सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना

ठोस रंग

विषय-वस्तुएँ

फॉन्ट

फॉन्ट का आकार

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

0 खोज परिणाम

कोई परिणाम नहीं मिला

`

परमेश्वर के प्रेम को मैं लौटाऊंगा

I

बरसों तक ज़िंदगी के समंदर में बहा हूं।

पूरी तरह मैली आत्मा मेरी, बहुत अंदर तक दूषित हो चुका हूं।

उसकी कृपा के हाथ पहुंचे हैं मुझ तक, उसी की दया से बचा हूं।

मैं आभारी हूं, अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के धाम लौट रहा हूं।

बचा लिया है आज हालाँकि परमेश्वर ने मुझे,

बदलना है फिर भी अपना स्वभाव मुझे।

शुद्धिकरण हो या दर्द हो, परमेश्वर के प्यार को,

बिना शर्त लौटाऊंगा मैं।

II

उसके न्याय से, ताड़ना से, दिखता है अपना असली चेहरा मुझे।

दिखता नहीं है इंसान का निशान कोई,

मेरी रूह को तबाह कर दिया है शैतान ने।

बुराई के ज़माने में जी रहे हैं हम,

जब इंसान को निगल लिया है अंधेरों ने,

जब लोट रहा है पाप में इंसान, उद्धार की भोर नज़र नहीं आती।

बचा लिया है आज हालाँकि परमेश्वर ने मुझे,

बदलना है फिर भी अपना स्वभाव मुझे।

शुद्धिकरण हो या दर्द हो, परमेश्वर के प्यार को,

बिना शर्त लौटाऊंगा मैं।

III

इंसान कोशिश कर रहा है बच निकलने की,

शैतान की पकड़ मगर बेरहम है।

खो गई है तर्क-शक्ति, खो गया ज़मीर उनका,

और करने दे रहे शासन वो शैतान को।

बनके मैली आत्मा वो, सह रहे शैतान की निगाह को।

परमेश्वर के धाम को अब मुड़ गया हूं,

इंसानी राहों के जीवन में लौट आया हूं।

बचा लिया है आज हालाँकि परमेश्वर ने मुझे,

बदलना है फिर भी अपना स्वभाव मुझे।

शुद्धिकरण हो या दर्द हो, परमेश्वर के प्यार को,

बिना शर्त लौटाऊंगा मैं।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

पिछला:सहस्त्राब्दी राज्य है पास

अगला:हे प्रभु, कहाँ हो तुम?

शायद आपको पसंद आये

प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं? केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है