैं, और उनकी आदतें, सामाजिक वातावरण, जन्म का परिवार—सभी गरीब और सबसे पिछड़े हुए हैं। उनकी हैसियत भी कम है। इस स्थान में कार्य प्रतीकात्मक है, और इस परीक्षा के कार्य के इसकी संपूर्णता में पूरा कर दिए जाने के बाद, उसका बाद का कार्य बहुत बेहतर तरीके से होगा। यदि कार्य के इस चरण को पूरा किया जा सकता है, तो इसके बाद का कार्य ज़ाहिर तौर पर होगा ही । एक बार कार्य का यह चरण सम्पन्न हो जाता है, तो बड़ी सफलता पूर्णतः प्राप्त कर ली गई होगी, और समस्त विश्व में विजय का कार्य पूर्णतः पूरा हो गया होगा। वास्तव में, एक बार तुम लोगों के बीच कार्य सफल हो जाता है, तो यह समस्त विश्व में सफलता के बराबर होगा। यही इस बात का महत्व है कि क्यों मैं तुम लोगों से एक प्रतिदर्श और नमूने के रूप में कार्यकलाप करवाता हूँ।

"परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)" से

चीनी लोगों ने कभी परमेश्वर में विश्वास नहीं किया है और कभी भी यहोवा की सेवा नहीं की है, कभी भी यीशु की सेवा नहीं की है। वे जो कर सकते हैं वह केवल दिखावापूर्ण सम्मान है, वे धूप जलाते हैं, जॉस पेपर जलाते हैं, और बुद्ध की पूजा करते हैं। वे सिर्फ मूर्तियों की पूजा करते हैं--वे सभी चरम सीमा तक विद्रोही हैं, इसलिए लोगों की स्थिति जितनी निम्न है, इससे उतना ही अधिक पता चलता है कि परमेश्वर तुम लोगों से और भी अधिक महिमा पाता है। ... अगर याकूब के वंशज चीन में, ज़मीन के इस टुकड़े पर, पैदा हुए होते, और वे तुम सब ही होते, तो तुम लोगों में किए गए कार्य का क्या महत्व होता? शैतान क्या कहेगा? शैतान कहेगा: ""वे तुम से डरा करते थे, परन्तु कोई भी लंबे समय से इसे पारित नहीं कर पाया था। हालांकि, उनके पूर्वज तुमसे डरा करते थे; उन्होंने तुम्हारे साथ शुरु से आज्ञा-पालन किया और उन्होंने तुम्हें धोखा दिया हो ऐसा इतिहास में नहीं है। बात सिर्फ इतनी है कि समय की एक अवधि के बाद इसे अब और नीचे पारित नहीं किया गया था। वे मानव जाति के सबसे कलंकित, अधम या सबसे पिछड़े नहीं हैं। उन्होंने शुरुआत से तुमको स्वीकार किया। इसे इस तरह करने का कोई महत्व नहीं है! यदि यह वास्तव में इस तरह से किया जाता है, तो इस कार्य से कौन प्रभावित होगा?"" पूरे संसार में से, चीनी लोग सबसे पिछड़े हैं। वे कम ईमानदारी के साथ निम्न दर्जे में जन्म लेते हैं, वे बोदे और सुस्त हैं, और वे अशिष्ट और अवनतिशील हैं। वे शैतानी स्वभाव से ओतप्रोत, गंदे और कामुक हैं। तुम सब में ऐसी बातें हैं। जहाँ तक इन भ्रष्ट स्वभावों की बात है, इस कार्य के पूरा होने के बाद लोगों ने उन्हें फेंक देंगे और पूरी तरह से पालन करने और परिपूर्ण बनने में वे सक्षम हो जाएँगे। केवल इस तरह के कार्य के फल को सृष्टि के बीच गवाही कहा जाता है!

"मोआब के वंशजों को बचाने का महत्व" से

अब मोआब के वंशजों पर कार्य करने का अर्थ है उन लोगों को बचाना जो सबसे गहरे अंधेरे में गिर गए हैं। यद्यपि वे शापित थे, परमेश्वर उनसे महिमा पाने का इच्छुक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शुरूआत में, उन सभी लोगों के दिलों में परमेश्वर की कमी थी—केवल इन लोगों को उनमें बदलना जो उसकी आज्ञा का पालन करते और उससे प्रेम करते हैं, सच्ची विजय है, और इस तरह के कार्य का फल सबसे मूल्यवान और सबसे ज्यादा निश्चयात्मक है। केवल यही महिमा प्राप्त कर रहा है--यही वह महिमा है जिसे कि परमेश्वर आखिरी दिनों में हासिल करना चाहता है। हालांकि ये लोग कम दर्जे के हैं, अब वे ऐसे महान उद्धार को प्राप्त करने में सक्षम हैं, जो वास्तव में परमेश्वर की ऊँचाई है। यह काम बहुत ही सार्थक है, और यह न्याय के माध्यम से है कि वह इन लोगों को जीत लेता है। वह जानबूझकर उन्हें दंडित नहीं कर रहा, बल्कि वह उन्हें बचाने के लिए आया है। यदि वह अभी भी आखिरी दिनों के दौरान इज़राइल में जीतने का काम कर रहा होता, तो वह बेकार होगा; यदि वह फलदायक भी हो, तो इसका कोई मोल न होगा या कोई बड़ा महत्व नहीं होगा, और वह सारी महिमा पाने में सक्षम नहीं होगा। वह तुम लोगों पर कार्य कर ररहा है, अर्थात् उन लोगों पर जो सबसे अंधकारमय स्थानों में गिर चुके हैं, जो सबसे अधिक पिछड़े हैं। ये लोग यह मानते नहीं हैं कि एक परमेश्वर है और वे कभी नहीं जान पाए हैं कि एक परमेश्वर है। इन प्राणियों को शैतान ने इस हद तक भ्रष्ट किया है कि वे परमेश्वर को भूल गए हैं। वे शैतान द्वारा अंधे बना दिए गए हैं और वे बिलकुल नहीं जानते कि स्वर्ग में एक परमेश्वर है। अपने दिलों में तुम सब मूर्तियों की पूजा करते हो, शैतान की पूजा करते हो, क्या तुम लोग सबसे अधम, सबसे पिछड़े लोग नहीं हो? देह से तुम लोग सबसे निम्नतम हो, किसी भी निजी स्वतंत्रता से विहीन, और तुम लोग कष्टों से भी पीड़ित हो। तुम लोग इस समाज में सबसे निम्न स्तर पर भी हो, तुम लोगों को विश्वास की स्वतंत्रता तक नहीं है। तुम सब पर कार्य करने का यही महत्व है।

"मोआब के वंशजों को बचाने का महत्व" से

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