मैंने सच्चे प्रकाश को पाया

क्यूहे जापान

मेरा जन्म एक ईसाई परिवार में हुआ था। बचपन से ही, मैंने अपने दादा—दादी के साथ कलीसिया में धर्मसमाज में हिस्सा लिया था। मेरे वातावरण के प्रभाव और परमेश्वर पर ​मेरे विश्वास के कारण, मैंने कई धर्म—पुस्तकों को गाना और विभिन्न रीतियों का अभ्यास करना सीख लिया था।

2009 में, मैं पढ़ाई करने के लिए जापान आई थी। एक बार, एक साथी विद्यार्थी के छात्रावास के कमरे में, इत्तेफाक से मेरी मुलाकात ईसाई धर्म के एक छोटे समूह के रहनुमा से हुई, जो सुसमाचार प्रसार करने आए हुए थे। मैंने सोचा: प्रोटेस्टैंटव कैथोलिक एक ही परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। ये दोनों ही प्रभु यीशु पर भरोसा करते हैं। इस वजह से, मैंने इस छोटे समूह के रहनुमा द्वारा दिए गए कलीसिया में उनके साथ सम्मिलित होने के आमंत्रण को स्वीकार कर लिया। पादरियों का प्रचार और कुछ भाइयों व बहनों को बाइ​बल के बारे में बात करते हुए सुनकर, मुझे प्रभु यीशु की जिंदगी के बारे में बातें समझ आईं। इस वजह से मुझे प्रभु पर और भी विश्वास हो गया। हालांकि, कुछ महीनों के बाद, पादरियों व प्रचारकों ने हमसे हर हफ्ते दशमांश दान करने के लिए कहा। साथ ही, हर हफ्ते हमें सुसमाचार का प्रचार करने के लिए पुस्तिकाएं बांटनी होती थी। कई बार, हम इतने थक जाते थे कि रविवार सेवा के दौरान भी झपकी लेते रहते थे। हमारी जिंदगी की दिनचर्या अब सामान्य नहीं रह गई थी। उस समय, हम में से कुछ काम व पढ़ाई दोनों ही कर रहे थे। हमें न केवल अपनी पढ़ाई के लिए भुगतान करने हेतु धन कमाना पड़ता था, बल्कि अपने दैनिक खर्चों के लिए भी धन की जरूरत थी। हमारी जिंदगी पहले से ही काफी कठिन थी, फिर भी वे चाहते थे कि हम उन्हें अपना धन व अपनी ऊर्जा दें। हम बहुत अधिक तनाव व दर्द में दबे हुए थे। धीरे—धीरे, मैंने पाया कि ये पादरी व प्रचारक असल में वे लोग नहीं हैं, जो वास्तव मेँ प्रभु की सेवा कर रहे हों। आमतौर पर, चूंकि ये लोग कलीसिया के धर्मगुरु थे, इसलिए इन्हें आध्यात्मिक जिंदगी में प्रगति करने में हमारी मदद करनी चाहिए थी। लेकिन, उन्हें हमारी जिंदगियों की कोई परवाह नहीं थी। वे हमारी व्यवहारिक समस्याओं के बारे में नहीं समझते थे। इसके स्थान पर, वे बस हमारी ऊर्जा और हमारा धन चाहते थे। उन्होंने जो कुछ भी किया वह सबकुछ अपने कलीसिया का प्रसार करने और अपनी प्रतिष्ठा व अपने प्रभाव को मजबूत करने के लिए था। इस समय तक, हमें ऐसा लगने लगा था कि हमें धोखा दिया गया है। इस वजह से, मेरे कुछ भाइयों व मैंने उस कलीसिया को छोड़ दिया।

