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सत्य की खोज का मार्ग

I

जानो कि सत्य का कौन सा हिस्सा सम्बंधित है उनसे जिनका है,

सामना तुमने किया।

यदि तुम ढूंढों ईश्वर की इच्छा सत्य को जाने बग़ैर,

तो ये व्यर्थ है, न प्राप्त होगा कुछ भी।

क्या सच को समझने में तुम्हारी अवस्था भूमिका निभाती है?

क्या तुम सामनाओं में सोचते हो कौन सा सच यथार्थ है?

II

तुम्हारे सभी सामनाओं में, ढूंढों सच के उन हिस्सों को,

ईश्वर के वचन में जो इसके समान है।

और फिर उस राह की खोज करो तुम्हारे लिए हो जो सही,

करेगा ये मदद तुम्हारी, मदद तुम्हारी जानने को ईश्वर की इच्छा।

क्या सच को समझने में तुम्हारी अवस्था भूमिका निभाती है?

क्या तुम सामनाओं में सोचते हो कौन सा सच यथार्थ है?

तो फिर ढूंढों इन सच्चाइयों को तुम पाओगे

क्या है ईश्वर की इच्छा तुम्हारे लिए।

III

सत्य की खोज और उसका अभ्यास,

सूत्र और सिद्धांत से बस जुड़े रहना जैसा बिलकुल भी नहीं है।

सच कोई समीकरण या कानून नहीं। ये जीवन है और ये जीवित है!

ये एक नियम है जिसे करना चाहिए पालन,

जीवन में जिसकी तुमको ज़रुरत है।

इस विचार का पालन करो अनुभव के माध्यम से।

क्या सच को समझने में तुम्हारी अवस्था भूमिका निभाती है?

क्या तुम सामनाओं में सोचते हो कौन सा सच यथार्थ है?

क्या सच को समझने में तुम्हारी अवस्था भूमिका निभाती है?

क्या तुम सामनाओं में सोचते हो कौन सा सच यथार्थ है?

तो फिर ढूंढों इन सच्चाइयों को तुम पाओगे क्या

है ईश्वर की इच्छा तुम्हारे लिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं