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अनुग्रह के युग में परमेश्वर ने यहूदिया में क्यों कार्य किया?

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मैं पहली बार मनुष्यों के बीच छुटाकारे के युग के दौरान आया था। निस्संदेह मैं यहूदी परिवार के बीच आया; इसलिए परमेश्वर को पृथ्वी पर आते हुए देखने वाले सबसे पहले यहूदी लोग थे। मैंने इस कार्य को व्यक्तिगत रूप से किया उसका कारण यह था क्योंकि मैं छुटकारे के अपने कार्य में पापबलि के रूप में अपने देहधारी देह का उपयोग करना चाहता था। इसलिए मुझे सबसे पहले देखने वाले अनुग्रह के युग के यहूदी थे। वह पहली बार था कि मैंने देह में कार्य किया।

"जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है" से

इस्राएल में किए जा रहे पहले चरण की तुलना में कुछ भी अधिक प्रतीकात्मक नहीं था: इस्राएली सभी लोगों में से सबसे पवित्र और सबसे कम भ्रष्ट थे, और इसलिए इस देश में नए युग का उद्भव सर्वाधिक महत्व रखता था। ऐसा कहा जा सकता है कि मानव जाति के पूर्वज इस्राएल से आये, और यह कि इस्राएल परमेश्वर के कार्य का जन्मस्थान था। आरंभ में, ये लोग सर्वाधिक पवित्र थे, और वे सभी यहोवा की उपासना करते थे, और उन में परमेश्वर का कार्य सबसे बड़े परिणाम प्राप्त करने में सक्षम था। पूरी बाइबिल में दो युगों का कार्य दर्ज किया गया है: एक व्यवस्था के युग का कार्य था, और एक अनुग्रह के युग का कार्य था। पुराने विधान (ओल्ड टेस्टामेंट)में इस्राएलियों के लिए यहोवा के वचनों को और इस्राएल में उसके कार्यों कोदर्ज किया गया है;नये विधान में यहूदिया में यीशु के कार्य को दर्ज किया गया है। किन्तु बाइबल में कोई चीनी नाम क्यों नहीं है? क्योंकि परमेश्वर के कार्य के पहले दो हिस्से इस्राएल में किये गए थे, क्योंकि इस्राएल के लोग चुने हुए लोग थे—जिसका अर्थ है कि वे यहोवा के कार्य को स्वीकार करने वाले सबसे पहले लोग थे। वे समस्त मानवजाति में सबसे कम भ्रष्ट थे, और आरंभ में, वे परमेश्वर की खोज करने और उसका आदर करने का मन रखने वाले लोग थे। वे यहोवा के वचनों का पालन करते थे, और हमेशा मंदिर में सेवा करते थे, और याजकीय लबादे या मुकुट पहनते थे। वे परमेश्वर की पूजा करने वाले सबसे आरंभिक लोग थे, और उसके कार्य के सबसे आरंभिक विषयवस्तुथे। ये लोग संपूर्ण मानवजाति के लिए एक प्रतिदर्श और नमूना थे। वे पवित्रता और धार्मिकता के प्रतिदर्श और नमूने थे। अय्यूब,इब्राहीम,लूत या पतरस और तीमुथियुस जैसे लोग—सभी इस्राएली, और सर्वाधिक पवित्र प्रतिदर्श और नमूने थे। इस्राएल मानव जाति के बीच परमेश्वर की पूजा करने वाला सबसे आरंभिक देश था, और कहीं अन्यत्र की तुलना में अधिक धर्मी लोग यहाँ से आते थे। परमेश्वर ने उनमें कार्य किया ताकि भविष्य में वह पूरे देश में मानव जाति को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सके। उनकी उपलब्धियाँ और यहोवा की उनकी आराधना की धार्मिकता दर्ज की गई थी, ताकि वे अनुग्रह के युग के दौरान इस्राएल से परे लोगों के लिए प्रतिदर्शों और नमूनों के रूप में काम कर सकें; और उनकी क्रियाओं ने, आज के दिन तक, कई हजार वर्षों के कार्य को कायम रखा है।

"परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)" से

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