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31. बुद्धिमान कुंवारियाँ कौन हैं? मूर्ख कुंवारियाँ कौन हैं?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

अतीत में, कुछ लोगों ने "पाँच समझदार कुँवारियों, पाँच मूर्ख कुँवारियों" की भविष्यवाणियाँ की हैं; यद्यपि भविष्यवाणी परिशुद्ध नहीं है, फिर भी यह पूरी तरह से ग़लत भी नहीं है, इसलिए मैं तुम लोगों को कुछ स्पष्टीकरण दे सकता हूँ। पाँच समझदार कुँवारियाँ और पाँच मूर्ख कुँवारियाँ दोनों निश्चित रूप से लोगों की संख्या को नहीं दर्शाती हैं, न ही वे क्रमशः एक प्रकार के लोगों को दर्शाती हैं। पाँच समझदार कुँवारियों का अर्थ लोगों की संख्या है, पाँच मूर्ख कुँवारियाँ एक प्रकार के लोगों को दर्शाती हैं, किन्तु इन दोनों में से कोई भी ज्येष्ठ पुत्रों को संदर्भित नहीं करती हैं, और इसके बजाय वे सृजन को दर्शाती हैं। यही कारण है कि उन्हें अंत के दिनों में तेल तैयार करने के लिए कहा गया है। (सृजन में मेरी गुणवत्ता नहीं होती है; यदि वे समझदार लोग बनाना चाहते हैं तो उन्हें तेल तैयार करने की आवश्यकता है, और इस प्रकार उन्हें मेरे वचनों से सुसज्जित होने की आवश्यकता है।) पाँच समझदार कुँवारियाँ मनुष्यों के बीच में से मेरे पुत्रों और मेरे लोगों को दर्शाती हैं जिन्हें मैंने बनाया है। "कुँवारियाँ" कहकर इसलिए उन्‍हें संबोधित किया जाता है[क] क्योंकि यद्यपि वे पृथ्वी पर पैदा हुए हैं, फिर भी वे मेरे द्वारा प्राप्त कर लिए जाते हैं; कहा जा सकता है कि वे पवित्र हो गए हैं, इसलिए उन्हें "कुँवारियाँ" कहा जाता है। पूर्वोल्लिखित "पाँच" मेरे पुत्रों और मेरे लोगों की संख्या को दर्शाता है जिन्हें मैंने पूर्वनियत किया है। "पाँच मूर्ख कुँवारियाँ" सेवा करने वालों का उल्लेख करता है। वे जीवन को अल्‍पमात्र भी महत्व दिए बिना मेरे लिए सेवा करते हैं, केवल बाहरी चीज़ों का पीछा करते हैं (क्योंकि उनमें मेरी गुणवत्ता नहीं है, चाहे वे कुछ भी क्यों न करें, वह बाहरी चीज़ ही होती है), और वे मेरे सक्षम सहायक होने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्हें "मूर्ख कुँवारियाँ" कहा जाता है। पूर्वोल्ल्खित "पाँच" शैतान को दर्शाता है, और "कुँवारियाँ" कह कर उन्हें बुलाए जाने[ख] का अर्थ है कि वे मेरे द्वारा जीते जा चुके हैं और मेरे लिए सेवा करने में सक्षम हैं, किन्तु इस तरह के व्यक्ति पवित्र नहीं हैं, इसलिए उन्हें सेवा करने वाले कहा जाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 116" से उद्धृत

