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44. मैं सभी की अगुआई स्वीकार करने के लिए राज़ी हूं

झिआंशैंग जिंझॉन्ग सिटी, सांग्ज़ी प्रदेश

कुछ समय पहले, जब भी मैं सुनती थी कि जिले के प्रचारक हमारे कलीसिया में आ रहे हैं, तो मैं थोड़ी असहजता महसूस करने लगती थी। मैं बाहरी तौर पर अपनी भावनाएं प्रकट नहीं करती थी, लेकिन मेरा दिल गुप्त विरोध से भरा हुआ था। मैंने सोचा: “अच्छा होगा कि तुम सब न आओ। अगर तुम लोग आते हो, तो कलीसिया में कम से कम मेरे साथ कार्य मत करो। अन्य, मैं प्रतिबंधित हो जाउंगी और संवाद नहीं कर पाउंगी।” बाद में, यह परिस्थिति इतनी बुरी हो गई कि मैं असल में उनके आने से नफरत करने लगी। ऐसे में भी, मैं नहीं मानती थी कि मुझमें कुछ गलत है और निश्चित रूप से, इस परिस्थिति के संदर्भ में खुद को जानने का प्रयास नहीं करती थी।

फिर एक दिन, मैं परमेश्वर के वचन का निम्न अवतरण पढ़ा: “सामंती नीति-संहिता की शिक्षा और प्राचीन संस्कृति के ज्ञान की विरासत ने लंबे समय से मनुष्य को संक्रमित किया गया है और मनुष्यों को बड़े और छोटे दुष्टों में बदल दिया है। … मनुष्य का चेहरा हत्या से भर गया है, और सभी जगहों पर, मृत्यु हवा में है। वे इस भूमि से परमेश्वर को निष्कासित करने की कोशिश करते हैं …यह परमेश्वर का सब कुछ एक झटके में मिटा देना, फिर से उसका अपमान करना और उसे मार डालना चाहता है, और उसके कार्य को ढहाने और उलट-पुलट करने का प्रयास करता है। वह कैसे परमेश्वर को समान दर्जे का मान सकता है? कैसे वह पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अपने काम में परमेश्वर के "हस्तक्षेप" को बर्दाश्त कर सकता है? कैसे उसके घिनौने चेहरे को उजागर करने के लिए वह परमेश्वर को अनुमति दे सकता है? वह कैसे परमेश्वर को अपने काम को बाधित करने की अनुमति दे सकता है? क्रोध के साथ भभक रहा यह दुष्ट कैसे पृथ्वी पर अपनी शक्ति के दरबार में परमेश्वर को शासन करने की इजाजत दे सकता है? यह कैसे स्वेच्छा से हार स्वीकार कर सकता है? इसके कुत्सित चेहरे की असलियत को उजागर किया जा चुका है, इसलिए किसी को यह पता नहीं है कि वह हँसे या रोये, और इसकी तो बात करना ही वास्तव में मुश्किल है। क्या यही इसका सार नहीं है? … राक्षसों और बुरी आत्माओं … है और परमेश्वर की इच्छा और श्रमसाध्य प्रयास को रोक दिया है, जिससे वे अभेद्य बन गए हैं। कैसा नश्वर पाप है! परमेश्वर कैसे चिंतित महसूस न करता? परमेश्वर कैसे क्रोधित महसूस नहीं करता? वे परमेश्वर के कार्य के लिए गंभीर बाधा और विरोध का कारण बनते हैं। अत्यधिक विद्रोही! यहाँ तक कि अधिक शक्तिशाली दुष्ट की ताकत पर छोटे-बड़े राक्षस भी अभिमानी हो जाते हैं और मुश्किलें पैदा करते हैं। वे स्पष्ट जानकारी के बावजूद जानबूझकर सच्चाई का विरोध करते हैं। विद्रोह के बेटे!” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “कार्य और प्रवेश (7)” से) मैंने अपनी हालिया स्थिति पर चिंतन करते हुए इस अवतरण के अर्थ पर मनन किया: मैं अपने कलीसिया में जिला के कार्यकर्ताओं का आना इतना ज्यादा नापसंद क्यों करती थी? क्यों मैं उन्हें कलीसिया में मेरे साथ कार्य करने देने के लिए राज़ी नहीं हूं? क्या मुझे इस बात की चिंता नहीं थी कि अगर वे कलीसिया आएंगे, तो उन्हें पता चल जाएगा कि मैं सिद्धांतों या परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य नहीं कर रही थी और इस मामले में फिर वे मुझसे निपटेंगे? इसके अलावा, क्या मुझे इस बात का डर नहीं था कि उनके आने से मेरी कार्य योजनाओं में व्यवधान पड़ जाएगा? क्या मुझे इस बात का डर नहीं था कि वे मुझसे बेहतर संवाद करेंगे और इस वजह से मैं अपने भाई—बहनों के दिलों में अपना विशेष दर्जा खो दूंगी? अगर वे नहीं आए होते, तो मैं अपनी इच्छानुसार ही अपनी कार्य योजनाओं पर जा सकती थी। भले ही मेरे तरीके सिद्धांत या परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप नहीं होते, लेकिन तो किसी को भी पता नहीं चलता और खास तौर पर कोई भी मुझसे नहीं निपटता या मेरी आलोचना नहीं करता। इस प्रकार, मेरे