उस कलीसिया को छोड़ने के बाद, मैंने पाया कि पर्वत की चोटी पर भी एक कैथलिक कलीसिया स्थित है। उस कलीसिया के लोग जापानी थे। मैं कई बार धर्मसमाज में शामिल हुई लेकिन मैंने महसूस किया इससे आध्यात्मिक तौर पर मुझे कोई लाभ नहीं हुआ था। इसके साथ ही, सभा में शामिल होना भी असहज था, इसलिए मैंने वह कलीसिया भी छोड़ दिया। इस प्रकार से, मैं एक दिशाहीन और उद्देश्यहीन जिंदगी जीने लगी। ... अक्टूबर 2016 तक यही सबकुछ चलता रहा। बहन लिआंग, जिनसे मैं पहले प्रतिवादी प्रोटेस्टैंट कलीसिया में मिली थी, उन्होंने अचानक ही मुझसे संपर्क किया, मेरा हालचाल पूछा और उनसे मिलने के लिए मुझे आमंत्रित किया। मैंने उस एक साल प्रोटेस्टैंट में कलीसिया में अपने बेहद निराशाजनक अनुभव के बारे में सोचा और परिणामस्वरूप, मैंने बहन लिआंग के आमंत्रण को मना कर दिया। हालांकि, बहन लिआंग ने मुझे बार—बार आमंत्रित किया और उनकी भावनाओ के प्रति सम्मान के कारण, मैंने उनसे मिलने का निर्णय लिया।

बहन लिआंग के जरिए, मैं बहन मा व बहन फैंग से मिली। एक दिन, उन्होंने मुझसे बाइबल की कई भविष्यवाणियों के बारे में बात की। उन्होंने मुझे जेहोवा परमेश्वर व प्रभु यीशु के कार्य के बारे में बताया। उनकी जानकारी बिल्कुल नई थी और उन्होंने मुझे ऐसी बातों के बारे में बताया, जिन्हें मैंने पहले कभी नहीं सुना था। मैंने उन्हें उन बुरे हालात के बारे में बताया जिनका सामना मैंने उस कलीसिया में किया था और आध्यात्मिक पोषण न पा पाने के कारण मैं इतना परेशान हो गई थी कि मैंने वहां और सभाओं में शामिल नहीं होना चाहती थी। बहन फैंग ने कहा: आपने जो अनुभव किया था वही अनुभव हमने भी किया है। आज, पूरी धार्मिक दुनिया अंधकार व वीरान स्थिति में है। इसके अंदर, परमेश्वर के लक्ष्य व सत्यता को खोजना है। वर्तमान में, हम दुनिया के अंत के दिनों में हैं। प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की थी: "अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा पड़ जाएगा" (मत्ती 24:12).धार्मिक दुनिया में इन दिनों में अधर्म बहुत ज्यादा व्याप्त हो गया है। पादरी व एल्डर प्रभु की शिक्षा का अनुसरण नहीं करते हैं और वे उनके आदेशों का पालन नहीं करते हैं। वे बस प्रचार करते हैं और अपनी प्रतिष्ठा के लिए काम करते हैं। वे हमेशा खुद की प्रशंसा करते हैं और अपना प्रचार करते हैं ताकि अन्य लोग उन्हें देखें और उनकी पूजा करें। वे अन्य लोगों से दान करवाते हैं और उनसे सुसमाचार का प्रसार कराते हैं। नाममात्र के लिए, वे कहते हैं कि उनका उद्देश्य लोगों की आत्मा को बचाना है, लेकिन असल में, वे लोगों को परमेश्वर के वचनों का अनुभव नहीं कराते हैं, न ही परमेश्वर के वचनों को कार्य में लाने के लिए लोगों की मदद करते हैं। वे बस यह चाहते हैं कि लोग उनकी आज्ञा मानें। उन्हें इस बात की लत होती है कि अन्य लोग उन्हें परमेश्वर की तरह पूजें। बहुत समय पहले उन्होंने शैतान के मार्ग पर चलना शुरू कर दिया था जो परमेश्वर का विरोधी है। उन्होंने पवित्रात्मा के कार्य को खो दिया और वे परमेश्वर द्वारा त्याग दिए गए हैं। व्यवस्था के युग के दौरान की अंतिम अवधि के बारे में सोचिए, जब मंदिर उजाड़ दिए गए थे और चोरों का अड्डा बन गए थे। पुजारी तुच्छ प्रसाद चढ़ाने लगे थे जबकि आम लोग मंदिर के अंदर धन का लेन—देन करने लगे थे और बैल, भेड़ व कबूतर बेचने लगे थे। लेकिन परमेश्वर के अनुशासन व दंड से ये लोग दंडित नहीं हुए। ऐसा क्यों हुआ? परमेश्वर की सेवा करने वाले प्रमुख पादरी, धर्म शास्त्र के लेखक व फरीसी व्यवस्था का पालन नहीं करते थे, वे कपटी व धोखेबाज लोग थे, और उन लोगों ने परमेश्वर के चुने हुए लोगों को परमेश्वर का विरोध करने के मार्ग पर चलाया था। इस वजह से परमेश्वर ने उनसे घृणा करके उन्हें त्याग दिया था और मंदिर पवित्रात्मा के कार्य को खो कर चोरों का अड्डा बन गया था। कानून द्वारा लोगों को दिए जा रहे मृत्यु दंड से बचाने के लिए, परमेश्वर ने पहली बार देह धारण किया था तथा यीशु के नाम से पापमुक्ति का कार्य किया, अनुग्रह के युग को शुरू किया और व्यवस्था के युग को खत्म किया। इसके बाद पवित्रात्मा का कार्य उन लोगों पर हस्तांतरित कर दिया गया जिन्होंने प्रभु यीशु को स्वीकार किया था। मंदिर में अब पवित्रात्मा का कार्य नहीं था। भविष्यवाणी के अनुसार, वर्तमान समय में, प्रभु यीशु वापस आ गया है वह पहले ही देहधारण कर वापस आ चुका है वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है, अंत के दिनों का यीशु है और उसने सत्य को व्यक्त करना और परमेश्वर के परिवार से आरंभ करके न्याय का कार्य करना शुरू कर दिया है। पवित्रात्मा का कार्य उन लोगों पर स्थानांतरित हो गया है जिन्होंने अंत दिनों के परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया है। चूंकि धार्मिक दुनिया ने परमेश्वर के कार्य से कदम से कदम नहीं मिलाया है और कई पादरियों व एल्डरों ने परमेश्वर के नए कार्य को दोषी ठहराया है व इसका विरोध किया है, इस वजह से परमेश्वर उनसे नफरत कर रहा है व उन्हें शाप दे रहा है। यह धार्मिक दुनिया के अंधकार व पतन का स्रोत है।

