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ईसाई प्रेम: विच्छेद से कैसे उबरें

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शुई, दक्षिण कोरिया

गर्मियों की शुरुआत में एक दिन सुबह, एक हलकी खुशबू हवा में बिखरी हुई थी और धूप हर कोने में फैल रही थी। फूलों के चित्रों वाली एक शिफॉन पोशाक पहने हुए चीनयी मेट्रो स्टेशन पर खुश महसूस कर रही थी, और अगली ट्रेन के आने की प्रतीक्षा कर रही थी। अपने सिर को घुमाते हुए, चीनयी ने अनायास एक वीडियो स्क्रीन पर एक लड़की को एक लड़के के साथ सम्बन्ध-विच्छेद करते हुए देखा क्योंकि उस लड़के ने उसके साथ बेवफ़ाई की थी, फिर लड़की अपने चेहरे पर आँसू लिए दूसरी ओर घूमकर चली गई। चीनयी ने स्क्रीन को टकटकी लगाये देखा। तभी, उसने अचानक सोचा कि वह पहले कैसी थी, जब उसने एक सुंदर प्रेम की लालसा की थी जहां वह और उसका प्रेमी एक साथ जीवन गुजारेंगे, लेकिन अंत में, उसे केवल ज़ख्म और घाव मिले थे ...

बचपन से ही चीनयी 'द बटरफ्लाई लवर्स' वाला गीत सुनना पसंद करती थी, और वह एक टीवी धारावाहिक देखना और भी अधिक पसंद करती थी, जिसका नाम भी 'द बटरफ्लाई लवर्स' था, जिसके भीतर नायक-नायिका की "केवल जब पहाड़ ढह जाएँगे, एवं स्वर्ग और पृथ्वी एक हो जाएँगे, तभी मैं तुमसे ज़ुदा हूँगा" वाली प्रेम कहानी ने हमेशा उसे गहराई से भावुक बनाया था। उसे उम्मीद थी कि उसे भी एक ऐसा प्यार मिलेगा जो कि आकाश और पृथ्वी के पुराने हो जाते तक बना रहेगा, और जो उसके जीवन भर चलता रहेगा।

जिस साल वह 17 की हुई, चीनयी की मुलाकात युहान से हुई थी। वह सभ्य और विचारशील था, एवं वह हमेशा चीनयी की देखभाल किया करता था। हर बार जब चीनयी अपने जीवन के दबावों के कारण दुखी महसूस किया करती, युहान हमेशा उसे दुबारा खुश करने का कोई तरीक़ा ढूँढ निकालता था। चीनयी चीज़ों के बारे में कुड़कुड़ाना पसंद करती थी, और युहान सुनने का काम बखूबी किया करता था। ...अनजाने में ही, चीनयी ने युहान के मज़ाकिया स्वभाव और उसकी समझदार प्रकृति की ओर खुद को आकर्षित होते हुए पाया, और उसने एक से अधिक बार खुद से पूछा: "क्या वह मेरे लिए है?" चीनयी का उस पर दिल आ गया था और, समय के साथ, वे अधिक से अधिक संपर्क में रहने लगे थे। लेकिन जो बात चीनयी को उलझन में डाल देती थी वह यह थी कि युहान कभी-कभी उसके फ़ोन का जवाब नहीं देता था, और कभी-कभी वह अपना फ़ोन बंद कर लेता था। एक दिन, चीनयी को एक दोस्त से पता चला कि युहान पहले से ही शादी-शुदा था और उसका एक साल का बेटा था। यह जानकारी पूरी तरह से चीनयी की सहन-शक्ति से परे थी, और इसे सुनते ही वह लगभग ढह-सी गई थी! उसने इस प्यार के बारे में सोचा था कि वह और युहान उनके बाक़ी जीवन भर एक साथ होंगे, और फिर भी युहान ने उसे पूरी तरह से धोखा दिया था। वह सिर्फ़ यह नहीं समझ पा रही थी कि युहान कैसे उसके साथ इस तरह का व्यवहार कर सकता था, और उसे बहुत पीड़ा हुई। देर रात में वह अक्सर अपना तकिया पकड़े चुपचाप रोया करती थी। चीनयी की ऐसी सौत बनने की कोई इच्छा नहीं थी जो किसी के परिवार को नष्ट कर दे, और इसलिए, कुछ आंतरिक संघर्ष के बाद और युहान की दयनीय विनतियों के बावजूद, उसने उस पीड़ा को झेल लिया और युहान के साथ सभी रिश्ते तोड़ दिए।

