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इंसान और परमेश्वर हैं सहभागी आनंद-मिलन में

I

ब्रह्माण्ड में अपना काम शुरु कर चुका है परमेश्वर।

जागृत हैं लोग और घूमते हैं उसके काम के चहुं ओर।

जब उनके भीतर “सफर” करता है परमेश्वर,

छूटते हैं शैतान के बंधन से वो,

आज़ाद हैं अब सदा के लिये, महा-व्यथा के बंधन से वो।

लोगों में उल्लास है, परमेश्वर के दिन के आने से।

ग़म सारा मिट गया, सदा के लिये उनके दिलों से।

ग़म के बादल छँट गए हैं, बहती है ताज़ी हवा।

इंसान की निकटता की ख़ुशी से आनंदित है परमेश्वर।

II

हर चीज़ को रहता इंतज़ार, परमेश्वर के बोले वचनों का।

सबका मन हर्षित होता है, परमेश्वर जो कहता-करता है।

है सबसे ऊँचा वो फिर भी, इंसानों के संग रहता है।

कर्म उनके ज़ाहिर करते, कि धरती-आकाश सृजन परमेश्वर के।

हर चीज़ में उसका हो उत्कर्ष, जब सारे जन गुणगान करें।

आसमाँ नीला हो जाए, फूल खिलें, हरियाली बढ़ जाए।

धरती पर हर चीज़ बड़ी सुंदर हो जाए, हो जाए।

III

सुनकर उसकी वाणी को, लोग इधर-उधर हो जाएं।

उसके राज्य में लोग, भर जाते हैं ख़ुशियों से;

और फलने-फूलने लगती है ज़िंदगी उनकी।

जो चुने हुए लोग हैं परमेश्वर के, वो काम उनमें करता है,

अपने कामों पर परमेश्वर,

इन्सान की धारणा के, दाग़ नहीं लगने देता।

क्योंकि परमेश्वर अपने काम ख़ुद ही करता है।

जब काम वो ख़ुद ही करता है,

हर चीज़ नई हो जाती है, हर चीज़ का रूप बदलता है।

जब काम ख़त्म हो जाता है परमेश्वर का,

इंसान नया हो जाता है, परमेश्वर की मांगों से,

उसे होती नहीं फिर कोई व्यथा।

ख़ुशियों की आशीषों से, संसार धन्य हो जाता है।

हर चीज़ में उसका हो उत्कर्ष, जब सारे जन गुणगान करें।

आसमाँ नीला हो जाए, फूल खिलें, हरियाली बढ़ जाए।

धरती पर हर चीज़ बड़ी सुंदर हो जाए, हो जाए।

जब ख़ुशियों की आशीषों से, संसार धन्य हो जाएगा,

तो मानवता को परमेश्वर का, आशीर्वाद मिल जाएगा,

मिल जाएगा, मिल जाएगा, मिल जाएगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है