सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का ऐप

परमेश्वर की आवाज़ सुनें और प्रभु यीशु की वापसी का स्वागत करें!

सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मैं अपनी भ्रष्टता की सच्चाई को देख पाती हूँ

3

ली हेंग, जिआंग्सू प्रांत

जिन वचनों से परमेश्वर मनुष्य को उजागर करता है, उनमें मुझे यह अंश मिला: "पहले यह कहा गया था कि ये लोग बड़े लाल अजगर की संतान हैं। वास्तव में, स्पष्टता से कहा जाए, तो वे बड़े लाल अजगर के अवतार हैं" ("वचन देह में प्रकट होता है" में संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या के "अध्याय 36")। मैंने सोचा था कि परमेश्वर के ये वचन उन नास्तिक सत्तावादी शासकों को उजागर करने के लिए थे, क्योंकि वे लोगों के विचारों का गला घोंटते हैं और उन्हें परमेश्वर में विश्वास करने और परमेश्वर की आराधना करने से सख्ती से मना करते हैं; वे परमेश्वर के चुने हुए लोगों को क्रूरतापूर्वक सताते हैं, वे जहाँ भी हो सके, परमेश्वर के कार्य को बाधित और नष्ट कर देते हैं, वे कई दुष्ट चीज़ें करते हैं, वे दुराग्रही और अधर्मी होते हैं, और हर बात में परमेश्वर का विरोध करते हैं। दूसरी ओर, मैं परमेश्वर में विश्वास करती हूँ और कलीसिया में अपना कर्तव्य पूरा करती हूँ, भले ही मेरा स्वभाव भ्रष्ट है, मगर मैं कहीं भी उनकी तरह दुर्भावनापूर्ण नहीं हूँ—मैं कैसे बड़े लाल अजगर का मूर्त रूप और उसकी संतान हो सकती हूँ? मेरी यह सोच परमेश्वर के कार्य द्वारा उजागर किए जाने तक ही थी, और तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरी प्रकृति का सार बड़े लाल अजगर के जैसा ही था, और मैं बिना किसी संदेह के, बड़े लाल अजगर का मूर्त रूप थी।

हमारी कलीसिया में एक उपयाजक थी जो अपने परिवार से बहुत मजबूर और लाचार थी। नतीजतन, वह अपने कर्तव्यों को पूरा कर पाने में ईमानदार नहीं थी, और अक्सर वह समूह की बैठकों में भाग लेना भूल जाती थी। मैंने उसके साथ सहभागिता की और मैंने कहा, "तुम्हें अपने कर्तव्यों के निर्वाह में इतना ग़ैर-ज़िम्मेदार या लापरवाह नहीं होना चाहिए। तुम कलीसिया की एक उपयाजक हो और तुम पर हमारे भाइयों और बहनों के जीवन की ज़िम्मेदारी है। परमेश्वर ने तुम्हें इस तरह का एक महत्वपूर्ण कार्यभार सौंपा है, यदि तुम इसे बेपरवाही से लेती हो, तो परमेश्वर इससे तिरस्कार और नफ़रत करेंगे!" मेरी इस सहभागिता के बाद, उसने न केवल इसे स्वीकार नहीं किया, बल्कि उसने बहाने किये और मेरी बात काटने के लिए कारण भी दिए। मैंने सोचा, "वह परमेश्वर के साथ एकमत नहीं है। वह कोई ऐसी व्यक्ति नहीं हो सकती जिसे परमेश्वर बचाना चाहे, क्या वह ऐसी हो सकती है? निश्चित रूप से वह परमेश्वर के उपयोग के लिए अनुपयुक्त है, क्या वह ऐसी है जिसे परमेश्वर द्वारा उजागर किया गया और हटा दिया गया हो?" मैंने अपनी कलीसिया में उसकी जगह किसी और को रखने पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया। उस काम के लिए एक सही व्यक्ति के मिलते ही, मैंने उससे छुटकारा पाने की योजना बनाई। लेकिन उस समय कोई भी उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिला, इसलिए मेरा एकमात्र विकल्प उसके साथ फिर से सहभागिता करना था। बाद में उसे यह समझ में आ गया कि वह अपने कर्तव्य को निभाने में नाकाम रही थी, वह ग़ैर-ज़िम्मेदार और लापरवाह थी, इसलिए वह अपनी पिछली भूलों के लिए पश्चाताप करना चाहती थी। लेकिन फिर भी, मुझे हमेशा लगा कि यह काफ़ी नहीं था, और उसके बाद मैंने उसे ज्यादा पसंद नहीं किया। एक बार, मैंने उससे उसके निवास स्थान से कुछ ही दूर रहने वाले एक मेजबान परिवार के साथ बैठक करने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया और वह जाने के लिए तैयार नहीं थी। जब उसने ना कही, तो मेरे मन में क्रोध बढ़ गया। मैंने मन ही मन सोचा: "तुम अपने कर्तव्यों को पूरा करने में बहुत नखरेबाज़ हो, जो भी तुम्हें पसंद हो तुम उसे करती हो, और जो भी तुम पसंद नहीं करती, उसे अनदेखा कर देती हो। तुम्हारे पास लेशमात्र भी आज्ञाकारिता नहीं है और तुमसे जो भी कहा जाता है, तुम उसे अस्वीकार कर देती हो। कलीसिया के लिए तुम्हारे जैसे लोगों का कोई उपयोग नहीं है, और तुम्हें बस निकाल ही दिया जाना चाहिए। जो भी हो, तुमने अपने कर्तव्य को सही तरीक़े से पूरा नहीं करके इस मुसीबत को न्योता दिया है।" हालांकि मुझे पता था कि लोगों को मनमाने ढंग से निकालना सिद्धांतों के खिलाफ़ जाता है, लेकिन यह विचार इतना मजबूत था और यह मेरे दिमाग में आए जा रहा था, मैं इसे नियंत्रित नहीं कर सकी, यह लगातार मेरे मन को परेशान करता रहा, और मेरी स्थिति तेज़ी से बिगड़ने लगी। दर्द में, मैं बस यही कर सकती थी कि परमेश्वर के सामने आकर उससे प्रार्थना करूँ, "हे परमेश्वर! यह बहन मेरी बात नहीं सुन रही है, इसलिए मुझे लगता है कि मैं उसे जल्द से जल्द यहाँ से निकाल दूँ। मुझे पता है कि यह विचार गलत है, लेकिन मैं इसे रोक नहीं सकती। हे परमेश्वर! मैं तुमसे मुझे बचाने और इस बहन के प्रति सही रवैया अपनाने के लिए विनती करती हूँ, मुझे कुछ भी ऐसा करने न देना जो तुम्हारी अवज्ञा करता हो।" प्रार्थना करने के बाद, मैं काफ़ी शांत हुई, और उसे निकालने की मेरी इच्छा पहले की तरह मजबूत न रही।

