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मैंने स्पष्ट रूप से अपनी सच्ची कद-काठी को देखा

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डिंग ज़ियांग तेंगझोउ शहर, शैंडॉन्ग प्रांत

कलीसिया के अगुआओं की एक सभा में जिसमें मैं एक बार उपस्थित हुई थी, कलीसिया के एक नव-चयनित अगुआ ने कहा था: "मेरी कद-काठी पर्याप्त नहीं है। मुझे लगता है कि मैं इस कर्तव्य को पूरा करने के लिए उपयुक्‍त नहीं हूँ। मैं कई चीजों से इस हद तक दबाव महसूस करती हूँ, कि मैं लगातार कई दिनों और रातों तक सो भी नहीं पाई हूँ।…" उस समय, मैं परमेश्वर की अपनी खोज की ज़िम्मेदारी वहन कर रही थी, तो मैंने उसके साथ संवाद किया: "समस्त कार्य परमेश्वर द्वारा किया जाता है; मनुष्य तो बस थोड़ा सा सहयोग ही करता है। अगर हम बोझिल महसूस करते हैं, तो परमेश्वर के समक्ष अक्सर प्रस्तुत होना और परमेश्वर पर भरोसा करना, निश्चित रूप से हमें परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और बुद्धि को समझाएगा। अपने कार्य से बोझिल महसूस करना अच्‍छी बात है। लेकिन यदि बोझ आफ़त बन जाए, तो यह एक बाधा बन जाएगा, और यह नकारात्मकता और यहाँ तक कि परमेश्वर के प्रति ग़लतफ़हमी भी लाएगा।" परमेश्वर के मार्गदर्शन के अधीन, मैं महसूस करती थी कि मेरे संवाद खास तौर पर प्रकाशित थे। वह बहन भी यह मानती थी कि वह ऐसी स्थिति में थी, जहाँ उसके दिल में परमेश्वर के लिए स्थान नहीं था, और कि वह परमेश्वर के भरोसे रहने की जगह इसे खुद कर रही थी, और इस तरह से उसने प्रवेश का मार्ग खोज लिया था। मैं उस समय बहुत खुश थी क्योंकि मैं सोचती थी कि मैं उस बहन की समस्या को हल कर सकी थी, जिससे मैंने साबित किया था कि मेरे पास सत्य के इस पहलू की यथार्थता है।

दो महीने बाद, कलीसिया ने मेरे कर्तव्यों को पूरा करने के लिए मेरा पुन: आवंटन सुधार समूह में कर दिया। जब मैं पहली बार पहुँची, तो मैं पाठ के सुधारों के पीछे के सिद्धांतों को नहीं समझ सकी थी। बार—बार पाठों के एक के बाद एक ऐसे आलेखों का सामना करके जिनमें सुधार, व्यवस्था और मार्गदर्न की जरूरत थी, मैं खुद को नकारात्मकता की स्थिति में जाने से नहीं रोक सकी थी। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आता था, और फिर भी मुझे न केवल अपने इस कर्तव्य को पूरा करना था बल्कि मुझे इन आलेखों की कमियों का पता लगाने का काम भी दिया गया था। इसमें मुझसे बहुत ज्यादा अपेक्षा की गई थी! मैं बस बहुत ज्यादा दबाव महसूस करती थी और शांत नहीं हो पा रही थी, और मैं यह भी नहीं जानती थी कि परमेश्वर के भरोसे कैसे रहा जाए। मैं इतनी ज्यादा बेचैन हो गई थी कि लगातार तीन दिन और रातों तक सो नहीं सकी थी। मैं अपनी स्थिति के समक्ष काफी घबरा गई थी। जब मैंने कलीसिया की उस नई अगुआ की समस्या को हल करने में उसकी मदद की, तो मुझे लगा कि मैं सत्य के इस पहलू को पूरी तरह से समझ गई हूँ। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि अब जब मैं ऐसी समस्या में चल रही हूँ, तो मुझे नहीं पता कि ऐसे अनुभव को कैसे सँभाला जाए? मैं अपनी व्याकुलता और उलझन को लेकर परमेश्वर के समक्ष आयी।