इसके बाद, उन बहनों ने परमेश्वर के वचनों का एक अवतरण पढ़ा ताकि मैं और अच्छे से समझ जाऊं। स्पष्ट तौर पर, चूंकि परमेश्वर ने एक बार फिर से नया कार्य किया है, इसलिए पवित्रात्मा का कार्य स्थानांतरित हो गया है। वे सभी संप्रदाय जिनमें पवित्रात्मा का कार्य नहीं है, वे और ज्यादा अंधकारमय हो गए हैं और उनका पतन हो गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा था: "और अन्य स्थानों पर उसका कार्य समाप्त हो जाएगा और लोगों को सच्चा मार्ग तलाशने के लिए मजबूर किया जाएगा। यह यूसुफ की तरह होगा: हर कोई भोजन के लिए उसके पास आया, और उसके सामने झुका, क्योंकि उसके पास खाने की चीज़ें थीं। अकाल से बचने के लिए लोग सच्चा मार्ग तलाशने के लिए मजबूर हो जाएँगे। सम्पूर्ण धार्मिक समुदाय गंभीर भूखमरी से पीड़ित हो रहा है और केवल परमेश्वर ही आज, मनुष्य के आनन्द के लिए हमेशा बहने वाले स्रोत को धारण किए हुए, जीवन के जल का स्रोत है, और लोग आकर उस पर निर्भर हो जाएँगे। यह वह समय होगा जब परमेश्वर के कर्म प्रकट होंगे, और परमेश्वर गौरवान्वित होगा; ब्रह्माण्ड भर के सभी लोग इस साधारण “मनुष्य” की आराधना करेंगे। क्या वह परमेश्वर की महिमा का दिन नहीं होगा?" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" से ). जब मैंने उन हालात को याद किया जो मैंने प्रोटेस्टेंट व कैथोलिक मतों में देखे थे, तो यह बात मेरे दिल में और भी सुनिश्चित हो गई कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों ने वास्तविक स्थिति की बात कही थी। उसके वचन काफी यथार्थ व सत्य हैं। पवित्रात्मा का कार्य निश्चित तौर पर स्थानांतरित हो गया है। ये प्रोटेस्टेंट हों या कैथोलिक, जो मुझे महसूस हुआ वह यह कि यह बस लोगों का दिखावटी जुनून था। जो मैंने सीखा वह बस आध्यात्मिक ज्ञान व धार्मिक सिद्धांत था। वहां मूल रूप से कोई नया प्रकाश नहीं था और न ही मैं जिंदगी में कोई आध्यात्मिक पोषण महसूस कर रही थी। ऐसे लोगों के बीच में जो सच्चे मायने में परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, कौन आध्यात्मिक पोषण नहीं पाना चाहेगा? मैंने देखा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन मेरी बेड़ियों को तोड़ने व बाइबल के रहस्यों को खोलने में सक्षम हैं। उसके वचनों ने मेरे दिल को प्रबुद्ध किया है। मेरा दिल अब बेसुध नहीं था। मैंने वाकई कई लाभ पाए हैं!

