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विषय-वस्तु

7. आपदाओं के बीच मैंने परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव देखा

ली जिंग, बीजिंग

7 अगस्त, 2017

उस दिन, सुबह से बारिश होना शुरू हो गई थी। मैं एक भाई के घर में सभा में गई थी, इसी दौरान बारिश अधिक से अधिक तेज होती जा रही थी। दोपहर तक यह ऐसे बरसने लगी जैसे सीधे स्वर्ग से ही गिर रही हो। हमारी सभा के खत्म होने के समय तक, बारिश का पानी मेरे भाई के बरामदे में घुस गया था, लेकिन चूंकि मैं अपने परिवार के लिए चिंतित थी, इसलिए मैं अपने घर की ओर जाने के लिए संघर्ष करने लगी। आधे रास्ते तक पहुंचने पर, कुछ लोग खतरे से निकलकर भागते हुए मेरे पास आए और कहा, "क्या तुम भाग नहीं रही हो, क्या तुम अब भी घर जा रही हो?" जब मैं घर पहुंची, तो मेरे बच्चे ने मुझसे कहा, "क्या बाढ़ आपको बहा नहीं ले गई?" तब ही मुझे पता चला कि मेरे दिल में परमेश्वर नहीं था। तभी, मेरी पड़ोसी बहन के पति छत पर चढ़ गए और देखा कि हमारे घर से कुछ ही दूर के कई घर पानी में बह गए थे। जलप्रवाह और भी तीव्र होता जा रहा था, और बहन के पति ने जोर दिया कि वे अपने बच्चे को पहाड़ पर ले जाएँ, लेकिन वह नहीं गई। हम कुछ बहनों ने आपस में यह चर्चा की, कि उस बहन का पति इस प्रकार से बहस कर रहा है जैसे इसमें परमेश्वर की इच्छा शामिल हो; तब ही हम रात गुजारने के लिए पहाड़ के ऊपर स्थित एक आश्रय घर में उसके साथ चले गए। वहां, हमने उन लोगों की बातें सुनी जो उस आपदा से बचकर आए थे कि उस बाढ़ का पानी कितना भयंकर था, और कैसे लोग सभी दिशाओं की ओर चले गए; कुछ लोग छत पर चढ़ गए, कुछ बह गए, कुछ को पेड़ों ने रोक लिया...

अगले दिन मैं एक बहन से मिलने गई। उसका घर नदी के किनारे था, जिसके सामने की ओर एक बड़ी सड़क और पीछे नदी थी। उसका घर बाढ़ के पानी के मिलने के दो हिस्सों के ठीक बीच में स्थित था। जब बाढ़ आई, तो इस बहन ने परमेश्वर से प्रार्थना की, और सब कुछ उन पर छोड़ दिया। जब वह रात में गहरी नींद में सो रही थी, तो पानी उसकी पंक्ति में स्थित अन्य सभी घरों को बहा ले गया, केवल उसका और एक अन्य घर अनछुआ रह गया। मैंने सच में यह देखा कि जब व्यक्ति के पास परमेश्वर का संरक्षण होता है, तो वह अपने दिल में सहजता के साथ आराम कर सकता है।

