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मसीह की पहचान परमेश्वर स्वयं है

I

सभी मानव-जाति से ऊपर मसीह की दिव्यता है,

सभी रचे प्राणियों में वो सबसे ऊँचा अधिकारी है।

यह उसकी दिव्यता है, उसका स्वभाव और अस्तित्व।

ये ही हैं जो उसकी पहचान को तय करते हैं।

उसकी मानवता सामान्य है,

विभिन्न भूमिकाओं में वो कहता है,

और पालन ईश्वर की आज्ञा का वो करे,

फिर भी वो ही ईश्वर है निस्संदेह।

II

सामान्य मानवता मसीह की,

वे मूर्ख इसे ग़लती मानते हैं।

वे उसको स्वीकार नहीं करते हैं,

जब कि उसने दिव्यता अपनी दिखाई है।

जितना ही वो आज्ञाकारी और नम्र है,

उतना ही वे उसको नीचा दिखाते हैं।

कुछ तो उसको बहिष्कृत करते हैं,

और महान लोगों की आराधना करते हैं।

ईश्वर की इच्छा माने देहधारी ईश्वर,

उसकी मानवता सामान्य और सत्य है।

ईश्वर की इच्छा माने देहधारी ईश्वर,

उसकी मानवता सामान्य और सत्य है।

इन्हीं सारी वजहों

से लोग उसका विरोध और अवज्ञा करते हैं।

उसकी मानवता सामान्य है,

विभिन्न भूमिकाओं में वो कहता है,

और पालन ईश्वर की आज्ञा का वो करे,

फिर भी वो ही ईश्वर है निस्संदेह।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:मनुष्य के लिए परमेश्वर जो करता वो हर काम नेकनीयत है

अगला:स्तुति करो परमेश्वर की वह विजेता बनकर लौटा है

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