कई साल बाद, चीनयी की युहान से फिर से मुलाकात हुई। युहुआन ने सुझाव दिया कि वे फिर से साथ हो लें और नए सिरे से शुरू करें, और चीनयी कुछ हिल-सी गई थी। उसने सोचा: "उस बात को कई साल हो गए हैं और मेरे लिए युहान की भावनाएँ बिल्कुल भी बदल नहीं हैं। अगर वह वास्तव में अपनी पत्नी से प्यार नहीं करता है, तो मैं उसे स्वीकार कर लूँगी।" चीनयी चाहती थी कि युहुआन किसी एक को चुन ले, और उसने उससे स्पष्ट कहा था कि वह एक विवाहित व्यक्ति के साथ संबंध नहीं रखेगी। अप्रत्याशित रूप से, युहुआन ने अपने चेहरे पर एक तिरस्कार के भाव के साथ कहा, "इस आधुनिक युग में, कौन ऐसा योग्य मर्द है, जिसकी दो या तीन महिलाएँ न हों?' 'घर पर लाल झंडी गिरती नहीं, बाहर हवा में रंगीन झंडे फहराते रहते हैं।' क्या यह आम बात नहीं है? तुम बहुत अधिक रूढ़िवादी हो!" युहान की बातों ने चीनयी को स्तब्ध कर दिया। उसने कभी नहीं सोचा था कि युहान ऐसी बात कहेगा, और उसे लगा जैसे वह उसे बिल्कुल जानती ही नहीं थी। वह पूरी तरह से चकित महसूस कर रही थी: किस बात ने युहान को इतना स्वार्थी और कामुक बना दिया गया था?

उसे कुछ चोट लगी। अपने पहले प्यार के इस तरह खत्म हो जाने की उसने कभी उम्मीद नहीं की थी। लेकिन उसे अभी भी आशा थी कि बहुत दूर न हो ऐसे भविष्य में, वह एक ऐसे प्यार को पा ही लेगी जो आजीवन बना रहेगा।

बाद में, चीनयी दक्षिण कोरिया चली गई और हाओयू नाम के एक दक्षिण कोरियाई व्यक्ति ने उसके जीवन में प्रवेश किया। हाओयू बहुत स्नेही था, उसकी रुचियाँ चीनयी जैसी थीं और वह उसकी बहुत परवाह किया करता था। हाओयू और चीनयी अक्सर हर चीज़ के बारे में बात किया करते, संगीत सुनते और एक साथ गाने गाया करते थे। लगभग हर दिन, हाओयू चीनयी को संदेश भेजकर पूछा करता था कि वह कैसी थी, और वह उसे अपने माता-पिता से मिलने ले गया। अपने पिछले सम्बन्ध के टूटने से आहत होने के बाद, एक विदेशी भूमि में, चीनयी के जीवन में हाओयू की उपस्थिति ने उसके दिल को दिलासा दिया। एक बार, हाओयू ने चीनयी के प्रति गहरे स्नेह के साथ यह गाया: "मैं तुम्हारे साथ पृथ्वी के छोर तक जाऊँगा। ...हम साथ-साथ बूढ़े होंगे, बिना किसी फ़िक्र या परवाह के। ..." चीनयी का दिल उसके प्रति भावुक हो गया, क्योंकि हाओयू जिसके बारे में गा रहा था, वो वही प्यार और जीवन था जिसे वह चाहती थी, और उसे उम्मीद थी कि हाओयू वह व्यक्ति होगा जिसके साथ वह बूढ़ी हो सकेगी। कौन जान सकता था कि जिस क्षण उसका हृदय हाओयू की ओर बढ़ने लगा था, वही अंत की शुरुआत होगी ...

