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देह और आत्मा का है काम उसी सार का

I

परमेश्वर के आत्मा का हर एक चीज़ पर अधिकार है।

उसके देह में, परमेश्वर का सार है, उसका भी वही अधिकार है।

देह में रहकर भी प्रभु, काम कर सकता बहुत है।

वो पिता की ख़्वाहिशें करता पूरी।

परमेश्वर आत्मा है, वो बचा सकता है इंसानियत को,

ऐसा देह में परमेश्वर भी कर सकता है।

अपने कामों को प्रभु करता है ख़ुद।

II

कोई भी इंसान ना ऐसा सोच सकता है, ना हासिल कर सकता है।

परमेश्वर के पास सब अधिकार है, मगर उसका देह कर सकता है इसको समर्पित।

“मसीह मानता है इच्छा अपने पिता की” है यही इसके असली मायने।

परमेश्वर आत्मा है, वो बचा सकता है इंसानियत को,

ऐसा देह में परमेश्वर भी कर सकता है।

अपने कामों को प्रभु करता है ख़ुद।

III

अपने ही कामों से प्रभु का भेद ना टकराव है।

आत्मा का काम और देह का काम है एक समान।

एक ही है दोनों की मंज़िल, एक ही बस काम है।

है स्वरूप बिल्कुल जुदा, पर एक उनका सार है।

दोनों में परमेश्वर का सार और पहचान है।

परमेश्वर आत्मा है, वो बचा सकता है इंसानियत को।

अपने कामों को प्रभु करता है ख़ुद।

परमेश्वर आत्मा है, वो बचा सकता है इंसानियत को।

अपने कामों को प्रभु करता है ख़ुद।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो।