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59. बहुत-से लोग मानते हैं कि परमेश्वर में विश्वास करने का अर्थ बाइबल से कभी भी भटकना नहीं है, और बाइबल से भटकने का अर्थ परमेश्वर को धोखा देना है। क्या यह नज़रिया सही है?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

यहूदी फरीसी यीशु को दोषी ठहराने के लिए मूसा की व्यवस्था का उपयोग करते थे। उन्होंने उस समय के यीशु के अनुकूल होने की खोज नहीं की, बल्कि नियम का अक्षरशः पालन कर्मठतापूर्वक किया, इस हद तक किया कि अंततः उन्होंने निर्दोष यीशु को, पुराने नियम की व्यवस्था का पालन न करने और मसीहा न होने का आरोप लगाते हुए, क्रूस पर चढ़ा दिया। उनका सारतत्व क्या था? क्या यह ऐसा नहीं था कि उन्होंने सत्य के अनुकूल होने के मार्ग की खोज नहीं की? उनमें पवित्रशास्त्र के हर एक वचन का जुनून सवार हो गया था, जबकि मेरी इच्छा और मेरे कार्य के चरणों और कार्य की विधियों पर कोई भी ध्यान नहीं दिया। ये वे लोग नहीं थे जो सत्य को खोज रहे थे, बल्कि ये वे लोग थे जो कठोरता से पवित्रशास्त्र के वचनों का पालन करते थे; ये वे लोग नहीं थे जो सत्य की खोज करते थे, बल्कि ये वे लोग थे जो बाइबल में विश्वास करते थे। दरअसल वे बाइबल के रक्षक थे। बाइबल के हितों की सुरक्षा करने, और बाइबल की मर्यादा को बनाये रखने, और बाइबल की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए, वे यहाँ तक गिर गए कि उन्होंने दयालु यीशु को भी क्रूस पर चढ़ा दिया। यह उन्होंने सिर्फ़ बाइबल की रक्षा करने के लिए, और लोगों के हृदय में बाइबल के हर एक वचन के स्तर को बनाये रखने के लिए ही किया। इस प्रकार उन्होंने यीशु को, जिसने पवित्रशास्त्र के सिद्धान्त का पालन नहीं किया, मृत्यु दंड देने के लिये अपने भविष्य और पापबलि को त्यागना बेहतर समझा। …

और आज के लोगों के विषय में क्या कहें? मसीह सत्य को बताने के लिए आया है, फिर भी वे निश्चय ही स्वर्ग में प्रवेश प्राप्त करने और अनुग्रह को पाने के लिए उसे मनुष्य के मध्य में से बाहर निकाल देंगे। वे निश्चय ही बाइबल के हितों की सुरक्षा करने के लिए सत्य के आगमन को भी नकार देंगे, और निश्चय ही वापस देह में आये हुए मसीह को बाइबल के अस्तित्व को अनंतकाल तक सुनिश्चित करने के लिए फिर से सूली पर चढ़ा देंगे। कैसे मनुष्य मेरे उद्धार को ग्रहण कर सकता है, जब उसका हृदय इतना अधिक द्वेष से भरा है, और मेरे प्रति उसका स्वभाव ही इतना विरोध से भरा है? मैं मनुष्य के मध्य में रहता हूं, फिर भी मनुष्य मेरे अस्तित्व के बारे नहीं जानता है। जब मैं अपना प्रकाश लोगों पर फैलाता हूं, फिर भी मेरे वह अस्तित्व के बारे में अज्ञानी ही बना रहता है। जब मैं लोगों पर क्रोधित होता हूँ, तो वह मेरे अस्तित्व को और अधिक प्रबलता से नकारता है। मनुष्य शब्दों, बाइबल के साथ अनुकूलता की खोज करता है, फिर भी सत्य के अनुकूल होने के रास्ते को खोजने के लिए एक भी व्यक्ति मेरे पास नहीं आता है। मनुष्य मुझे स्वर्ग में खोजता है, और स्वर्ग में मेरे अस्तित्व के लिए विशेष समर्पण करता है, फिर भी कोई मेरी परवाह नहीं करता क्योंकि मैं जो देह में उन्हीं के बीच रहता हूं, बहुत मामूली हूँ। जो लोग सिर्फ़ बाइबल के शब्दों के और एक अज्ञात परमेश्वर के अनुकूल होने में ही अपना सर्वस्व समझते हैं, वे मेरे लिए एक घृणित हैं। क्योंकि वे मृत शब्दों की आराधना करते हैं, और एक ऐसे परमेश्वर की आराधना करते हैं जो उन्हें अवर्णनीय खज़ाना देने में सक्षम है। जिस की वे आराधना करते हैं वो एक ऐसा परमेश्वर है जो अपने आपको मनुष्य की दया पर छोड़ देता है, और जिसका अस्तित्व है ही नहीं। तो फिर, ऐसे लोग मुझ से क्या लाभ प्राप्त कर सकते हैं? मनुष्य वचनों के लिए बहुत ही नीचा है। जो मेरे विरोध में हैं, जो मेरे सामने असीमित मांगें रखते हैं, जिन में सत्य के लिए प्रेम ही नहीं है, जो मेरे प्रति बलवा करते हैं—वह मेरे अनुकूल कैसे हो सकते हैं?

"वचन देह में प्रकट होता है" से "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" से

चूँकि यहाँ एक उच्चतर मार्ग है, तो उस निम्न एवं पुराने मार्ग का अध्ययन क्यों करते हो? चूँकि यहाँ अधिक नवीन कथन हैं, और अधिक नया कार्य है, तो पुराने ऐतिहासिक अभिलेखों के मध्य जीवन क्यों बिताते हो? नए कथन तुम्हारा भरण-पोषण कर सकते हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह नया कार्य है; पुराने लिखित दस्तावेज़ तुम्हें तृप्त नहीं कर सकते हैं, या तुम्हारी वर्तमान आवश्यकताओं को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं, जिससे यह साबित होता है कि वे इतिहास हैं, और यहाँ के और वर्तमान के कार्य नहीं हैं। उच्चतम मार्ग ही नवीनतम कार्य है, और नए कार्य के साथ, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि अतीत का मार्ग कितना ऊँचा था, यह अभी भी लोगों के चिंतनों का इतिहास है, और इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि सन्दर्भ के रूप में इसका कितना महत्व है, यह अभी भी एक पुराना मार्ग है। यद्यपि इसे "पवित्र पुस्तक" में दर्ज किया गया है, फिर भी पुराना मार्ग इतिहास है; यद्यपि "पवित्र पुस्तक" में इसका कोई अभिलेख नहीं है, फिर भी नया मार्ग यहाँ का और अभी का है। यह मार्ग तुम्हें बचा सकता है, और यह मार्ग तुम्हें परिवर्तित कर सकता है, क्योंकि यह पवित्र आत्मा का कार्य है।