एक बार, चीनयी हाओयू और उसके दोस्तों के साथ बाहर खाने के लिए गई और, भोजन के दौरान, हाओयू ने एक फोन का जवाब दिया। जब वह फोन पर था, तो चीनयी ने उसे एक गुप्त स्वर में बात करते हुए सुना, और उसके अंतर्ज्ञान ने उसे बताया कि हाओयू का किसी अन्य लड़की के साथ एक अनुचित संबंध था। बहरहाल, जब उसने हाओयू से इसके बारे में पूछा, तो उसने गंभीरता से कसम खाई, और विश्वास दिलाया कि चीनयी के लिए उसकी भावनाएँ नेक थीं। उसके निर्दोष होने के आश्वासन को सुनकर, चीनयी ने उस पर विश्वास करना चुना। बाद में उसने अपना काम करने का स्थान बदल दिया, हाओयू भी काम करने के लिए दूसरे शहर जाने लगा और कुछ समय बीतने के बाद, हाओयू का चीनयी के साथ संपर्क लगातार कम होता गया।

एक दिन, अचानक हाओयू ने चीनयी से कहा, "मुझे आशा है कि हम अच्छे दोस्त हो सकते हैं। इन शब्दों से चीनयी को जैसे एक झटका सा लगा, और उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि एक घाव को जो हाल ही में भरा था, फिर एक बार बुरी तरह से उधेड़ दिया गया था, और उसे ऐसी पीड़ा हुई कि वह साँस नहीं ले पा रही थी। उसे इतना दुख हुआ कि वह केवल अपने आपसे बड़बड़ा पाई, "क्या हमारा प्यार इतनी जल्दी मर जाएगा? हमेशा मैं ही वो क्यों होती हूँ जिसे आहत किया जाता है?" बाद में चीनयी बहुत उदास हो गई, और उसे लगा जैसे उसने अपनी आत्मा को खो दिया हो।

ठीक तभी जब वह पीड़ित और खोई-खोई सी महसूस कर रही थी, उसने परमेश्वर का अंत के दिनों का सुसमाचार सुना। परमेश्वर के वचनों के सिंचन और आपूर्ति से, और भाइयों और बहनों से मिली देखभाल और मदद के माध्यम से, उसके टूटे, ठिठुरे हुए दिल को काफी गर्माहट मिली। तब से, चीनयी अक्सर भाइयों और बहनों के साथ परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और सत्य के बारे में सहभागिता करने के लिए मिला करती थी, और वे परमेश्वर की प्रशंसा में स्तुति-भजन गाया करते थे। उसे ऐसा लग रहा था कि वह हर दिन समृद्धि और खुशियों का जीवन जी रही थी।

एक दिन, चीनयी को अचानक हाओयू से एक संदेश मिला, जिसमें उसने कहा कि वह अभी भी अपने रिश्ते को जारी रखना चाहता था। खुशी के एक पल के बाद, चीनयी हिचकिचायी। वह नहीं जानती थी कि क्या हाओयू उसके साथ जीवन निभाने में सक्षम होगा, और इसलिए उसने परमेश्वर से प्रार्थना की एवं उसका मार्गदर्शन और उसकी अगुआई करने के लिए कहा। कुछ समय बाद, अचानक चीनयी की हाओयू के एक दोस्त से मुलाकात हो गई और, उनकी बातचीत के दौरान, उसे पता चला कि हाओयू की कई गर्लफ्रेंड थीं और वह अक्सर रिश्तों के संदर्भ में अपने विकल्प खुले रखता था। जिस बात ने चीनयी को इससे भी अधिक हैरान कर दिया वह यह थी कि जब वह उसके साथ थी, तब वह एक अन्य लड़की के साथ अनैतिक संबंध बनाए हुए था। यह सुनने के बाद, चीनयी बहुत गुस्से में आ गई। उसे ऐसे पुरुषों से सबसे ज्यादा नफ़रत थी, जो अपने प्यार के लिए कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेते थे। हाओयू उसके साथ खेल रहा था और फिर भी वह अभी भी उस तरह के आदमी से ठेस और दर्द महसूस कर रही थी—वह कितनी बेवकूफ़ थी! उसने उसके दो असफल प्यार पर फिर से सोचा, और उनके नाटकीय अंत ने उसे असामान्य रूप से चोट और पीड़ा पहुँचाई थी। वह आह भरते हुए यह सोचे बिना रह न सकी: "इस दुनिया में सच्चा प्यार कहाँ मिल सकता है? क्या मेरी ओर अविभाजित ध्यान दे सके ऐसे एक आदमी को ढूँढना इतना कठिन है? मुझे ऐसा प्यार क्यों नहीं मिल सकता जो हमेशा वफ़ादार रहे? मुझे अंत में केवल विश्वासघात और घाव ही क्यों मिलते हैं?"

