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इंसान के लिये परमेश्वर के प्रबंधनों का प्रयोजन

I

गर यकीन है तुम्हें परमेश्वर के शासन में,

तो जान लो कुछ भी संयोगवश नहीं होता।

हर चीज़ की व्यवस्था करता है परमेश्वर।

किस लिये करता है परमेश्वर ये सब? अंतिम लक्ष्य क्या है उसका?

ये सब नहीं है तुम्हें उजागर करने के लिये,

ये सब है तुम्हें पूर्ण करने, बचाने के लिये।

कैसे पूर्ण करता है, बचाता है तुम्हें परमेश्वर?

ये सब करता है वो दिखाकर तुम्हें भ्रष्टता तुम्हारी,

प्रकृति, सार और ग़लतियाँ तुम्हारी।

जानकर इन चीज़ों को, तुम निकाल फेंकोगे इन्हें, निकाल फेंकोगे इन्हें।

II

सीख लो इस अवसर को पकड़ना। जान लो इसे तुम्हें पकड़ना ही है।

न टकराओ, न तकरार करो, न विरोध का प्रयास करो।

परमेश्वर की व्यवस्थित हर चीज़ का गर मुकाबला करोगे,

फिर सत्य में प्रवेश करना मुश्किल होगा तुम्हारा।

पालन करो, खोजो, प्रार्थना करो, और आओ सम्मुख परमेश्वर के।

भीतर से अवस्था बदल जाएगी तुम्हारी, सत्य गढ़ा जाएगा तुम में।

तब तरक्की करोगे तुम, जीवन को बदला हुआ पाओगे।

जब ये सच साकार होगा,

तो कद तुम्हारा जीवन का सृजन करेगा, जीवन का सृजन करेगा।

कैसे पूर्ण करता है, बचाता है तुम्हें परमेश्वर?

ये सब करता है वो दिखाकर तुम्हें भ्रष्टता तुम्हारी,

प्रकृति, सार और ग़लतियाँ तुम्हारी।

जानकर इन चीज़ों को, तुम निकाल फेंकोगे इन्हें, निकाल फेंकोगे इन्हें।

"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है