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पति से मिले धोखे के बाद परमेश्वर ने उसे पीड़ा की काली छाया से बचाया

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ओऊयांग मो, हुबेई प्रान्त

समय वाकई पंख लगाये उड़ जाता है। हाँगर, एक भोली-भाली लड़की से एक शालीन युवती में बदल गयी, और प्यार में उसकी रुचि जगने लगी। उसे धन या हैसियत में दिलचस्पी नहीं थी। वह बस एक ऐसा रिश्ता चाहती थी, जिसमें चाहे कोई भी तूफ़ान आये पर अंतरंगता और प्यार बना रहे, वे जरूरत के समय में एक-दूसरे की मदद करें, और एक साथ बढ़ती उम्र की ओर कदम रखें। वह शांति से एक उस समय के आने का इंतज़ार कर रही थी...

वह उसकी दुनिया में आँधी जैसा आया और उसने अपने सुंदर चेहरे और साफ़दिल आंखों से हाँगर के दिल की धड़कनों को बढ़ा दिया। उसके मन में भी वास्तव में हाँगर के लिए भावनाएं थीं। उस समय से, हाँगर के शांत, नीरस दिन सूरज की रोशनी से जगमगा उठे। समय के साथ वे करीब आए और उसकी सुंदरता से कहीं ज़्यादा, उसकी कोमलता और विचारशीलता ने हाँगर के भीतर प्यार को जगाया। वह जानती थी कि वही वो इन्सान है जिसे वह अपनी ज़िन्दगी सौंपना चाहती थी और बाकी उम्र बिताना चाहती थी। उसने भी हाँगर को ज़िन्दगीभर की खुशियाँ देने की कसम खाई। लेकिन, हाँगर के माता-पिता ने आपत्ति जताई, कि वह एक गरीब परिवार से था और वे चाहते थे कि हाँगर उसे छोड़ दे। हाँगर को इसकी ज़रा भी परवाह नहीं थी, वह केवल इतना जानती थी कि वे वास्तव में एक दूसरे से प्यार करते हैं और वे दृढ़ता के साथ ज़िन्दगी भर साथ रह सकते हैं। इस तरह, अपने माता-पिता की आपत्तियों के बावजूद, वह उसके साथ बहुत दूर चली गई।

ज़्यादा समय नहीं बीता था कि, एक प्यारा सा, गोल-मटोल बेटा उनकी गोद में आया, वे उसे आरामदायक ज़िन्दगी देने के लिए निरंतर काम किया करते थे। भले ही हाँगर के लिए यह कठिन और थका देने वाला समय था, लेकिन अपने प्यारे के साथ, घर की देख-रेख के लिए कड़ी मेहनत करना, उसके लिए एक बहुत ही सुखद आनंद था। एक बार हाँगर के जन्मदिन पर उसके पति ने एक प्रेम गीत—बारिश या धूप—रेडियो पर बजवाने लिए अपने आधे महीने का वेतन खर्च कर दिया। जैसे ही गाना शुरू हुआ उसने उसके दिल को ऐसा छुआ कि वह रोने लगी; उस गाने में, उसने अपने एकजुट दिलों की आवाज़ को सुना। प्यार में दो लोग, जो हमेशा के लिए एक दूसरे से बंधे, आपस में प्रतिबद्ध हैं, उनसे ज्यादा कीमती क्या हो सकता है? वह बड़ी दौलत की तलाश में नहीं थी, बस उसे इस तरह का वैवाहिक सद्भाव और प्रेम चाहिए था। सामंजस्य से भरा ऐसा घर उसके लिए काफी था।

साल, दिन की तरह बीत गए, और पलक झपकते ही 20 साल गुज़र गए। उनका बेटा बड़ा हो गया था और वे एक बड़े पारिवारिक व्यवसाय को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। लेकिन एक वक्त पर हाँगर ने महसूस किया कि उसके पति का घर आना कम होता जा रहा था, और वह ज़्यादातर यह बहाने बना रहा था कि उसे दूसरों का मन बहलाना था। जो कभी एक स्नेहमयी, खुशहाल घर हुआ करता था वह ठंडा पड़ता जा रहा था। हाँगर परेशान थी: जब वे कंपनी के निर्माण की तैयारी कर रहे थे, तब भी बहुत सारी चीजें थीं जिन्हें उसके पति को ही संभालना था, भले ही, वह उस दौरान बहुत व्यस्त था लेकिन फिर भी वह हमेशा जितनी जल्दी हो सके घर आ जाया करता था। अब जबकि कंपनी के संचालन के सभी पहलू सही पटरी पर आ गये थे और वह पहले की तरह व्यस्त नहीं था, तो वह घर कम क्यों आ रहा था? वह परेशान होने लगी। उसे अपने ग्राहकों की शैली के बारे में स्वाभाविक समझ थी: पैरों के मसाज, भाप स्नान, कैरिओके, और नाइटक्लब जैसे मनोरंजन के सभी प्रकारों की एक ही जगह पर उपलब्ध सेवाएं, उद्योग के अनकहे नियम बन गए थे। एक रात की ऐय्याशी और नाजायज़ रिश्तों के लिए सभी प्रकार के मनोरंजन स्थानों पर जाना कई पुरुषों के लिए एक प्रवृत्ति बन गई थी। उसका पति मेहमानों का दिन-प्रतिदिन मनोरंजन करता था, मनोरंजन के उन स्थानों में आता जाता था, जो लालच के साधनों से भरपूर थे, तो क्या उसका पति भी...? नहीं, ऐसा हो ही नहीं सकता! वह और उसका पति पिछले दो दशकों से हर तूफान से हाथ थामकर गुज़रे थे, और उस दौरान की हर छोटी चीज उनके प्यार का प्रमाण थी। थोड़े से प्रलोभन के आगे प्यार की ऐसी मजबूत नींव कैसे गिर सकती है? उसे भरोसा था कि उनका प्यार किसी भी परीक्षा को झेल सकता है। हाँगर ऐसा सोचकर खुद को समझाती थी, लेकिन वास्तविकता का सामना करते हुए, वह अब भी पूरी तरह से निश्चिंत नहीं थी।