इसके बाद, बहन मा 'वचन देह में प्रकट होता है' की एक प्रति लाईं और कुछ अन्य अवरतण भी पढ़ें: "मानवजाति का प्रबंधन करने के कार्य को तीन चरणों में बाँटा जाता है, जिसका अर्थ यह है कि मानवजाति को बचाने के कार्य को तीन चरणों में बाँटा जाता है। इन चरणों में संसार की रचना का कार्य समाविष्ट नहीं है, बल्कि ये व्यवस्था के युग, अनुग्रह के युग और राज्य के युग के कार्य के तीन चरण हैं।" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" से ). "यहोवा के कार्य से ले कर यीशु के कार्य तक, और यीशु के कार्य से लेकर इस वर्तमान चरण तक, ये तीन चरण परमेश्वर के प्रबंधन की पूर्ण परिसीमा को आवृत करते हैं, और यह समस्त एक ही पवित्रात्मा का कार्य है। जब से उसने दुनिया बनाई, तब से परमेश्वर हमेशा मानव जाति का प्रबंधन करता आ रहा है। वही आरंभ और अंत है, वही प्रथम और अंतिम है, और वही एक है जो युग का आरंभ करता है और वही युग का अंत करता है।" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)" से). "वर्तमान में किए गए कार्य ने अनुग्रह के युग के कार्य को आगे बढ़ाया है; अर्थात्, समस्त छह हजार सालों की प्रबन्धन योजना में कार्य आगे बढ़ाया है। यद्यपि अनुग्रह का युग समाप्त हो गया है, किन्तु परमेश्वर के कार्य ने आगे प्रगति की है। मैं क्यों बार-बार कहता हूँ कि कार्य का यह चरण अनुग्रह के युग और व्यवस्था के युग पर आधारित है? इसका अर्थ है कि आज के दिन का कार्य अनुग्रह के युग में किए गए कार्य की निरंतरता और व्यवस्था के युग में किए कार्य का उत्थान है। तीनों चरण आपस में घनिष्ठता से सम्बंधित हैं और एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। … सिर्फ तीनों चरणों के कार्य के संयोजन को ही छह हजार सालों की प्रबन्धन योजना समझा जा सकता है।" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं" से). सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ना खत्म करने के बाद, उन्होने कहा, "सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से, हम देखते हैं कि चूंकि मानवता को शैतान ने भ्रष्ट कर दिया था, इसलिए परमेश्वर ने मानवता को बचाने के लिए कार्य करना शुरू किया था। इस कार्य को तीन चरणों में बांटा गया है: व्यवस्था के युग में यहोवा परमेश्वर का कार्य, अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु का कार्य और अंत के दिनों के राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य। व्यवस्था के युग के दौरान, यहोवा परमेश्वर ने कानून बनाए थे ताकि मनुष्य अपने पापों के प्रति जागरुक रहे। अनुग्रह के युग के दौरान, प्रभु यीशु मनुष्य को मुक्त करने के लिए सलीब पर लटक गया था। अब, अंत के दिनों के राज्य के युग में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने हमारी पापी प्रवृत्ति को सुधारने, हमारे पापों को अलग करने और हमें पूर्णत: निर्मल करने व बचाने के लिए प्रभु यीशु के पापमुक्ति के कार्य के मूलाधार पर अपने वचनों के माध्यम से न्याय का कार्य किया है। यह साक्ष्य पुष्टि करता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही यहोवा परमेश्वर का प्रकटन है जिसने कानून बनाए और मनुष्य की जिंदगी को दिशा दी। वह प्रभु यीशु के रूप में दूसरा अवतार था, जिसने सलीब पर लटककर मानवता को पापमुक्त किया था। कार्य के इन तीन चरणों के अंदर, कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैसे परमेश्वर के नाम व कार्य बदल गए हैं, लेकिन परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य कभी नहीं बदला है, जो मानवता को बचाने का प्रयोजन है। परमेश्वर का सार कभी नहीं बदलेगा। कार्य के इन तीनों चरणों में से प्रत्येक को पूर्ववर्ती चरण के आधार पर बनाया गया है। प्रत्येक चरण पिछले से गहरा व ऊंचा है। परमेश्वर के कार्य को युगों के विकास के अनुसार पूरा किया गया है। इसे मानवता की जरूरतों के आधार पर किया गया है ताकि वह हमें बेहतर तरीके से बचा व अपना सके। दूसरे शब्दों में, यहोवा परमेश्वर की व्यवस्था का कार्य, प्रभु यीशु का पापमुक्ति का कार्य और अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य, उसी परमेश्वर द्वारा अलग—अलग युगों में किए गए अलग—अलग प्रकार के कार्य हैं। उसकी खुद की योजना के अनुसार व मानवता की जरूरतों के अनुसार, परमेश्वर हमें चरण दर चरण बचा रहा है।"

