सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का ऐप

परमेश्वर की आवाज़ सुनें और प्रभु यीशु की वापसी का स्वागत करें!

सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

बचाये जाने के बारे में थोड़ी-सी समझ

9

लीन चिंग चिंग चिंगचो नगर, शैनदोंग प्रांत

इन अनेक वर्षों में परमेश्वर का अनुसरण करते हुए मैंने अपने परिवार और दैहिक खुशियों को त्याग दिया है, और मैं पूरा दिन कलीसिया में अपना कार्य करने में व्यस्त रही हूँ। इसलिए मैं मानती थी: जब तक मैं कलीसिया में अपने काम को छोड़ती नहीं हूँ, परमेश्वर को धोखा नहीं देती हूँ, कलीसिया को छोड़ती नहीं हूँ, और अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करती हूँ, परमेश्वर मुझे क्षमा करेगा और बचायेगा। मैं यह भी मानती थी कि मैं परमेश्वर द्वारा मुक्ति के मार्ग पर चल रही हूँ, और मुझे बस अंत तक उनका अनुसरण करना है।

परंतु कुछ दिन पहले, मैंने "केवल वही जो सत्य को प्राप्त करते हैं और वास्तविकता में प्रवेश करते हैं, वे ही सच में बच पाते हैं": "परमेश्वर द्वारा बचाया जाना उतना सरल नहीं होता जितना कि लोग कल्पना करते हैं। हमें न्याय और ताड़ना और साथ ही परमेश्वर के वचनों से परीक्षण और शुद्धिकरण का कदम-दर-कदम अनुभव करना चाहिए। हमें परमेश्वर के कार्य के हर चरण का बारीकी से पालन करना चाहिए, और अंत में सत्य प्राप्त करना चाहिए और एक नयी रचना बनने के लिए स्वभाव को बदलना चाहिए, और शैतान पर विजय पाने और पाप के पार लगने के लिए सत्य पर भरोसा रखने में समर्थ होना चाहिए। परमेश्वर की आज्ञा का पूर्णतः पालन करने के लिए और उसके अनुरूप बनने के लिए हमें परमेश्वर के वचनों पर भरोसा करते हुए जागरूक होकर जीना चाहिए। केवल यही शैतान पर विजय पाना, पाप के पार लगना और परमेश्वर को प्राप्त होना है। अगर हम यह परिणाम परमेश्वर के कार्य के अनुभव से प्राप्त करते हैं, तभी यह वास्तव में परमेश्वर द्वारा बचाया जाना है।" "सत्य का अनुसरण करने और परमेश्वर से उद्धार प्राप्त करने के मार्ग पर, अभी भी अनेक कठिनाइयां और बाधाएँ हैं, जैसे कि परिवार का टूटना, प्राकृतिक और मानव-रचित आपदाएँ—हर प्रकार के परीक्षणऔर पीड़ा जिसका सामना लोगों को करना है। निश्चित तौर पर यह आसान नहीं होता है, और अगर लोगों में सत्य की कमी हो, तो वे दृढ़ नहीं रह सकते, ऐसे में यह संभावना शत-प्रतिशत है कि वे परमेश्वर के साथ विश्वासघात करेंगे" (ऊपर से संगति)। यह पढ़ने के बाद, मुझे लगा मानो मैं किसी स्वप्न से जागी हूँ। तो परमेश्वर द्वारा बचाया जाना बिल्कुल भी उतना सरल नहीं है जितना मैंने सोचा था; यह लोगों द्वारा हर कदम पर परमेश्वर के कार्य और वचनों, परमेश्वर की ताड़ना और न्याय, व्यवहार और काट-छांट, साथ ही तरह-तरह के परीक्षणों और पीड़ा की कड़वाहट का अनुभव करन पर निर्भर होता है। ताकि वे स्वयं के भ्रष्ट स्वभावों की सही में समझ पा सकें और धीरे-धीरे भ्रष्टाचार से खुद को छुटकारा दिला सकें, और अंत में परमेश्वर के वचनों पर भरोसा कर सकें और शैतान पर विजय प्राप्त करने और हर तरह के माहौल में अंधकार की शक्तियों के पार लगने के लिए सत्य पर विश्वास कर सकें। केवल इस परिणाम को प्राप्त करना ही वास्तव में परमेश्वर द्वारा बचाया जाना है। परंतु इसके साथ अपनी वास्तविक अवस्था की तुलना करने पर, मैं इस परिणाम को प्राप्त करने से बहुत दूर थी। बहुत बार ऐसा हुआ कि यह जानने के बावजूद कि प्रतिष्ठा और पद के पीछे भागने को परमेश्वर स्वीकृति नहीं देते, मैं फिर भी इन चीजों के पीछे भागती रही, और जब वे मुझे नहीं मिल पाए तो मैं नकारात्मक और कमज़ोर हो गयी। मैं सत्य की खोज करने की अपनी प्रेरणा को खो देती और ऐसे अंधकार में डूब जाती जिसमें से मैं खुद को बाहर नहीं निकाल पाती। बहुत बार ऐसा हुआ कि मुझे पता था कि परमेश्वर में विश्वास करने का मतलब था कि मैं उनके प्रेम को चुकाने के लिए सत्य की खोज करूँ और मैं परमेश्वर से मोल-भाव नहीं कर सकती थी, फिर भी मैंने देखा कि परमेश्वर के कार्य को पूरा होने में बहुत देर है और मैंने अपने भीतर नकारात्मकता भर ली। मेरी पहले की ऊर्जा बिना किसी निशान के पूरी तरह गायब हो गयी, और मैं अपना कर्तव्य निभाने के प्रति लापरवाह हो गयी। जब मुझे अपने कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, तो यह जानने के बावजूद कि परमेश्वर ही कठिनाइयों के माध्यम से मेरी परीक्षा ले रहा है, मैं अपने भीतर अभी भी परमेश्वर के प्रति गलतफहमियों और शिकायतों से भरी थी। मुझे लगा कि परमेश्वर में विश्वास करना बहुत कठिन, औरबहुत थकाने वाला है, और मैं हमेशा उस से बचना चाहती थी, और यहाँ तक कि अपना काम तक छोड़ना चाहती थी। बहुत बार ऐसा हुआ कि यह जानने के बावजूद कि यह माहौल और सभी लोग, यहाँ के मामले और मेरे चारों ओर की वस्तुएं, परमेश्वर ने मुझे सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए बनाई थीं, और मुझे इनमें सत्य खोजना चाहिए, जब मैं किसी ऐसे व्यक्ति, मामले या वस्तु का सामना करती थी जो मेरी उम्मीद के अनुसार नहीं होता था, तो मैं हमेशा उसका विरोध करती थी और उसे स्वीकार नहीं करना चाहती थी। जब मैं अन्य लोगों को उनके खुशहाल परिवारों के साथ देखती थी, जबकि मैं अपने प्रियजनों द्वारा छोड़ दी गयी थी और मेरे पास कोई आसरा नहीं था, मैं इससे बार-बार इस हद तक मायूसी और पीड़ा महसूस करती थी, कि अनेक बार मैं परमेश्वर से दूर जाना चाहती थी। ...फिर भी, मैं सोचती थी कि बहुत समय पहले ही मैंने परमेश्वर के उद्धार के मार्ग को अपनाया था। इन सभी वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए, मैं सच्चा पद कैसे पा सकती थी? जब मैं किसी मामूली परीक्षणया हताशा का सामना करती थी, मुझे लड़खड़ाने का ख़तरा होता था, भयंकर कठिनाइयों और कष्टों के बीच मजबूती से खड़ा होना तो दूर की बात रही। उस क्षण मुझे इस बात का एहसास हो गया कि, यद्यपि मैंने हताश हुए बिना, अनेक वर्षों तक भले ही परमेश्वर में विश्वास किया हो, पर मैं सत्य को वास्तव में समझ ही नहीं पायी हूँ और मेरे जीवन स्वभाव में ज़रा सा भी बदलाव नहीं आया है।मैं अभी भी शैतान के काले प्रभाव में रह रही थी और उसके छल और हेरफेर के अधीन थी। यह सच में परमेश्वर द्वारा बचाए जाने के मानक से बहुत नीचे था, परंतु मैं अभी भी मानती थी कि मैं परमेश्वर कृपा से उद्धार पाने के मार्ग में बहुत पहले ही प्रवेश कर चुकी थी और मैं लगभग पर्याप्त थी—यह तो केवल मेरा आत्मभ्रम था।