लेकिन वास्तविकता हाँगर के आत्म-सुख के आगे वैसे नहीं झुकी जैसे वो चाहती थी। उसका पति एक के बाद एक बड़े खर्च कर रहा था जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं था, वह ज़्यादा से ज़्यादा घर से बाहर रह रहा था, और उसके बहाने विश्वास के योग्य नहीं थे। ये सब बातें उसके लिए वार की तरह थीं; उसके दिल में मौजूद चिंताओं का बोझ हमेशा से अधिक हो गया था। हालाँकि, उसने महसूस किया कि उसके पति के असामान्य व्यवहार के आधार पर, मुमकिन था कि वह उससे वफादार नहीं था, लेकिन वह इस वास्तविकता को स्वीकारने या मानने को तैयार नहीं थी। उसे विश्वास करने की हिम्मत नहीं हो रही थी कि जिस व्यक्ति ने उसे ज़िन्दगी भर खुशियाँ देने की कसम खाई थी, जिसने दो दशक के तूफानों का उसके साथ मिलकर सामना किया था; वह अचानक उसके साथ विश्वासघात कर सकता है। क्या "जब तक मृत्यु हमें अलग नहीं करती" यह वादा एक आसानी से बोले गये झूठ के अलावा और कुछ नहीं?

वास्तविकता ने अब हाँगर को खुद को धोखा देने की इजाज़त नहीं दी; इसलिये उसने अपने पति का पीछा करना शुरू कर दिया। एक दिन, वह उसके पीछे एक बहुत धनी समुदाय में गई और उसे पता चला कि वहाँ उसने दूसरी महिला के साथ एक घर बना लिया था। जिस क्षण उसने उस महिला को एक छोटे बच्चे को अपनी बांहों में भरते देखा, उसे एक गहरा सदमा लगा। उसे अपनी आँखों पर विश्वास करने की हिम्मत नहीं हुई। उसे कई बार ऐसा लगा था कि उसका पति दूसरी महिलाओं के साथ होटलों में आता जाता होगा, कि उनके साथ अंतरंग होने के अलावा मामला और कुछ नहीं था, लेकिन वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसका पति एक और परिवार बना लेगा और दूसरी महिला के साथ बच्चा पैदा कर लेगा। उस वक़्त सुकून का आख़िरी कतरा जो उसके पास था, वह बिखर गया, कड़वी सच्चाई के सामने ढह गया। एक झपकी में, उनकी प्रतिज्ञा, उनके दो दशकों के आपसी समर्थन का हर एक हिस्सा नीचे गिरकर ध्वंस हो गया। वह इतना हृदयहीन कैसे हो सकता है? क्या वह वास्तव में उसे ज़िन्दगी भर की खुशी देने के अपने वादे को भूल सकता था? क्या वह "बारिश या धूप" गीत के माध्यम से व्यक्त की गई भावनाओं को भूल गया? क्या वह भूल गया कि हाँगर ने उसके लिए सब कुछ छोड़ दिया था, वह सब भी भूल गया जिससे होकर वे गुज़रे थे? वह कैसे भूल सकता है? वह उसके साथ ऐसा क्यों करेगा? बीस साल का प्रेम किसी अजनबी के प्रलोभन को झेलने में कैसे विफल हो सकता है? उस क्षण हाँगर के भीतर गुस्सा और दुःख फट पड़ा; उसका दिल धड़के जा रहा था और उसकी आँखों से अनायास आंसू बह निकले। वह उस पर भर्रायी आवाज़ में चिल्लायी, "क्या आप वाकई मुझे और अपने बेटे को दरकिनार कर इस महिला को चुनना चाहते हैं?" उसने अपने पति के चेहरे पर अपराधबोध की एक झलक पाने की और उसे यह बताने की उम्मीद की थी कि वह गलत था, कि उसने अभी भी अपने परिवार को अपने दिल में बसा रखा है, लेकिन उसका पति उसके आँसू और उसके प्रश्नों के सामने बिल्कुल चुप था। उसका रवैया देखकर, हाँगर पूरी तरह से टूट गयी। उसे इस बात का बिल्कुल कोई अंदाजा नहीं था कि वह इतनी बेदर्दी से उसे धोखा क्यों देगा। वह अपने दिल के आक्रोश को दबा नहीं पायी और उसने उसे जोरदार थप्पड़ मारा।