और तब मेरे मन में परमेश्वर के वचनों का एक अंश उभर आया, "बड़े लाल अजगर की अभिव्यक्ति मेरे प्रति प्रतिरोध, मेरे वचनों के अर्थों की समझ और बोध की कमी, बार-बार मेरा उत्पीड़न, और मेरे प्रबंधन को बाधित करने के लिए षड़यंत्रों का उपयोग करने की कोशिश करना है। शैतान इस प्रकार से व्यक्त होता है: सामर्थ्य के लिए मेरे साथ संघर्ष करना, मेरे चुने हुए लोगों पर कब्‍ज़ा करने की इच्छा करना, और मेरे लोगों को धोखा देने के लिए नकारात्मक वचनों को जारी करना" ("वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 2")। परमेश्वर के वचनों ने मुझे चौंका दिया। क्या मुझे उजागर करना ठीक बड़े लाल अजगर जैसा ही नहीं था? हालांकि, बड़ा लाल अजगर उन कामों को करने में सक्षम था जो मैंने नहीं किए थे। मैंने सोचा कि परमेश्वर कैसे मनुष्य को बचाने के लिए अंत के दिनों में अपना कार्य करता है, और फिर भी बड़ा लाल अजगर परमेश्वर के चुने हुए लोगों का उन्मत्त भाव से दमन और क्रूरतापूर्ण उत्पीड़न करता है और उन्हें यातना देता है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को कलंकित और बदनाम करने के उद्देश्य से अफ़वाहें फैलाने और लोगों को परमेश्वर में विश्वास एवं उसका अनुसरण करने में विघ्न डालने के लिए हर संभव कोशिश करता है, वह उनके बचाए जाने की संभावनाओं को छीनने का प्रयास कर परमेश्वर के कार्य में बाधा और अवरोध डालता है। क्या यह बिल्कुल वही काम नहीं था जो मैं कर रही थी? जब मैंने देखा कि मेरी बहन में कुछ कमियाँ थीं, तो मैंने प्यार से सत्य के बारे में सहभागिता नहीं की, जिससे कि वह अपने अपराधों को पहचान सके, इंसानों को बचाने की परमेश्वर की इच्छा को समझ सके, और परमेश्वर के कार्य के प्रति समर्पित हो सके; इसके बजाए, मैंने उसकी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर देखा और उनमें मीन-मेख निकालती रही, मैं उसे निकालने की अपनी इच्छा का अनुसरण कर उसके बचाए जाने की सम्भावना को नष्ट कर देना चाहती थी। क्या मैं इंसानों के बीच परमेश्वर के उद्धार के कार्य को बाधित और नष्ट करने की कोशिश नहीं कर रही थी? क्या मैं वास्तव में बड़े लाल अजगर का मूर्त रूप नहीं थी? मैंने एक उपदेश में पढ़ा था, "देखो कि कैसे बड़ा लाल अजगर परमेश्वर को सताता है और यह कैसे परमेश्वर के चुने हुए लोगों को क्रूरतापूर्वक नुकसान पहुँचाता है, फिर देखो कि तुम कैसे परमेश्वर के खिलाफ़ विरोध और विद्रोह करते हो, कैसे तुम परमेश्वर के चुने हुए लोगों के साथ शांतिपूर्वक निभाने में असमर्थ हो। तुम द्वेष से भरे हुए और बहुत स्वार्थी हो। तुम बड़े लाल अजगर से कैसे अलग हो? ... बहुत से लोग बड़े लाल अजगर के उन विषों को नहीं पहचानते हैं जो उनके भीतर छिपे रहते हैं। वे हमेशा सोचते हैं कि बड़ा लाल अजगर बहुत बुरा है, और जब वे सत्ता में आएँगे, तो वे बड़े लाल अजगर से काफी बेहतर होंगे; लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है? यदि तुम इसी पल सत्ता पाते हो, तो तुम बड़े लाल अजगर से कितने बेहतर होगे? क्या तुम बड़े लाल अजगर से बहुत बेहतर काम कर सकोगे? सच्चाई यह है कि सत्ताधारी बड़ा लाल अजगर किसी भी सत्ताधारी भ्रष्ट इंसान से अलग नहीं है। यदि बड़ा लाल अजगर 8 करोड़ लोगों को मार सकता है, तो सत्ता में आकर तुम कितनों को मारोगे? कुछ लोग कहते हैं, 'अगर मैंने सत्ता संभाली, तो मैं किसी को भी नहीं मारूँगा।' जैसे ही तुम यह कहते हो, कोई उठ खड़ा होगा और तुम्हें शाप देगा, और तुम क्रोधित हो जाओगे और कहोगे, 'तो मैं सिर्फ एक को मार