हे परमेश्वर, तेरा धन्यवाद! यह तेरी ही प्रभुद्धता और मार्गदर्शन था जिसके कारण मैं अपनी सच्ची अवस्था को स्पष्ट तौर पर देख पायी और मुझे समझ में आया कि वास्तविक उद्धार क्या है, जिस से मेरे पहले के भ्रामक ज्ञान में परिवर्तन आया। इस से मुझे यह भी समझ में आया कि अगर मैं सत्य को प्राप्त नहीं करती हूँ या अपने जीवन स्वभाव में बदलाव नहीं लाती हूँ, तो चाहे मैं कितने भी वर्षों तक परमेश्वर में विश्वास करती रहूँ, मुझे तेरा अनुमोदन प्राप्त नहीं होगा। आज के बाद से, मैं समय के इस अनमोल खजाने को संजोने की इच्छुक हूँ ताकि इससे मैं अधिक से अधिक सत्य प्राप्त कर सकूँ, और तेरे कार्य का अनुभव कर, मैं अपने भ्रष्ट स्वभाव से छुटकारा पा जाऊँगी। मैं तेरे वचनों के अनुसार जीवन व्यतीत करूँगी और पूरी तरह से तेरी आज्ञा का पालन करूँगी, और तुझसे सच्चा उद्धार प्राप्त करूँगी।

सम्बंधित मीडिया

  • परमेश्वर के प्रेम की प्रकृति क्या है?

    सिकियू, सुईहुआ सिटी, हीलॉन्ग जिआंग प्रदेश जब भी मैं परमेश्वर के वचन का यह अवतरण पढ़ता हूं, "यदि तुम हमेशा मेरे प्रति बहुत निष्ठावान और प्यार करने वाल…

  • आपदा से बचने का एकमात्र तरीका

    चाओटुओ, शियाओगन नगर, हुबेई प्रांत 12 मई को सिचुआन में आये भूकंप के समय से ही, मैं हमेशा डरी हुई और चिंतित रहती थी कि मैं किसी दिन किसी आपदा से मारी ज…

  • परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो

    मुझे अभी-अभी कलीसिया के अगुआ का उत्तरदायित्व लेने के लिए चुना गया था। लेकिन कुछ अवधि तक की कठिन मेहनत के बाद, न केवल कलीसिया का इंजील समूह का कार्य फीका पड़ गया था, बल्कि इंजील दल में मौजूद मेरे सभी भाई-बहन भी नकारात्मकता और कमज़ोरी में जी रहे थे।

  • सत्‍य को सचमुच स्‍वीकार करना क्‍या है?

    अतीत में, हर समय जब मैं परमेश्‍वर द्वारा प्रकट उस वचन के बारे में पढ़ता था कि कैसे लोग सत्‍य को स्‍वीकार नहीं करते हैं, तो मैं यह विश्‍वास नहीं करता था कि वे वचन मुझ पर भी लागू होते हैं।