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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 1)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" (अंश 1) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" (अंश 2)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" (अंश 2) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (अंश 1)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (अंश 1) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 1)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश 1) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "देहधारण का रहस्य (4)" (अंश 1)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "देहधारण का रहस्य (4)" (अंश 1) मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है"(अंश 5)मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है"(अंश 5) अंतिम दिनों के मसीह के वचन "सर्वशक्तिमान का आह भरना" (अंश 1)अंतिम दिनों के मसीह के वचन "सर्वशक्तिमान का आह भरना" (अंश 1) "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" (अंश I)"जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" (अंश I) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन" (अंश) परमेश्वर के कथन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश I)परमेश्वर के कथन "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" (अंश I) परमेश्वर के कथन "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" (अंश I)परमेश्वर के कथन "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" (अंश I) अंतिम दिनों के मसीह के कथन  (अंश I)अंतिम दिनों के मसीह के कथन (अंश I) मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है" (अंश II)मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है" (अंश II) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" (अंश) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा" (अंश I)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा" (अंश I) मसीह के कथन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश I)मसीह के कथन "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश I) मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है" अंश IIIमसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है" अंश III सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन: उन्तीसवाँ कथन" (अंश I)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन: उन्तीसवाँ कथन" (अंश I) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I)" (अंश I)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I)" (अंश I) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव" (अंश I)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव" (अंश I) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सर्वशक्तिमान का आह भरना" (अंश II)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सर्वशक्तिमान का आह भरना" (अंश II) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश) मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है" (अंश IV)मसीह के कथन "भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है" (अंश IV) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है (III) परमेश्वर का अधिकार (II)" (अंश III)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है (III) परमेश्वर का अधिकार (II)" (अंश III) "सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे" (अंश)"सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे" (अंश) परमेश्वर के कथन "उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश II)परमेश्वर के कथन "उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" (अंश II) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है"(अंश III)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है"(अंश III) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI परमेश्वर की पवित्रता (III)" (अंश)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI परमेश्वर की पवित्रता (III)" (अंश) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार" (अंश 4)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार" (अंश 4) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" (अंश) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार" (अंश 2)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार" (अंश 2) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है" (अंश) "केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है" (अंश)"केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है" (अंश) अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार" (अंश)अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार" (अंश) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" (अंश) सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" (अंश)सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" (अंश) परमेश्वर के कथन "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" (अंश)परमेश्वर के कथन "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" (अंश)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश)