आज, जो लोग परमेश्वर के वर्तमान वचनों का पालन करते हैं, वे पवित्र आत्मा की धारा में हैं; जो लोग आज परमेश्वर के वचनों से अनभिज्ञ हैं, वे पवित्र आत्मा की धारा के बाहर हैं, और परमेश्वर की सराहना ऐसे लोगों के लिए नहीं है। ..."पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण" करने का मतलब है आज परमेश्वर की इच्छा को समझना, परमेश्वर की वर्तमान अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करने में सक्षम होना, आज के परमेश्वर का अनुसरण और आज्ञापालन करने में सक्षम होना, और परमेश्वर के नवीनतम कथनों के अनुसार प्रवेश करना। केवल ऐसा व्यक्ति ही है जो पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करता है और पवित्र आत्मा की धारा में है। ऐसे लोग न केवल परमेश्वर की सराहना प्राप्त करने और परमेश्वर को देखने के लिए सक्षम हैं, बल्कि परमेश्वर के नवीनतम कार्य से परमेश्वर के स्वभाव को भी जान सकते हैं, और मनुष्य की अवधारणाओं और अवज्ञा को, मनुष्य के प्रकृति और सार को भी, परमेश्वर के नवीनतम कार्य से जान सकते हैं; इसके अलावा, वे अपनी सेवा के दौरान धीरे-धीरे अपने स्वभाव में परिवर्तन हासिल करने में सक्षम होते हैं। केवल ऐसे लोग ही हैं जो परमेश्वर को प्राप्त करने में सक्षम हैं, और जो वास्तव में सही राह को हासिल कर चुके हैं। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य से हटा दिए गए हैं, वे वो लोग हैं जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य का अनुसरण करने में असमर्थ हैं, और जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य के विरुद्ध विद्रोह करते हैं। ऐसा लोग खुले आम परमेश्वर का विरोध इसलिए करते हैं कि परमेश्वर ने नया कार्य किया है, और परमेश्वर की छवि उनकी धारणाओं के अनुरूप नहीं है—जिसके परिणामस्वरूप वे परमेश्वर का खुले आम विरोध करते हैं और परमेश्वर पर निर्णय देते हैं, जिससे वे स्वयं के लिए परमेश्वर की घृणा और अस्वीकृति उत्पन्न करते हैं। परमेश्वर के नवीनतम कार्य का ज्ञान रखना कोई आसान बात नहीं है, लेकिन अगर लोग स्वेच्छापूर्वक परमेश्वर के कार्य का अनुसरण कर पाते हैं और परमेश्वर के कार्य की तलाश कर सकते हैं, तो उन्हें परमेश्वर को देखने का मौका मिलेगा, और उन्हें पवित्र आत्मा का नवीनतम मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिलेगा। जो जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करते हैं, वे पवित्र आत्मा के प्रबोधन या परमेश्वर के मार्गदर्शन को प्राप्त नहीं कर सकते हैं; इस प्रकार, लोगों को परमेश्वर का नवीनतम कार्य प्राप्त होता है या नहीं, यह परमेश्वर की कृपा पर निर्भर करता है, यह उनके अनुसरण पर निर्भर करता है, और यह उनके इरादों पर निर्भर करता है।

वे सभी धन्य हैं जो पवित्र आत्मा की वर्तमान उक्तियों का पालन करने में सक्षम हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कैसे थे, या उनके भीतर पवित्र आत्मा कैसे कार्य किया करता था—जिन्होंने नवीनतम कार्य को प्राप्त किया है वे सबसे अधिक धन्य हैं, और जो लोग आज के नवीनतम कार्य का अनुसरण नहीं कर सकते हैं, वे हटा दिए जाते हैं। परमेश्वर उन्हें चाहता है जो नई रोशनी को स्वीकार करने में सक्षम हैं, और वह उन्हें चाहता है जो उसके नवीनतम कार्य को स्वीकार करते और जान लेते हैं। ऐसा क्यों कहा गया है कि तुम लोगों को शुद्ध कुँवारी होना चाहिए? एक शुद्ध कुँवारी पवित्र आत्मा के कार्य की तलाश करने में और नई चीज़ों को समझने में सक्षम होती है, और इसके अलावा, पुरानी अवधारणाओं को दूर करने और परमेश्वर के आज के कार्य का अनुसरण करने में सक्षम होती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" से उद्धृत

जो शैतान से संबंधित होते हैं वे परमेश्वर के वचनों को नहीं समझते हैं और जो परमेश्वर से संबंधित होते हैं वे परमेश्वर की आवाज़ को सुन सकते हैं। वे सभी लोग जो मेरे द्वारा बोले गए वचनों को महसूस करते और समझते हैं ऐसे लोग हैं जो बचाए जाएँगे, और परमेश्वर की गवाही देंगे; वे सभी लोग जो मेरे द्वारा बोले गए वचनों को नहीं समझते हैं परमेश्वर की गवाही नहीं दे सकते हैं, तो वे ऐसे लोग हैं जो निकाल दिए जाएँगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" से उद्धृत