बाद में, मैंने "कार्य और प्रवेश (2)" में परमेश्वर के वचन देखे: "जब मनुष्य कार्य करता और बोलता है, या अपनी आध्यात्मिक भक्ति में मनुष्य की प्रार्थना के दौरान, एक सच्चाई उसे अचानक स्पष्ट हो जाएगी। वास्तव में, हालाँकि, मनुष्य जो देखता है वह केवल पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्धता है (प्राकृतिक रूप से, यह मनुष्य से सहयोग से संबंधित है) और मनुष्य की सच्ची कद-काठी नहीं है। अनुभव की अवधि के बाद जिसमें मनुष्य कई वास्तविक कठिनाइयों का सामना करता है, ऐसी परिस्थितियों में मनुष्य की वास्तविक कद-काठी स्पष्ट होती है। … केवल इस तरह के अनुभव के कई चक्रों के बाद ही कई ऐसे लोग जो अपनी आत्माओं के भीतर जाग गए हैं, वे महसूस करते हैं कि अतीत में यह उनकी वास्तविकता नहीं थी, बल्कि पवित्र आत्मा से एक क्षणिक रोशनी थी, और मनुष्य को केवल रोशनी प्राप्त हुई थी। जब पवित्र आत्मा मनुष्य को सच्चाई समझने के लिए प्रबुद्ध करता है, तो ऐसा प्रायः, संदर्भ के बिना, स्पष्ट और विशिष्ट तरीके से होता है। अर्थात्, वह इस प्रकाशन में मनुष्य की कठिनाइयों को शामिल नहीं करता है, और बल्कि सीधे ही सत्य को प्रकट करता है। जब मनुष्य प्रवेश में कठिनाइयों का सामना करता है, तो मनुष्य पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्धता को शामिल करता है, और यह मनुष्य का वास्तविक अनुभव बन जाता है।" जैसे ही मैंने इस अंश पर मनन किया, मैं समझ गई: उस बहन की समस्या को हल करने में उसकी मदद करने पर मैंने जिस सत्य को समझा था, वह परमेश्वर की रोशनी से आया था। यह उस समय के मेरे सहयोग के कारण था कि मुझे पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता प्राप्त हुई थी। लेकिन यह मेरी सच्ची कद-काठी नहीं थी और इससे यह भी प्रदर्शित नहीं होता था कि मुझे सत्य का वह पहलू प्राप्त हो गया है। पवित्र आत्मा ने उस समय मुझे सत्य को समझने के लिए प्रबुद्ध किया था क्योंकि यह मेरे कार्य के लिए ज़रूरी था, और मेरे सहयोग के माध्यम से, उसने मेरे कार्य की समस्याओं और कठिनाइयों को हल करने में मेरी मदद की थी। लेकिन इस संबंध में मुझे सच्चा अनुभव मिलने से पहले, मेरी कद-काठी तब भी ऐसी छोटी ही थी। इसलिए जब मैं प्रवेश में कठिनाइयों का सामना करती हूँ, तो यह केवल पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता को सम्मिलित करने के माध्यम से ही होता है, कि यह मेरी जिंदगी का असल अनुभव बन सकती हैं।

परमेश्वर के वचनों की प्रबुद्धता और मार्गदर्शन में, मैंने परमेश्वर को समझने और उस पर भरोसा करने के लिए अपने दिल को शांत कर लिया, और सौंपे गए उन लेखों और उदाहरणों के पीछे के लेखन सिद्धांतों की ध्यानपूर्वक तुलना और मीमांसा करके, मैंने अनजाने में ही परमेश्वर की प्रबुद्धता और उसका मार्गदर्शन प्राप्त कल लिया, जिससे मैं धीरे—धीरे उन आलेखों की समस्याओं की सही प्रकृति का पता लगाने में सक्षम हुई, मैंने उन लेखों को सुधारते समय अपने विचारों में और अधिक स्पष्टता प्राप्त की, और लेखों को लिखने का अभ्यास करने की हमसे परमेश्वर के घर की अपेक्षा के पीछे के अर्थ को भी महसूस किया। मैं अपनी नकारात्मकता और ग़लतफ़हमी से भी धीरे—धीरे बाहर निकल पाई थी।

परमेश्वर का धन्यवाद। इस अनुभव के माध्यम से मैं अपनी समझ के भटकावों से मुड़ते हुए अपनी सच्ची कद—काठी को स्पष्ट रूप से देख पाई। इसने मुझे अहसास कराया कि पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध की गई सत्य की मेरी समझ मेरे वास्तविक अनुभव का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। इसके अलावा, इसका यह अर्थ नहीं था कि मेरे पास सत्य के इस पहलू की वास्तविकता है। अब से, मैं अभ्यास और प्रवेश करने के लिए असल जीवन में पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता लाने की और अधिक इच्छुक हूँ, ताकि ये सत्य असल में मेरी जिंदगी की वास्तविकता बन सकें।