परमेश्वर के वचन के पाठ   2297  

परिचय

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" (अंश)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "परमेश्वर ने इस संसार की सृष्टि की, उसने इस मानवजाति को बनाया, और इसके अलावा वह प्राचीन यूनानी संस्कृति और मानव सभ्यता का वास्तुकार था। केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति को सांत्वना देता है, और केवल परमेश्वर ही रात-दिन इस मानवजाति का ध्यान रखता है। मानव का विकास और प्रगति परमेश्वर की सम्प्रभुता से अवियोज्य है और मानवजाति का इतिहास और भविष्य परमेश्वर की योजनाओं में जटिल है। यदि तुम एक सच्चे ईसाई हो, तो तुम निश्चय ही इस बात पर विश्वास करोगे कि किसी भी देश या राष्ट्र का उत्थान या पतन परमेश्वर की योजना के अनुसार होता है। केवल परमेश्वर ही किसी देश या राष्ट्र के भाग्य को जानता है और केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति के जीवन के ढंग को नियंत्रित करता है। यदि मानवजाति अच्छा भाग्य पाना चाहती है, यदि कोई देश अच्छा भाग्य पाना चाहता है, तो मनुष्य को अवश्य परमेश्वर की आराधना में झुकना चाहिए, पश्चाताप करना चाहिए और परमेश्वर के सामने अपने पापों की स्वीकार करना चाहिए, अन्यथा मनुष्य का भाग्य और मंज़िल अपरिहार्य रूप से तबाह हो कर समाप्त हो जाएँगे। नूह की नाव के समय में पीछे पलट कर देखें: मानवजाति पूरी तरह से भ्रष्ट थी, परमेश्वर की आशीषों से भटक गई थी, परमेश्वर के द्वारा उनकी देखभाल नहीं की जा रही थी, और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को खो चुकी थी। वे परमेश्वर की रोशनी के बिना अंधकार में रहते थे। इस प्रकार वे प्रकृति से व्यभिचारी बन गए थे, उन्होंने अपने आप को घृणित चरित्रहीनता के मध्य उन्मुक्त कर दिया था। इस प्रकार के लोग परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को प्राप्त नहीं कर सकते थे; वे परमेश्वर के चेहरे की गवाही देने के अयोग्य थे, न ही वे परमेश्वर की आवाज़ को सुनने के योग्य थे, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर को त्याग दिया था, उन सब चीजों को बेक़ार समझ कर छोड़ दिया था जो परमेश्वर ने उन्हें प्रदान की थीं, और परमेश्वर की शिक्षाओं को भूल गए थे। उनका मन परमेश्वर से बहुत दूर भटक गया था, और जैसा कि इससे हुआ, वे अत्यधिक मूर्खतापूर्ण स्तरों तक और मानवता से पथभ्रष्ट हो गए थे, और उत्तरोत्तर दुष्ट होते गए। इस प्रकार से वे मृत्यु के और भी निकट आ गए थे, और परमेश्वर के कोप और दण्ड के अधीन हो गए थे। केवल नूह ने परमेश्वर की आराधना की और बुराई को दूर रखा, और इसलिए वह परमेश्वर की आवाज़ को सुनने और परमेश्वर के निर्देशों को सुनने में सक्षम था। उसने परमेश्वर के वचन के अनुसार नाव बनायी, और सभी प्रकार के जीवित प्राणियों को उसमें एकत्रित किया। और इस तरह, जब एक बार सब कुछ तैयार हो गया, तो परमेश्वर ने संसार पर अपनी विनाशलीला शुरू कर दी। केवल नूह और उसके परिवार के सात लोग इस विनाशलीला में जीवित बचे, क्योंकि नूह ने यहोवा की आराधना की थी और बुराई को दूर रखा था। फिर वर्तमान युग पर विचार करें: नूह के जैसे धर्मी मनुष्य, जो परमेश्वर की आराधना कर सके और बुराई को दूर रख सके, उनका अस्तित्व समाप्त हो गया है। फिर भी परमेश्वर इस मानवजाति के प्रति दयालु है और इस अंतिम युग में मानवजाति को दोषमुक्त करता है। परमेश्वर उनकी खोज कर रहा है जो उसके प्रकट होने की लालसा करते हैं। वह उनकी खोज करता है जो उसके वचनों को सुनने में सक्षम हों, जो उसके आदेश को नहीं भूले हों और अपने हृदय एवं शरीर को उसके प्रति समर्पित करते हों। वह उनकी खोज करता है जो उसके सामने बच्चों के समान आज्ञाकारी हों, और उसका विरोध न करते हों। यदि तुम परमेश्वर के प्रति अपने समर्पण में किसी भी ताकत से अबाधित हो, तो परमेश्वर तुम्हारे ऊपर अनुग्रह की दृष्टि डालेगा और अपने आशीष तुम्हें प्रदान करेगा। यदि तुम उच्च पद वाले, आदरणीय प्रतिष्ठा वाले, प्रचुर ज्ञान से सम्पन्न, विपुल सम्पदा के मालिक हो, और कई लोगों के द्वारा समर्थित हो, फिर भी ये चीज़ें तुम्हें परमेश्वर के आह्वान और परमेश्वर के आदेश को स्वीकार करने, जो कुछ परमेश्वर तुम से कहता है उसे करने के लिए, उसके सम्मुख आने से नहीं रोकती हो, तब तुम जो कुछ भी करोगे वह पृथ्वी पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा और मानवजाति में सर्वाधिक धर्मी होगा। यदि तुम परमेश्वर के आह्वान को अपनी हैसियत और लक्ष्यों के वास्ते अस्वीकार करोगे, तो तुम जो कुछ भी करोगे वह श्रापित हो जाएगा और यहाँ तक कि परमेश्वर द्वारा भी तिरस्कृत किया जाएगा। हो सकता है कि तुम कोई अध्यक्ष, या कोई वैज्ञानिक, कोई पादरी, या कोई बुज़ुर्ग हो, किन्तु इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि तुम्हारा पद कितना उच्च है, यदि तुम अपने ज्ञान और अपने कार्य की योग्यता पर भरोसा रखोगे, तो तुम हमेशा ही असफल रहोगे, और परमेश्वर की आशीषों से हमेशा वंचित रहोगे, क्योंकि तुम जो कुछ भी करते हो परमेश्वर उससे कुछ भी अपेक्षा नहीं करता है, और वह नहीं मानता है कि तुम्हारी वृत्ति धर्मी है, या यह स्वीकार नहीं करता है कि तुम मानवजाति के भले के लिए कार्य कर रहे हो। वह कहेगा कि जो कुछ भी तुम करते हो, वह मानवजाति को परमेश्वर की सुरक्षा से वंचित करने, और परमेश्वर के आशीषों को इनकार करने के लिए मानवजाति के ज्ञान और मानवजाति की शक्ति का उपयोग करना है। वह कहेगा कि तुम मानवजाति को अंधकारी की ओर, मृत्यु की ओर, और एक ऐसे अस्तित्व के आरंभ की ओर ले जा रहे हो जिसकी सीमाएँ नहीं है जिसमें मनुष्य परमेश्वर और उसके आशीष को खो देगा।" — "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

अनुशंसित:

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" (भाग दो)

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "तीन चेतावनियाँ" | The Warning of God to Man (Hindi)

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन"

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं"

https://hi.kingdomsalvation.org/videos/do-not-know-God-are-oppose-God-word.html

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना"

https://hi.kingdomsalvation.org/videos/behold-God-in-judgment-chastisement-word.html

चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।

विशेष वक्तव्य: यह वीडियो प्रस्तुति सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया द्वारा लाभ-के-लिए-नहीं (नॉट-फॉर प्रॉफिट) रचना के रूप में तैयार की गई थी। यह वीडियो किसी भी तीसरे पक्ष को लाभ के लिए वितरित नहीं किया जा सकता है, और हमें आशा है कि हर कोई इसे खुले तौर पर साझा और वितरित करेगा। जब आप इसे वितरित करते हैं, तो कृपया स्रोत पर ध्यान दें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया की सहमति के बिना, कोई भी संगठन, सामाजिक समूह या व्यक्ति इस वीडियो की सामग्री के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है या इसे गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं कर सकता है।

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