चीनयी ने अपने दर्द के बारे में कलीसिया की एक बहन से दिल की बात की, और बहन ने उसके साथ सहभागिता करते हुए कहा: "हम दर्द में जीते हैं क्योंकि हमारे पास सत्य नहीं हैं, क्योंकि हम शैतान द्वारा मानव जाति को भ्रष्ट कर देने की सच्चाई को और उन चालाक योजनाएँ को नहीं समझते हैं जिनका इस्तेमाल शैतान हमें धोखा देने के लिए करता है। यह इसलिए है क्योंकि हम शैतान की गलत सोच से जीते हैं, और हम अपनी कल्पना के ही पूर्ण प्यार की खोज करते हैं। हम सभी जानते हैं कि पहले जब मानवजाति शैतान द्वारा केवल थोड़ी ही भ्रष्ट हुई थी, लोगों की सोच अपेक्षाकृत रूढ़िवादी थी, क्योंकि वे सदाचार और नैतिकता से बंधे हुए थे और वास्तविक भावनाओं और सच्चे प्यार का विशेष ध्यान रखा करते थे। भले ही एक पुरुष और एक महिला आजीवन एक दूसरे के प्रति समर्पित न भी रहे हों, फिर भी वे मर्यादाओं का अत्यधिक उल्लंघन नहीं करते थे। बहरहाल अब शैतान द्वारा मानव जाति को अधिकाधिक गहराई से भ्रष्ट किया जा रहा है, और सभी प्रकार की प्रेम प्रतिमाओं, रूमानी पुस्तकों और फिल्मों के प्रभाव में आकर, नैतिकता के बारे में लोगों के विचारों पर हमला किया गया है और उन्हें नष्ट कर दिया गया है। लोग अब दुष्टता की तरफ़दारी करते हैं, भौतिक वासनाओं के लालची होते हैं और वे पाप के सुख का भोग करते हैं। ज्यादातर लोग दुष्टता और स्वच्छन्दता की घिनौनी, नकारात्मक बातों को ही चलन मानते हैं, पति और पत्नी का एक दूसरे से विश्वासघात करना अब एक सामान्य घटना है, और वास्तविक प्यार को पाना और भी कठिन हो गया है। आओ, हम पढ़ें कि परमेश्वर के वचनों का इस बारे में क्या कहना है!'' चीनयी ने परमेश्वर के वचनों में "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" के अध्याय को खोला और वह इसे पढ़ने लगी, "कैसे शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए सामाजिक प्रवृत्तियों का लाभ उठाता है। …एक के बाद एक, ये सभी प्रवृत्तियाँ दुष्ट प्रभाव को लेकर चलती हैं जो निरन्तर मनुष्य को पतित करते रहते हैं, जिसके कारण वे लगातार विवेक, मानवता और कारण को गँवा देते हैं, और जो उनकी नैतिकता एवं उनके चरित्र की गुणवत्ता को और भी अधिक नीचे ले जाते हैं, उस हद तक कि हम यहाँ तक कह सकते हैं कि अब अधिकांश लोगों के पास कोई ईमानदारी नहीं है, कोई मानवता नहीं है, न ही उनके पास कोई विवेक है, और कोई तर्क तो बिलकुल भी नहीं है। …ऐसे मनुष्यों के लिए जो स्वस्थ्य शरीर और मन के नहीं है, जो कभी नहीं जानते हैं कि सत्य क्या है, जो सकारात्मक एवं नकारात्मक चीज़ों के बीच अन्तर नहीं बता सकते हैं, इन किस्मों की प्रवृत्तियाँ एक के बाद एक उन सभी से स्वेच्छा से इन प्रवृत्तियों, जीवन के दृष्टिकोण एवं मूल्यों को स्वीकार करवाती हैं जो शैतान से आती हैं। जो कुछ शैतान उनसे कहता है वे उसे स्वीकार करते हैं कि किस प्रकार जीवन तक पहुँचना है और जीवन जीने के उस तरीके को स्वीकार करते हैं जो शैतान उन्हें "प्रदान" करता है। उनमें सामर्थ्य नहीं है, न ही उनमें योग्यता है, प्रतिरोध करने की जागरूकता तो बिलकुल भी नहीं है।" "शैतान इन सामाजिक प्रवृत्तियों का उपयोग करता है ताकि एक बार में एक कदम उठाकर लोगों को दुष्टों के घोंसले में आने के लिए लुभा सके, ताकि सामाजिक प्रवृत्तियों में फँसे लोग अनजाने में ही धन एवं भौतिक इच्छाओं का समर्थन करें, और साथ ही दुष्टता एवं हिंसा का समर्थन करें। जब एक बार ये चीज़ें मनुष्य के हृदय में प्रवेश कर जाती हैं, तो मनुष्य क्या बन जाता है? मनुष्य दुष्ट शैतान बन जाता है! ऐसा मनुष्य के हृदय में कौन से मनोवैज्ञानिक झुकाव की वजह से होता है? मनुष्य किस बात का समर्थन करता है? मनुष्य दुष्टता और हिंसा को पसन्द करना शुरू कर देते हैं। वे खूबसूरती या अच्छाई को पसन्द नहीं करते हैं, और शांति को तो बिलकुल भी पसन्द नहीं करते हैं। लोग सामान्य मानवता के साधारण जीवन को जीने की इच्छा नहीं करते हैं, बल्कि इसके बजाए ऊँची हैसियत एवं अपार धन समृद्धि का आनन्द उठाने की, देह के सुखविलासों में मौज करने की इच्छा करते हैं, और उन्हें रोकने के लिए प्रतिबंधों के बिना और बन्धनों के बिना अपनी स्वयं की देह को संतुष्ट करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, दूसरे शब्दों में जो कुछ भी वे चाहते हैं करते हैं।"

