सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मसीह की बातचीतों के अभिलेख

प्रस्तावना

अध्याय 1. अपनी प्रकृति को समझना और सत्य को व्यवहार में शामिल करना
अध्याय 2.परमेश्वर की इच्छा को खोजना और यथासंभव सत्य का अभ्यास करना
अध्याय 9. व्यावहारिक परमेश्वर में तीन विश्वास
अध्याय 17. देहधारण का ज्ञान
अध्याय 10. जो लोग सच्चाई से प्रेम करते हैं, उनके पास अनुसरण करने का एक मार्ग होता है
अध्याय 11. देहधारण के महत्व का दूसरा पहलू
अध्याय 4.स्वभाव का समाधान करना और सत्य का अभ्यास करना
अध्याय 5.परमेश्वर की इच्छा है कि यथासंभव लोगों की रक्षा की जाये
अध्याय 6. लोगों के प्रदर्शन के अनुसार उनके परिणाम के निर्धारण का अर्थ
अध्याय 7. स्वयं को सही ढंग से देखो और सत्य का त्याग न करो
अध्याय 8. अतिवाद से हटकर एक उत्तरजीवी होने दिशा में बढ़ना
अध्याय 16. सत्य के बिना परमेश्वर को अपमानित करना आसान है
अध्याय 29. परमेश्वर जिस तरह से कार्य करता है उसे मनुष्य को जानना होगा
अध्याय 18.परमेश्वर की सेवा करने के लिए व्यक्ति को पतरस के मार्ग पर चलना चाहिए
अध्याय 19.परमेश्वर की सर्वसामर्थता और व्यावहारिकता को कैसे समझें
अध्याय 20. किस प्रकार के लोगों को दण्डित किया जायेगा
अध्याय 21. परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को कैसे समझें
अध्याय 23. परमेश्वर की देह और आत्मा के एकत्व को कैसे समझें
अध्याय 24. स्वयं को जानना मुख्यतः मानव स्वभाव को जानना है
अध्याय 25. कार्यकर्ता कैसे कार्य करते हैं उसके मुख्य सिद्धान्तों
अध्याय 26. जिसमें सत्य की कमी है वह दूसरों का नेतृत्व नहीं कर सकता
अध्याय 30. केवल सत्य की खोज करके ही आप अपने स्वभाव में परिवर्तन ला सकते हैं
अध्याय 31. बुनियादी ज्ञान जो मनुष्य के पास होना चाहिए
अध्याय 32. सत्य प्रदान करना दूसरों का नेतृत्व करने का वास्तविक मार्ग है
अध्याय 33. भ्रमित लोगों का उद्धार नहीं हो सकता
अध्याय 34. केवल परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता के बारे में जान कर ही आप सच्चा विश्वास रख सकते हैं
अध्याय 36.केवल अपनी खुद की परिस्थितियों को समझ कर आप सही रास्ते पर चल सकते हैं
अध्याय 37.अपनी नकारात्मक स्थिति को हल करने के लिए आपको सत्य का उपयोग करना चाहिए
अध्याय 38. सब इससे निर्धारित होता है कि व्यक्ति के पास सत्य है या नहीं
अध्याय 39. बाहरी परिवर्तन और स्वभाव में परिवर्तन के बीच अंतर
अध्याय 52.मानव में बेवफ़ाई के तत्व और मानव-प्रकृति जो परमेश्वर के साथ विश्वासघात करती है 
अध्याय 41. मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें
अध्याय 44.क्या आप मानवजाति के लिए परमेश्वर के प्रेम को समझते हैं?
अध्याय 47. कसौटियों के बीच परमेश्वर को कैसे संतुष्ट करें
अध्याय 42.जिन लोगों की परमेश्वर से हमेशा अपेक्षाएँ होती हैं, वे सबसे कम विवेकी होते हैं
अध्याय 50.ईमानदार बनने के लिए, आपको अन्य लोगों के सामने स्वयं को खोल कर रख देना चाहिए।
अध्याय 40. तुम्हारे स्वभाव को बदलने के बारे में तुम्हें क्या पता होना चाहिए