एक बहन सामान्य मामलों के प्रभारी डीकन और मुझे खोजती हुई आई, और हम कलीसिया की सामग्रियों वाले घर की जांच करने के लिए निकल गए। चूंकि पानी पुल और सड़कों को बहा ले गया था, इसलिए हम घूमकर ही वहां पहुंच पाए थे। रास्ते में, हमने भूस्खलन और मिट्टी-चट्टान के प्रवाह से अस्त-व्यस्त, "लुटे-पिटे" गांव को देखा, जो वाकई एक दयनीय नजारा था; हर जगह केवल तबाही ही दिख रही थी। हम साथ चलते गए और आसपास देखते गए, और एक जगह देखी जहां कुछ भाइयों और बहनों के घर बह गए थे, और अन्य घर वैसे के वैसे ही सुरक्षित थे। वे घर जो बच गए थे, वे सभी उन भाइयों और बहनों के थे जिन्होंने अपने कर्तव्यों को पूरा किया था। इससे मुझे समझ में आया कि जब लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, जब वे सत्य को खोजते और अपने कर्तव्यों को पूरा करते हैं, केवल तभी उनको परमेश्वर का संरक्षण मिलता है, और वे आपदाओं से बच पाते हैं। एक गांव में, केवल दो घर ही बचे थे, एक बुजुर्ग भाई का घर, और एक अन्य। जब बाढ़ का पानी आया, तो उस बुजुर्ग भाई ने देखा कि बाढ़ उसके घर को गिराने ही वाली है, तो पहाड़ के ऊपर से वह दो बार जोर से चिल्लाया, "परमेश्वर! परमेश्वर के वचनों की मेरी किताबें अंदर हैं!" फिर उसने देखा कि चमत्कारपूर्ण ढंग से बाढ़ से उसका घर बच गया और परमेश्वर के वचनों की भी सुरक्षित बच गईं। एक बहन थी जिसका घर सभा करने का स्थान था, और वह सक्रिय रूप से अपने कर्तव्य को पूरा किया करती थी। भले ही बाढ़ का पानी उसके पूरे शरीर के ऊपर से गुजर गया, उसे जरा सी भी चोट नहीं लगी। बाढ़ उसके बच्चे को बहा ले गई, लेकिन उसे एक अविश्वासी ने पकड़ लिया और वह भी बहने से बच गया। एक बुजुर्ग बहन ने देखा कि पानी लगभग उसके घर के दरवाजे पर ही था, बाढ़ पहले ही घर के पास स्थित सब्जियों के बाग़ को बहा ले गई थी। तो उसने परमेश्वर से प्रार्थना की, और वह पानी, जिसने कई सालों से मजबूते से खड़े बांधों को भी तोड़ दिया था, वह मुड़ गया, और उसका घर सुरक्षित बच गया। ऐसी दो बहनें भी थीं, जिन्होंने सत्य को नहीं खोजा था, और बाढ़ के पानी से उनका घर भी बच गया, लेकिन प्रांगण पूरा बह गया था। एक बहन जो अपने मेजबानी के कर्तव्य से सामंजस्य नहीं बिठा पाई थी, उसने कहा था कि उसके घर को मरम्मत कराने की जरूरत है, और उसने भाइयों और बहनों को बाहर कर दिया था; परमेश्वर के वचनों की उसकी सभी किताबें बह गई थी। एक और बहन थी, जिसने हालांकि अपने कर्तव्य को पूरा किया था, यह कहा था कि "अपने दिल से मेरी ऐसा करने की इच्छा नहीं है।" इस आपदा के दौरान, वह पानी में डूब गई और मिट्टी-चट्टान के प्रवाह द्वारा निगल ली गई, और एक पत्थर ने उसके पेट में एक छेद बना दिया। वह बार-बार रो-रोकर परमेश्वर से याचना करने लगी, और पानी उसे बहाते हुए एक बड़े पेड़ के पास ले गया, जहां वह रुक गई और उसकी जान बच गई। उसका जख्म संक्रमित हो गया था, और उसे एक और ऑपरेशन करवाना पड़ा। एक और भाई था जो आनंदित होने का नाटक कर रहा था; जब कभी भी घर में कुछ करने लायक होता था, तो वह अपने कर्तव्य को पूरा नहीं करता था। इस आपदा के दौरान उसने सबसे ज्यादा कष्टों को सहा; बाढ़ ने उसके दोनों घरों को बहा दिया, और उसके पास दो निर्जन कमरे ही बचे। परमेश्वर के वचनों की किताबों में से, एक भी नहीं बची। उस भाई को यह भी पता चला कि वह परमेश्वर का प्यार है और उसने कोई दोषारोपण नहीं किया।