बहन ने अपनी सहभागिता जारी रखते हुए कहा, "परमेश्वर के वचनों से, हम यह देख सकते हैं कि मानव जाति इतनी दुष्ट और पतित, इतनी घिनौनी और भ्रष्ट मुख्यतः इसीलिए है कि विभिन्न सामाजिक चलन जिन्हें शैतान जन्म देता है, लोगों को बहकाते और उन्हें भ्रष्ट करते हैं। हमारे आसपास के सभी लोगों, घटनाओं और चीज़ों के माध्यम से, शैतान हमें बुरी भ्रांतियाँ सिखाता है, जैसे कि 'घर पर लाल झंडी गिरती नहीं, बाहर हवा में रंगीन झंडे फहराते रहते हैं', 'मस्तियों के लिए दिन को झपट लो क्योंकि जीवन छोटा है', और 'अनंत काल की मत पूछो, वर्तमान में मस्त रहो।' और शैतान द्वारा भ्रष्ट किए जाने के बाद, हमारा स्वभाव भी अविश्वसनीय रूप से दुष्ट हो जाता है, और फिर हमारे लिए शैतान की दुष्ट विचारधाराओं को स्वीकार करना बहुत आसान हो जाता है, हम अपनी दैहिक वासनाओं के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर देते हैं और दुष्टता की वकालत करते हैं। हम कई चक्करों को चलाना, और एक ही रात के सम्बन्ध बनाना, महान और शानदार बात मानते हैं। धीरे-धीरे, जैसे-जैसे हम शैतान की दुष्ट विचारधाराओं से विषाक्त और प्रभावित होते जाते हैं, लोग अविश्वसनीय रूप से ठंडे और हृदयविहीन, स्वार्थी और नीच, दुष्ट और पतित हो जाते हैं, और वे अब और अपनी सोच को अंतरात्मा या विवेक तक नहीं ले जाते हैं। उदाहरण के लिए, युहान को लो। वह सदाचार या नैतिकता के बारे में परवाह नहीं करता था, वह अपनी पत्नी की पीठ के पीछे तुम्हारे साथ था, और उसने तुम्हें और उसकी पत्नी दोनों को ठेस पहुँचाई; हाओयू अपने प्यार में चंचल था और एक साथ कई लड़कियों के साथ रिश्ते बनाकर रखता था, और उसने दूसरों को धोखा दिया। और फिर भी उसने कोई शर्म महसूस नहीं की, उसका मानना था कि इस तरह के व्यवहार का मतलब यह था कि वह एक शक्तिशाली, आकर्षक व्यक्ति था। शैतान इन बुरी रुझानों का उपयोग न केवल कई लोगों को लालच और वासना के मार्ग पर बहकाने के लिए, उन्हें अधिकाधिक पतित और दुष्ट, व्यसनी नर-पिशाच बनाने के लिए करता है, बल्कि कई दयालु और प्रेमी पतियों और पत्नियों को एक दूसरे को धोखा देने के लिए भी इसका इस्तेमाल करता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके परिवार अंततः बिखर जाते हैं। नतीजतन, सामाजिक बुराइयाँ आम चलन बन चुकी हैं, लोगों के आपसी सम्बन्ध बहुत अस्त-व्यस्त हो गए हैं, और तलाक़ एवं पुनर्विवाह के किस्से बढ़ते जा रहे हैं। इस तरह के दुष्ट युग में, किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढना बहुत कठिन है जो हमारे साथ नेकी से पेश आएगा, ऐसे प्यार की तो बात ही न करो जो हमेशा के लिए वफ़ादार हो। बहन, अब हमने परमेश्वर के वचनों से शैतान द्वारा मानव जाति को भ्रष्ट करने की सच्चाई को समझ लिया है, और अब हमने उन तरीकों को, जिनसे शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करता है, और उसके नीच उद्देश्यों को समझ लिया है, और इसलिए हमें पारस्परिक भावनाओं को सही ढंग से समझना चाहिए। इस तरह, हमें आँखें मूँद कर दर्द में नहीं जीना होगा और न ही हम शैतान से धोखा खाएँगे।"