…यीशु के समय में, यीशु ने अपने में पवित्र आत्मा के कार्य के अनुसार यहूदियों और उन सब की अगुवाई की थी जिन्होंने उस समय उसका अनुसरण किया था। उसने जो कुछ किया उस में उसने बाइबल को आधार के रूप में नहीं लिया, बल्कि वह अपने कार्य के अनुसार बोला; बाइबल क्या कहती है उसने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, और न ही उसने अपने अनुयायियों की अगुवाई करने के लिए बाइबल में किसी मार्ग को ढूँढ़ा था। ठीक उस समय से ही जब उसने कार्य करना आरम्भ किया, उसने पश्चाताप—एक शब्द जिसके बारे में पुराने विधान की भविष्यवाणियों में बिलकुल भी उल्लेख नहीं किया गया था—के मार्ग को फैलाया। न केवल उसने बाइबल के अनुसार कार्य नहीं किया, बल्कि उसने एक नए मार्ग की अगुवाई भी की, और नया कार्य किया। जब उसने उपदेश दिए तब उसने कभी भी बाइबल को संदर्भित नहीं किया। व्यवस्था के युग के दौरान, बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने के उसके चमत्कारों को करने के योग्य कोई कभी नहीं हो पाया था। उनका कार्य, उनकी शिक्षाएँ, उनका अधिकार—व्यवस्था के युग के दौरान किसी ने भी इसे नहीं किया था। यीशु ने मात्र अपना नया काम किया, और भले ही बहुत से लोगों ने बाइबल का उपयोग करते हुए उसकी निन्दा की—और यहाँ तक कि उसे सलीब पर चढ़ाने के लिए पुराने विधान का उपयोग किया—फिर भी उसका कार्य पुराने विधान से बढ़कर था; यदि ऐसा न होता, तो लोग उसे सलीब पर क्यों चढ़ाते? क्या यह इसलिए नहीं था क्योंकि पुराने विधान में उसकी शिक्षाओं, और बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने की उसकी योग्यता के बारे में कुछ नहीं कहा गया था? उसका कार्य एक नए मार्ग की अगुवाई करने के लिए था, यह जानबूझकर बाइबल के विरूद्ध "लड़ाई करना", या जानबूझकर पुराने विधान को अनावश्यक बना देना नहीं था। वह केवल अपनी सेवकाई करने के लिए आया था, और अपने नए कार्य को उन लोगों के लिए लेकर आया था जो उसके लिए लालायित थे और उसे खोजते थे। वह पुराने विधान की व्याख्या करने या इसके कार्य का समर्थन करने के लिए नहीं आया था। उसका कार्य व्यवस्था के युग के निरन्तर विकास की अनुमति देने के लिए नहीं था, क्योंकि उसके कार्य ने इस बात पर कोई विचार नहीं किया कि इसमें एक आधार के रूप में बाइबल थी या नहीं; यीशु केवल वह कार्य करने के लिए आया था जो उनके लिए करना आवश्यक था। इस प्रकार, उसने पुराने विधान की भविष्यवाणियों की व्याख्या नहीं की, न ही उसने पुराने विधान के व्यवस्था के युग के वचनों के अनुसार कार्य किया। जो कुछ पुराने विधान ने कहा उसने उसकी उपेक्षा की, उसने इस बात की परवाह नहीं की कि पुराना विधान उनके कार्य से सहमत था या नहीं, और इस बात की परवाह नहीं की कि लोग उसके कार्य के बारे में क्या जानते हैं, या उसने कैसे इसकी निन्दा की। वह केवल निरन्तर वह कार्य करता रहा जो उसे करना चाहिए था, भले ही बहुत से लोगों ने उसकी निन्दा करने के लिए पुराने विधान के भविष्यवक्ताओं के पूर्वकथनों का उपयोग किया। लोगों को, ऐसा प्रतीत हुआ मानो उसके कार्य का कोई आधार नहीं था, और उस में बहुत कुछ ऐसा था जो पुराने विधान के अभिलेखों से असंगत था। क्या यह मूर्खता नहीं है? क्या परमेश्वर के कार्य में सिद्धांतों को लागू किए जाने की आवश्यकता है? और क्या इसे भविष्यवक्ताओं के पूर्वकथनों के अनुसार अवश्य होना चाहिए? आख़िरकार, कौन बड़ा हैः परमेश्वर या बाइबल? परमेश्वर का कार्य बाइबल के अनुसार क्यों होना चहिए? क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर को बाइबल से आगे बढ़ने का कोई अधिकार नहीं है? क्या परमेश्वर बाइबल से दूर नहीं जा सकता है और अन्य काम नहीं कर सकता है? यीशु और उनके शिष्यों ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया? यदि उसे सब्त का पालन करना होता और पुराने विधान की आज्ञाओं के अनुसार अभ्यास करना होता, तो आने के बाद यीशु ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया, बल्कि इसके बजाए उसने पाँव धोए, सिर को ढका, रोटी तोड़ी और दाखरस पीया? क्या यह सब पुराने विधान की आज्ञाओं से अनुपस्थित नहीं हैं? यदि यीशु पुराने विधान का सम्मान करता, तो उसने इन सिद्धांतो का अनादर क्यों किया? तुम्हें जानना चाहिए कि पहले कौन आया था, परमेश्वर या बाइबल! सब्त का प्रभु होते हुए, क्या वह बाइबल का भी प्रभु नहीं हो सकता है?