इस बिंदु पर, मुझे लगा कि परमेश्वर का कार्य बहुत उत्कृष्ट, सर्वशक्तिशाली व बुद्धि पूर्ण था। मैंने उस देखभाल व परवाह को भी महसूस किया जो परमेश्वर ने, शैतान द्वारा गहराई से भ्रष्ट की गई मानवता को बचाने के लिए दिखाई है और हमारे लिए परमेश्वर के महान प्यार का भी अनुभव किया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों ने उन सत्यों व रहस्यों पर प्रकाश डाला जिनके बारे में मैंने कभी सुना भी नहीं था। मेरी पहुंच वाकई विस्तारित हो गई थी और मैंने बहुत कुछ पाया। मैं अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य का ध्यानपूर्वक परीक्षण करने का फैसला लिया।

चूंकि उस समय तक काफी देरी हो गई थी, तो हमने अपने संवाद को अगली बार मिलने पर जारी रखने का निर्णय लिया। जाने से पहले, बहन मा ने मुझे 'राज्य के सुसमाचार पर परमेश्वर के उत्कृष्ट वचन' की एक प्रति दी ताकि जब मैं घर वापस जाऊं तो परमेश्वर के कार्य का ध्यानपूर्वक परीक्षण कर पाऊं। वापस आने के बाद, मैंने उत्सुकता वश, इंटरनेट पर 'सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया' को खोजा। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं सीसीपी सरकार और धार्मिक दुनिया के लोगों द्वारा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर व उसके कलीसिया का विरोध व उसे बदनामी करने के लिए,चलाए जा रहे इतने नकारात्मक प्रचार को देखूंगी। जब मैंने इस सामग्री को देखा, तो मैं और भी निश्चित हो गई कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ही वह कलीसिया है, जिसमें सच्चे मायनों में पवित्र आत्मा का कार्य है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही वह परमेश्वर है जो प्रकट हुआ हैहैं और अंत के दिनों में कार्य करता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्राचीन काल से ही, सत्य को हमेशा ही दबाया गया है! जब मैं चीन में अपने दादा—दादी के साथ धर्मसमाज में जाया करती थी, तो मुझे भी सीसीपी सरकार का उत्पीड़न झेलना पड़ता था। हमें छिप—छिप कर इन धर्मसमाजों में शामिल होना पड़ता था। सीसीपी सरकार वाकई शैतान है! ये एक नास्तिक व्यवस्था है। वे सत्य और परमेश्वर से सबसे ज्यादा नफरत करते हैं। तो, वे जिसके विरोध में हैं और जिसे दबाते हैं, वही संभवत: सच्चा मार्ग व सच्चा कलीसिया है। बाद में एक धर्मसमाज के दौरान, मैंने यह बहन फैंग व अन्य को बताया। उन्होंने मुझे एक अद्भुत एपिसोड दिखाया, 'प्रलोभन के जाल से बाहर निकलो' शीर्षक के सुसमाचार वीडियो में 'धोखे से जागना'। मुख्य किरदार प्रार्थना कर रहा था, "...लेकिन मुझे समझ नहीं आता, यदि चमकती पूर्वी बिजली ही सच्चा मार्ग है, तो सीसीपी सरकार इसका इतना कड़ा विरोध क्यों करेगी? क्यों धार्मिक अगुआ भी क्रोधावेश में इसका विरोध करेंगे?"

