अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

1. जब से लोगों ने जीवन के सही मार्ग पर चलना शुरू किया, ऐसी कई चीजें हैं जिनके बारे में वे अस्पष्ट रहेहैं। वे परमेश्वर के कार्य के विषय में तथा उन्हें कितना कार्य करना चाहिए,इस विषय में पूर्ण रीति से भ्रम में हैं। एक ओर, यह उनके अनुभव की कमी के कारण और उनकी ग्रहण करने की क्षमता सीमित होने के कारण है; दूसरी ओर, यह इसलिए है कि परमेश्वर के कार्य ने लोगों को अभी तक इस अवस्था में नहीं पहुँचाया है। इसलिए, हर कोई अधिकांश आत्मिक विषयों के बारे में अस्पष्ट है। न केवल तुम लोग इस बारे में अस्पष्ट हो कि तुम्हें किस में प्रवेश करना चाहिए; बल्कि तुम लोग परमेश्वर के कार्य के बारे में भी अनजान हो। यह तुम्हारे भीतर केवल कमियों की बात नहीं है: यह उन सभी का बहुत बड़ा दोष है जो धार्मिक जगत से संबंध रखते हैं। इसका रहस्य यहाँ छिपा हुआ है कि क्यों लोग परमेश्वर को नहीं जानते, और इसलिए यह दोष उन सभी में आम कमी है जो परमेश्वर को खोजते हैं। किसी ने भी परमेश्वर को कभी नहीं जाना, न ही उसका सच्चा चेहरा कभी देखा है। यही कारण है कि परमेश्वर का कार्य इतना कठिन बन जाता है जैसे किसी पहाड़ को हटाना या समुद्र को खाली करना। परमेश्वर के कार्य के लिए कितने लोगों ने अपना जीवन बलिदान किया है; उसके कार्य के कारण कितने लोगों को निकाल दिया गया है; उसके कार्य के कारण कितने लोगों को दर्दनाक मृत्यु सहनी पड़ी; कितने लोग अपनी आँखों में परमेश्वर के लिए प्रेम के आंसू लेकर अन्यायपूर्वक मरे; कितनों को क्रूरता के साथ अमानवीय सताव सहना पड़ा? क्या ये त्रासदियाँ लोगों में परमेश्वर का ज्ञान कम होने के कारण नहीं हुईं? कैसे कोई ब्यक्ति जो परमेश्वर को नहीं जानता उसके सम्मुख आने का साहस कर सकता है? कोई व्यक्ति जो परमेश्वर पर विश्वास करता है और फिर भी उसे सताता है, वह उसके सम्मुख आने का साहस कैसे कर सकता है? यह केवल धार्मिक जगत में रहने वालों की ही कमियाँ नहीं हैं, बल्कि तुम लोगोंमें और उन में साधारणतः पाई जाती हैं। लोग परमेश्वर को जाने बिना उस पर विश्वास करते हैं; यही कारण है कि वे अपने हृदयों में परमेश्वर को आदर नहीं देते, और अपने हृदयों में उससे नहीं डरते। ऐसे भी लोग हैं, जो बड़े दिखावे के साथ इस दिशा में अपनी ही कल्पना द्वारा कार्य करते हैं, और अपनी ही मांगों और व्यर्थ इच्छाओं के अनुसार परमेश्वर का कार्य करते हैं। बहुत लोग परमेश्वर को बिना आदर दिए अपनी ही इच्छा के पीछे जाकर असभ्य लोगों की तरह व्यवहार करते हैं। क्या ये लोगों के स्वार्थी हृदयों का सटीक उदाहरण नहीं हैं? क्या यह लोगोंमें धोखे की बहुतायत को प्रकट नहीं करता?