हाँगर को पता ही नहीं चला कब वह उस जगह से चली आई—ऐसा महसूस होता था कि मानो सब कुछ उससे खींच लिया गया हो। शाम गहरा रही थी, वह समन्दर किनारे खड़ी थी, डूबते सूरज के आखिरी निशां और उसकी खत्म होती रोशनी के अलावा, कुछ और साथ न था। उसके दिल में दर्द की लहर पर लहर उमड़ रही थी। साथ बिताये सालों के दृश्य एक के बाद एक उसकी आंखों के सामने आ रहे थे। उसने अपने पति के लिए अपने परिवार की आपत्तियों को मानने से इनकार कर दिया था, उसके साथ दृढ़ता से घर से बहुत दूर चली गई थी। उसने जी-जान लगाकर उसके साथ काम किया था और उनकी किसी भी तरह की आर्थिक तंगी उनकी भावनाओं को थोड़ा भी कम नहीं कर पाई थी। वे कड़वे और मीठे, हवा और बारिश, सब कुछ झेलते हुए इतनी दूर तक हाथ थाम कर चले आये थे। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक हो गयी थी और उनका बच्चा बड़ा हो गया था, लेकिन वह दूसरी महिला के साथ घोंसला बनाने के लिए एक खुशहाल परिवार को फेंकने में वास्तव में सक्षम था। वह उसकी अनिश्चितता से नफरत करती थी, उसकी बेरुखी से नफरत करती थी। लेकिन जैसे ही उसने इस खुशहाल परिवार के अचानक गायब हो जाने के बारे में सोचा, जिसके लिए उसने इतनी मेहनत की है, तो उसे लगा कि वह इससे अलग होना नहीं सह सकती और इसे वापस पाने के लिए वह सब कुछ करना चाहती थी। अगर उसका पति वापस आ जाये, तो वह उसकी पिछली गलतियों को माफ कर सकती थी क्योंकि उसने अपनी सारी खुशियाँ उसके साथ दांव पर लगा दी थीं।

घर लौटने के बाद हाँगर अपनी शादी बचाने की योजना बनाने लगी। एक दोस्त ने उससे कहा: "जब एक आदमी बाहर निकलता है और जीवनयापन के लिए काम करता है, तो उसे बाहर काफी ठंडे भाव मिलते हैं। जब वह घर आता है तो उसे घर की गर्माहट महसूस करने की आवश्यकता होती है; इस तरह वह खुश महसूस करेगा। जैसी यह कहावत है, ''एक आदमी के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है।" हाँगर को पता था कि उसके पति को पकौड़ीयाँ बहुत पसंद है, इसलिए वह हर दिन अपने हाथों से बड़े ध्यानपूर्वक, कई अलग-अलग प्रकार की पकौड़ियाँ बना कर रखती थी और चुपचाप उसके बारे में पूछताछ करने के बारे में सोचती थी। उसने अपने पति को घर बुलाने के हर तरह के कारण देने के लिए अपने बेटे का इस्तेमाल किया, लेकिन चाहे वह अपने पति को कैसे भी क्यों न मनाती, वह हमेशा उदासीन बना रहा। हाँगर ने सोचा कि शायद वह दिलचस्पी इसलिए नहीं ले रहा था क्योंकि वह बूढ़ी हो रही थी, अपनी सुंदरता खो रही थी। इसलिए उसने खुद को युवा दिखाने की भरपूर कोशिश करनी शुरू कर दी। उसने अपने पति के दिल को फिर से पाने के लिए कई तरीके सोचे, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। वो समय वास्तव में उसके लिए कठिन और थका देने वाला था, वह वास्तव में असहाय महसूस करती थी। हर दिन, वह आँसूओं से अपना चेहरा धोती और रात को अच्छी नींद नहीं ले पाती थी। वह नहीं जानती थी कि उसने अपने टूटे हुए घर की मरम्मत के लिए कितनी कोशिशें कीं थी। कोई अन्य विकल्प न होने के कारण, वह केवल अपने दर्द में रहते हुए इंतजार कर सकती थी, अपने पति के वापस आने की प्रतीक्षा कर सकती थी।

हाँगर ने तीन साल तक इसी तरह इंतजार किया, और उन लंबे दिनों में उसने अक्सर खुद से पूछा: "बीस साल से ज़्यादा समय की भावनाएं यों ही कैसे गायब हो सकती हैं? मैंने जो भी प्रयास किये उससे मुझे एक खुश, पूर्ण परिवार क्यों नहीं मिला?" उसने बार-बार पूछा, लेकिन कोई भी उसे जवाब नहीं दे सका। वह दिन प्रतिदिन इंतजार करती रही, लेकिन कभी कुछ नहीं आया। यह निश्चित रूप से उसके और उसके पति की शादी के लिए एक "मौत की सज़ा" थी। टूटे दिल के साथ, हाँगर में अब उस तरह का झटका झेलने की ताकत नहीं बची थी। उसने बहुत झेल लिया था और अब उसमें चलते रहने की हिम्मत नहीं थी। उसने एक बार में चालीस नींद की गोलियाँ खा लीं...

अगले दिन उसने खुद को अस्पताल में पाया, उसने देखा कि उसका बेटा और उसका पति दोनों वहाँ थे। व्यथित आँसू उसकी आँखों से बहते ही जा रहे थे—वह बहुत अधिक रोई, उसके दिल के टुकड़े-टुकड़े हो गये थे। इन परिस्थितियों में परिवार का एक साथ आना कितना विडंबनापूर्ण था, लेकिन इसके बारे में वह कुछ नहीं कर सकती थी। उसने आसमान की ओर देखा और ठंडी आह भरी: "कौन मुझे बता सकता है कि क्यों पति-पत्नी प्रतिकूल परिस्थितियों में तो एक साथ बने रह सकते हैं, लेकिन सम्पन्नता के दिनों में नहीं? बीस सालों से अधिक का प्रेम इतना नाजुक कैसे हो सकता है?"