इस वीडियो में, एक भाई ने उत्तर दिया, "बाइबल कहती है, 'सारा संसार उस दुष्‍ट के वश में पड़ा है।' (1 यूहन्ना 5:19)। प्रभु यीशु ने यह भी कहा था: 'इस युग के लोग बुरे हैं' (लूका 11:29)। इस स्थिति में, किस हद तक दुनिया अंधकारमय व बुरी है? अनुग्रह के युग के दौरान, मानवता को पापमुक्त करने के लिए, देहधारी प्रभु यीशु को उस समय की धार्मिक दुनिया व शासकों ने सलीब पर लटका दिया। अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर, जो सत्य को व्यक्त करने और मानवता का निर्णय लेने आया है, वह भी धार्मिक दुनिया और बड़े लाल अजगर की राजनीतिक व्यवस्था के दबाव व बदनामी का सामना कर रहाहै हैं और इस दुनिया द्वारा नकार दिया गया है। यह प्रभु यीशु के वचनों को सिद्ध करता है: 'क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ।' (लूका 17:24-25)। प्रभु यीशु की यह भविष्यवाणी अंतत: पूरी हो गई है। हर वह व्यक्ति जो परमेश्वर के प्रकटन के लिए लालायित है उसे यह साफ तौर पर देखना चाहिए कि परमेश्वर काफी समय पहले ही वापस आ चुका हैऔर वह अंत के दिनों में न्याय का कार्य करने की प्रक्रिया में हैं। प्रभु यीशु की भविष्यवाणी भी पहले ही पूरी हो चुकी है। क्या यह संभव है कि हम सत्य को साफ तौर पर नहीं देख पा रहे हैं?"

अन्य गवाह ने बोलना जारी रखा: "भाइयो व बहनो, यह नास्तिक राजनीतिक व्यवस्था और धार्मिक दुनिया के ज्यादातर अगुआ शैतानी ताकतेंहैं जो परमेश्वर और सत्य से नफरत करते हैं। प्रभु यीशु को सलीब पर लटकाया गया था, इस बात से इसकी पुष्टि भी हो गई है। इसी वजह से सच्चे मार्ग को हमेशा ही नास्तिक राजनीतिक व्यवस्था और धार्मिक दुनिया की अस्वीकृति व कठोर विरोध का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, वे सभी जो सच्चे मार्ग का प्रसार करते हैं और सत्य को अभ्यास में लाते हैं उन्हें इनके द्वारा फंसाया व पीड़ित भी किया जाएगा। जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा था:, 'यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो कि उसने तुम से पहले मुझ से बैर रखा। यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रेम रखता; परन्तु इस कारण कि तुम संसार के नहीं, वरन् मैं ने तुम्हें संसार में से चुन लिया है, इसी लिये संसार तुम से बैर रखता है।' (यूहन्ना 15:18-19)। यही मुख्य कारण है कि इतनी पीढ़़ियों बाद भी, वे लोग जो सत्य के मार्ग को स्वीकार करते हैं और सच्च परमेश्वर का अनुसरण करते हैं उनकी संख्या बहुत ही कम है, जो सत्य को प्यार करते हैं और सत्य को अपनाते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग सत्य के मार्ग का निरीक्षण करने की हिम्मत नहीं करते हैं और इस वजह से परमेश्वर द्वारा उद्धार का मौका गंवा देते हैं क्योंकि वे शैतानी ताकतों का अनुसरण करते हैं या उत्पीड़ित किए जाने से डरे हुए होते हैं। इसी वजह से प्रभु यीशु ने पहले ही चेतावनी दे दी थी: 'सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और सरल है वह मार्ग जो विनाश को पहुँचाता है; और बहुत से हैं जो उस से प्रवेश करते हैं। क्योंकि सकेत है वह फाटक और कठिन है वह मार्ग जो जीवन को पहुँचाता है; और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं।' (मत्ती 7:13-14)।" जब मैंने वीडियो में ये चीजें देखीं, तो मुझे और भी विश्वास हो गया कि सीसीपी सरकार जिसे सताती है व अपराधी ठहराती है, वह ही असल में सत्य का मार्ग है। यह बात सुनिश्चित है।