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (1)" से

2. निःसंदेह लोग बहुत ही बुद्धिमान हो सकते हैं, परंतु कैसे उनके वरदान परमेश्वर के कार्य का स्थान ले सकते हैं? लोग परमेश्वर के बोझ की परवाह वास्तव मेंकर सकते हैं, परंतुवे बहुत ही स्वार्थपूर्ण व्यवहार नहीं कर सकते। क्या लोगों के कार्य वास्तव में दैवीय हैं? क्या कोई सकारात्मक रूप से आश्वस्त हो सकता है? परमेश्वर कीगवाही देने के लिए और उसकी महिमा को प्राप्त करने के लिए परमेश्वर एक अपवाद को कर रहा है और लोगों को खड़ा कर रहा है; वे कैसे इसके योग्य हो सकते हैं? परमेश्वर का कार्य अभी बस शुरू हुआ है, उसके वचन अभी बोले जाने शुरू हुए हैं। इस समय, लोग अपने बारे में अच्छा महसूस करते हैं; क्या यह निरादर को आमंत्रित करना नहीं होगा? वे बहुत कम समझते हैं। यहाँ तक कि ऊंचे दर्ज़े के सिद्धांतवादी, उच्च श्रेणी के वक्ता भी परमेश्वर की बहुतायत का वर्णन नहीं कर सकते-तो तुम लोग कितना कर सकते हो? तुम लोगों ने अपना मूल्य स्वर्ग से अधिकनहीं समझा होता, बल्कि स्वयं को उन विवेकी लोगों से भी कम समझा होता जो परमेश्वर से प्रेम करने का प्रयास करते हैं। यही मार्ग है जिसके द्वारा तुम लोगों को प्रवेश करना है: स्वयं को दूसरों से छोटा समझना। स्वयं को इतना ऊंचा क्यों समझना है? स्वयं को इतना अधिक बड़ा क्यों समझना है? जीवन की लंबी यात्रा में, तुमलोगों ने केवल कुछ पहले कदम उठाए हैं। तुम लोग परमेश्वर का सिर्फ हाथ देखते हो, न कि पूरे परमेश्वर को। क्योंकि तुम लोगों में बहुत कम बदलाव हुए हैं, इसलिए यह तुम लोगों को योग्य बनाता है ताकि तुम लोग परमेश्वर का कार्य अधिक देख सको, यह खोज सको कितुम लोगों को किस में प्रवेश करना है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (1)" से

3. सच्चाई तो यह है, मनुष्य परमेश्वर की सारी सृष्टि के क्रम में सबसे छोटा है। यद्यपि वह सब वस्तुओं का स्वामी है, फिर भी उनमें केवल मनुष्य ही है जो शैतान की धोखेबाजी का शिकार है, एकमात्र प्राणी जो उसके दुराचरण के अनगिनत तरीकों का शिकार हो जाता है। मनुष्य की स्वयं पर कभी भी प्रभुता नहीं रही। अधिकांश लोग शैतान के घृणित स्थान में रहते हैं, और उपहास को सहते हैं; इस संसार के हर अन्याय, हर कष्ट को सहते हुए, जब तक वे आधे मर नहीं जाते तब तक वह उन्हें कष्ट देता रहता है। उनके साथ खेलने के बाद, शैतान उनके गंतव्य को ख़त्म कर देता है। और इसलिए लोग अपना पूरा जीवन उलझन में गुज़ार देते हैं, एक बार भी उन अच्छी चीजों का आनंद नहीं ले पाते जो परमेश्वर ने उनके लिए तैयार की हैं, इसकी अपेक्षा शैतान द्वारा नष्ट किए जाते और चिथड़ो में छोड़ दिए जाते हैं। आज वे इतने उदासीन और निरुत्साहित हो गए हैं कि उनमें परमेश्वर के कार्य पर ध्यान देने की रूचि ही नहीं है। यदि लोगों में परमेश्वर के कार्य पर ध्यान देने की रूचि नहीं है, तो उनका अनुभव हमेशा विभाजित और अधूरा रहेगा, और उनका प्रवेश हमेशा के लिए एक खाली स्थान रहेगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (1)" से