परमेश्वर के वचनों और बहन की सहभगिता ने चीनयी को, जो भ्रम और आक्रोश में जी रही थी, अचानक जगा दिया: "तो ये शैतान है जो 'घर पर लाल झंडी गिरती नहीं, बाहर हवा में रंगीन झंडे फहराते रहते हैं', 'मस्तियों के लिए दिन को झपट लो क्योंकि जीवन छोटा है', जैसी बुरी रीतियों का लोगों को बहकाने और भ्रष्ट करने के लिए, उन्हें वासना के पाप में गिराने के लिए, अधिकाधिक दुष्ट, स्वार्थी और नीच बनाने के लिए, और उन्हें अपनी गरिमा और सत्यनिष्ठा को खोने के प्रति उकसाने के लिए उपयोग कर रहा है। वास्तव में ये कुरीतियाँ ही हैं जिन्होंने युहान और हाओयू को उकसाया और प्रभावित किया है। केवल अपनी खुद की दुष्ट वासनाओं को संतुष्ट करने की फिराक़ में, उन्होंने उसे ठेस पहुँचाई, और वे भी इन बुरी प्रवृत्तियों के शिकार हैं।" इस बात को समझने के बाद, चीनयी ने अब युहान और हाओयू के विश्वासघात को दिल पर नहीं लिया।

