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प्रभुजनों की प्रार्थना

I

ईश्वर के बंदे उठते उसके सिंहासन के समक्ष, दिल में प्रार्थनाएं उनके।

ईश्वर दे आशीष उन्हें जो लौटे प्रभु की ओर; वे सब रोशनी में हैं जीते।

विनती है पवित्र आत्मा से करे प्रबुद्ध हमें परमेश्वर की इच्छा से,

द्वारा वचन के।

सभी लोग संजोये परमेश्वर के वचन को और वे आएँ उसे जानने।

ईश्वर दे हमें और ज्यादा उसके अनुग्रह, जिससे जीवन का स्वभाव बदले।

ईश्वर करे परिपूर्ण हमें जिससे बनें एक मन और दिल उसके साथ।

हमें अनुशासित करे जिससे हम पालन अपने कर्तव्यों का करें।

राह दिखाए रोज़ पवित्र आत्मा जिससे हों हम

परमेश्वर के साक्षी और करें प्रचार।

II

सब लोगों को हो ज्ञान अच्छे और बुरे का, करें पालन सत्य का।

परमेश्वर दुर्जनों को दण्डित करे और कलीसिया में शांति रहे।

अर्पण सभी करें सच्चा प्रेम परमेश्वर को जो हैं सबसे सुहावने और प्यारे।

सब अड़चन हटाए परमेश्वर जिससे सौंपे खुद को पूरा हम।

प्रभु दे ऐसा दिल जो करे उससे ही प्यार, दिल जो जाए न उससे दूर।

सभी लौट आएं परमेश्वर के समक्ष जिन्हें उसने चुना है।

सभी मिलकर गाएँ गुणगान परमेश्वर के जिसने की महिमा की प्राप्ति।

परमेश्वर रहे साथ प्रजा के अपने, हमें अपने प्रेम में जीवित रखे।

परमेश्वर रहे साथ प्रजा के अपने, हमें अपने प्रेम में जीवित रखे।

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परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं? बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है