ज़्यादा समय नहीं बीता थे कि, उसके बेटे की सास ने हाँगर के साथ, अंत के दिनों के परमेश्वर के सुसमाचार को साझा किया और उसे बताया कि केवल परमेश्वर ही उसे बचा सकते हैं और उसकी सभी पीड़ाओं को दूर कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मनुष्य परमेश्वर द्वारा बनाया गया था; शुरुआत में, मानवजाति परमेश्वर की देखभाल और संरक्षण में बहुत खुशी से रहती थी, लेकिन शैतान के द्वारा भ्रष्ट होने के कारण, वह परमेश्वर से दूर हो गई। मनुष्य परमेश्वर के अस्तित्व को अस्वीकार करने लगे और शैतान के नुकसान के भीतर रहने लगे; उनकी हताशा और पीड़ा बढ़ती ही गई। सत्य को व्यक्त करने के लिए और मानवजाति को बचाने के लिए, परमेश्वर स्वयं देह बन गए, ताकि शैतान के चंगुल से मानवजाति को वापस लाया जा सके। यदि कोई परमेश्वर के सामने आता है, उनके वचनों को पढ़ता है, उनके माध्यम से सत्य को समझता है, तभी वो समाज में बुराई की जड़ को देख सकता है, शैतान के नुकसान से दूर रह सकता है और परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा के तहत जी सकता है। उसके बेटे की सास ने परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ा: "वे जो बुरी तरह से दुख में हैं सर्वशक्तिमान उन पर करुणा दिखाता है। साथ ही, वह उन लोगों से ऊब चुका है जो होश में नहीं है, क्योंकि उसे उनसे प्रत्युत्तर पाने में लंबा इंतजार करना पड़ता है। वह खोजने की इच्छा करता है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारी आत्मा को ढूंढता है। वह तुम्हें भोजन-पानी देना चाहता है, जगाना चाहता है, ताकि तुम फिर और भूखे और प्यासे न रहो। जब तुम थके हो और इस संसार में खुद को तन्हा महसूस करने लगो तो, व्याकुल मत होना, रोना मत। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, रखवाला, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा। वह तुम्हारे ऊपर नज़र रखे हुए है, वह तुम्हारे लौटने की प्रतीक्षा में बैठा है। वह उस दिन की प्रतीक्षा में है जब तुम्हारी याददाश्त एकाएक लौट आयेगी: और इस सत्य को पहचान लेगी कि तुम परमेश्वर से ही आए हो, किसी तरह और किसी जगह एक बार बिछड़ गए थे, सड़क के किनारे बेहोश पड़े थे, और फिर अनजाने में एक पिता आ गया। और फिर तुम्हें यह भी एहसास हो कि सर्वशक्तिमान निरंतर देख रहा था, तुम्हारे लौटकर आने की प्रतीक्षा कर रहा था" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "सर्वशक्तिमान का आह भरना")।

इन वचनों को, जिनके समान उसने पहले कभी कुछ नहीं सुना था, सुनने के बाद, हाँगर बेहद प्रेरित हो गयी, यह ऐसा था मानो एक गर्म धारा उसके दिल में उमड़ रही हो और उसके शरीर, दिल को गर्माहट दे रही हो। उन पिछले कुछ वर्षों में किसी ने उसके दिल की गहरी उदासी को नहीं समझा था, और कोई भी उसके दर्द का बोझ साझा नहीं कर सकता था। विशेष रूप से, कोई भी उसे समझने या सांत्वना देने में सक्षम नहीं था। उसने नींद के बगैर अनगिनत अकेली रातें बितायीं थीं, भोर तक अकेली चुपचाप रोती रही थी। घाव एक छाया की तरह उसका पीछा करता था जिसे वह वास्तव में कभी न तो भूल सकती थी, न उससे पीछा छुड़ा सकती थी। उसने सोचा था कि बाकी उम्र उसके पास, अकेले और दर्द में ऐसे ही रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन उस दिन, उस अंश ने उसके दिल के दरवाजे पर दस्तक दी। उसने महसूस किया कि जब वह दर्द में थी, दुख सहन कर रही थी और रो रही थी, परमेश्वर जानते थे, वे हमेशा उसके पास थे और उसके वापस फिरने की प्रतीक्षा कर रहे थे। परमेश्वर के पोषण देने वाले वचनों को सुनकर, हाँगर रोये बिना न रह सकी; उसने महसूस किया कि परमेश्वर उसके साथ थे और वह वास्तव में अकेली नहीं थी। हालाँकि उसने पहले कभी परमेश्वर के बारे में नहीं सुना था, न उनके बारे में उसे कुछ पता था, लेकिन वे हमेशा से उसके बगल में उसकी निगरानी करते रहे थे। न केवल जब उसने मरने का फैसला किया तब उन्होंने उसे समय पर बचाया और उसकी ज़िन्दगी सुरक्षित रखी, बल्कि जब ज़िन्दगी में उसकी कोई भी आशा बाकी न रही, तो उन्होंने उसे उसके बेटे की सास के माध्यम से अपनी आवाज सुनने दी। निराशा और दर्द की उसकी ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के वास्ते, आशा और एक नया मोड़ लाते हुए, उन्होंने उसके दिल को प्रेरित करने और गर्मजोशी से भरने के लिए अपने वचनों का इस्तेमाल किया। उस क्षण, हाँगर ने परमेश्वर के प्यार और उद्धार को महसूस किया और उसके घायल दिल को आराम मिला। उसे सहारे के लिए कुछ मिल गया था।