किसी भी रूप या राष्ट्र की विवशताओं से मुक्त, परमेश्वर के प्रकटन का लक्ष्य, उसे अपने द्वारा बनाई गई योजना के अनुसार कार्य को पूरा करने में सक्षम बनाना है। यह वैसा ही है जैसे जब परमेश्वर यहूदिया में देह बना, तब उसका लक्ष्य समस्त मानव जाति को छुड़ाने के लिये सलीब पर चढ़ने के कार्य को पूरा करना था। फिर भी यहूदियों का मानना था कि परमेश्वर के लिए ऐसा करना असंभव है, और उन्हें यह असंभव लगता था कि परमेश्वर देह बन सकता है और प्रभु यीशु के रूप को ग्रहण कर सकता है। उनका "असंभव" वह आधार बन गया जिस पर उन्होंने परमेश्वर की निंदा और उसका विरोध किया, और अंततः इस्राएल को विनाश की ओर ले गया। आज, कई लोगों ने उसी तरह की ग़लती की है। वे अपनी समस्त शक्ति के साथ परमेश्वर के आसन्न प्रकटन की घोषणा करते हैं, मगर साथ ही उसके प्रकटन की निंदा भी करते हैं; उनका "असंभव" परमेश्वर के प्रकटन को एक बार और उनकी कल्पना की सीमा के भीतर सीमित कर देता है। और इसलिए मैंने कई लोगों को परमेश्वर के वचनों के आने के बाद जँगली और कर्कश हँसी का ठहाका लगाते देखा है। लेकिन क्या यह हँसी यहूदियों की निंदा और ईशनिंदा से किसी तरह से भिन्न है? सच्चाई की उपस्थिति तुम लोगों को श्रद्धावान नहीं बनाती, सच्चाई के लिए तरसने की तुम लोगों की प्रवृत्ति तो और भी कम है। तुम बस इतना ही करते हो कि लापरवाही से छानबीन करते हो और बेपरवाह जिंदादिली के साथ प्रतीक्षा करते हो। इस तरह से छानबीन और प्रतीक्षा करने से तुम्हें क्या फायदा हो सकता है? क्या ऐसा हो सकता है कि तुम परमेश्वर का व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करोगे? यदि तुम परमेश्वर के कथनों को नहीं समझ सकते, तो तुम किस तरह से परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हो? जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य व्यक्त होता है, और वहाँ परमेश्वर की वाणी होगी। केवल वे लोग ही परमेश्वर की वाणी को सुन पाएँगे जो सत्य को स्वीकार कर सकते हैं, और केवल इस तरह के लोग ही परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

तथाकथित "बुद्धिमान कुंवारियों" का तात्पर्य उन लोगों से है जो परमेश्वर की वाणी को पहचान सकते हैं और "दूल्हे" की पुकार को सुन सकते हैं, और जो इस तरह मसीह को स्वीकार कर व्यावहारिक परमेश्वर को अपने घर ले जा सकते हैं। और चूँकि "मूर्ख कुंवारियां" "दूल्हे" की आवाज़ को नहीं जानती हैं और परमेश्वर की वाणी को नहीं पहचान सकती हैं, वे मसीह को अस्वीकार करती हैं। वैसे लोग अभी भी अस्पष्ट परमेश्वर की आशा में रहते हैं, इसलिए वे छोड़ दिए और हटा दिए जाते हैं। इस प्रकार हम देख सकते हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने में सच्ची निष्ठा रखे बिना मसीह को स्वीकार करना बहुत कठिन है। जो लोग मसीह को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, वे "प्रियतम के विवाह-भोज" से वंचित रह जाएँगे, और वे स्वर्ग के राज्य में परमेश्वर द्वारा अपने घर में वापस नहीं लिए जा सकते, न ही वे उस जगह में प्रवेश कर सकते हैं जिसे परमेश्वर ने इंसानों के लिए तैयार किया है। इसलिए, लोग अंत के दिनों में मसीह को स्वीकार कर उसके कार्य के प्रति समार्पित हो सकते हैं या नहीं, यह लोगों के परमेश्वर पर विश्वास करने में सफल या विफल होने का एक महत्वपूर्ण निर्णायक घटक है।

