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परमेश्वर के अधिकार के तहत शैतान कुछ नहीं बदल सकता

I

कितने सालों से, हज़ारों वर्षों से,

शैतान मानव को भ्रष्ट करता रहा है, गढ़ी इतनी बुराइयाँ।

पीढ़ियों के बाद पीढ़ियों को उसने धोखा दिया।

ओह, कितने जुर्म, ख़ौफ़नाक जुर्म,

शैतान ने दुनिया भर में हैं किये।

बहकाया मानव को ख़िलाफ़ ईश्वर के, दुरूपयोग और धोख़ा दिया,

ईश्वर की प्रबंधन योजना का नाश करना चाहा।

हालांकि शैतान चलता है ईश्वर की रची चीज़ों के बीच,

वो ज़रा भी लोगों या चीज़ों को बदल नहीं सकता है।

हालांकि शैतान चलता है ईश्वर की रची चीज़ों के बीच,

एक भी चीज़ न वो बदल सके।

ईश्वर की आज्ञा के अंतर्गत कुछ भी न बदले।

एक भी चीज़ न वो बदल सके।

ईश्वर की आज्ञा के अंतर्गत कुछ भी न बदले।

II

ईश्वर के अधिकार के अंतर्गत सभी चीज़ें उसकी आज्ञा का पालन करती हैं।

सभी जीव-जंतु खुद को ईश्वर के बनाये क़ानून के प्रति समर्पित करते हैं।

ईश्वर के महान अधिकार के मुक़ाबले में शैतान की दुष्ट प्रवृत्ति नीच है,

अनियंत्रित और कुरूप, घिनौना, इतना छोटा और कमज़ोर है।

हालांकि शैतान चलता है ईश्वर की रची चीज़ों के बीच,

वो ज़रा भी लोगों या चीज़ों को बदल नहीं सकता है।

हालांकि शैतान चलता है ईश्वर की रची चीज़ों के बीच,

एक भी चीज़ न वो बदल सके।

ईश्वर की आज्ञा के अंतर्गत कुछ भी न बदले।

एक भी चीज़ न वो बदल सके।

ईश्वर की आज्ञा के अंतर्गत कुछ भी न बदले।

ईश्वर की आज्ञा के अंतर्गत कुछ भी न बदले।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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