धर्मसमाज व अन्वेषण की एक अवधि के बाद, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों और भाइयों व बहनों के साझा करने व संवाद से मैं अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य को और गहराई से समझने लगी। मैंने देहधारण करने, उद्धार करने और पूर्ण उद्धार, मानवता को संभालने का परमेश्वर का उद्देश्य, मानवता का अंत व मंजिल और अनंत जीवन के मार्ग के आरंभ से संबंधित सत्य को भी समझ गई थी। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने जो सत्य व्यक्त किया है वह बहुत ज्यादा है। अपने दिल से, मैंने माना कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में निश्चित तौर पर प्रभु यीशु फिर से आया है। मैं पूरी खुशी से अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार किया है।

मैं हर रोज प्रार्थना करने और परमेश्वर के वचनों को पढ़ने में लीन हो गई हूं। समय—समय पर मैंने जीवन में प्रवेश करने से संबन्धित धर्मोपदेश व संवाद सुने और परमेश्वर के वचनों के भजनों को भी सुना और मैंने सुसमाचार के विडियो भी देखें। हर हफ्ते मैं, अपने भाइयों व बहनों के साथ धर्मसमाज करती और सक्रिय रूप से सुसमाचार का प्रसार करती और उनके साथ मिलकर परमेश्वर की गवाह देती। मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी इस समय बहुत खुशहाल है और मेरे आध्यात्मिक जीवन पोषण प्राप्त कर रहा है और यह आनंदमय हो गया है। अंतत:, मैं सच्चे कलीसिया में लौट आई हूं और मैंने अपना सच्चा 'परिवार' पा लिया है। बीते दिनों में, मैं जिस कलीसिया में जाया करती थी वहां ऐसे पादरी व पुजारी थे जिनसे मुख़ातिब होना पड़ता था। लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में, मेरे भाई, बहन व मैं, हम सभी परमेश्वर का सम्मान महानतम सत्ता के रूप मेँ करते हैं। एक—दूसरे के साथ हमारा संबंध हमारी हैसियत के अनुसार तय नहीं किया जाता है। इन धर्मसमाजों के दौरान कोई नियम या धार्मिक रीति—रिवाज भी नहीं हैं। आप अपनी खुद की जरूरत व समय के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं। कोई भी आपको प्रतिबंधित नहीं करेगा न ही जोर देगा। हर कोई इसी बारे में संवाद करता है कि एक ईमानदार व्यक्ति बनने के लिए क्या करें, स्वच्छता व उद्धार पाने के लिए अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन कैसे लाएं, परमेश्वर के प्रेम को लौटाने और परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए अपने कर्तव्यों को कैसे पूरा किया जाए, आदि। अचेतन रूप से, परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन में, मैंने अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन लाना और परमेश्वर के वचनों के अनुसार चीजों को देखना शुरू कर दिया; मुझे इस बात की भी कुछ समझ आ गई और यह जानने लगी कि समाज के प्रवाह के बुरे सार को कैसे पहचाना जाए और वे माध्यम व तरीके भी जिनसे शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करता है।इसके बाद, मैंने कभी वीडियो गेम नहीं खेला न ही मैंने केटीवी देखने में अपना समय बर्बाद किया। जब भी मेरे पास समय होता, मैं परमेश्वर के वचनों को पढ़ती या फिर मैं संवाद के लिए अपने भाइयों व बहनों को एकत्रित करती जहां हम भजन गाते और परमेश्वर की वंदना करते। हर दिन भरपूर था। अब मैं और खाली व असहाय महसूस नहीं किया करती थी। बल्कि, मैं अपने जीवन के लक्ष्य को लेकर स्पष्ट हो गई थी। मैं जानती थी कि इसका अर्थ परमेश्वर के समक्ष अपने खुद के कर्तव्यों को पूरा करके और उनकी एक रचना के रूप में परमेश्वर के लिए जीकर स्थापित होता है। मुझे जिंदगी के उचित मार्ग पर चलने हेतु मार्गदर्शन देने के लिए मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आभारी हूं। मैं अभी से अंत तक सभी अधिकारों, प्रतिष्ठा व वंदना को उस एक सच्चे परमेश्वर के चरणों में प्रस्तुत करती हूं। आमीन!