— ऊपर से संगति से उद्धृत

प्रभु यीशु ने बाइबल में भविष्यवाणी की थी कि उसकी वापसी के समय दो प्रकार के लोग होंगे, उसने अनुग्रह के युग में सभी विश्वासियों के लिए बुद्धिमान कुंवारी और मूर्ख कुंवारी को एक दृष्टांत के रूप में प्रयोग किया: जो लोग परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं और उसे स्वीकार करके उसका पालन कर सकते हैं, तो वे बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं; जो सभी परमेश्वर की वाणी सुनने में सक्षम नहीं हैं, जो सुनते तो हैं मगर फिर भी इंकार करते हैं और विश्वास नहीं करते हैं, वे मूर्ख कुंवारियाँ हैं। क्या मूर्ख कुंवारियाँ स्वर्गारोहित की जा सकती हैं? नहीं, नहीं की जा सकतीं। तो इन मूर्ख और बुद्धिमान कुंवारियों को कैसे उजागर किया जा सकता है? उन्हें परमेश्वर के वचन का उपयोग करके उजागर किया जा सकता है। "वचन देह में प्रकट होता है" नामक पुस्तक में दिए गए परमेश्वर के अन्य के दिनों के वचनों को पढने के बाद उनके व्यवहार से ऐसा किया जा सकता है। कुछ विश्वासी इसे पढ़ने के बाद कहते हैं, "वाह, ऐसे गहरे वचन, इन वचनों में सत्य है।" इसे फिर से ध्यान से पढ़ने के बाद, वे कहते हैं, "ये वचन किसी सामान्य व्यक्ति से नहीं आ सकते हैं; ऐसा लगता है कि ये परमेश्वर से आये हैं।" इसे फिर से ध्यान से पढने के बाद वे कहते हैं, "वाह, यह तो परमेश्वर की वाणी है, ऐसा हो ही नहीं सकता कि ये वचन किसी मनुष्य से आये हैं!" यह व्यक्ति धन्य है, यह एक बुद्धिमान कुंवारी है। जहाँ तक मूर्ख कुंवारियों की बात है, तो कुछ पादरी हैं, कुछ एल्डर हैं, कुछ प्रचारक हैं, और कुछ भ्रमित विश्वासी हैं, जो केवल पेट भर खाना चाहते हैं। परमेश्वर के वचन को पढ़ने के बाद वे कैसा महसूस करते हैं? "हम्म, ये वचन मेरी धारणाओं और कल्पना के अनुरूप नहीं हैं, मैं इन्हें स्वीकार नहीं करता हूँ।" और इसे फिर से ध्यान से पढ़ने के बाद, वे कहते हैं: "हम्म, कुछ शब्दों में लगता है कि वे उचित हैं, लेकिन यह संभव नहीं है, यह परमेश्वर का कार्य नहीं हो सकता।" तो एक बार फिर यह उनकी धारणाओं और कल्पनाओं के अनुरूप नहीं है। अंत में, वे जितना अधिक इसे पढ़ते हैं, उतना ही कम यह उनकी धारणाओं के अनुरूप लगता है। तब, वे कहेंगे: "यह परमेश्वर का वचन नहीं है, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता। यह नकली है। एक झूठा मसीह लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है, मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकता!" यह किस तरह का व्यक्ति है? यह एक फरीसी है, एक मूर्ख कुंवारी है। बुद्धिमान कुंवारियों और मूर्ख कुंवारियों को प्रकाश में कैसे लाया जाता है? यह परमेश्वर का वचन है जो उन्हें प्रकाश में लाता है। अंत के दिनों में यह परमेश्वर का वचन है जो उन्हें वर्गीकृत करता है और उन्हें उन श्रेणियों में विभाजित करता है जिनसे वे संबंधित हैं, और फिर परमेश्वर भले को पुरस्कार देना शुरू करेगा और दुष्टों को दंडित करेगा।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति से उद्धृत

बुद्धिमान कुँवारियाँ प्रभु की वाणी पर मुख्य रूप से इसलिए ध्यान देंगी, क्योंकि वे सत्य से प्रेम करती हैं और सत्य की तलाश करती हैं। वे परमेश्वर के प्रकटन के लिए प्यासी हैं; यही कारण है कि वे प्रभु के आगमन की तलाश और जाँच कर पाती हैं, और वे प्रभु की वाणी को समझ पाती हैं। चूँकि मूर्ख कुँवारियाँ सत्य से प्रेम नहीं करती हैं, इसलिए वे केवल हठपूर्वक नियमों से चिपके रहना जानती हैं और प्रभु के आने की तलाश या जाँच नहीं करती हैं। उनमें से कुछ तो इस बात पर जोर देती हैं कि वे ऐसे किसी भी प्रभु को स्वीकार या उसकी जाँच नहीं करेंगी जो बादल पर नहीं आता है। अन्य कुवाँरियाँ धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डरों की चालबाजियों के प्रति पूरी तरह से समर्पित हो जाती हैं। जो कुछ भी पादरी और एल्डर्स कहेंगे, वे उसे ही सुनेंगी और उसी का पालन करेंगी। वे प्रभु के नाम में विश्वास करती हैं, किन्तु वास्तव में, वे इन पादरियों और एल्डरों का अनुसरण करती हैं और उनकी आज्ञा का पालन करती हैं। वे अपने लिए सच्चे मार्ग की जाँच नहीं करती हैं और वे प्रभु की वाणी को समझने में असमर्थ होती हैं। कुछ तो और भी अधिक मूर्ख होती हैं। चूँकि अंत के दिनों में झूठे मसीह भी प्रकट होते हैं, इसलिए वे सच्चे मसीह की तलाश या जाँच नहीं करती हैं और यहाँ तक कि उसे नकारने और उसकी निंदा करने में भी नहीं चूकती हैं। क्या यह अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारना नहीं है? यह भी एक मूर्ख कुँवारी की पहचान है।

— पटकथा प्रश्नों के उत्तर से उद्धृत

फुटनोट:

क. मूल पाठ में "उन्हें संबोधित किया जाता है", यह वाक्यांश शामिल नहीं है।

ख. मूल पाठ में "उन्हें बुलाए जाने", यह वाक्यांश शामिल नहीं है।

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