4. परमेश्वर के जगत में आने के हजारों वर्षों के बाद से घमंडी व्यवहार वाले कितने लोगों को परमेश्वर ने अपने कार्य के लिए वर्षों तक इस्तेमाल किया है; परंतु जो उसका कार्य जानते है वे बहुत कम हैं,लगभग न के बराबर हैं। इसी कारण, बहुत से लोग उसी समय परमेश्वर का विरोध करने लग जाते हैं जब वे उसके कार्य को कर रहे होते हैं क्योंकि, वे उसका कार्य करने की अपेक्षा वास्तव में परमेश्वर द्वारा दिए गए पद में मनुष्य का कार्य करते हैं। क्या इसे कार्य करना कहा जा सकता है? वे कैसे प्रवेश कर सकते हैं? मनुष्यजाति ने परमेश्वर के अनुग्रह को लेकर उसे दफन कर दिया है। इसी कारण,सदियों से जो उसका कार्य रहे हैं उनका प्रवेश कम होता है। वे परमेश्वर के कार्य को जानने के बारे में बात ही नहीं करते, क्योंकि वे परमेश्वर की बुद्धि के विषय में बहुत ही कम समझते हैं। यह कहा जा सकता है, यद्यपिऐसे कई लोग हैं जो परमेश्वर की सेवा करते है, फिर भी वे इस बात को देखने में असमर्थ रहे हैं कि वह कितना महान है, और इसलिए सब ने स्वयं को परमेश्वर बना लिया है ताकिदूसरे उनकी आराधना करें।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (1)" से

5. कई वर्षों तक परमेश्वर सृष्टि में छिपा रहाहै; धुंध के पीछे से कई वसंत और पतझड़ को देखता रहा है; कई दिनों और रातों तक तीसरे स्वर्ग से देखता रहा है; कई महीनों और वर्षों तक मनुष्यों के बीच में चला है। उसनेकई शीतकालों तक चुपचाप प्रतीक्षा करते हुए स्वयं को मनुष्योंसे ऊपर स्थापितकिया है। उसने कभी अपने आपको किसी के समक्ष प्रकट नहीं किया, न ही उसने कोई आवाज़ की, बिना कोई संकेत दिए चला गया और वैसे ही चुपचाप लौट आया। कौन उसका असली चेहरा जान सकता है? उसने एक बार भी मनुष्य से बात नहीं की, न ही कभी उन्हें दिखाई दिया। परमेश्वर का कार्य करना लोगों के लिए कितना आसान है? उन्हें यह एहसास ही नहीं होता कि उसे जानना सबबातों में सबसे कठिन है। आज परमेश्वर ने मनुष्य से बात की है, परंतु मनुष्य ने उसे कभी नहीं जाना है, क्योंकि जीवन में उसका प्रवेश बहुत ही सीमित और सतही है। यदि उसके दृष्टिकोण से देखा जाए, तो लोग परमेश्वर के सामने उपस्थित होने मेंपूर्णतः अयोग्य हैं। उनमें परमेश्वर की बहुत ही कम समझ है और वे उससे बहुत दूर भटके हुए हैं। यही नहीं, उनके हृदय जिनसे वे परमेश्वर पर विश्वास रखते हैं, वे बहुत जटिल हैं, और वे अपने हृदयों के भीतर परमेश्वर के स्वरुप को नहीं रखते। परिणामस्वरूप, परमेश्वर का जी तोड़ परिश्रम, और उसका कार्य, रेत में दबे सोने के टुकड़ों के समान, रोशनी की चमक नहीं फैला सकते हैं। परमेश्वर के समक्ष इन लोगों की योग्यता, उद्देश्य, और दृष्टिकोण बहुत ही घृणास्पद हैं। स्वीकार करने की क्षमता में निर्बल, असंवेदनशीलता की हद तक भावनारहित, भ्रष्टाचारी, और विकृत, अत्यंत चाटुकार, कमज़ोर और इच्छाशक्ति से रहितलोगों के समान उनकी अगुवाई मवेशियों या घोड़ों की तरह होनी चाहिए। आत्मा में अपने प्रवेश, या परमेश्वर के कार्य में अपने प्रवेश के संबंध में वे बिलकुल भी ध्यान नहीं देते, उनमे सत्य के लिए कष्ट सहने का थोड़ा सा भी संकल्प नहीं है। इसलिए इस प्रकार के व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा संपूर्ण करना आसान नहीं होगा। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि तुम लोग अपना प्रवेश इस दृष्टिकोण से स्थापित करो—कि तुम लोग अपने कार्य और अपने प्रवेश के द्वारा परमेश्वर के कार्य को जानने के लिए उसके निकट पहुँचो।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (1)" से

