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मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना

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परमेश्वर के प्रेम को मैं लौटाऊंगा

I

बरसों तक ज़िंदगी के समंदर में बहा हूं।

पूरी तरह मैली आत्मा मेरी, बहुत अंदर तक दूषित हो चुका हूं।

उसकी कृपा के हाथ पहुंचे हैं मुझ तक, उसी की दया से बचा हूं।

मैं आभारी हूं, अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के धाम लौट रहा हूं।

बचा लिया है आज हालाँकि परमेश्वर ने मुझे,

बदलना है फिर भी अपना स्वभाव मुझे।

शुद्धिकरण हो या दर्द हो, परमेश्वर के प्यार को,

बिना शर्त लौटाऊंगा मैं।

II

उसके न्याय से, ताड़ना से, दिखता है अपना असली चेहरा मुझे।

दिखता नहीं है इंसान का निशान कोई,

मेरी रूह को तबाह कर दिया है शैतान ने।

बुराई के ज़माने में जी रहे हैं हम,

जब इंसान को निगल लिया है अंधेरों ने,

जब लोट रहा है पाप में इंसान, उद्धार की भोर नज़र नहीं आती।

बचा लिया है आज हालाँकि परमेश्वर ने मुझे,

बदलना है फिर भी अपना स्वभाव मुझे।

शुद्धिकरण हो या दर्द हो, परमेश्वर के प्यार को,

बिना शर्त लौटाऊंगा मैं।

III

इंसान कोशिश कर रहा है बच निकलने की,

शैतान की पकड़ मगर बेरहम है।

खो गई है तर्क-शक्ति, खो गया ज़मीर उनका,

और करने दे रहे शासन वो शैतान को।

बनके मैली आत्मा वो, सह रहे शैतान की निगाह को।

परमेश्वर के धाम को अब मुड़ गया हूं,

इंसानी राहों के जीवन में लौट आया हूं।

बचा लिया है आज हालाँकि परमेश्वर ने मुझे,

बदलना है फिर भी अपना स्वभाव मुझे।

शुद्धिकरण हो या दर्द हो, परमेश्वर के प्यार को,

बिना शर्त लौटाऊंगा मैं।

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