उसके बाद हाँगर ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में जाना, परमेश्वर के वचनों को पढ़ना, सत्य पर संगति करना और अपने भाई-बहनों के साथ परमेश्वर की प्रशंसा में भजन गाना शुरू कर दिया। उसने देखा कि वे सभी दयालु थे और दूसरों के साथ ईमानदारी से पेश आते थे। वे अपने द्वारा प्रदर्शित भ्रष्टाचार के बारे में सीधे और ईमानदारी से बात कर सकते थे, फिर उस भ्रष्टाचार का परमेश्वर के वचनों के अनुसार विश्लेषण कर, परमेश्वर के पसंद के ईमानदार लोगों की तरह बनने का प्रयास कर सकते थे। कोई भी किसी और का उपहास नहीं उड़ाता था, बल्कि वे एक-दूसरे की मदद करते और एक-दूसरे को सहारा देते थे। हर चेहरा खुश मुस्कुराहट के साथ दमकता था। हाँगर को ईमानदार, हर्षित वातावरण प्रभावी लगा और उसने उस बड़े परिवार के भीतर ऐसा आराम और आज़ादी पाई जो उसने पहले कभी नहीं पाई थी। उसने उस गर्माहट को, जिसे उसने लंबे समय से महसूस नहीं किया था, और घर वापस आने के एहसास को, फिर से खोज लिया। उसकी परेशानी दिन-प्रतिदिन कम होती चली गयी, और धीरे-धीरे उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी। परमेश्वर के वचनों के भीतर, उसने उन चीज़ों के उत्तर पाए, जिन्होंने उसे लंबे समय से उलझन में डाल रखा था और उसने अपनी पीड़ा की जड़ को जाना। उसने परमेश्वर के वचनों में निम्नलिखित देखा: "सच्चाई तो यह है, मनुष्य परमेश्वर की सारी सृष्टि के क्रम में सबसे छोटा है। यद्यपि वह सब वस्तुओं का स्वामी है, फिर भी उनमें केवल मनुष्य ही है जो शैतान की धोखेबाजी का शिकार है, एकमात्र प्राणी जो उसके दुराचरण के अनगिनत तरीकों का शिकार हो जाता है। मनुष्य की स्वयं पर कभी भी प्रभुता नहीं रही। अधिकांश लोग शैतान के घृणित स्थान में रहते हैं, और उपहास को सहते हैं; इस संसार के हर अन्याय, हर कष्ट को सहते हुए, जब तक वे आधे मर नहीं जाते तब तक वह उन्हें कष्ट देता रहता है। उनके साथ खेलने के बाद, शैतान उनके गंतव्य को ख़त्म कर देता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (1)")। "एक के बाद एक, ये सभी प्रवृत्तियाँ दुष्ट प्रभाव को लेकर चलती हैं जो निरन्तर मनुष्य को पतित करते रहते हैं, जिसके कारण वे लगातार विवेक, मानवता और कारण को गँवा देते हैं, और जो उनकी नैतिकता एवं उनके चरित्र की गुणवत्ता को और भी अधिक नीचे ले जाते हैं, उस हद तक कि हम यहाँ तक कह सकते हैं कि अब अधिकांश लोगों के पास कोई ईमानदारी नहीं है, कोई मानवता नहीं है, न ही उनके पास कोई विवेक है, और कोई तर्क तो बिलकुल भी नहीं है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI")। "तुम सभी लोग 'विश्वासघात' शब्द से परिचित हो क्योंकि अधिकांश लोगों ने पहले दूसरों को धोखा देने के लिए कुछ किया होता है, जैसे कि किसी पति का अपनी पत्नी के साथ विश्वासघात करना, किसी पत्नी का अपने पति के साथ विश्वासघात करना, किसी बेटे का अपने पिता के साथ विश्वासघात करना, किसी बेटी का अपनी माँ के साथ विश्वासघात करना, किसी गुलाम का अपने मालिक के साथ विश्वासघात करना, दोस्तों का एक दूसरे के साथ विश्वासघात करना, रिश्तेदारों का एक दूसरे के साथ विश्वासघात करना, विक्रेताओं का क्रेताओं के साथ विश्वासघात करना, इत्यादि। इन सभी उदाहरणों में विश्वासघात का सार निहित है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "एक बहुत गंभीर समस्या: विश्वासघात (1)")। "मनुष्य की प्रकृति उसका जीवन है, यह एक सिद्धांत है जिस पर वह जीवित रहने के लिए भरोसा करता है और वह इसे बदलने में असमर्थ है। ठीक विश्वासघात की प्रकृति की तरह—यदि तुम किसी रिश्तेदार या मित्र को धोखा देने के लिए कुछ कर सकते हो, तो यह साबित करता है कि यह तुम्हारे जीवन और तुम्हारी प्रकृति का हिस्सा है जिसके साथ तुम पैदा हुए थे। यह कुछ ऐसा है जिससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "एक बहुत गंभीर समस्या: विश्वासघात (1)")।