डालूँगा, मैं एक अपवाद बना लूँगा।' जब कोई समूह तुम्हारा विरोध करने के लिए उठेगा, तो तुम कहोगे, 'एक समूह को मारना बड़ी बात नहीं है, बड़े लाल अजगर ने 8 करोड़ लोगों को मारा था। मैं केवल एक छोटे-से समूह को मार रहा हूँ, जो कि बड़े लाल अजगर की तुलना में बहुत कम है।' जब एक करोड़ लोग तुम्हारा विरोध करने के लिए उठेंगे, तो तुम कहोगे,' मैं इन एक करोड़ लोगों को भी मार सकता हूँ, क्योंकि अगर मैं ऐसा नहीं करता हूँ, तो सत्ता में कैसे रहूँगा?' क्या तुम यहाँ कोई समस्या नहीं देख सकते हो? जब तुम्हारे पास कोई सत्ता नहीं होती है, तो तुम कोई बुराई नहीं करते हो, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जब तुम सत्ता धारण करोगे तो तुम बुरे कर्म नहीं करोगे, क्योंकि सारे इंसानों की प्रकृतियाँ एक जैसी होती हैं।" (जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति)। परमेश्वर के वचनों के प्रबोधन और प्रकाश से और इस उपदेश के विश्लेषण के माध्यम से, मैंने अंततः अपने असली रंगों को स्पष्ट देखा, कि मैं बड़े लाल अजगर का मूर्त रूप थी, और मेरा भ्रष्ट सार बड़े लाल अजगर की प्रकृति के सार से कोई अलग नहीं था। जब मेरी बहन ने सत्य को स्पष्ट रूप से नहीं समझा था और अपने कर्तव्यों में वह लापरवाह और ग़ैर-ज़िम्मेदार थी, तो मैंने उसे प्यार भरे दिल से मदद नहीं की, बल्कि इसके बजाय मैंने सख्त स्वर में मांग करते हुए उससे बात की। जब उसने मेरी बात का खंडन किया और मेरी व्यवस्था का पालन और अनुसरण नहीं किया, तो मैं क्रोधित हो गई, मैंने उसकी किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में निंदा की जिसे परमेश्वर ने उजागर करके हटा दिया हो, मेरे दिल में एक बुरा इरादा उभर आया था और मैं उसे कलीसिया से बाहर निकालना चाहती थी। क्या मैं बड़े लाल अजगर की तरह व्यवहार नहीं कर रही थी, जिसकी नीतियाँ हैं "केवल खुद को बड़ा करो", "जो आज्ञापालन करते हैं, वे तरक्की करेंगे, जो अवज्ञा करते हैं, वे मारे जाएँगे", "चीज़ों को हद से परे बढ़ा-चढ़ा कर दिखाओ", "निर्दोषों का क़त्ले-आम करो"? ये बड़े लाल अजगर के विषों के श्रेष्ठ उदाहरण हैं! बड़ा लाल अजगर निर्दोषों का नरसंहार करता है और अनगिनत लोगों को मार डालता है; लोगों के जीवन का इसने कभी भी कोई सम्मान नहीं किया है, और यदि कोई इसके साथ सहमत नहीं होता या इसकी आज्ञा का पालन नहीं करता है, या यदि कोई इसे किसी भी तरह से अपमानित करता है, तो यह उसकी हत्या कर देता है। अगर मैं सत्ता में होती, तो मैं भी बड़े लाल अजगर जैसी ही होती, ऐसी कोई बुराई नहीं होती जो मैं नहीं करती और मैं अपने आप में पूरी तरह से एक कानून होती। यदि कलीसिया के काम की व्यवस्थाओं और सिद्धांतों ने मुझे नहीं रोका होता, मेरे भाइयों और बहनों ने मेरी निगरानी न की होती, तो मैंने निश्चित रूप से बहुत पहले ही अपनी बहन को हटा दिया होता। अपने विचारों और ख्यालों से, मैंने देखा, चूँकि मैंने ऐसी चीज़ों को उजागर किया था, इसलिए मुझे बड़े लाल अजगर की तरह निर्दोषों के नरसंहार जैसी करतूतों को कर पाने के लिए बस सत्ता और क़द की ही ज़रूरत थी। परमेश्वर के प्रबोधन और मार्गदर्शन ने मुझे अपनी बदसूरत और दुर्भावनापूर्ण प्रकृति और सार को जानने के लिए सक्षम बनाया, यह परमेश्वर के न्याय और उसकी ताड़ना के कारण ही था कि मुझे पश्चाताप करने का मौका दिया गया। मेरा दिल परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता से भर गया, साथ ही मैं अपने कर्मों से और भी अधिक नफ़रत, और उनका पश्चाताप, करने लगी।

इस अनुभव ने मुझे अपने भ्रष्ट सार की कुछ वास्तविक समझ दी। मैंने देखा कि मैं वास्तव में विवेक या जमीर से रहित एक व्यक्ति थी, मैं निस्संदेह बड़े लाल अजगर की संतान थी। लेकिन इससे मुझे यह भी लगा कि चाहे परमेश्वर के वचन कितने भी चुभने वाले हों, या चाहे वे मनुष्यों के विचारों के साथ मेल खाते हों या नहीं, उसका हर कथन अनंत, अपरिवर्तनीय सत्य होता है, और देर-सबेर भ्रष्ट मानवता पूरी तरह से इस बारे में आश्वस्त हो जाएगी। हे परमेश्वर! मैं तुम्हारे उद्धार के अनुग्रह का ऋण चुकाने के लिए अपने कर्तव्यों को ठीक से पूरा करुँगी, मैं अपने भाई-बहनों के साथ शांति से रहना चाहती हूँ और अपनी पिछली गलतियों को ठीक करना चाहती हूँ, और नए से ऐसी बनना चाहती हूँ जो तुम्हें सुकून दे।

सम्बंधित मीडिया

  • उत्पीड़न और आपदा ने पनपने में मेरी सहायता की

    बाइतुओ डेझोउ शहर, शैंडॉन्ग प्रांत पहले, मैं सिर्फ इतना ही जानती थी कि परमेश्वर की बुद्धि का प्रयोग शैतान की साज़िश के आधार पर किया जाता था, यह कि परम…

  • अंधकार के उत्पीड़न से होकर फिर उठ खड़ा हुआ

    मेरा जन्म एक गरीब, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र में हुआ था, जहाँ हम कई पीढ़ियों से अगरबत्ती जलाते व बुद्ध की पूजा करते आए थे।

  • सत्य का अभ्यास करने का अनुभव

    इस रीति से, मैं अनजाने में अहंकारी और स्वयं को बधाई देने वाली बन गई।

  • इस प्रकार की सेवा सच में तिरस्करणीय है

    पिछले कुछ दिनों में, कलीसिया ने मेरे कार्य में एक परिवर्तन की व्यवस्था की है। जब मुझे यह नया कार्यभार मिला, तो मैंने सोचा, "मुझे अपने भाई—बहनों के साथ एक सभा बुलाने, मामलों के बारे में साफ तौर पर उनसे बात करने, और उन पर अच्छा प्रभाव छोड़ने के लिए इस अंतिम अवसर को लेने की जरूरत है।" इसलिए, मैंने कई उपयाजकों से मुलाकात की, और हमारी मुलाकात की समाप्ति पर, मैंने कहा, "मुझसे यहाँ से चले जाने और एक अन्य कार्य पर जाने के लिए कहा गया है।