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देहधारी परमेश्वर की जो मानते हैं, वो ही पूर्ण बन सकते हैं

I

देहधारी परमेश्वर की मानो, वो तुम्हें पूर्ण बना देगा।

आसमां के परमेश्वर को मानोगे तो कुछ ना पाओगे।

क्योंकि आसमां का नहीं, धरती का परमेश्वर ही मानव से वादे करता है।

धरती का परमेश्वर ही दुआएं देता है।

धरती के परमेश्वर को मामूली ना समझो,

और आसमां के परमेश्वर को बड़ा मत बनाओ,

क्योंकि परमेश्वर के साथ ये अन्याय है।

आसमां का परमेश्वर ऊंचा है और अद्भुत है।

वो ग़ज़ब का समझदार है, मगर उसका वजूद नहीं है।

धरती का परमेश्वर मामूली है, मामूली उसकी सोच है।

उसके काम नहीं हैं प्रभावशाली, मामूली हैं काम और सच्चे हैं।

वो ना गर्जना के ज़रिये बात करता है, ना आंधी-तूफ़ान को बुलाता है।

इंसानों के बीच में वो रहता है, इंसान के रूप में भगवान है।

II

उस परमेश्वर को ना बढ़ाओ, ना चढ़ाओ, जिसे तुम समझते हो,

जो तुम्हारी कल्पना से मेल खाता है।

उस परमेश्वर को नीची नज़र से ना देखो,

जिसे तुम नकारते हो, जो तुम्हारी कल्पना से बाहर है।

ऐसा ना करो, ऐसा बिल्कुल ना करो।

ये इंसान की नाफ़र्मानी है, परमेश्वर के विरोध की बड़ी वजह है।

हां, यही मूल है।

हां, यही मूल है।

हां, यही मूल है।

हां, यही मूल है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है