बाद में, चीनयी ने परमेश्वर के इन वचनों को पढ़ा: "उदाहरण के लिए, यदि आप टेलीविज़न पर कोई कार्यक्रम देख रहे हों, तो इसमें किस प्रकार की बातें आपके दृष्टिकोण को बदल सकती हैं? …किस प्रकार की बातें लोगों को भ्रष्ट करेंगी? ये कार्यक्रम के मूल विचार और विषय-वस्तु होंगे, जो निर्देशक के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करेंगे, इन दृष्टिकोणों में वहन की गई सूचनाएँ लोगों के मन और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती हैं। क्या यह सही है?" ("स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V")। जब चीनयी ने परमेश्वर के वचनों पर चिंतन किया, तो उसने उन दिनों को याद किया जब वह धारावाहिक कार्यक्रम देखा करती थी और अनजाने में वह उन सब विचारधाराओं को स्वीकार कर लेती थी, जैसे कि "हमेशा के लिए वफ़ादार," "प्रेमी हमेशा एक साथ मरते हैं," और "केवल जब पहाड़ ढह जाएँगे, स्वर्ग और पृथ्वी एक हो जाएँगे तभी मैं तुमसे ज़ुदा हूँगा।" वह प्यार की लालसा से भर गई थी और हमेशा यह स्वप्न देखा करती थी कि उसे एक सदैव वफ़ादार रहने वाला प्यार मिलेगा। केवल दो असफल प्रेम का अनुभव करने के बाद ही चीनयी ने आखिरकार महसूस किया कि लोगों में धारावाहिक कार्यक्रम जिस प्रेम का गतिशील चित्रण किया करते थे, वह सब कल्पना मात्र था। वे वास्तविक जीवन में मौजूद थे ही नहीं, क्योंकि शैतान के द्वारा भ्रष्ट होने के बाद लोग सच्चे प्यार के अधिकारी नहीं थे। इसके बजाय, वे सब सिर्फ एक-दूसरे का इस्तेमाल और एक-दूसरे से विश्वासघात कर रहे थे, और वह खुद बहुत बेवकूफ थी और उसके पास कोई विवेक नहीं था, और प्यार के मामले में इन विचारों से वह धोखा खा गई थी। एक आदर्श प्रेम की उसकी खोज को उसने अपने संपूर्ण जीवन के उद्देश्य के रूप में मान लिया था। इसलिए जब उसके प्यार के सपने पूरे नहीं हुए, तो वह अविश्वसनीय रूप से उदास हो गई और उसे असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा था। अब, परमेश्वर के वचनों से हुए खुलासे के कारण, चीनयी अंततः स्पष्ट रूप से देख सकी थी कि शैतान ने लोगों की एक परिपूर्ण प्रेम की तलाश का इस्तेमाल उन्हें धोखा देने और उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए किया था, ताकि वे पीड़ा में इसे खोजते रह जाएँ। लेकिन वास्तव में, यह सिर्फ एक खूबसूरत भ्रम था जो कभी सच नहीं हो सकता था। जब लोग बार-बार असफलताओं का सामना करते हैं और वे उस प्यार को प्राप्त नहीं कर सकते जिसे वे चाहते हैं, तो वे एक ऐसे दर्द में रहते हैं जिससे वे बच नहीं सकते हैं—यह एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करता है! इस अहसास को पाकर, चीनयी ने तहेदिल से उसे बचाने के लिए परमेश्वर का शुक्रिया अदा किया, उसने परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि वह उसे अपने सामने वापस ले आया था और उसके वचनों से वह यह सीख पाई थी कि कैसे मनुष्य को भ्रष्ट करने की शैतान की चालाक योजनाओं को समझ लिया जाए और कैसे खुद को इसके नुकसान से बचाया जाए।