6. जब कार्य के बारे में बात की जाती है, तो मनुष्य का मानना है कि परमेश्वर के लिए इधर-उधर भागना, सभी जगहों पर प्रचार करना और परमेश्वर के लिए व्यय करना कार्य है। यद्यपि यह विश्वास सही है, किन्तु यह अत्यधिक एक-तरफा है; परमेश्वर आदमी से जो कहता है वह परमेश्वर के लिए केवल इधर-उधर यात्रा करना ही नहीं है; यह आत्मा के भीतर सेवकाई और आपूर्ति अधिक है। बहुत से भाइयों और बहनों ने इतने वर्षों के अनुभव के बाद भी परमेश्वर के लिए कार्य करने के बारे में कभी नहीं सोचा है, क्योंकि मनुष्य द्वारा कल्पना किया गया कार्य परमेश्वर के द्वारा कहे जाने वाले कार्यों के साथ असंगत है। इसलिए, आदमी को कार्य के मामले में किसी भी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं है, और यही निश्चित रूप से कारण है कि क्यों मनुष्य का प्रवेश भी एक तरफा है। तुम सभी लोगों को परमेश्वर के लिए कार्य करके प्रवेश करना शुरू करना चाहिए, ताकि तुम लोग इसके सभी पहलुओं का बेहतर अनुभव कर सको। यही है वह जिसमें तुम लोगों को प्रवेश करना चाहिए। कार्य परमेश्वर के लिए इधर-उधर चलने को संदर्भित नहीं करता है; यह इस बात को संदर्भित करता है मनुष्य का जीवन और मनुष्य जो जीवन बिताता है वे परमेश्वर के आनंद के लिए हैं या नहीं। कार्य परमेश्वर के प्रति गवाही देने और मनुष्य के प्रति सेवकाई के लिए मनुष्य द्वारा परमेश्वर के प्रति अपनी विश्वसनीयता और परमेश्वर के बारे में उनके ज्ञान के उपयोग को संदर्भित करता है। यह मनुष्य का उत्तरदायित्व है और वह है जो सभी लोगों को महसूस करना चाहिए। दूसरे शब्दों में, तुम लोगों का प्रवेश तुम लोगों का कार्य है; तुम लोग परमेश्वर के लिए अपने कार्य के दौरान प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हो। परमेश्वर का अनुभव करना न केवल उसके वचन को खाने और पीने में सक्षम होना है; बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण है, कि तुम लोगों को परमेश्वर की गवाही देने, परमेश्वर की सेवा करने, और मनुष्य की सेवकाई और आपूर्ति करने में सक्षम अवश्य होना चाहिए। यह कार्य है, और तुम लोगों का प्रवेश भी है; इसे ही हर व्यक्ति को निष्पादित करना चाहिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (2)" से

