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परमेश्वर की आवाज़ सुनें और प्रभु यीशु की वापसी का स्वागत करें!

अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

पश्चिम की सभी शाखाओं को मेरी आवाज़ सुननी चाहिएः

अतीत में, क्या तुम लोग मेरे प्रति निष्ठावान रहे हो? क्या तुम लोगों ने मेरे परामर्श के उत्कृष्ट वचनों का पालन किया है? क्या तुम लोगों के पास ऐसी आशाएँ हैं जो वास्तविक हैं और अस्पष्ट और अनिश्चित नहीं हैं। मनुष्य की वफादारी, उसका प्रेम उसकी निष्ठा—जो कुछ मुझ से आता है उसके अलावा और कुछ नहीं है, जो कुछ मेरे द्वारा प्रदान किया जाता है उसके अलावा और कुछ नहीं है। मेरे लोगो, जब तुम लोग मेरे वचनों को सुनते हो, तो क्या तुम लोग मेरी इच्छा को समझते हो? क्या तुम लोग मेरे हृदय को देखते हो? अतीत में, जब तुम लोग सेवा के पथ पर यात्रा कर रहे थे, तो तुम लोग उतार-चढ़ाव से होकर गुज़रे थे, तुम लोगों ने प्रगतियों और असफलताओं का सामना किया था, और ऐसे समय भी आए थे जब तुम लोग नीचे गिरने के ख़तरे में थे और यहाँ तक कि मुझसे विश्वासघात करने वाले थे; लेकिन क्या तुम लोग जानते थे कि हर घड़ी मैं हमेशा तुम लोगों को बचाने के कार्य में लगा हुआ था? यह कि तुम लोगों को बुलाने और बचाने के लिए हर पल मैं हमेशा आवाज़ लगा रहा था? तुम लोग कितनी बार शैतान के फन्दों में गिरे हो? कितनी बार तुम लोग मनुष्यों के प्रलोभनों में उलझे हो? और फिर, तुम लोग कितनी बार, अपने आप को त्यागने में असफल होते हुए, एक दूसरे के साथ कभी न खत्म होने वाले झगड़े में पतित हुए हो? कितनी बार तुम लोगों के शरीर मेरे घर में रहे हैं परन्तु तुम लोगों के हृदय कहाँ थे कौन जानता है? तथापि, कितनी बार तुम लोगों को सँभालने के लिए मैंने अपना बचाने वाला हाथ फैलाया है; कितनी बार मैंने दया के कण तुम लोगों के बीच फेंके हैं; कितनी बार मैं तुम लोगों के दुःख की दयनीय दशा को देखना सहन करने में असमर्थ रहा हूँ? कितनी बार ... क्या तुम लोग नहीं जानते हो?

परन्तु आज, तुम लोगों ने, मेरी देखरेख में, आख़िरकार सभी कठिनाईयों पर विजय पाई है और मैं तुम लोगों के साथ-साथ आनंदित हूँ; यह मेरी बुद्धि का मूर्त रूप लेना है। तथापि, इसे अच्छे से स्मरण रखो! तुम लोगों में से कौन नीचे गिरा है जबकि तुम मज़बूत बने रहे? तुम में से कौन है जो कभी भी दुर्बलता के क्षणों के बिना दृढ बना रहा है? मनुष्यों में से, किसने किसी भी ऐसे आशीष का आनंद उठाया है जो मुझ से नहीं आया था? किस ने किसी भी ऐसे दुर्भाग्य का अनुभव किया है जो मेरे से नहीं आया था? क्या ऐसा हो सकता है कि वे सभी जो मुझ से प्रेम करते हैं केवल आशीष ही प्राप्त करते हैं? क्या ऐसा हो सकता था कि दुर्भाग्य अय्यूब के ऊपर इसलिए पड़ा क्योंकि वह प्रेम करने में असफल हुआ था बल्कि इसके बजाय उसने मेरा विरोध किया था? क्या ऐसा हो सकता था कि पौलुस मेरी उपस्थिति में वफादारी के साथ मेरी सेवा इसीलिए कर सका था क्योंकि मुझ से प्रेम करने में सचमुच में समर्थ था? यद्यपि तुम लोग मेरी गवाहियों को कस कर थामे रहे, किन्तु क्या तुम में से कोई भी ऐसा है जिसकी गवाही, शुद्ध सोने के समान, अशुद्धताओं से मिलावट रहित हो? क्या मनुष्य विशुद्ध वफादारी में सक्षम है? यह कि तुम लोगों की गवाही मुझे आनंदित करती है यह तुम लोगों की "वफादारी" से टकराव नहीं करती है, क्योंकि मैंने कभी भी किसी से ज़्यादा की माँग नहीं की है। मेरी योजना के मूल अभिप्राय से दूर होने से, तुम सभी लोग "मामूली की वस्तु—असंतुष्ट" हो जाओगे। क्या यह इस बात एक उदाहरण नहीं है जो "दया के कण बिखेरने" के बारे में मैंने तुम लोगों से कहा था? क्या जो तुम लोग देखते हो वह मेरे द्वारा उद्धार नहीं है?