भाई—बहनों के दिलों में मेरा स्थान ज्यादा बड़ा, ज्यादा विशेष और ज्यादा स्थाई ही होगा। कलीसिया के सभी भाई—बहन मेरा आदर करेंगे, मेरी सराहना करेंगे और मेरे आदेशों का पालन करेंगे। पूरा कलीसिया मेरे आसपास घूमता रहेगा। क्या यह मेरा असल उद्देश्य नहीं था? क्या मैं अपने भाई—बहनों के दिलों से परमेश्वर को बाहर करने की षडयंत्र नहीं कर रही थी ताकि मैं उनके दिलों में अपना दर्जा बढ़ा सकूं? क्या मैं बड़े लाल अजगर की “स्वर्ग ऊंचा है और सम्राट नजर से दूर है,” “मेरे अलावा कोई राजा नहीं है” जैसी खराबियों का जीवित और सांस लेता उदाहरण नहीं थी? मानवता के ऊपर नियंत्रण करने और उस पर आधिपत्य का दावा करने के लिए, परमेश्वर को मनुष्यों के मामले में हस्तक्षेप करने, उसके ​घिनौने चेहरे को उजागर करने, उसकी योजनाओं या उसके अधिकारक्षेत्र में शासन में हस्तक्षेप करने से रोकते हुए, बड़े लाल अजगर ने पूरे बल से परमेश्वर के आगमन से लड़ाई की। इसलिए, उसने क्रूरता के साथ परमेश्वर के कार्य का विरोध किया, व्यवधान उत्पन्न किया, उसका खंडन किया और उसे नुकसान पहुंचाया। उसने यह कल्पना की थी कि, एक दिन, यह मानवजाति के दिलों से परमेश्वर को निकाल सकेगा और मनुष्य का अनंत न्यायकर्ता बनने और मानव जाति से अपनी पूजा करवाने के अपने कुत्सित उद्देश्य को पूरा कर पाएगा। मेरे अपने विचारों और बड़े लाल अजगर के कामों में क्या अंतर था? चूंकि मैं अपना खुद का दर्जा बनाए रखना चाहती थी और यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि मैं अपने हिसाब से काम कर सकूं और मेरे काम में कोई मुझे बाधित न करे, इसलिए मैं नहीं चाहती थी कि अन्य अगुआ या कार्यकता मेरे कार्य का निरीक्षण करें। मैं नहीं चाहती थी कि मेरे कलीसिया के कार्य या मेरे भाई—बहनों को संबल देने के कार्य में कोई और हस्तक्षेप करे। मैं ऐसा क्यों नहीं चाहती थी? क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं दूसरों पर नियंत्रण करना और उन पर आधिपत्य का दावा करना चाहती थी? क्या मेरी असली आकांक्षा अपने भाई—बहनों पर खुद को राजा और भौतिक शासक साबित करना नहीं थी? मैंने देखा कि बड़े लाल अजगर की गलत अहंकार और महत्वाकांक्षा की खराबी मेरे अस्तित्व की गहराई में समा चुकी थी। बड़े लाल अजगर के प्रभाव ने काफी समय से मेरे भीतर से मुझे पकड़ा हुआ था: मैं खुद अजगर जैसे द्रोही दानव जैसी ही बन गई थी। बाहरी तौर पर, मैं अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए कार्य कर रही थी, लेकिन मेरे दिल में गुप्त अभिप्राय थे। असल में, मैं सिंहासन को तोड़ना, दर्जों में उथल—पुथल मचाना और परमेश्वर के विरुद्ध एवं परमेश्वर की इच्छा के क्रियान्वयन के अवरोध में अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करना चा​हती थी। मेरी प्रकृति पूरी तरह से दुष्ट और कितनी भयावह थी! अगर परमेश्वर के वचन का यह कड़ुआ का प्रकाशन और न्याय नहीं हुआ होता, तो मुझे कभी पता ही नहीं चलता कि शैतान ने मुझे किस हद तक भ्रष्ट और परमेश्वर के विरुद्ध कर दिया था। मैं कभी भी यह नहीं जान पाती कि, मेरी आत्मा की गहराई से, एक नीच षडयंत्र पैदा हो रहा था और कि मेरी असली प्रकृति बुराई से इतनी ही गहराई तक पीड़ित थी।

तुम्हारे प्रकाशन और प्रबुद्धता के परमेश्वर का धन्यवाद, जिससे मुझे अहंकार और दुष्टता की मेरी शैतानी प्रकृति का अहसास हुआ। मैं देखती हूं कि मैं, असल में, बड़े लाल अजगर और महादूत की बेटी हूं। परमेश्वर, मैं कर्मठता से सत्य की खोज करने और बड़े लाल अजगर की खराबी के मेरी प्रकृति की पीड़ित करने के तरीके को बेहतर तरीके से समझने का संकल्प लेती हूं। इससे भी अधिक, मैं अन्य कार्यकर्ताओं और अगुओं के निरीक्षण और पर्यवेक्षण को स्वीकार करने का संकल्प लेती हूं। मैं सभी के निपटने और छंटाई को स्वीकार करूंगी। मैं सभी भक्तगणों के निरीक्षण के तहत खुद को प्रस्तुत करूंगी ताकि मैं तुम्हारे दिल को सांत्वना देने के लिए निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों को पूरा कर सकूं।

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