परमेश्वर के वचनों के माध्यम से, हाँगर समझ गयी कि सभी मानवीय दुःख शैतान के भ्रष्टाचार के कारण उत्पन्न होते हैं, कि सभी लोग एक बड़े कुंड के भीतर रहते हैं, जो बुराई से भरपूर है। हम पर, "अपने मकान को मजबूत बनाए रखो और अपनी मस्ती जारी रखो"; "जिंदगी छोटी है। जबतक उठा सकते हो इसका आनंद उठाओ"; "आनंद के दिन को हाथ से जाने न दो, क्योंकि ज़िन्दगी छोटी है"; "दस में से नौ आदमी मस्ती का आनन्द लेते हैं, उनमें से दसवां सिर्फ एक मूर्खानंद होता है", इन जैसे शैतान के बुरे संदेशों की बमबारी होती है। इसका अर्थ ये है कि एक पुरुष जो दूसरी महिला से सम्बन्ध रखता है, जो एक प्रेमिका रखे हुए है, वह सहन करने योग्य है और हैसियत का एक सूचक है। इसके अलावा, प्रलोभनों से भरी मनोरंजन की जगहें, प्रमुख सड़कों से लेकर छोटी गलियों तक, हर तरफ हैं, जो लोगों के लिए दुष्टतापूर्ण दैहिक सुखों में लिप्त होना बहुत ही सुविधाजनक बना देता है। कई लोग बेशर्मी से एक रात के लिए ऐय्याशी करते और चक्कर चलाते हैं। वे लोग इतने दुष्ट और भ्रष्ट हैं, इतने ऐय्याश हैं कि उनमें किसी भी तरह की मानवीय समानता का अभाव है। जब लोग सत्य नहीं समझते हैं, उनके पास अच्छे और बुरे, सौंदर्य और कुरूपता, या सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के बीच अंतर करने का विवेक नहीं होता है। चीजों के बारे में उनके दृष्टिकोण विकृत होते हैं, वे बुरी चीजों को न्यायपूर्ण और सम्मानजनक मानते हैं। वे अपने वादों से इनकार करदेते हैं, अपने विवाह के साथ धोखा करते हैं केवल इसलिए कि वे अपनी दैहिक इच्छाओं को तृप्त कर सकें, और वे उस मानवीयता, तार्किकता, नैतिकता और गरिमा को खो देते हैं जो मनुष्य के पास होनी चाहिए। वे शैतान के प्रभुत्व के अंतर्गत रहते हैं, पूरी तरह से देह में खोये रहते हैं, संतुष्टि का पीछा करते हैं, अपनी खुद की अनुचित इच्छाओं को पूरा करते हैं। हाँगर ने इस दुष्ट समाज के बारे में थोड़ा सोचा। पतियों को धोखा देने वाली पत्नियाँ और पत्नियों को धोखा देने वाले पति आम नजारे हैं हैं; दुष्ट प्रवृत्तियों के विनाश के तहत, जिन लोगों में सत्य का अभाव है, वे इन चीज़ों का कोई विरोध नहीं कर पाते है। वे न चाहते हुए भी इस बुरी सोच के प्रभाव के अधीन हैं, वे जिम्मेदारियों, नैतिकता, न्याय, और अपनी अंतरात्मा की अवहेलना करते हैं, ताकि एक क्षणभंगुर दैहिक इच्छा को पूरा कर सकें। वे अपने जीवनसाथी को एक ओर कर देते हैं, जिससे उनके परिवार को अत्यधिक भावनात्मक नुकसान होता है, ज़िन्दगी भर का दुःख भी संभव है। उसने देखा कि उसका पति भी इन बुरी शैतानी प्रवृत्तियों का शिकार था। हाँगर ने अतीत के बारे में सोचा कि कैसे उसका पति, उसके प्रति इतनी परवाह करने वाला और प्रेमी हुआ करता था, कैसे उन्होंने कभी भी अपने लिए भौतिक संपत्ति नहीं चाही—बस आपसी प्यार, स्नेह, खुशी और सद्भाव यही चाहा। लेकिन एक बार जब उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो गयी, तो उसने अक्सर ग्राहकों का मनोरंजन करना शुरू कर दिया और एक मनोरंजन स्थल से दूसरे स्थल पर जाने लगा। वह उन दुष्ट प्रवृत्तियों के लालच का विरोध नहीं कर पाया और निरंकुश ज़िन्दगी जीने लगा। उसका एक चक्कर चल रहा था और वह अपनी अनुचित इच्छाओं के अनुसार जी रहा था। वह केवल अपनी ही कामुक वासना को संतुष्ट करने की सोच रहा था। उसने कभी अपनी पत्नी की भावनाओं पर कोई विचार नहीं किया, परिवार की तो बात ही दूर है। इसके चलते उनका घर टूट गया और उनका अलगाव हो गया। उन्होंने जो प्यार बीस सालों से ज़्यादा आपस मेंबाँटा था, वह उन बुरी प्रवृत्तियों के सामने इतना नाजुक लग रहा था; कि वह मामूली सा झटका भी नहीं झेल सका। क्या यह सब शैतान द्वारा मनुष्य के भ्रष्टाचार का परिणाम नहीं था?