तुम सभी लोगों को अपने मन में विचार करना चाहिए: मेरे घर में वापस आने के बाद, क्या कोई ऐसा है, जिसने अपने नफा-नुकसान पर विचार नहीं करते हुए, मुझे उस तरह से जान लिया है जिस तरह से पतरस ने जान लिया था? तुम लोगों ने बाइबल को सतही तौर पर अच्छी तरह से समझ लिया, किन्तु क्या तुमने उसके सार को आत्मसात किया? फिर भी, तुम स्वयं को वास्तव में छोड़ने से इनकार करते हुए, अभी भी अपनी "पूँजी" को पकड़े हुए हो। जब मैं कोई कथन कहता हूँ, जब मैं तुम लोगों से आमने-सामने बात करता हूँ, तो तुम लोगों में से किसने जीवन के उन वचनों को प्राप्त करने के लिए कभी बंद पुस्तक को नीचे रखा है जिन्हें मैंने प्रकट किया है? तुम लोग मेरे वचनों के लिए कोई सम्मान नहीं रखते हो, न ही तुम लोगों को वे अच्छे लगते हैं। बल्कि, तुम लोग अपनी स्वयं की स्थिति को बनाए रखने के लिए अपने शत्रुओं पर दागने के लिए मेरे वचनों को मशीनगन की तरह उपयोग करते हो; मुझे जानने के लिए तुम लोग अल्पतम अंश में भी प्रयास नहीं करते हो। तुम लोगों में से हर कोई किसी अन्य पर हथियार तानता है, तुम सभी लोग "निःस्वार्थ" हो, सभी लोग हर स्थिति में "दूसरों के लिए विचार करते हो"; क्या यह बिलकुल वही नहीं हैं जो तुम कल कर रहे थे? और आज? तुम लोगों की "वफादारी" कुछ स्तर ऊपर हो गई है, तुम लोग थोड़ा और अनुभवी हो गए हो, थोड़ा और परिपक्व हो गए हो, और इसके कारण, मेरे प्रति तुम्हारा "भय" कुछ-कुछ बढ़ गया है, और कोई भी "बिना सोचे-विचारे कार्य करने का साहस" नहीं करता है। तुम लोग क्यों निरंतर निष्क्रियता की स्थिति में विद्यमान रहते हो? ऐसा क्यों है कि तुम लोगों में सकारात्मक पहलू हमेशा कहीं भी नहीं जाते हैं? आह, मेरे लोगो! अतीत बहुत पहले बीत चुका है; तुम्हें उस से अब अवश्य और चिपके नहीं रहना चाहिए। अपनी कल की ज़मीन पर खड़े हो कर, आज तुम्हें अपनी ईमानदार निष्ठा मुझे देनी चाहिए, और इस से भी बढ़कर कल तुम्हें मेरे लिए अच्छी गवाही देनी चाहिए, और तुम भविष्य में उत्तराधिकार में मेरे आशीर्वादों को प्राप्त करोगे। यही तुम लोगों को समझना चाहिए।

यद्यपि मैं तुम लोगों के सामने उपस्थित नहीं हूँ, फिर भी मेरा आत्मा अवश्य तुम लोगों को अनुग्रह प्रदान करेगा। मैं आशा करता हूँ कि तुम लोग मेरे आशीर्वाद को सँजो कर रखोगे और, इस पर भरोसा करते हुए, अपने आप को जानने में समर्थ होगे। इसे अपनी पूँजी के रूप में मत मानो; बल्कि, जो तुम लोगों में अभाव है उसे मेरे वचनों के भीतर से भर लो, और इससे अपने सकारात्मक अवयवों को प्राप्त करो। यही सन्देश मैं तुम लोगों को वसीयत में दे रहा हूँ!

28 फरवरी 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन

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