परमेश्वर के वचनों का भजन "परमेश्वर मनुष्य के अस्तित्व का एकमात्र आधार है" कुछ इस प्रकार है: "जब समुद्र मनुष्यों को पूर्णतः निगल लेता है, तो मैं उसे ठहरे हुए समुद्र में से बचाता हूँ और नए सिरे से जीवन जीने का अवसर देता हूँ। जब मनुष्य जीवित रहने के अपने आत्मविश्वास को खो देते हैं, तो मैं उन्हें, जीने की हिम्मत देते हुए, मृत्यु की कगार से खींच लाता हूँ, ताकि वे मुझे अपने अस्तित्व की नींव माने। जब मनुष्य मेरी अवज्ञा करते हैं, मैं उन्हें उनकी अवज्ञा में अपने को ज्ञात करवाता हूँ। मानवजाति की पुरानी प्रकृति के आलोक में और मेरी दया के आलोक में, मनुष्यों को मृत्यु प्रदान करने की बजाय, मैं उन्हें पश्चाताप करने और नई शुरूआत करने की अनुमति प्रदान करता हूँ। जब मनुष्य अकाल से पीड़ित होते हैं, तो जब तक उनकी एक भी साँस बची है, उन्हें शैतान की प्रवंचना का शिकार बनने से बचाते हुए, मैं उन्हें मुत्यु से हथिया लेता हूँ। कितनी ही बार लोगों ने मेरे हाथों को देखा है; कितनी ही बार उन्होंने मेरी दयालु मुखाकृति देखी है, मेरा मुस्कुराता हुआ चेहरा देखा है; और कितनी बार उन्होंने मेरा प्रताप देखा और मेरा कोप देखा है। यद्यपि मानव जाति ने मुझे कभी नहीं जाना है, फिर भी मैं अनावश्यक परेशानी देने के लिए उनकी कमजोरियों का लाभ नहीं उठाता हूँ। मानव जाति के कष्टों का अनुभव करके, मैं इसलिए मनुष्यों की कमजोरियों के प्रति सहानुभूति रखता हूँ। यह केवल मनुष्य की अवज्ञा, उनकी कृतघ्नता की प्रतिक्रिया स्वरूप है, कि मैं विभिन्न अंशों में ताड़ना बाँटता हूँ।मनुष्यों को मृत्यु प्रदान करने की बजाय, मैं उन्हें पश्चाताप करने और नई शुरूआत करने की अनुमति प्रदान करता हूँ।जब मनुष्य अकाल से पीड़ित होते हैं, मैं उन्हें मुत्यु से हथिया लेता हूँ।" इस आपदा के बीच, हमने परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और चमत्कार देखे, जिसने भविष्य के मार्ग पर चलने में हमारी श्रद्धा व विश्वास को और भी मजबूत कर दिया। जब परमेश्वर ने अपने महान क्रोध का प्रसार किया, तो हमने परमेश्वर का स्वभाव देखा, जिसका विरोध नहीं किया जा सकता। लोगों के विद्रोह करने, और उनकी अकृतज्ञता के कारण, परमेश्वर लोगों को विभिन्न प्रकार से ताड़ना देते हैं। हालांकि, परमेश्वर हमारी चेतना को जगाने के लिए आपदाओं का इस्तेमाल करते हैं; वे लोगों को मृत्यु नहीं देते हैं, बल्कि लोगों को पछतावा करने और नई शुरुआत करने का मौका देते हैं। इस आपदा ने हमें परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को देखने, उसका प्यार, उसका उद्धार देखने का मौका दिया, और इन सबसे भी बढ़कर इसने मुझे परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और उसका अधिकार देखने का मौका दिया। वे लोग जो पूरी ईमानदारी से सत्य को खोजते हैं, वे जो अपने कर्तव्यों को पूरा करने और खुद को परमेश्वर में लगाने के लिए इच्छुक हैं, वे परमेश्वर की देखभाल और संरक्षण पाते हैं। वे लोग जो लापरवाह हैं, जो शिकायत और विरोध करते हैं, जो अपने कर्तव्यों को पूरा करने और खुद को परमेश्वर में लगाने के लिए इच्छुक नहीं है, वे परमेश्वर की देखभाल और संरक्षण नहीं पाते हैं। यह एक कर्तव्य है जो हमारी सुरक्षा करता है! यह कर्तव्य है जो हमें आशीर्वाद देता है! भविष्य के मार्ग पर, परमेश्वर हमें सक्षम करने के लिए हमें श्रद्धा, साहस, ताकत और प्रबुद्धता दें, ताकि वे हमसे जो काम करने की उम्मीद करते हैं उसे पूरा करने के लिए हम गंभीर और अनुभवी रहें, और अपने प्रत्येक कर्तव्य में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें।

हम अपनी आंखों से देखे गए इन तथ्यों के बारे में हर किसी को बताना चाहेंगे: परमेश्वर हमारे अस्तित्व का एकमात्र आधार हैं। दुनिया में सारी प्रसिद्धि, संपदा, यश और भाग्य उड़ते बादलों की तरह से अस्थायी है। जिस क्षण बाढ़ के पानी ने मानव जीवन को निगला, मानव की जिंदगी कितनी तुच्छ और कमजोर थी। जब हमने मदद के लिए आवाज लगाई, तो केवल परमेश्वर ने ही उद्धार के लिए हाथ उठाया, और जो उनपर ईमानदारी से विश्वास करते थे उसने उन्हें मौत के संकट से बाहर निकला। भाइयों और बहनों, परमेश्वर ने हमें जो जिम्मेदारी दी है कृपया उसे पूरा करें। आइये हम अंत के दिनों में, पूरी तरह से ईमानदार बनें, और साम्राज्य के सुसमाचार का विस्तार करने के लिए अपनी खुद की क्षमता कोका उपयोग करें।