हाँगर ने समझ लिया कि शैतान ने उसे बहुत गहरा नुकसान पहुँचाया था जिसके कारण, उसने हमेशा, वैवाहिक सद्भाव का प्यार, एक साथ उम्र बिताना, और "जब तक मौत हमें अलग नहीं करती", इन जैसे भावों को खोज की। वह सोचती थी कि उस प्रकार का विवाह ही, उसकी ज़िन्दगी की एकमात्र खुशी थी। जब उसका पति भटक गया, उसके बाद उसने अपने नष्ट हुए प्यार को बचाने के लिए सब कुछ करने की कोशिश की, और जब उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई तो वह दर्द के धुंध में जीने लगी, जहाँ से वो खुद को निकाल नहीं पा रही थी, यहाँ तक कि उसने मौत में राहत पाने की कोशिश भी की। क्या यह सब वैसे ही गलत विचार और दृष्टिकोण नहीं हैं, जिससे शैतान ने मानवजाति को, उसके साथ खेलते और नुकसान पहुंचाते हुए, तर कर दिया है? केवल परमेश्वर के वचनों को पढ़ने से ही हाँगर यह समझ पायी कि सभी मनुष्य स्वार्थी हैं, वे सभी चीजें अपने फायदे के लिए और अपने स्वयं के सिद्धांतों के अनुसार करते हैं। दो लोगों के बीच कोई सच्चा प्यार नहीं होता; रूमानी प्रेम का कोई अस्तित्व ही नहीं है। शैतान लोगों को भ्रष्ट करने और बहकाने के लिए सभी तरह की बेतुकी अवधारणाओं का उपयोग करता है, ताकि वे बुराई में श्रद्धा रखें, हर चीज़ से ज़्यादा रूमानी प्यार के पीछे भागें और पूरी तरह से उसके भ्रम में रहें। वे अधिकाधिक भ्रष्ट और दुष्ट हो जाते हैं, और परमेश्वर से दूर होते ही जाते हैं। इसी समय हाँगर ने वास्तव में अनुभव किया कि सत्य के बिना, लोगों को अच्छे और बुरे के बीच, सौंदर्य और कुरूपता के बीच और सकारात्मक चीजों के बारे में कोई विवेक नहीं है। उनके साथ केवल शैतान खिलवाड़ करेगा और उन्हें नुकसान पहुँचाएगा, वे अंततः इसके द्वारा पूरी तरह से निगल लिये जायेंगे। परमेश्वर के उद्धार के कारण, हाँगर ने शैतान द्वारा मानवजाति के भ्रष्टाचार के सत्य को देखा और दुःख के जड़ को पाया। परमेश्वर के वचनों ने उसके हृदय को बहुत उज्ज्वल कर दिया; वह अब बहुत अधिक सहज महसूस करती थी।

हाँगर ने फिर परमेश्वर के वचनों का यह अंश पढ़ा: "क्योंकि परमेश्वर का सार पवित्र है; इसका अर्थ है कि केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम जीवन के आरपार उज्जवल, और सही मार्ग पर चल सकते हो; केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम जीवन के अर्थ को जान सकते हो, केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम वास्तविक जीवन जी सकते हो, सत्य को धारण कर सकते हो, सत्य को जान सकते हो, और केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम सत्य से जीवन को प्राप्त कर सकते हो। केवल स्वयं परमेश्वर ही तुम्हें बुराई से दूर रहने में सहायता कर सकता है और तुम्हें शैतान की क्षति और नियन्त्रण से मुक्त कर सकता है। परमेश्वर के अलावा, कोई भी व्यक्ति और कोई भी चीज़ तुम्हें कष्ट के सागर से नहीं बचा सकती है ताकि तुम अब और कष्ट नहीं सहो: यह परमेश्वर के सार के द्वारा निर्धारित किया जाता है। केवल स्वयं परमेश्वर ही इतने निःस्वार्थ रूप से तुम्हें बचाता है, केवल परमेश्वर ही अंततः तुम्हारे भविष्य के लिए, तुम्हारी नियति के लिए और तुम्हारे जीवन के लिए ज़िम्मेदार है, और वही तुम्हारे लिए सभी चीज़ों को व्यवस्थित करता है। यह कुछ ऐसा है जिसे कोई सृजित या सृजित नहीं किया गया प्राणी प्राप्त नहीं कर सकता है। क्योंकि कोई भी सृजित या सृजित नहीं किया गया प्राणी परमेश्वर के इस प्रकार के सार को धारण नहीं कर सकता है, इसलिए किसी भी व्यक्ति या प्राणी में तुम्हें बचाने या तुम्हारी अगुवाई करने की क्षमता नहीं है। मनुष्य के लिए परमेश्वर के सार का यही महत्व है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI")।