धड़धड़ाकर आती हुई मेट्रो ट्रेन के शोर ने चीनयी को अपनी गहरी सोच से वापस खींच लिया। अपने दिल में, उसने परमेश्वर के प्यार और उद्धार के बारे में सोचा और मुस्कुराते हुए, उसने ट्रेन के डिब्बे में कदम रखा। जब ट्रेन चलने लगी, तो चीनयी ने रेलिंग पकड़ ली और अपना सेल फोन खोला, अपने इयरफ़ोन लगाए, और धीमे-धीमे लय के साथ इसे गुनगुनाने लगी: "केवल सृष्टिकर्ता ने ही इस मानवजाति के ऊपर दया की है। केवल सृष्टिकर्ता ने ही इस मानवजाति को कोमलता और स्नेह दिखाया है। केवल सृष्टिकर्ता ही इस मानवजाति के लिए सच्चा और कभी न टूटनेवाला प्रेम रखता है। उसी प्रकार, केवल सृष्टिकर्ता ही इस मानवजाति पर दया कर सकता है और अपनी सम्पूर्ण सृष्टि का पालन पोषण कर सकता है। उसका हृदय मनुष्य के हर एक कार्यों से खुशी से उछलता और दुखित होता है: वह मनुष्य की दुष्टता और भ्रष्टता के ऊपर क्रोधित, परेशान और दुखित होता है; वह मनुष्य के पश्चाताप और विश्वास के लिए प्रसन्न, आनंदित, क्षमाशील और प्रफुल्लित होता है; उसका हर एक विचार और उपाय मानवजाति के लिए अस्तित्व में बने हुए हैं और उसके चारों और परिक्रमा करते हैं; जो वह है और जो उसके पास है उसे पूरी तरह से मानवजाति के वास्ते प्रकट किया जाता है; उसकी भावनाओं की सम्पूर्णता मानवजाति के अस्तित्व के साथ आपस में गुथी हुई है। मनुष्य के वास्ते, वह भ्रमण करता है और यहां वहां भागता है, वह खामोशी से अपने जीवन का हर अंश दे देता है; वह अपने जीवन का हर मिनट और सेकेंड समर्पित कर देता है।" (मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना में "केवल सृष्टिकर्ता मानवता पर दया करता है")।

"दया करता है," "कोमलता और स्नेह" और "अटूट स्नेह" जैसे शब्दों ने चीनयी के दिल को गहराई से द्रवित कर दिया। उसने उन दिनों के बारे में सोचा जब वह सबसे अधिक पीड़ा में थी, और परमेश्वर ने उसे अपने परिवार में वापस ले लिया था और उसके दिल के घावों को शांत करने के लिए अपने वचनों का उपयोग किया था, और यह परमेश्वर के वचन ही थे जिन्होंने उसे स्पष्ट रूप से यह दिखाया था कि कुरीतियों का, और प्यार के बारे में गलत विचारों का, उपयोग करके शैतान लोगों को भ्रष्ट एवं नियंत्रित करता है, और उन्हें धोखा देता है। केवल परमेश्वर के वचनों ने ही उसे शैतान की चालाक योजनाओं को देख पाने के लिए सक्षम बनाया था, और वह अब एक अस्पष्ट और भ्रामक प्रेम के पीछे नहीं भागेगी, बल्कि शैतान के द्वारा होते नुकसान से बच कर रहेगी। चीनयी अब यह समझ गई थी कि केवल परमेश्वर के सामने आकर और उसके उद्धार को स्वीकार कर, सच्चाई की खोज करके, एवं परमेश्वर से डरने और बुराई से दूर रहने की राह पर चलकर ही कोई जीवन में सही मार्ग का अनुसरण कर सकता है। वह गहराई से सराहना करने लगी, इस दुनिया में, जो प्यार सबसे अच्छा, सबसे सच्चा और सबसे निस्वार्थ है, वह मानव जाति के लिए परमेश्वर का प्यार ही है। केवल परमेश्वर ही चुपचाप मनुष्य से प्यार करता है, उसे जीवन की सांस देता है, उनका सिंचन करता है और उन्हें सच्चाई प्रदान करता है, और उन्हें शैतान की चालाक योजनाओं को समझ कर शैतान के नुकसान से दूर रहने में सक्षम बनाता है। चीनयी के पास इस तरह के प्यार का ऋण चुकाने का कोई रास्ता नहीं था! उसने तहेदिल से परमेश्वर के सामने अपने आभार और अपनी स्तुति की पेशकश की, और उसने एक संकल्प किया: सत्य की खोज करना, आजीवन परमेश्वर का अनुसरण करना, और जीवन में सही मार्ग पर चलना!

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