"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (1)" से

यदि तुम व्यवस्था के युग के कार्य को देखने की इच्छा करते हो, और यह देखना चाहते हो कि इज़राइली किस प्रकार यहोवा के मार्ग का अनुसरण करते थे, तो तुम्हें पुराना विधान अवश्य पढ़ना चाहिए; यदि तुम अनुग्रह के युग के कार्य को समझना चाहते हो, तो तुम्हें नया विधान अवश्य पढ़ना चाहिए। किन्तु तुम अंतिम दिनों के कार्य को किस प्रकार देखते हो? तुम्हें आज के परमेश्वर की अगुआई को स्वीकार अवश्य करनी चाहिए, और आज के कार्य में प्रवेश करना चाहिए, क्योंकि यह नया कार्य है, और किसी ने भी पूर्व में इसे बाइबल में दर्ज नहीं किया है। आज, परमेश्वर देहधारी हो चुका है और उसने चीन में अन्य चयनित लोगों को छाँट लिया है। परमेश्वर इन लोगों में कार्य ता है, वह पृथ्वी पर अपने काम को निरन्तर जारी रखता है, और अनुग्रह के युग के कार्य को जारी रखता है। आज का कार्य एक मार्ग है जिस पर मनुष्य कभी नहीं चला, और एक तरीका है जिसे किसी ने कभी नहीं देखा है। यह वह कार्य है जिसे पहले कभी नहीं किया गया है—यह पृथ्वी पर परमेश्वर का नवीनतम कार्य है। इस प्रकार, ऐसा कार्य जो पहले कभी नहीं किया गया हो वह इतिहास नहीं है, क्योंकि अभी तो अभी है, और इसे अभी अतीत बनना है। लोग नहीं जानते हैं कि परमेश्वर ने पृथ्वी पर और इस्राएल के बाहर बड़ा, नया काम किया है, कि यह पहले ही इस्राएल के दायरे के बाहर, और भविष्यवक्ताओं के पूर्वकथनों के परे चला गया है, कि यह भविष्यवाणियों के बाहर नया और बेहतरीन, और इस्राएल के परे नवीनतम कार्य है, और ऐसा कार्य है जिसे लोग न तो समझ सकते हैं और न ही जिसकी कल्पना कर सकते हैं। बाइबल ऐसे कार्य के सुस्पष्ट अभिलेखों को कैसे समाविष्ट कर सकती है? कौन आज के कार्य के प्रत्येक अंश को, बिना किसी चूक के, पहले से ही दर्ज कर सका होगा? कौन इस अति पराक्रमी, अति बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य को इस पुरानी घिसीपिटी पुस्तक में दर्ज कर सकता है जो परम्परा का अनादर करता है? आज का कार्य इतिहास नहीं है, और वैसे तो, यदि तुम आज के नए पथ पर चलने की इच्छा करते हो, तो तुम्हें बाइबल से दूर अवश्य जाना चाहिए, तुम्हें बाइबल की भविष्यवाणियों या इतिहास की पुस्तकों के परे अवश्य जाना चाहिए। केवल तभी तुम इस नए मार्ग पर उचित तरीके से चल पाओगे, और केवल तभी तुम एक नए राज्य और नए कार्य में प्रवेश कर पाओगे। तुम्हें यह अवश्य समझना चाहिए कि क्यों, आज, तुम से बाइबल न पढ़ने को कहा जा रहा है, क्यों एक अन्य कार्य है जो बाइबल से अलग है, क्यों परमेश्वर बाइबल में किसी नवीनतम तथा अधिक विस्तृत अभ्यासों की ओर नहीं देखता है, क्यों इसके बजाए बाइबल के बाहर अधिक पराक्रमी कार्य हैं। यही वह सब है जो तुम लोगों को समझना चाहिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (1)" से

पिछला:प्रभु यीशु के लौट आने के अपने अध्ययन में कुछ लोग केवल बाइबल की भविष्यवाणियों को आधार बनाते हैं, लेकिन वे परमेश्वर की वाणी को सुनने की कोशिश नहीं करते। इस चलन के साथ क्या समस्या है?

अगला:परमेश्वर में अपने विश्वास में किसी को बाइबल से नहीं भटकना चाहिए; बाइबल से भटकी हुई कोई भी चीज़ नकली और धर्मद्रोही है। क्या यह तर्कसंगत है?

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