हाँगर परमेश्वर के वचनों से समझ गयी कि केवल परमेश्वर ही मनुष्य को शैतान के भ्रष्टाचार से बचा सकते हैं। लोग, मानवजाति को भ्रष्ट करने की शैतान की रणनीति और तरीके पर विवेक, केवल परमेश्वर के वचनों के माध्यम से सत्य को समझने द्वारा ही हासिल कर सकते हैं। शैतान की चाल के बारे में अंतर्दृष्टि हासिल करने, उसके नुकसान से बचने और स्वतंत्र रूप से जीने का यही एकमात्र तरीका है। उसने ठंडी आह भरी, इस पर विलाप किया कि इतने सालों तक वह गलत विचारों के अधीन रही और इस पर भी कि शादी के माध्यम से खुशी पाने की कोशिश एक भ्रम से ज्यादा कुछ नहीं था। उसने करना इस तथ्य के बारे में सोचा कि उसका पति भी शैतान द्वारा भ्रष्ट किया गया व्यक्ति था, और उसने जो चाहा था वह नकारात्मक, बुरी चीजें थीं। इसलिए वह केवल उसे दुख और चोट ही पहुँचा सकता था; वह उसे किसी भी प्रकार की खुशी नहीं दे सकता था। केवल, लोगों के लिए परमेश्वर का प्यार ही निस्वार्थ है, और केवल परमेश्वर ही पूरे दिल से शैतान के शासन से लोगों को बचाना चाहते हैं। परमेश्वर ने सभी प्रकार के सत्य व्यक्त किए हैं और मानवजाति को शुद्ध और परिवर्तित करने के लिए सभी प्रकार के वातावरण की व्यवस्था करते हैं, यह सब लोगों को शैतान के नुकसान से बचाने के लिए उनकी अगुआई करने और उन्हें खुशहाल ज़िन्दगी देने के लिए हैं। लेकिन जहाँ तक भ्रष्ट मानवों की बात है, जैसे ही कुछ उनके स्वयं के व्यक्तिगत हित को स्पर्श भी करेगा, वे विश्वासघात कर बैठेंगे; केवल परमेश्वर हर समय, हर जगह लोगों के पास हो सकते हैं, और हर प्रतिकूलता से निकल पाने में उनकी मदद कर सकते हैं। केवल परमेश्वर पर वास्तव में भरोसा किया जा सकता है, किसी व्यक्ति की आत्मा के लिए परमेश्वर का घर ही एकमात्र वास्तविक आश्रय है। अतीत में, हाँगर को शैतान से उत्पन्न बुरी प्रवृतियों की कोई समझ नहीं थी, और वह बिना किसी ख़ुशी और आनंद के, अपने पति के प्रति नाराज़गी में जी रही थी। शैतान के बंधन और अहित में रहते हुए, वह हर दिन दुःख में बिता रही थी—उसका दर्द अकथनीय था। अब जबकि उसने अपनी पीड़ा की जड़ पा ली थी, वह अपने पति से नफरत नहीं करती थी। यह ऐसा था मानो उसके कन्धों से भारी बोझ हट गया हो, उसने अपनी आत्मा में ऐसी शांति, सहजता और आज़ादी का अनुभव किया जैसे उसने पहले कभी नहीं किया था। सत्य की समझ से उसने वाकई सभी प्रकार के लोगों, घटनाओं और चीज़ों के बारे में विवेक पाया और शैतान के नुकसान और पीड़ा के उत्पीड़न से अंतत: मुक्त हो गयी।

अब जबकि उसके पास परमेश्वर के वचनों का प्रबोधन और मार्गदर्शन था, हाँगर अब पहले के समान कमज़ोर हौसले वाली नहीं थी। वह पूरी तरह अनचाही चीज़ों को छोड़ने में सक्षम हुई और उसने अपने पति द्वारा उनकी शादी को धोखा देने को भी स्वीकार लिया। उसने अंतत: अपने ऊपर झूलते, धुंध के उन दिनों को अलविदा कहा। उसे जानने वाले हर व्यक्ति ने कहा कि वह एक व्यक्ति के रूप में बदल गयी थी, वह दिमाग से और अधिक स्पष्ट और चिंतामुक्त हो गयी थी। परमेश्वर के वचनों के माध्यम से स्वयं में प्राप्त इन सभी परिवर्तनों के लिए, वह परमेश्वर के लिए कृतज्ञता से भरी थी।

कई साल बीत गए हैं। हाँगर परमेश्वर के वचनों को अक्सर पढ़ती है, कलीसिया का जीवन जीती है, अपने भाइयों और बहनों के साथ परमेश्वर के वचनों पर संगति करती है, और एक सृष्टि होने के कर्तव्य को पूरा करने लिए जी-जान लगाती है। उसके दिन बहुत संतुष्टिदायक हैं। उसने थोड़ा सत्य समझा है और स्पष्ट रूप से जाना है कि धरती पर किसी व्यक्ति का जीवन सिर्फ अपने जीवनसाथी या बच्चों की खातिर नहीं जिया जाता है, बल्कि यह एक प्राणी के उचित कर्तव्य को पूरा करने के लिए होता है, और केवल इस तरह से जीने से ही एक व्यक्ति परमेश्वर को खुशी दे सकता है। उसने आखिरकार ज़िन्दगी में सही रास्ता पा लिया है, जो कि परमेश्वर का अनुसरण करना है, परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकारना है, परमेश्वर के कार्य से गुजरना है और सत्य को समझने और प्राप्त करने के लिए प्रयास करना है। यह परमेश्वर से भय खाना और बुराई से दूर रहना है, और ऐसा व्यक्ति बनना है जो परमेश्वर की आज्ञा मानता है और उनकी आराधना करता है। केवल यह सब कुछ ही सबसे सार्थक और सुखद प्रकार का जीवन है। हाँगर की इच्छा, परमेश्वर के मार्गदर्शन और अगुआई के तहत जीवन में इस तरह का मार्ग अपनाना है, सत्य और जीवन पाना है, खुद को शैतान के नुकसान से पूरी तरह से मुक्त करना है, और अर्थपूर्ण जीवन जीना है—सत्य की वास्तविकता को जीना और परमेश्वर के लिए महिमा लाना है!

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