7. ऐसे कई लोग हैं जो केवल परमेश्वर के लिए इधर-उधर यात्रा करने, और सभी जगहों पर उपदेश देने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, फिर भी अपने व्यक्तिगत अनुभव को अनदेखा करते हैं और आध्यात्मिक जीवन में अपने प्रवेश की उपेक्षा करते हैं। यही कारण है कि परमेश्वर की सेवा करने वाले लोग परमेश्वर का विरोध करने वाले बन जाते हैं। कई वर्षों से, जो लोग परमेश्वर की सेवा करते हैं और मनुष्य की सेवकाई करते हैं, उन्होंने कार्य करने और उपदेश देने को प्रवेश के रूप में माना है, और किसी ने भी अपने स्वयं के अनुभव को महत्वपूर्ण प्रविष्टि के रूप में नहीं लिया है। बल्कि, वे दूसरों को सिखाने के लिए पवित्र आत्मा के कार्य की प्रबुद्धता का लाभ उठाते हैं। उपदेश देते समय, उन पर बहुत जिम्मेदारी होती है और वे पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त करते हैं, और इसके माध्यम से वे पवित्र आत्मा की वाणी निकालते हैं। उस समय, जो लोग कार्य करते हैं, वे आत्मतुष्टि से पूर्ण और आत्म-संतुष्ट महसूस करते हैं, मानो कि पवित्र आत्मा का कार्य उनका स्वयं का आध्यात्मिक अनुभव है; उन्हें लगता है कि उस समय के दौरान उनके द्वारा बोले गए सभी वचन उनके स्वयं के हैं…. इस तरह तुम्हारे एक बार उपदेश करने के बाद, तुम्हें लगता है कि तुम्हारी वास्तविक कद-काठी उतनी छोटी नहीं है जितनी तुम मानते थे। पवित्र आत्मा द्वारा तुम्हारे भीतर कई बार इसी तरह से कार्य करने के बाद, तुम तब यह निर्धारित करते हो कि तुम्हारे पास पहले से ही कद-काठी है और ग़लती से मानते हो कि पवित्र आत्मा का कार्य तुम्हारा स्वयं का प्रवेशऔर अस्तित्व है। जब तुम्हें लगातार यह अनुभव होता है, तो तुम अपने स्वयं के प्रवेश के बारे में सुस्त हो जाते हो। तब तुम बिना ध्यान दिए आलसी हो जाते हो, और अपने स्वयं के प्रवेश को कोई भी महत्व बिल्कुल नहीं देते हो। इसलिए, जब तुम दूसरों की सेवकाई कर रहे हो, तो तुम्हें अपनी कद-काठी और पवित्र आत्मा के कार्य के बीच स्पष्ट रूप से अंतर अवश्य करना चाहिए। इससे तुम्हारा प्रवेश बेहतर रूप से सुगम होगा और तुम्हारे अनुभव को बेहतर लाभ होगा। मनुष्य का पवित्र आत्मा के कार्य को अपने स्वयं के अनुभव के रूप में समझना मनुष्य के अधःपतन काआरंभ है। इसलिए, तुम लोग जो भी कर्तव्य करते हो, उसे तुम लोगों को अपने प्रवेश के एक मुख्य सबक के रूप में समझना चाहिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (2)" से

8. एक व्यक्ति परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने, परमेश्वर की पसंद के सभी लोगों को उसके सामने लाने, और पवित्र आत्मा के कार्य और परमेश्वर के मार्गदर्शन से मनुष्य को परिचित कराने के लिए कार्य करता है, जिससे परमेश्वर के कार्य के परिणामों को पूर्ण करता है। इस कारण से, यह अनिवार्य है कि तुम लोग कार्य करने के सार को समझो। परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए किसी व्यक्ति के रूप में, सभी पुरुष परमेश्वर के लिए कार्य करने के योग्य हैं, अर्थात्, सभी के पास पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए जाने का अवसर है। हालाँकि, इसमें एक बात है जिसका तुम लोगों को अवश्य एहसास होना चाहिए: जब मनुष्य परमेश्वर का कार्य करता है, तो मनुष्य के पास परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाने का अवसर होता है, किन्तु मनुष्य के द्वारा जो कहा और जाना जाता है वह पूर्णतः मनुष्य की कद-काठी नहीं है। तुम लोगों को केवल अपने कार्य में ही अपनी कमियों के बारे में बेहतर ज्ञात हो सकता है, और पवित्र आत्मा से अधिक प्रबुद्धता प्राप्त कर सकते हो, जो तुम लोगों को अपने कार्य में बेहतर प्रवेश प्राप्त करने देगा। यदि मनुष्य परमेश्वर से मार्गदर्शन को मनुष्य का स्वयं का प्रवेश और मनुष्य के अंदर अंतर्निहित बातें समझता है, तो मनुष्य की कद-काठी के विकसित होने की कोई संभावना नहीं है। जब मनुष्य एक सामान्य स्थिति में होता है, तो पवित्र आत्मा उसे प्रबुद्ध करता है; ऐसे समयों पर, मनुष्य प्रायः उसे प्राप्त होने वाली प्रबुद्धता को वास्तव में अपनी स्वयं की कद-काठी के रूप मानने की ग़लती करता है, क्योंकि पवित्र आत्मा अत्यंत सामान्य तरीके से प्रबुद्ध करता है: मनुष्य के भीतर जो अंतर्निहित है उसका उपयोग करके। जब मनुष्य कार्य करता और बोलता है, या अपनी आध्यात्मिक भक्ति में मनुष्य की प्रार्थना के दौरान, एक सच्चाई उसे अचानक स्पष्ट हो जाएगी। वास्तव में, हालाँकि, मनुष्य जो देखता है वह केवल पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्धता है (प्राकृतिक रूप से, यह मनुष्य से सहयोग से संबंधित है) और मनुष्य की सच्ची कद-काठी नहीं है। अनुभव की अवधि के बाद जिसमें मनुष्य कई वास्तविक कठिनाइयों का सामना करता है, ऐसी परिस्थितियों में मनुष्य की वास्तविक कद-काठी स्पष्ट होती है। केवल उस समय ही मनुष्य को पता चलता है कि मनुष्य की कद-काठी बहुत बड़ी नहीं है, और मनुष्य के स्वार्थ, व्यक्तिगत विचार और लालच सभी उभर जाते हैं। केवल इस तरह के अनुभव के कई चक्रों के बाद ही कई ऐसे लोग जो अपनी आत्माओं के भीतर जाग गए हैं, वे महसूस करते हैं कि अतीत में यह उनकी वास्तविकता नहीं थी, बल्कि पवित्र आत्मा से एक क्षणिक रोशनी थी, और मनुष्य को केवल रोशनी प्राप्त हुई थी। जब पवित्र आत्मा मनुष्य को सच्चाई समझने के लिए प्रबुद्ध करता है, तो ऐसा प्रायः, संदर्भ के बिना, स्पष्ट और विशिष्ट तरीके से होता है। अर्थात्, वह इस प्रकाशन में मनुष्य की कठिनाइयों को शामिल नहीं करता है, और बल्कि सीधे ही सत्य को प्रकट करता है। जब मनुष्य प्रवेश में कठिनाइयों का सामना करता है, तो मनुष्य पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्धता को शामिल करता है, और यह मनुष्य का वास्तविक अनुभव बन जाता है।.… इसलिए, जब तुम लोग पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त करते हो, तो, यह देखते हुए कि वास्तव में पवित्र आत्मा का कार्य क्या है और तुम लोगों का प्रवेश क्या है, और साथ ही अपने प्रवेश में पवित्र आत्मा के कार्य को शामिल करते हुए, तुम लोगों को उसके साथ-साथ अपने प्रवेश पर और अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि तुम लोग उसके द्वारा बेहतर ढंग से पूर्ण बनाए जा सको और पवित्र आत्मा के कार्य के सार को तुम लोगों में गढ़े जाने दे सको। पवित्र आत्मा के कार्य के अपने अनुभव के दौरान, तुम लोग पवित्र आत्मा और साथ ही स्वयं के बारे में जान जाते हो, और अत्यधिक दुःखों के अनगिनत उदाहरणों के बीच, तुम लोग परमेश्वर के साथ एक सामान्य संबंध विकसित करते हो, और तुम लोगों और परमेश्वर के बीच संबंध दिन पर दिन घनिष्ठ होता जाता है। शुद्धिकरण और काट-छाँट के असंख्य उदाहरणों के बाद, तुम लोगों में परमेश्वर के प्रति एक सच्चा प्यार विकसित होता है। यही कारण है कि तुम लोगों को यह एहसास अवश्य होना चाहिए कि कष्ट, दण्ड, और क्लेश हतोस्ताही नहीं हैं; केवल पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त करना किन्तु तुम लोगों का प्रवेश प्राप्त नहीं करना भयावह है। जब दिन आएगा कि परमेश्वर का कार्य पूरा हो जाएगा, तो तुम लोगों ने व्यर्थ के लिए परिश्रम किया होगा; यद्यपि तुम लोगों ने परमेश्वर के कार्य का अनुभव कर लिया होगा, किन्तु तुम लोग पवित्र आत्मा को नहीं जान पाए होगे या तुम लोगों की स्वयं की प्रविष्टि नहीं हुई होगी। पवित्र आत्मा द्वारा मनुष्य की प्रबुद्धता मनुष्य के जुनून को बनाए रखने के लिए नहीं है; यह मनुष्य के प्रवेश के लिए एक रास्ता खोलने के लिए है, और साथ ही मनुष्य को पवित्र आत्मा को जानने देने के लिए, और उस से परमेश्वर के लिए श्रद्धा और आराधना का हृदय विकसित करने के लिए है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (2)" से

अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन

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